क्षमा का अमृत
गले में शब्द जैसे अटक गए हों, सुधीर कुछ बोल ही नहीं पाया। माधवराव ने फल और मिठाइयों का थैला रोहन के हाथ में दिया। फिर वे सुधीर के बिल्कुल करीब गए, अपने दोनों हाथ जोड़े और भारी, भर्राई हुई आवाज में बोले, “सुधीर मेरे भाई… इतने सालों में मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। … Read more