भाभी का घर – मुकेश कुमार

गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली थी और  रजनी को मायके जाने की छटपटाहट मचने लगी थी क्योंकि इस बार मायके में सिर्फ मां और पापा नहीं थे बल्कि वहां पर एक और नया मेहमान आ चुका था वह थी  रजनी की भाभी ‘शालिनी’, रजनी के बड़े भाई की शादी को अभी कुछ महीने ही हुआ था यानी दिसंबर में रजनी के बड़े भाई की शादी हुई थी लेकिन उस समय बच्चों की स्कूल की छुट्टी ज्यादा दिन नहीं थी इस वजह से  रजनी को अपनी भाभी से सिर्फ नाम की ही मुलाकात हो पाई थी।

लेकिन  यह सोच कर  अपने ससुराल वापस आ गई थी कि इस गर्मी की छुट्टियों में  वह कहीं बाहर घूमने नहीं जाएगी बल्कि पूरी गर्मी की छुट्टी अपनी भाभी के साथ बिताएगी यूं तो रजनी का मायका  उसके ससुराल से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर था लेकिन ससुराल में रजनी भी अकेली थी इस वजह से बिल्कुल भी टाइम नहीं मिलता था 1 दिन के लिए भी मायके चली जाए ।



रजनी एक अच्छी स्वभाव की सुलझी हुई औरत थी वह जितनी अच्छी बेटी थी उतनी अच्छी बहू और उससे कहीं ज्यादा एक इंसान थी।  बच्चों के गर्मी के छुट्टी होते ही वह पूरे 1 महीने रहने के लिए अपने मायके में डेरा डाल चुकी थी। रजनी को अपने भाभी शालिनी से फोन पर भी खूब अच्छे से बातचीत होती थी ऐसा लगता था वह  दोनों ननद-भाभी नहीं बल्कि दोनों सगी बहने हो इतना प्यार था दोनों के बीच में। रजनी और शालिनी ने पूरे दिन बातचीत किया ऐसा लग रहा था कि यह दोनों सालों बिछड़े हुए मिल रही हो।

बातों बातों में शालिनी ने रजनी को यह खुशखबरी दी कि रजनी अब आप बहुत जल्द ही बुआ बनने वाली हैं मैंने सोचा यह खबर जब आप यहां आएंगी तब आपको दूंगी कुछ तो सरप्राइज होना चाहिए।  रजनी बहुत खुश हुई और अपनी भाभी शालिनी को धन्यवाद कहा और कहा भाभी आपको बहुत बहुत धन्यवाद अब मैं भी कुछ दिनों में बुआ बन जाऊंगी ।

रजनी ने अपनी भाभी शालिनी को साफ लफ्जों में बता दिया था कि भाभी आप कल से किचन में नहीं जाएंगी जितना दिन मैं यहां रहूंगी आप सिर्फ आराम करेंगी अब आपका सारा काम मैं करूंगी।

कुछ दिनों के बाद वह देख रही थी पहले उसका भाई अपना सारा काम खुद करता था लेकिन जब से उसकी शादी हुई है वह हर बात के लिए  शालिनी को ही आवाज लगाता था चाहे वह नहाने के कपड़े हो या एक गिलास पानी पीना हो ये नहीं की फ्रिज से पानी निकाले और पी ले आखिर वह भी तो कुछ दिनों में बाप बनने वाला था उसकी भी कुछ जिम्मेवारी बनती है भाभी के प्रति।  



मैंने  तो भाई से साफ-साफ कह दिया क्या आप अपनी हर छोटी-छोटी बातों के लिए भाभी को ही आवाज लगाते रहोगे कुछ काम तो खुद भी कर लिया करो।

रजनी के भाई शैलेश ने कहा अच्छा तो अब अपनी भाभी की तरफदारी हो रही है सही है।  रजनी बोली नहीं भैया तरफदारी वाली ऐसी बात कुछ नहीं है आप मेरे शुरू से ही आदर्श रहे हो मैंने अपने जीवन में हमेशा आप से ही प्रेरणा ली है ऐसे में मैं किसी एक की तरफदारी करूं ऐसा हो ही नहीं सकता अब आप खुद ही सोचो कि भाभी प्रेग्नेंट है अब उनसे उतना काम नहीं हो पाता है फिर भी जितना हो पाता है बेचारी करती है।

अगर आप अपने कुछ काम स्वयं कर लो तो भाभी को भी मदद मिल जाएगी और आपका शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा खुद देखो कितना हाथी जैसे मोटे होते जा रहे हो।

अगले दिन से शैलेश अपना सारा काम खुद से करने लगा यहां तक कि अब वह अपने कपड़े भी खुद धोए और छत पर सुखाने भी ले जा रहा था ऐसा देखकर शालिनी  को अपनी ननद रजनी पर गर्व महसूस हो रहा था। धीरे-धीरे समय बिता गया और गर्मी की छुट्टियां खत्म होने को आई और अब रजनी के जाने के दिन नजदीक आ गए।



शालिनी ने हंसते हुए अपनी ननद रजनी से कहा कि सही कहा गया है बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी आपने तो 1 महीनों तक मुझे बैठा कर बैठे रहने की आदत डाल दी अब आप जा रहे हो।  कल से तो मुझे ही  सारा काम करना पड़ेगा हा हा हा हा।

तभी  रजनी का भाई शैलेश बोल पड़ा नहीं शालिनी अब तुम्हें जब तक डिलीवरी नहीं हो जाएगी कोई काम नहीं करना है बल्कि हर काम में मैं तुम्हारा हाथ बटाऊंगा और मैंने एक बाई से भी बात कर ली है वह कल से आ जाएगी और बाकी मां तो है ही।  रजनी की मां भी बोली हां बेटी फिर मैं  किस लिए हूं तुम भी मुझे अपनी मां से कम मत समझो।

रजनी अपनी भाभी से बोल कर जाने लगी कि भाभी आप चिंता मत करो आप के डिलीवरी के 15 दिन पहले ही मैं यहां पर आ जाऊंगी और आपको कोई भी तकलीफ नहीं होगी।  आपके नंदोई बहुत अच्छे हैं सब कुछ मैनेज कर लेंगे। अपने हस्बैंड की तरफ रजनी ने इशारा करते हुए कहा। रजनी के हस्बैंड दिनेश ने भी शालिनी की तरफ मुंह फेर कर कहा हां हां काम पड़ने पर साथ न दिया तो फिर रिश्तेदारी काहे का।

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