समझौता नहीं,समन्वय – शुभ्रा बैनर्जी

शुचिता जब ब्याह कर ससुराल आई,तब उसे अपने आप को नए परिवेश में ढालने में समय लगा। मायके में सबसे बड़ी और लाड़ली बेटी।पढ़ने में सदा अव्वल,सुंदर और सुशील।दादी तो तब आशीर्वाद देतीं थीं जब शुचिता पांचवीं कक्षा में थी”महारानी बनकर राज करेगी मेरी मोना।” शुचिता ने रानी बनने के ख्वाब तो नहीं देखे थे, … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आज़ादी – तन्वी

क्या कभी तुम्हें ऐसा लगा है कि तुम सांस ले रही हो पर जी नहीं रही हो? रिया के साथ हर दिन वही होता था। लोग कहते हैं लड़कियां पराया धन होती हैं पर रिया को लगता था कि वह धन नहीं, एक पिंजरा है जिसमें सिर्फ उसकी सांसें घुट रही थीं। रिया 20 साल … Read more

और कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा है – मंजू ओमर

और कैसी है मेरी बेटी राजीव जी बेटी श्वेता की  अटैची उठाते हुए बोले, ठीक हूं पापा ।और मेरा आने वाला नवासा  कैसा है, और वह भी ठीक है। तू अकेले आई है दामाद जी नहीं आए।नहीं पापा अच्छा चल ऑटो में बैठ चल तेरी मां इंतजार कर रही होगी बड़ी बेसब्री  से। श्वेता घर … Read more

अरमान निकालना – रंजीता पाण्डेय

रुचि ने अपने पति रोहित से पूछा  ,रोहित  मां पापा  का बहुत मन है , कुंभ जाने का ,मै ले के चली जाऊ क्या? आप  दो दिन मम्मी जी और पापा जी ,ध्यान रख लेते तो ठीक था । रोहित ने बोला पागल तो नहीं हो गई? किसी और के साथ भेज दो , उनका … Read more

समझौता – खुशी

विकास और पूनम की शादी को पंद्रह साल हो चुके थे। पंद्रह साल… इतना लंबा समय कि इंसान किसी रिश्ते को निभाते-निभाते खुद को भूल जाए। पूनम ने भी खुद को भुला दिया था। शादी के शुरुआती दिनों में उसे लगता था कि विकास एक दिन समझ जाएगा। वह जिम्मेदार बनेगा, नौकरी करेगा, परिवार की … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आजादी – डॉ आभा माहेश्वरी

शहर की भीड़ में रहने वाली मान्या बाहर से जितनी खुश दिखाई देती थी, भीतर से उतनी ही अकेली थी। उसका विवाह हुए आठ वर्ष हो चुके थे। घर सुंदर था, सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उस घर की दीवारों के भीतर उसका अपना कोई कोना नहीं था। उसकी हर पसंद पर सवाल … Read more

दिखावे की चाशनी – मीनाक्षी चौहान 

हमारी इस नई कॉलोनी में शिफ्ट हुए मुश्किल से एक महीना ही बीता था, लेकिन मेरी सास, सावित्री देवी जी, और सामने वाले फ्लैट की विमला आंटी के बीच जो दोस्ताना परवान चढ़ा था, उसे देखकर ऐसा लगता था मानो वो पिछले जन्म की सहेलियाँ हों। हमारे फ्लैट्स की बालकनी एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने थीं। … Read more

विरासत के धागे – सुधा जैन

जैसे ही राघवेंद्र नित्या को लेकर हवेली की चौखट पर पहुंचे, कौशल्या देवी और शालिनी का चेहरा उतर गया। दोनों को उम्मीद थी कि राघवेंद्र किसी तरह कोई लड़का ही लाएंगे। कौशल्या देवी ने उसी वक्त अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक पराई लड़की उनके खानदान की वारिस कैसे बन सकती है? लड़कियां … Read more

लहू के रंग

 इतना सुनते ही दीनदयाल का पत्थर सा दिखने वाला चेहरा पिघलने लगा। उसकी आँखों के किनारे भीग गए। उसने अपनी कांपती हुई उंगलियों से अपनी आँखें पोंछीं और रुंधे हुए गले से बोला, “आपने सब सच पता कर लिया वकील साहब। हाँ, मेरा भाई बहुत बड़ा आदमी है। उसके पास आज गाड़ियां हैं, नौकर-चाकर हैं, … Read more

फ़र्ज़ की वेदी

शाम के धुंधलके ने अभी घर के आँगन में कदम ही रखा था कि तभी अंदर के कमरे से एक ज़ोरदार आवाज़ आई। मीरा दौड़कर अपनी सास, शांति देवी के कमरे में पहुँची। शांति देवी ज़मीन पर बेसुध पड़ी थीं। उनके हाथ से पानी का गिलास छूटकर टूट चुका था। मीरा की साँसें जैसे गले … Read more

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