संस्कार – नीरजा कृष्णा

आज वो बहुत खुश घर लौटा था। उसके बॉस ने आज ऑफिस के सभी लोगों को सपरिवार भोजन पर निमंत्रित किया है। आते ही बोला,”सुनो विम्मी! तुमको बहुत शिकायत थी ना…हमलोग कहीं बढ़िया जगह नहीं जा पाते। आज सर के शानदार बंगले में दावत है। खूब एंजॉय करना।”

वो भी सिन्हा मैम की स्मार्टनैस से बहुत प्रभावित रहती थी। अक्सर मन में सोचती थी….मैम कितने ठाठ से रहती है। एक से बढ़ कर एक नए फैशन की ड्रेसेस पहन कर जब वो लहरा कर चलती है …तो सब आँखें फाड़े देखते रह जाते है। वो स्वयं उनके रूप, उनके गजब के ड्रैसिंग सेंस से चमत्कृत थी। उनके हवा में तैरते से रेशमी बॉबकट बाल उसके लिए घोर ईर्ष्या के विषय थे।

एक बार तो उसकी विनय से बाकायदा बहस भी हो गई थी,”मुझे भी सिन्हा मैम की तरह बाल कटवाने हैं।”

उसने चौंक कर पूछा था,”क्यों भला… इतने सुंदर नागिन से बलखाते बालों को क्यों कटवाना चाहती हो?”

उसने चिढ़ कर तोप का गोला दागा था,”क्यों, बड़ी जल्दी भूल गए। उसी दिन तो तुम मैम के बॉबकट बालों की कितनी तारीफ कर रहे थे।अब मैं भी उसी तरह के बाल चाह रही हूँ, तो तुम्हें परेशानी हो गई।”

वो उसके हाथ पकड़ कर समझाने की कोशिश करने लगा,”वो बड़े लोग हैं। हम उनकी बराबरी कैसे कर सकते हैं। हमारे घर में बॉबकट बालों का चलन नहीं है।”

वो दुखी होकर रोने लगी थी,”यहाँ आपके घर में तो इतनी पुरातनपंथी है…मेरा तो दम घुटने लगा है।हर समय सिर पर पल्ला लेना पड़ता है। मुझे तो सिन्हा मैम से रश्क होने लगा है।”

अचानक विनय के चुटकी बजाने से वो होश में आई और झेंप गई। जल्दी से तैयार होने लगी। आज उसने अपना इकलौता फ्लोइंग गाउन पहना। बाल खोल कर कंधों पर बिखेर लिए और आइने में स्वयं को निहार कर शरमा गई थी। जेठानी जी को पटा कर पीछे के रास्ते से निकली।

 वहाँ पहुँच कर हैरान रह गई। सिन्हा मैम साड़ी में थी और बराबर सिर ढ़ाके थी। चलते समय वो पूछ बैठी,”मैम आज आपका नया रूप देखा।”

वो हँसते हुए पूछ बैठीं,”अच्छा लगा ना मेरा नया रूप?”

वो अचकचा कर कुछ बोलना चाह रही थी पर वो पहले ही बोल पड़ी,”आज फंक्शन में मेरे सास ससुर और अन्य बड़े लोग आए हुए हैं । मुझे अपने परिवार की परंपराओं के हिसाब से चलना बहुत अच्छा लगता है। हमें अपनी जड़ो को सींचना चाहिए, ना कि फैशन की आड़ में उन जड़ों को नोंच फेंकना चाहिए।वैसे तुम आज साड़ी में नहीं आईं। तुम साड़ी में बहुत स्मार्ट और जहीन लगती हो।”

कह कर उन्होंने उसके गाल थपथपा दिए थे। और वो…वो उनकी सीख को आत्मसात करने में लग गई।

नीरजा कृष्णा

पटना

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