क्षमा का अमृत

गले में शब्द जैसे अटक गए हों, सुधीर कुछ बोल ही नहीं पाया। माधवराव ने फल और मिठाइयों का थैला रोहन के हाथ में दिया। फिर वे सुधीर के बिल्कुल करीब गए, अपने दोनों हाथ जोड़े और भारी, भर्राई हुई आवाज में बोले, “सुधीर मेरे भाई… इतने सालों में मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। … Read more

एहसास का आईना

कौशल्या देवी की आंखों से पछतावे के आंसू बह निकले। वे वहीं जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। “मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई दीनानाथ जी। सच में, मैं अपनी सत्ता और अधिकार के नशे में इतनी अंधी हो गई थी कि मैंने यह सोचने की कोशिश ही नहीं की कि श्रुति के माता-पिता … Read more

आँगन की देहरी और आसमान

मालती देवी धीरे-धीरे चलकर अंजलि के पास आईं। उन्होंने उसके सिर पर अपना झुर्रियों भरा, कांपता हुआ हाथ रखा। “मत रो अंजलि बहू। यह दुनिया ऐसी ही है। जब औरत कमज़ोर होती है, तो उसे रौंद देती है, और जब वह मज़बूत बनती है, तो उसे बदचलन कहने लगती है। जा, उठकर मुँह-हाथ धो ले। … Read more

खामोशी की गहराई

अमन रोते हुए बोला, “जीजाजी, मुझे माफ कर दीजिए। मैं दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख हूँ। मैंने हमेशा आपको गलत समझा। मुझे लगा कि जो लोग मीठी-मीठी बातें करते हैं, हंसी-मजाक करते हैं, वही अच्छे होते हैं। मैं आपको बोरिंग और घमंडी समझता रहा। लेकिन आज मुझे समझ आया कि बातें तो कोई भी कर … Read more

बोए बीज बबूल के

शालिनी के पास इस मासूम लेकिन तीर की तरह चुभते हुए सच का कोई जवाब नहीं था। वह पत्थर की मूरत बनकर खड़ी रही। तभी नीरज, जो अब तक चुपचाप यह सारा तमाशा देख रहा था, आगे आया। उसने रोती हुई निधि  को अपनी गोद में उठाया, उसे चुप कराया और फिर शालिनी की तरफ … Read more

इंसानियत का स्पर्श

 सुहासिनी देवी ने एक गहरी सांस ली और बहुत ही शांत लेकिन गंभीर स्वर में बोलीं, “राधिका, तुम्हें याद है सुबह तुमने शांति के साथ कैसा बर्ताव किया था? तुमने कहा था ना कि वह एक नौकरानी है, अनपढ़ है, उसे कोई तमीज नहीं है। उसने तुम्हारे बिखरे कमरे को समेटने की ही तो कोशिश … Read more

हैसियत का आईना

 वसुंधरा देवी ने एक व्यंग्यात्मक और दर्प पूर्ण हंसी हंसते हुए कहा, “अरे रश्मि, तुम भी कैसी बात करती हो! इन लोगों का स्टैंडर्ड काजू कतली और पिस्ते वाला थोड़े ही है। इन्हें ये महंगी चीजें पचती भी नहीं हैं। इनके लिए तो ये बाजार की मीठी सोनपापड़ी ही बहुत है। आखिर हमें क्लास का … Read more

जश्न के पीछे का सन्नाटा

 लेकिन तभी हॉल के मुख्य दरवाज़े पर एक अजीब सा शोर हुआ। दरबान किसी को अंदर आने से रोक रहे थे, और वह व्यक्ति ज़ोर-ज़ोर से गालियां बक रहा था। “अरे हटो… मेरा बेटा है वो… मुझे रोकोगे तुम? मैं बाप हूँ उसका, आईएएस का बाप!” आवाज़ सुनकर सुमेधा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। … Read more

स्वाभिमान का नया सवेरा

 सुमेधा सुबह विकास के उठने से पहले ही घर से निकल जाती और दोपहर तक वापस आ जाती। विकास को लगता कि वह बच्चों को स्कूल छोड़ने या किसी सहेली के घर जाती है। लेकिन एक दिन, नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था। विकास अपने एक पुराने दोस्त से नौकरी के सिलसिले … Read more

एक कठोर हृदय का पश्चाताप

 कांता बुआ ने पल्लवी के सिर पर हाथ फेरा और गहरी सांस लेते हुए बोलीं, “पल्लवी बिटिया, मैं पिछले दस दिनों से इस घर का तमाशा देख रही हूँ। तू दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह जुटी रहती है। मेरी बहन सुमित्रा की हर जायज-नाजायज मांग पूरी करती है। फिर भी उसके मुंह से तेरे … Read more

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