सोने का पिंजरा
काव्या की गोरी कलाई और कोहनी के बीच का हिस्सा नीले, काले और हरे पड़े निशानों से भरा हुआ था। वे निशान नए नहीं थे, कुछ पुराने थे जो पीले पड़ रहे थे और कुछ बिल्कुल ताज़े थे, जिनमें खून जम गया था। हीरों के उस भारी ब्रेसलेट के ठीक ऊपर, किसी सिगरेट से जलाए … Read more
कर्मा लौटता है
अगर तुम चाहो, तो अम्मा हमारे साथ, हमारे घर में रह सकती हैं। बच्चों को इनसे बेहतर और सुरक्षित हाथ नहीं मिल सकते, और अम्मा को भी उनका खोया हुआ परिवार और बच्चों का साथ वापस मिल जाएगा।” मीरा ने बिना एक पल गँवाए आगे बढ़कर मालती देवी के हाथ पकड़ लिए। “क्या आप सच … Read more
खोखले हो चुके रिश्ते – गरिमा चौधरी
“अरे कोई है इस घर में या सब बहरे हो गए हैं? मीना… ओ मीना! कहां मर गई?” ड्राइंग रूम में फाइलों का पुलिंदा बिखेरते हुए राजेंद्र बाबू का पारा सातवें आसमान पर था। उनकी गरजती आवाज से खिड़कियों के कांच भी मानो थर्रा गए हों। रसोई में सुबह के नाश्ते की तैयारी में जुटी … Read more
दोहरे चेहरे – डॉ आभा माहेश्वरी
राघव अपने शहर का एक प्रतिष्ठित समाजसेवी माना जाता था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थीं, मंचों पर उसका सम्मान होता था और लोग उसे “गरीबों का मसीहा” कहकर पुकारते थे। वह हर समारोह में बड़ी-बड़ी बातें करता—”इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं”, “हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए।” उसकी मधुर वाणी और सादा पहनावा … Read more
खुली हवा – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव
शर्मा जी के घर के सामने अच्छी खासी भीड जमा थी। उनके बीच खुसर फुसर जारी थी। एक पचीस वर्षीया शादीशुदा महिला फाटक पास बैठी थी। अंदर से फाटक बंद था। भीड ज्यादातर उन लेागो की थी जिनकी कोई केा सामाजिक हैसियत नहीं थी। किसी का आदमी ठेला चलता था तेा कोई बर्तन मांझने का … Read more
तालमेल
शादी को छह महीने बीत चुके थे, लेकिन नेहा के हिस्से में अब तक सिर्फ जिम्मेदारियां ही आई थीं। रसोई, पूजा-पाठ, रिश्तेदारों का आना-जाना और घर की अनगिनत उलझनों के बीच वह जैसे अपनी नई-नवेली शादीशुदा जिंदगी के वो सुनहरे पल जीना ही भूल गई थी, जिनके सपने उसने मायके में बुने थे। आज सुबह-सुबह … Read more
सच्चा जीवनसाथी
माधव रुंधे हुए गले से बोला, “मुझे छोड़ दो राधिका… तुम अब एक बहुत बड़ी अधिकारी हो। यहाँ सारे लोग तुम्हें देख रहे हैं। मेरे जैसे एक मामूली मजदूर का तुम्हारे साथ होना तुम्हारी इज्जत खराब कर देगा।” राधिका ने आँसू पोंछते हुए कहा, “कौन सी इज्जत? यह पद, यह रुतबा, यह गाड़ी, यह सब … Read more
दुनिया की सबसे बड़ी दौलत
अपनी सगी माँ की सूरत रोहन को ठीक से याद भी नहीं थी। जब वह महज छह साल का था, तभी एक गंभीर बीमारी ने उसकी माँ को उससे छीन लिया था। घर में वैसे तो पिता दिनेश थे, लेकिन रोहन की परवरिश का पूरा जिम्मा उसकी विधवा बुआ, कमला पर आ गया था। बुआ … Read more