एक थाली में खाने से प्यार बढ़ता है
काव्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने पास को देखा, फिर मुझे देखा, और फिर पास को देखा। “लेकिन… आपने तो कहा था कि आपके पास टाइम नहीं है?” उसकी आवाज़ अब बिल्कुल बदल चुकी थी। उसमें अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक मीठा सा आश्चर्य था। “मैंने इसलिए कहा था ताकि तुम्हें सरप्राइज … Read more
मेरे जीवनसाथी
कुणाल से रहा नहीं गया। वह भीड़ को चीरता हुआ अपनी माँ के पास पहुँचा और धीमे स्वर में बोला, “माँ, आरुषि को बहुत गर्मी लग रही है। वो भारी कपड़ों में है। रस्म को अंदर हॉल में शिफ्ट कर लेते हैं, वहाँ एसी चल रहा है।” माँ ने उसे झिड़कते हुए कहा, “पागल हो … Read more
मुझे माफ कर दो माँ
“रोहन… तुम्हारी माँ… हमें छोड़कर चली गई।” वाक्य इतना छोटा था, लेकिन रोहन के कानों में किसी बम के धमाके की तरह गूँजा। उसके हाथ से नाश्ते का निवाला छूटकर प्लेट में गिर गया। दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया। “क्या… क्या कह रहे हैं आप? ओ गॉड! कब… कैसे? परसों तक तो…” रोहन के मुँह … Read more
सच्चा प्यार
समीर और काव्या की शादी को आठ साल हो चुके थे। इन आठ सालों में उनके घर की दीवारें न जाने कितनी ही बार उनकी हँसी, उनकी नोक-झोंक और उनके एक खास ‘पेट डायलॉग’ की गवाह बन चुकी थीं। समीर स्वभाव से थोड़ा लापरवाह था। सुबह ऑफिस जाते वक्त गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ देना, … Read more
गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – डॉ आभा माहेश्वरी
रमेश एक मेहनती किसान था। उसके पास थोड़ी-सी जमीन थी, लेकिन वह अपनी मेहनत और ईमानदारी से अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। गाँव में उसकी एक बात सबसे अधिक प्रसिद्ध थी—उसका तेज गुस्सा। छोटी-सी बात पर भी वह अपना आपा खो बैठता था। कई बार उसकी पत्नी सीता और बेटा मोहन उसे समझाते, “गुस्सा … Read more
शातिर – गीता वाधवानी
मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं पता है ना तुम्हें नमन, रूप ने कहा। नमन-” हां मैं भी करता हूं ” रूप -” तो फिर मेरे मम्मी पापा से शादी की बात करो ना, मैं कुछ नहीं कह सकती अपने पापा से, तुम्हें पता है ना वह कितने गुस्से वाले हैं। ” नमन -” नहीं … Read more
दोहरे चेहरे – खुशी
रंजिता जी आ गई इतनी बड़ी सेविका है।औरतों और बच्चों का वो भी लड़कियों का कितना ध्यान रखती हैं।इनके परिवार में कौन कौन है? एक बेटा राघव उसकी पत्नी शमा और दो पोते विराज और मिहिर प्यारा सा परिवार है।इनके पति कैलाश नाथ जी का कुछ अरसे पहले ही निधन हो गया बीमार रहते थे। … Read more
दो पीढ़ियों का रिश्ता
लंदन की सर्द और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कार ने बनारस की संकरी और जानी-पहचानी गलियों में प्रवेश किया, तो कबीर के चेहरे पर एक अजीब सी सुकून भरी मुस्कान तैर गई। कबीर और उसकी पत्नी मायरा शादी के तीन साल बाद पहली बार भारत आ रहे थे। मायरा वैसे तो भारतीय मूल … Read more