चाँदी की पायल

नेहा अपनी बालकनी में सूखते हुए कपड़े उतार रही थी कि तभी उसकी नज़र नीचे वाले घर के अहाते में पड़ी। नीचे के हिस्से में मिस्टर और मिसेज़ शर्मा रहते थे, जिन्हें पूरी कॉलोनी वाले प्यार से ‘रघु अंकल’ और ‘कल्याणी आंटी’ कहते थे। नेहा ने देखा कि कल्याणी आंटी बड़ी बेचैनी से मुख्य द्वार … Read more

दिल के दरवाजे

“अंकल… मुझे माफ कर दीजिए… अंजलि… अंजलि को लेबर पेन हो रहा है। कोई गाड़ी नहीं है, नेटवर्क नहीं है, मेरी कोई मदद नहीं कर रहा। वो मर जाएगी अंकल… प्लीज मेरी मदद कीजिए!” सिद्धार्थ फूट-फूट कर रोने लगा और उनके पैरों में गिर पड़ा। तभी पीछे से कौशल्या जी हाथ में शॉल और कुछ … Read more

नेकी वापस लौटते हैं

“जी, आप किसे ढूँढ रहे हैं?” दीनानाथ जी ने अपनी कांपती हुई आवाज में पूछा। नौजवान की आँखें दीनानाथ जी की जर्जर हालत देखकर छलक पड़ीं। वो बिना कुछ बोले सीधे उनके पैरों पर गिर पड़ा और फफक-फफक कर रोने लगा। “ये क्या कर रहे हैं आप? उठिए… कौन हैं आप?” दीनानाथ जी पीछे हटते … Read more

 ऊपर वाले का दरवाजा

सुमेधा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। दस दिन का वह नर्क, वह पल-पल मरने का एहसास, वह रातों की नींद और आंसुओं का सैलाब… सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। डॉक्टर माथुर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “देखिए मिसेज … Read more

 मेरा घर सचमुच किसी स्वर्ग से कम नहीं है

“तुम कहते हो कि वो चिड़चिड़ी हो गई है? ज़रा सोचो, जिस लड़की को तुम शादी से पहले रेस्टोरेंट, सिनेमा और पार्क में घुमाते थे, पत्नी बनने के बाद तुम उसे कहां ले जाते हो? रिश्तेदारी की शादियों में जहां उसे घूंघट निकालकर सबकी जी-हुज़ूरी करनी होती है, मुंडन में, पूजा-पाठ में, या फिर किसी … Read more

संयुक्त परिवार

रघुनाथ जी ने मीरा के सिर पर हाथ रखते हुए उसे बीच में ही टोक दिया। “नहीं बेटी, गलती तुम्हारी नहीं थी। तुमने तो अपने पिता को दिया हुआ वादा आठ सालों तक बहुत ही खूबसूरती से निभाया। गलती मेरी थी जो मैं ये समझ नहीं पाया कि प्यार से सींचा हुआ पौधा जब बड़ा … Read more

बेटी को सीख – संगीता अग्रवाल

सुमित्रा जी ने एक गहरी सांस ली और कहा, “अच्छा! तो वहां तेरी ननद आनी चाहिए थी अपनी माँ की सेवा करने के लिए, क्योंकि तू थक गई थी? और यहाँ? यहाँ तू ननद बनकर आई है, तो तेरी भाभी को तेज बुखार में भी तेरी और तेरे बच्चों की गुलामी करनी चाहिए? ये कैसा … Read more

नन्हा सा फ़रिश्ता

लगभग पाँच सालों के एक लंबे अंतराल के बाद मेरा अपनी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त स्मृति के घर जाना हुआ। हम दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होने के कारण मिलना बहुत मुश्किल हो गया था, लेकिन इस बार जब मुझे देहरादून के एक सेमिनार में हिस्सा लेने का मौका मिला, तो मैंने सोच … Read more

घर को घर रहने दो

देविका जी को हर चीज़ एकदम परफेक्ट चाहिए होती थी। रोहन और अनन्या को अपने ही घर में किसी मेहमान की तरह रहना पड़ता था। सोफे पर बैठकर खाना मना था, क्योंकि कवर गंदे हो जाएंगे। बिस्तर पर सिलवटें नहीं पड़नी चाहिए। खिलौने खेलने के तुरंत बाद उनके डिब्बे में पैक हो जाने चाहिए। दोस्तों … Read more

झूठे रुतबे की बुनियाद

और फिर एक रात वह हुआ जिसने दोनों परिवारों की बची-खुची इज्जत को भी खाक में मिला दिया। विक्रम उस रात बहुत ज्यादा शराब पीकर घर आया था। किसी बिजनेस डील में उसे भारी नुकसान हुआ था और उसका सारा गुस्सा काव्या पर फूट पड़ा। काव्या भी उस वक्त अपने किसी दोस्त के साथ वीडियो … Read more

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