नई बहू

लाल सुर्ख जोड़े में लिपटी, भारी गहनों के बोझ तले बैठी काव्या आज किसी सजी-धजी गुड़िया से कम नहीं लग रही थी। पूरे घर में गेंदे के फूलों और देसी घी की मिठाइयों की महक तैर रही थी। यह शहर के जाने-माने वकील दीनानाथ जी का घर था, जहाँ आज उनके इकलौते बेटे सुशांत की … Read more

गुरु दक्षिणा

मास्टर विद्यानाथ थोड़ा घबरा गए। उन्होंने अपनी कमज़ोर आँखों से डॉक्टर को पहचानने की कोशिश की। “कौन हो बेटा? उठो, तुम इतने बड़े आदमी हो, मेरे पैर क्यों छू रहे हो?” डॉ. समर ने जब अपना सिर उठाया तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, “मास्टर जी… आपने … Read more

दोहरे चेहरे – सुदर्शन सचदेवा

शहर में एक प्रसिद्ध चित्रकार रहता था—समर। वह लोगों के चेहरे बनाता था, लेकिन उसकी एक खासियत थी। वह केवल चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि उस चेहरे के पीछे छिपे भावों को भी अपनी चित्रकारी में उतार देता था। लोग कहते थे कि समर की बनाई तस्वीरें बोलती हैं। एक दिन शहर के सबसे प्रतिष्ठित … Read more

डील के कागजात

दीनानाथ जी की सुबह छत पर बने उस छोटे से टिन के कमरे में होती थी, जिसे घर वाले ‘कबाड़खाना’ कहते थे। गर्मियों में यह कमरा भट्टी की तरह तपता था और सर्दियों में यहाँ की सीलन हड्डियों तक में उतर जाती थी। रात भर मच्छरों की भिनभिनाहट और टिन की छत से टपकती ओस … Read more

 रिश्तों का व्यापार

“रजत, तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो? रोहन के इक्कीसवें जन्मदिन पर हमें उसे वही लग्जरी एसयूवी ही गिफ्ट करनी चाहिए, जिसके बारे में वह पिछले छह महीने से बात कर रहा है।” सुमेधा ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए गहरी साँस ली और पति की तरफ देखा। रजत, जो अपनी कंसल्टेंसी फर्म … Read more

तपस्या

“डॉक्टर साहिबा, इतनी कम उम्र में जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का पद संभालना अपने आप में एक मिसाल है। आपकी इस असाधारण सफलता के पीछे किसका हाथ है? वो कौन सी प्रेरणा थी जिसने आपको इस मुकाम तक पहुँचाया?” पत्रकारों के कैमरों की फ्लैशलाइट्स चमक रही थीं और हर कोई उनके जवाब का … Read more

ज़िंदगी की एक छोटी सी हार

“अरे मीना बहू, क्या बात है? आज हमारे घर का चिराग सुबह से दिखाई नहीं दिया, कहीं सूरज पश्चिम से तो नहीं निकल आया?” पचहत्तर वर्षीय रिटायर कर्नल शमशेर सिंह ने अपनी छड़ी को ज़मीन पर टिकाते हुए अपने पड़ोस में रहने वाले आयुष के घर के बरामदे में कदम रखा। उनकी भारी और रौबदार … Read more

दोहरे चेहरे – विनीता सिंह

राघवेंद्र जी को पूरा शहर ‘सज्जन पुरुष’ कहता था। उनके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान तैरती रहती थी। शहर के हर बड़े सामाजिक कार्यक्रम, अनाथालयों के दान समारोहों और धार्मिक आयोजनों में वे अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आते थे। सफेद कड़क कुर्ता-पायजामा, माथे पर चंदन का तिलक और वाणी में ऐसी मधुरता कि … Read more

*वो मुझसे ज़्यादा मेरी भाभी की माँ है* – तोषिका

“माँ अब तो आप भी सास बन जाओगे, अब बस आप आराम करना और सारा काम भाभी पर छोड़ देना। घर में मेहमान बड़ था है तो उसका कुछ फायदा भी तो होना चाहिए।” फोन पर अपनी माँ नीलू से बात करती हुई उनकी बेटी रिया ने बोला। “अरे बेटा ऐसे नहीं बोलते, वो पहली … Read more

दोहरे चेहरे – मधु वशिष्ठ

   डोर बेल बजने पर दरवाजा खुला तो सामने मिसेस भसीन को मुस्कुराते हुए खड़ा पाया। उन्हें अंदर आने को कहा तो झट से बोली ,नहीं बहन जी ,आप तो हमारे घर आती नहीं ,मैं भी आपके घर नहीं आऊंगी। मैं अक्सर ऐसा ही करती थी। अरे भाई ,अगर नहीं आना था तो डोर बैल क्यों … Read more

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