नयी उड़ान, नयी पहचान

“दुनिया का काम है कहना, दादी,” आयुष ने मुस्कुराते हुए कहा। “सोचिए, जब कल को मेरी शादी होगी और मेरी पत्नी भी स्नेहा दीदी की तरह नौकरी करके थकी हारी घर आएगी, तो क्या मुझे उसे चाय बनाकर नहीं पिलानी चाहिए? क्या आप नहीं चाहेंगी कि आपके पोते की पत्नी को वो आराम और सम्मान … Read more

दो शरीर और एक आत्मा

निधि जब इस घर में बहू बनकर आई थी, तो उसे सबसे ज्यादा हैरानी अपने सास-ससुर का आपसी तालमेल देखकर हुई थी। उसके ससुर जी, यानी पंडित विद्याधर, अपने जमाने के प्रखर विद्वान और यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि, अनुशासन और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि घर के तीनों बच्चे आज … Read more

माँ का हृदय

सुमित्रा जी की आंखों में अब हल्के से आंसू तैरने लगे थे, लेकिन वो दुख के नहीं थे। उन्होंने कांता का हाथ पकड़कर कहा, “तू नहीं समझेगी कांता। अगर वो मांगता, तो मैं चारों अंगूठियां एक साथ उतार कर दे देती। लेकिन फिर वो दोबारा कभी नहीं आता। उसने चोरी की है, वो जानता है … Read more

सास का तजुर्बा

नंदिनी अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर लॉन में बिखरी सुबह की सुनहरी धूप को देख रही थी। उसके हाथों में रची गाढ़ी लाल मेहंदी अभी भी उसकी शादी की गवाही दे रही थी। महज़ तीन दिन पहले ही तो वह अपने पिता के घर की चौखट लांघकर इस नए घर में … Read more

नई बहू

लाल सुर्ख जोड़े में लिपटी, भारी गहनों के बोझ तले बैठी काव्या आज किसी सजी-धजी गुड़िया से कम नहीं लग रही थी। पूरे घर में गेंदे के फूलों और देसी घी की मिठाइयों की महक तैर रही थी। यह शहर के जाने-माने वकील दीनानाथ जी का घर था, जहाँ आज उनके इकलौते बेटे सुशांत की … Read more

गुरु दक्षिणा

मास्टर विद्यानाथ थोड़ा घबरा गए। उन्होंने अपनी कमज़ोर आँखों से डॉक्टर को पहचानने की कोशिश की। “कौन हो बेटा? उठो, तुम इतने बड़े आदमी हो, मेरे पैर क्यों छू रहे हो?” डॉ. समर ने जब अपना सिर उठाया तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, “मास्टर जी… आपने … Read more

दोहरे चेहरे – सुदर्शन सचदेवा

शहर में एक प्रसिद्ध चित्रकार रहता था—समर। वह लोगों के चेहरे बनाता था, लेकिन उसकी एक खासियत थी। वह केवल चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि उस चेहरे के पीछे छिपे भावों को भी अपनी चित्रकारी में उतार देता था। लोग कहते थे कि समर की बनाई तस्वीरें बोलती हैं। एक दिन शहर के सबसे प्रतिष्ठित … Read more

डील के कागजात

दीनानाथ जी की सुबह छत पर बने उस छोटे से टिन के कमरे में होती थी, जिसे घर वाले ‘कबाड़खाना’ कहते थे। गर्मियों में यह कमरा भट्टी की तरह तपता था और सर्दियों में यहाँ की सीलन हड्डियों तक में उतर जाती थी। रात भर मच्छरों की भिनभिनाहट और टिन की छत से टपकती ओस … Read more

 रिश्तों का व्यापार

“रजत, तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो? रोहन के इक्कीसवें जन्मदिन पर हमें उसे वही लग्जरी एसयूवी ही गिफ्ट करनी चाहिए, जिसके बारे में वह पिछले छह महीने से बात कर रहा है।” सुमेधा ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए गहरी साँस ली और पति की तरफ देखा। रजत, जो अपनी कंसल्टेंसी फर्म … Read more

तपस्या

“डॉक्टर साहिबा, इतनी कम उम्र में जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का पद संभालना अपने आप में एक मिसाल है। आपकी इस असाधारण सफलता के पीछे किसका हाथ है? वो कौन सी प्रेरणा थी जिसने आपको इस मुकाम तक पहुँचाया?” पत्रकारों के कैमरों की फ्लैशलाइट्स चमक रही थीं और हर कोई उनके जवाब का … Read more

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