सोने का हार

मीरा ने महीने भर के राशन का हिसाब डायरी में लिखकर जैसे ही मेज़ पर रखा, सामने बैठे उसके पति सुधीर ने तुरंत डायरी उठा ली। सुधीर की आदत थी कि वह घर खर्च के लिए दिए गए पैसों का एक-एक रुपये का हिसाब मांगता था। पंद्रह रुपये का हिसाब डायरी में नहीं था, और … Read more

पहली रसोई

विवाह वाले घर की रौनक देखते ही बनती थी। पिछले एक हफ्ते से चल रही शहनाइयों की गूंज, ढोलक की थाप और महिलाओं के लोकगीतों ने पूरे घर को एक उत्सव में बदल दिया था। अब शादी संपन्न हो चुकी थी, लेकिन विदाई के बाद भी रिश्तेदारों और मेहमानों का जमावड़ा कम नहीं हुआ था। … Read more

असली घर

शहनाई की गूंज अब मद्धम पड़ चुकी थी और विदाई की बेला ने हर आँख को नम कर दिया था। मंडप के एक कोने में खड़ी अनुराधा अपनी बेटी नव्या को निहार रही थी। नव्या, जो अब अपने बचपन के आँगन को छोड़कर एक नए संसार में कदम रखने जा रही थी, उसकी आँखों में … Read more

पिता का न्याय

रमाकांत जी के पचहत्तरवें जन्मदिन का जश्न पूरे शबाब पर था। घर के बड़े से लॉन में रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों की भीड़ जमा थी। चारों तरफ रोशनी, फूलों की सजावट और हंसी-मज़ाक का माहौल था। केक काटने की रस्म के बाद रमाकांत जी ने अपने दोनों बेटों और बहुओं को मंच पर बुलाया। यह … Read more

बहू को बेटी बनने समय तो लगता है

अलार्म की तीखी आवाज़ ने काव्या की नींद तोड़ दी। उसने फोन की स्क्रीन पर समय देखा—सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड में रजाई से बाहर निकलने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन रसोई की जिम्मेदारियां उसे पुकार रही थीं। काव्या की शादी को अभी महज़ आठ महीने ही हुए … Read more

संस्कारों की कद्र

“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more

प्यार हमेशा पाने का नाम नहीं होता

जब वह लाल जोड़े में सजी, रोते हुए गाड़ी में बैठ रही थी, तो उसकी नज़रें भीड़ में मुझे ही तलाश रही थीं, लेकिन मैं एक खंभे के पीछे छिप गया था। मैं उसे अलविदा कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। आज उसकी शादी को छः महीने बीत चुके हैं। कल ही वह पहली … Read more

एक माँ का दिल

रमा देवी गैस के पास खड़ी होकर अपने पच्चीस साल के बेटे कबीर के लिए टिफिन पैक कर रही थीं। डाइनिंग टेबल पर बैठे उनके पति, आनंद जी, अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अख़बार की सुर्ख़ियों में खोए हुए थे। घर का माहौल बिल्कुल वैसा ही था जैसा किसी भी आम मध्यमवर्गीय परिवार का … Read more

अहंकार

समीर ने अपने चमचमाते जूतों के फीते बांधते हुए झल्लाहट भरी आवाज में कहा, “मीरा, मेरा नीला रूमाल कहां है? तुम दिन भर घर में रहकर एक काम ढंग से नहीं कर सकती? नाश्ते में नमक कम है और मेरी फाइल भी टेबल पर नहीं है।” मीरा, जो पसीने से लथपथ रसोई में बच्चों का … Read more

झूठी शान

अपनी आलीशान कांच की इमारत के सबसे ऊपरी माले पर बनी अपनी शानदार केबिन में, बाहर हो रही बारिश को देखते हुए अवनि ने अपनी ब्लैक कॉफ़ी का कप अभी होंठों से लगाया ही था कि उसके दिमाग के किसी कोने में पच्चीस साल पुरानी वो खौफनाक रात फिर से जिंदा हो उठी। वो रात … Read more

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