छलावा: एक खूबसूरत धोखे की दास्तान

सुमन के हाथ से चाय का कप छलकते-छलकते बचा। उसने अपनी घबराहट को छुपाते हुए विषय बदल दिया, लेकिन उसके दिमाग में जैसे एक बवंडर उठ खड़ा हुआ था। घर लौटते समय रास्ते भर उसके दिमाग में श्रुति की कही बातें, वो लैपटॉप बैग, राजीव का बार-बार टूर पर जाना, सब कुछ एक फिल्म की … Read more

रिश्तों की असली वसीयत

 रामदीन जी मुस्कुराए और मुझे अपने पास बैठाते हुए बोले, “मैंने यह मकान एक ट्रस्ट को दान कर दिया है, मित्र। मेरे जाने के बाद यह पूरी तरह से अनाथ बच्चों का आश्रय स्थल बन जाएगा। और हां, जो पीछे वाला हिस्सा था, जिसे मैंने राघव को किराये पर दिया था, वो मैंने उसके नाम … Read more

भ्रम का टूटना: एक बेटी का फैसला

 समीर के शब्दों का चयन और लहजा संगीता  के लिए बिल्कुल नया था। उसने कहा, “नाटक नहीं है समीर, ये मेरी जिंदगी और मेरे परिवार की इज्जत का सवाल है। मैं अपने पिता को इस तरह धोखा नहीं दे सकती। अगर हम सच में प्यार करते हैं, तो हमें मेरे परिवार को मनाना चाहिए, भागना … Read more

वक्त का आइना

 लेकिन समय का पहिया हमेशा एक सी गति से नहीं चलता। जिंदगी ने अपनी करवट बदली। विक्रम को अचानक दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनका देहांत हो गया। विक्रम के जाने के बाद, नंदिनी का साम्राज्य जैसे ढह गया। वह घर, जिसे उन्होंने दुनिया के सबसे महंगे मार्बल और झूमरों … Read more

रिश्तों का तराज़ू

सुदीप्ति के माता-पिता ने जब अपनी बेटी की आँखों में आँसू और चेहरे पर मायूसी देखी, तो उनका दिल बैठ गया। उन्होंने विहान और उसके परिवार से बात करने की कोशिश की, ताकि रिश्ते को बचाया जा सके। लेकिन विहान के परिवार का रवैया बेहद अड़ियल था। दोनों परिवारों के बीच की बातचीत जल्द ही … Read more

खामोश समझौता

ये बातें सुजाता जी के दिल को छलनी कर देती थीं। जिस औरत ने जीवन भर अपने दम पर दुनिया का सामना किया था, आज उसे अपने ही घर में, अपने ही पहनावे और अस्तित्व के लिए ताने सुनने पड़ रहे थे। काव्या की माँ जब भी घर आतीं, तो वह भी काव्या की ही … Read more

रजत की झंकार

 माँ की बातें समीर के दिल में किसी तीर की तरह चुभ गईं। उसे अचानक एहसास हुआ कि पिछले कई महीनों से नंदिनी ने उससे कोई ज़िद नहीं की, वो पहले की तरह खिलखिला कर नहीं हंसी। उसने अपनी पत्नी को एक मशीन की तरह घर का काम करते हुए तो देखा, लेकिन उसकी आत्मा … Read more

कोख का कलंक

अंजलि पिछले हफ्ते ही अपनी बीमार माँ को देखने के लिए अपने मायके भोपाल गई हुई थी। घर में सिर्फ सुमित्रा देवी और रोहन थे। सुमित्रा देवी को लगा कि अंजलि की गैरमौजूदगी में रोहन को समझाना आसान होगा। रात के खाने के बाद, जब रोहन हॉल में बैठकर अपना लैपटॉप बंद कर रहा था, … Read more

स्मृतियों का आँगन: एक बेटी का भ्रम

 निशा जब महज़ आठ वर्ष की थी, तब एक भीषण सड़क दुर्घटना ने उससे उसके माता-पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया था। नियति का यह आघात इतना गहरा था कि उस नन्ही सी जान को समझ ही नहीं आया कि उसकी दुनिया अब हमेशा के लिए वीरान हो चुकी है। ऐसे अंधकारमय समय … Read more

दर्द – खुशी  

मै सुधा जिसके जीवन में सब है एक खुशहाल परिवार।प्यार करने वाला पति मोहन दो बेटे वरुण और अमन एक प्यारी सी बेटी नीतू सब हैं पर फिर भी एक दर्द है जो मुझे कचोटा है कि मैं मोहन जैसे सजन व्यक्ति को दुख दे रही हूं उन्हें मैने धोखा दिया है।वो कई बार कहते … Read more

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