दिल का दर्द
“अबे ओए किताबी कीड़े! तुझे क्या लगा, तू आवाज़ बदलेगा और मूंछें बढ़ा लेगा तो हम तुझे पहचान नहीं पाएंगे? साले, पच्चीस साल तो क्या, अगर पच्चीस जनम भी बीत जाते, तो भी तेरी ये झुकी हुई शक्ल और सहमी हुई आँखें हम दूर से पहचान लेते। तू हमें खाना परोस रहा था, ये देखकर … Read more
प्रेम की शुरुआत
लेकिन जब बुआ जी ने कहा, “ये हमारी मीता है,” तो समीर के माथे पर भी सिलवटें पड़ गईं। उसे थोड़ा बुरा भी लगा। क्या लड़की वालों ने उसे इतना हल्के में लिया है कि वे ठीक से तैयार भी नहीं हो सकते? क्या उसके पास पहनने के लिए एक ढंग का सूट नहीं था? … Read more
गुस्सा – खुशी
राजन इतना गुस्सा अच्छी बात नहीं है ये सब बर्बाद कर देगा समझो जरा।क्या समझू वो सतीश अपनी पत्नी को छोड़ तुम्हारी प्लेट में खाना क्यों लगा रहा था।सतीश मेरी प्लेट में खाना नहीं लगा रहा था वो माधवी के लिए ही ले जा रहा था उसके हाथ में बोल था इसलिए मैने उनकी प्लेट … Read more
वो आंसू खुशी के थे
रघुनाथ जी मुस्कुराए, पर उस मुस्कान में एक अजीब सा दर्द था। उन्होंने बहुत ही धीमी लेकिन चुभने वाली आवाज में पूछा, “और… इंसानियत? आत्मीयता? क्या ये मशीन वो भी मंगवा सकती है? क्या ये बता सकती है कि तेरी मां जब रसोई में अकेले काम करती है, तो उसके दिल में अपने बेटे से … Read more
गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – अनिता शर्मा
बेटी – माँ! जब मैं गुस्से में होती हूँ तब मेरे मुँह से बुरे शब्द जल्दी क्यों निकलने लग जाते हैं? और फिर मुझसे कोई बात भी करना पसंद नहीं करता। सब मुझसे दूरी बना लेते हैं। माँ – हाँ बेटी! क्योंकि गुस्सा हमारी भावनाओं पर हावी हो जाता है। गुस्सा भावनाओं का एक मजबूत … Read more
“गुस्सा एक दिन सब खत्म कर देता है” – रेणु सिंह राधे
आज माँ की बरसी है पूरा एक साल बीत गया ऐसा लग रहा है कल ही तो माँ मेरे साथ थी वो मुझ से बाते कर रही थी कभी कभी मेरी किसी बात पर डांट भी देती थी समझा रही थी इतना गुस्सा नहीं करते बिट्टो, देख पति पत्नि का रिश्ता काँच की तरह नाजुक … Read more
गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – सुदर्शन सचदेवा
“तुमसे एक छोटी-सी बात भी ठीक से नहीं हो सकती!” अजय की तेज आवाज सुनकर पूरा घर सहम गया। रसोई में खड़ी उसकी पत्नी नेहा के हाथ रुक गए। कमरे में बैठी सास ने अखबार नीचे रख दिया और दोनों बच्चे चुपचाप एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। बात सिर्फ इतनी थी कि नेहा से अजय … Read more
काँच के रिश्ते
“अंजलि, जो तुमने नीचे देखा, वो बहुत दुखद था, लेकिन तुम्हें एक बात समझनी होगी। जब दो अलग-अलग इंसान, जिनकी सोच अलग है, परवरिश अलग है, एक ही छत के नीचे पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करते हैं, तो उनके बीच वैचारिक मतभेद होना एक बेहद स्वाभाविक सी बात है। जहां गहरा प्यार होता है, … Read more