अभिमान के उस पार – सीमा गुप्ता

“ज्ञान का इतना बड़ा भंडार समेटे बैठे हैं आप, पर क्या कभी इस घर की दीवारों में कैद घुटन को भी पढ़ने की कोशिश की है, नीलकंठ?” सुमित्रा जी ने मेज पर कप रखते हुए भारी स्वर में कहा। नीलकंठ जी अखबार के पन्ने पलटते हुए गंभीर आवाज़ में बोले, “सुमित्रा, मैं अखबार की सुर्खियाँ … Read more

परायेपन का सुरक्षा कवच – लतिका श्रीवास्तव 

सावित्री सुशांत का कोई फोन आया ? सुबोध जी ने सुबह से पांचवीं बार वही प्रश्न किया तो सावित्री झुंझला गई। अरे अब काहे करेगा ऊ यहां फोन।अब ता नौकरी भी मिल गई बीबी भी मिल गई।काम खत्म मां बाप का । जब तक पढ़ाई कर रहे थे जब नौकरी नहीं मिली थी परेशान थे … Read more

मेंहदी अभियान – विभा गुप्ता

      बचपन में गर्मी की छुट्टियाँ होते ही हम सब भाई-बहन नानी घर चले जाते थें।दोपहरी में घर के बड़े आराम करते और हम छोटे खूब उधम मचाते।ऐसे में एक दिन हमारी नानी ने हम बच्चों को बगीचे से मेंहदी के पत्ते तोड़ लाने का काम सौंप दिया। हम सभी ने बड़े उत्साह से अपने-अपने रुमाल … Read more

बेटी-जंवाई तो मेहमान हैं – शुभ्रा बैनर्जी

ख़ुद के घर में रश्मि ने मां-पापा से यही सीखा था कि,घर की जिम्मेदारी भाई-बहनों की साझी होती है। बेटे और बेटी की परवरिश,पढ़ाई और खान-पान में कभी मतभेद करते नहीं हैं मां -बाप,तो उनके प्रति ,उस घर के प्रति जिम्मेदारी से मुंह कैसे मोड़ सकती हैं बेटियां। तब दादी कहतीं मां से”जमाना कितना भी … Read more

*बेटा-बहु तो अपने ही होते हैं* – तोषिका

*बेटा – बहु तो अपने ही होते है*। तुम्हारी मां के मुंह से ये वाक्य सुन सुन के मैं थक गया था। लेकिन तुम्हारी मां को अपनी औलाद पर इतना भरोसा था कि उसने मेरी एक ना सुनी। चिल्लाते हुए रमेश अपने बेटे रवि और दूर खड़ी बहु समीना को बोला। रवि कुछ बोले उस … Read more

बेटा – खुशी

निर्मला जी के दो बच्चे थे। धीरेन और दृष्टि।धीरेन बड़ा था जब वो दो साल का था तो पिता की नौकरी छूट जाने के कारण वो जमशेदपुर से दिल्ली आ गए।निर्मला का जमशेदपुर में भरा पूरा परिवार था। मां बाप ,बहने भाई पड़ोस में ही मां का पूरा परिवार रहता था।बचपन से निर्मला लाडो में … Read more

अपने हुए पराए  – मधु वशिष्ठ

 हेलो दीदी, सोनम दी के बारे में कुछ पता पड़ा? नहीं ,मेरे से भी काफी समय से कोई बात नहीं हुई, उसका फोन भी स्विच ऑफ ही जा रहा है। “परमात्मा करे सब ठीक हो”। सारी बहनें आपस में फोन करके सोनम दी के बारे में बातें जरूर कर रही थी, लेकिन मन सब का … Read more

उम्मीद का नया सवेरा – मधु वशिष्ठ

पापा, आप तो कह रहे थे कि प्रिया को  मम्मी जैसा अच्छा खाना बनाना आता है।  गट्टे की‌ सब्जी और साग तो वह मम्मी से भी अच्छा बनाती है।  यहां तो हालत यह है कि सवेरे की चाय अभी भी मैं ही बनाता हूं। हम तो सोच रहे थे की मां के जाने के बाद … Read more

गर्व – बिमला रावत जड़धारी

काव्य आज बहुत खुश थी। जिसका सपना मैंने देखा था, उसे सुभाष ने पूरा करने में मेरा पूरा साथ दिया।सुभाष मेरे पति को पता चला कि मुझे पेंटिंग बनाने का बहुत शौक है और मैं बहुत अच्छी पेंटिंग बनती हूॅं। मेरी इच्छा है किसी आर्ट गैलेरी में मेरी बनाई पेंटिंग की प्रदर्शनी लगे।उन्होंने मुझे कभी … Read more

*अभिमान* – तोषिका

ये कहा से रोने की आवाज़ें आ रही है? क्या तुम्हे भी सुनाई दे रही है नितिन? परेशान स्वर में गायत्री बोली। नितिन बोला “आवाज़ तो मुझे भी आ रही है, पर इतनी रात गए, अंधेरे में आवाज कहा से आ रही है पता ही नहीं चल रहा। दोनों आवाज को सुनते सुनते एक कूड़े … Read more

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