समर्पण – मीनाक्षी गुप्ता

“बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। गाँव की मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू वातावरण में घुल गई थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली गौरी अपने घर के आँगन में बैठी किताबों के पन्ने पलट रही थी। उसकी आँखों में बड़े सपने थे, लेकिन उन सपनों तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।” गौरी के … Read more

संस्कार – करुणा मलिक 

वाह! हर बार लड़की के ही संस्कारों की परीक्षा होती है, क्या लड़के किसी  विशेष कार्ड को लेकर पैदा होते हैं, मम्मी प्लीज….. आपकी इसी बात को सुनकर मैंने पूरे दो हफ्ते  गुजार दिया कि शायद केशव की मम्मी ने भी कुछ तो संस्कार दिए होंगे।  दीशू…. इतना आसान नहीं होता सब कुछ, सब आदमी … Read more

मुझे सज़ा दो माँ – सावित्री मल्होत्रा 

समर अपने घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़ा और अपनी माँ के पैरों से लिपटकर दहाड़ें मारकर रोने लगा। “मुझे माफ़ कर दो माँ… मैं बहुत नीच हूँ। मैंने तुम्हें सिर्फ एक माँ के रूप में देखा, कभी एक इंसान और एक औरत के रूप में तुम्हारे दर्द को नहीं समझा। मैंने तुम पर … Read more

टूटी हुई उम्मीदें – सविता गर्ग

  शादी के कुछ महीनों बाद ही सौम्या को सुमित्रा जी का रहन-सहन, उनकी पुरानी आदतें और उनका आयुष से बात करना खटकने लगा। घर में रोज़-रोज़ क्लेश होने लगे। सौम्या को अपनी ‘प्राइवेसी’ में सास का दखल बिल्कुल पसंद नहीं था। आयुष जो कभी अपनी माँ की एक आह पर रो पड़ता था, अब पत्नी … Read more

ममता को जलील मत करो – सावित्री मल्होत्रा

आरोही मुझे अचरज से देखने लगी। मैंने बात जारी रखी, “बेटा, ब्रांड्स बाजार में मिलते हैं, लेकिन माँ का प्यार किसी शोरूम में नहीं बिकता। तुम्हारी माँ ने पिछले तीन सालों से अपने लिए एक नई चप्पल तक नहीं खरीदी है, ताकि वो तुम्हारे कॉलेज की फीस भर सकें। आज वो तुम्हारे जन्मदिन के लिए … Read more

बहू नहीं सम्मान है इस घर का – गरिमा चौधरी

शहर के सबसे बड़े मैरिज हॉल में शहनाई की गूंज और रोशनी की चकाचौंध हर किसी का मन मोह रही थी। शहर के जाने-माने व्यापारी सेठ दीनानाथ की इकलौती और लाडली बेटी लीला  का विवाह एक बहुत ही रसूखदार और प्रतिष्ठित परिवार के बेटे वेदांत के साथ हो रहा था। बारात दरवाजे पर आ चुकी … Read more

लिव-इन वाली बहू – सीमा श्रीवास्तव

बेंगलुरु की एक नामी आईटी कंपनी में काम करने वाले सिद्धार्थ और नीती की सोच आज के ज़माने की थी। दोनों ने शादी का फैसला रातों-रात नहीं लिया था। करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद, एक-दूसरे की आदतों, आर्थिक ज़िम्मेदारियों और पारिवारिक मूल्यों को पूरी तरह से समझने के बाद ही … Read more

मैं विहान की पत्नी बाद में हूँ, आपकी बेटी पहले हूँ – रमा शुक्ला

शारदा के हाथों में आज भी जब वह पुरानी तस्वीर आती, तो उसकी आँखें अपने आप छलक उठती थीं। तस्वीर में वह अपने पति रमेश के साथ खड़ी थी, और उसकी गोद में छह महीने का नन्हा विहान था। शादी के महज तीन साल बाद ही एक सड़क दुर्घटना ने रमेश को हमेशा के लिए … Read more

जिस रिश्ते में सम्मान और भरोसा न हो… – निधि गुप्ता

शादी के शुरुआती दिन किसी खूबसूरत ख्वाब की तरह होते हैं, लेकिन रोहन और निध‍ि के लिए यह ख्वाब बहुत जल्दी एक डरावनी हकीकत में बदलने लगा था। दोनों ने एक-दूसरे को पसंद करके शादी की थी। निध‍ि एक मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर मैनेजर थी—आत्मविश्वासी, बेबाक और अपने उसूलों पर जीने वाली लड़की। रोहन एक … Read more

मैं बेटे की खुशियां उसे वापस लौटाऊँगी – नेहा पटेल  

कमरे में पसरा घना सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती हुई घड़ी की टिक-टिक। सुलोचना जी ने कांपते हाथों से खाने की थाली मेज पर रखी। पिछले एक महीने से उनके घर का यही दृश्य था। उनका इकलौता बेटा रोहन, जो कभी पूरे घर में अपनी हंसी और चुलबुलेपन से रौनक ला देता था, आज … Read more

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