स्वाभिमान मेरा भी – सुदर्शन सचदेवा

सुबह की हल्की धूप आँगन में उतर रही थी। रसोई से चाय की खुशबू और मंदिर की घंटियों की आवाज़ पूरे घर में घुल रही थी। सुमन रोज़ की तरह सबसे पहले उठ गई थी। सास-ससुर की चाय, पति राजेश का नाश्ता, बच्चों के टिफिन—सब कुछ उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। पिछले पंद्रह वर्षों से … Read more

 विश्वास की डोर

उस दिन मीरा ने चाय की ट्रे जैसे-तैसे मेज पर रखी और बिना कुछ कहे वहां से अपने कमरे में चली गई। उसके दिल में एक अजीब सी खटास पैदा हो गई थी। जिस सास के साथ वह अपने दिल की हर बात साझा करती थी, अचानक वह उसे एक अजनबी और स्वार्थी औरत लगने … Read more

सुबह की मीठी धूप

“अरे मीरा बेटा, तुम इतनी जल्दी क्यों उठ गईं? अभी तो छह भी नहीं बजे हैं। आज तो रविवार है, तुम्हें आराम करना चाहिए था,” निर्मला देवी ने बहुत ही स्नेह से कहा। मीरा हड़बड़ा गई। उसे लगा कि शायद उसने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी है या फिर उसकी सास उसे ताना मार … Read more

कर्ज़ ममता का: एक देवर की अपनी भाभी के लिए अनूठी भेंट

रोहन ने कविता के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए। उसकी भी आँखों से आँसू बह रहे थे। “भाभी, दुनिया कहती है कि भगवान हर जगह नहीं पहुँच सकता, इसलिए उसने माँ बनाई है। लेकिन मैं कहता हूँ कि जिसके पास आपके जैसी भाभी हो, उसे तो किसी भगवान की भी ज़रूरत नहीं है। … Read more

रिश्तों की असली पहचान

वो भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि काश बाबूजी का आना किसी तरह टल जाए। वो नहीं चाहती थी कि जिन बाबूजी को कस्बे में इतना सम्मान मिलता है, उन्हें अपनी ही बेटी के घर में उपेक्षा का शिकार होना पड़े। लेकिन सुबह हो चुकी थी। ट्रेन का समय हो गया था। मीरा ने … Read more

प्रेम की छाँव

घर में भले ही फैसले रोहन और मीरा लेते थे, लेकिन उन पर आखिरी मुहर हमेशा सावित्री देवी की ही होती थी। ये एक कड़वा सच है कि बेटा चाहे अपनी माँ को कितनी भी कड़वी बात कह दे, माँ उसे भूल जाती है। लेकिन अगर बहू ज़रा सी भी ऊँची आवाज़ में बात कर … Read more

बोया पेड़ बबूल का

पूर्वी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने अपना पूरा गुस्सा अपने भाई पर उतार दिया। “अनिकेत भैया, आपको शर्म नहीं आती? पापा ने हमें पालने के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी और आप उन्हें यहाँ छोड़ने आ गए? और सिमरन भाभी कहाँ हैं? मुझे पता है, ये सब उसी का किया धरा होगा। … Read more

विश्वास की कसौटी

रेवती जी ने श्रुति के आँसू पोंछे और रोहन की तरफ पलटकर बोलीं, “सुन ले रोहन, शादी का रिश्ता कोई शक की ज़मीन पर खड़ी इमारत नहीं होती। ये विश्वास की वो डोर है जो एक बार टूट जाए तो लाख कोशिशों के बाद भी उसमें गाँठ रह ही जाती है। मंडप में जलाई गई … Read more

असली श्रृंगार

“मैं सच कह रहा हूँ माँ,” आदित्य ने दृढ़ता से कहा। “मुझे ऐसी जीवनसाथी की ही तलाश थी जो सिर्फ हां में हां मिलाने वाली न हो, बल्कि जिसकी अपनी एक स्वतंत्र सोच हो। जो मुश्किल वक्त में मेरे बैंक बैलेंस की मोहताज न हो, बल्कि अपने संस्कारों और आत्मविश्वास से मेरा साथ दे सके। … Read more

असली हीरा है मेरी बहू

सावित्री देवी के घर में आज कोहराम मचा हुआ था। शहर की प्रतिष्ठित ‘महिला समिति’ की मासिक बैठक आज उन्हीं के घर पर थी। यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि सावित्री देवी के लिए अपनी नाक का सवाल था। शहर की मेयर की पत्नी और कई बड़े अधिकारियों की पत्नियां आने वाली थीं। सावित्री देवी … Read more

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