विश्वासघात  – सुदर्शन सचदेवा

बारिश उस दिन भी हो रही थी… बिल्कुल वैसी ही, जैसी पाँच साल पहले हुई थी, जब आरती ने पहली बार अपनी सबसे अच्छी सहेली निधि का हाथ पकड़कर कहा था— “दुनिया चाहे कुछ भी कहे निधि, मुझे तुम पर हमेशा भरोसा रहेगा।” निधि मुस्कुरा दी थी। उस मुस्कान में अपनापन था, दोस्ती थी और … Read more

धोखा – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   आज देव और कुमुद का चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है। कुमुद अकेली बाहर गार्डेन में फूलों से सुखी पत्तियां छांट रही है।कल शाम में ही देव किसी जरुरी काम से बाहर चला गया । ” अचानक कौन सा काम आ गया,कल हमारा चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है, फिर चले जाना” कुमुद देव को जल्दी-जल्दी अपने कपड़े लत्ते … Read more

विश्वासघात – खुशी

नंदिनी और पूनम आपस में घनिष्ठ सहेलियाँ । दोनों का एक-दूसरे के बिना गुज़ारा नहीं था। नंदिनी के पिता शहर के जाने-माने वकील थे और पूनम के पिता एक मुनीम। घर में माँ और एक भाई रवि था। घर की आमदनी कम और खर्च ज्यादा था, इसलिए कई बार नंदिनी पूनम की फीस भर देती, … Read more

परछाइयों की तलाश – अनीता रवि

ऐसे लगता है जैसे सारी मनौतियाँ पूरी करने कर के गंगा नहा आई हूँ या हज से लौटी हूँ या पवित्र रोमनगरी से हो आई हूँ । शब्‍दों के धागे जैसे मन की भावनाओं को गूँथ ही नहीं पा रहे । बस महक रही हूँ मैं अखंड तृप्ति के फूलों की सुगंध से । विश्‍वास … Read more

विश्वास की कसौटी

अगले कुछ दिन नेहा के लिए किसी मानसिक यातना से कम नहीं थे। वह हर रात विकास के कपड़ों से किसी अजनबी परफ्यूम की महक सूंघने की कोशिश करती। जब विकास सो जाता, तो वह दबे पाँव उसका फोन चेक करने की कोशिश करती, लेकिन फोन में नया पासवर्ड लगा था जो उसे नहीं पता … Read more

सच्चे रिश्ते की कीमत – मुकेश पटेल

 सुशीला ने जब अपने पति को इस कदर उदास देखा, तो वह उनके पास आई और लिफाफे में रखे पैसों को देखकर सब समझ गई। उसने दीनानाथ के कंधे पर हाथ रखते हुए बेहद प्यार से समझाया, “आप क्यों इतना सोच रहे हैं? बड़े लोग हैं, उनका काम करने का तरीका अलग होता है। उन्होंने … Read more

उम्मीद की छाँव

शहर की उस आलीशान सोसायटी के बड़े से लॉन में आज चहल-पहल कुछ ज्यादा ही थी। रंग-बिरंगे फूलों और झिलमिलाती लाइटों से सजे उस मंडप में खुशियों का शोर गूंज रहा था। मौका था स्मृति की देवरानी, नव्या की गोदभराई का। पूरे परिवार में एक अलग ही उल्लास था, आखिर घर में सालों बाद किसी … Read more

अनकहा दर्द और एक अधूरी सौगात

 मैंने जैसे ही उस डिब्बे को खोला, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। उसमें एक बहुत ही खूबसूरत और पुरानी चांदी की पायल रखी थी और साथ में एक मुड़ा हुआ कागज था। मेरे हाथ कांपने लगे। मैंने उस कागज को खोला। वह एक चिट्ठी थी, जिसकी लिखावट कई जगह से आंसुओं की वजह से … Read more

अनकहे शब्दों का सफर

 मैंने थोड़ा सख्त लेकिन प्यार भरे लहज़े में कहा, “सुमित, मेरी बात बहुत ध्यान से सुनना। तुम पैसा कमाते हो, यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन एक रिश्ते को सिर्फ पैसों से नहीं सींचा जा सकता। तुम्हारी पत्नी कोई मशीन नहीं है जो घर का काम करे और तुम्हारे आने पर चुपचाप खड़ी रहे। ज़रा … Read more

स्मृतियों की धुंध

“अरे वाह! मुझे हमेशा से पता था कि तुम एक दिन बहुत बड़े अफसर बनोगे। तुम्हारी मेहनत और लगन ही ऐसी थी,” अवंतिका की आंखों में एक सच्चा गर्व झलक रहा था। “मैं यहां हिमाचल यूनिवर्सिटी में बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की एक नेशनल कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के तौर पर आई हूं। मैं चंडीगढ़ की … Read more

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