पत्थर की छाँव में
बचपन से ही काव्या के लिए उसकी माँ, सुमित्रा, किसी तानाशाह से कम नहीं थीं। जहाँ दूसरी लड़कियाँ अपनी माँ के आँचल में छिपकर लाड़ लड़ाती थीं, उनके साथ सहेलियों की तरह बातें करती थीं, वहीं काव्या के हिस्से में सिर्फ नियम, अनुशासन और सख्त हिदायतें आई थीं। काव्या जब भी कोई नई फरमाइश करती, … Read more