अहमियत :सी इज जस्ट अ हॉउस वाइफ….. –  मीनाक्षी सिंह  : Moral stories in hindi

सुनो वंदना….कल मेरे ऑफिस के कुछ दोस्त अपनी फैमिली के साथ आयेंगे….. कुछ ज़रूरी डिस्कशन करना है सबके साथ … वो खाना खाकर ज़ायेंगे सब तैयारी कर लेना….

फ़ोन पर देखते हुए वंदना के पति मोहित बोले….

सामान भी तो लाना पड़ेगा जी…. आप ले आईयेगा… बना दूँगी मैं …..

वंदना बेटी को दूध पिलाती हुई बोली….

मुझ पर और भी काम होते है … ज्यादा दूर नहीं है मारकेट …. ले आना खुद ही… काम ही कितना होता है घर में… तुम्हे तो घर पर ही रहना होता है ….

मोहित इतना बोल ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गया….

वंदना को भी मोहित की बात का अब बुरा नहीं लगता था…. ये सुनने की रोज की आदत जो थी वंदना की…..

मोहित को वंदना ने लंच दिया…. वो चला गया…..

घर के सारे काम निपटाकर शाम को वंदना 3 साल के बेटे आरव और चार माह की बेटी रिंकी को गोद लेकर  बाजार गयी…..

उसने जल्दी जल्दी सब्जी और ज़रूरी सामान लिए… तब तक बेटा चिप्स दिलाने की ज़िद करने लगा… और पैर पटकने लगा… उसे चुप करा चिप्स दिलाया…. सामान ज्यादा हो गया था वंदना पर …. वो सामान दुकान पर ही रख चौराहे पर आयीं…… काफी देर बाद एक रिक्शा मिला… उससे मोल भाव कर दुकान पर लायी…. सब सामान रिक्शे पर रखवाया …..

सभी लोग पसीने से तरबतर हो गए थे… जल्दी से सामान ले घर के अंदर गयी…. बेड पर लेटी बेटी रोने लगी… पानी भी नहीं पी पायी उससे पहले बिटिया को दूध पिलाया…..

बेटी सो गयी …. बेटे को परांठा  दिया बनाकर …. थक तो बहुत गयी थी वंदना…. पर मेहमान आने वाले थे कल…. तो सोचा आराम नहीं काम ज्यादा ज़रूरी है …. उसने सारे कमरों की व्यवस्था ठीक की…. धूल मिट्टी साफ की….. टोयलेट को भी रात में साफ कर दिया यह सोच कि दोपहर को ही सब आ ज़ायेंगे…..

बच्चों के घर में थोड़ी अव्यवस्था तो रहती ही है ….. मेहमान आने पर ही थोड़ा मेनेज कर पाती है औरतें…..

बहुत थक गयी थी वंदना …. सोचा अब पुलाव ही बना लूँ …. उसने नहा धोकर चटनी पीसी, सलाद काटा, पुलाव बनाये…..

बस बेटी के उठने पर उसे गोद में लेकर बैठी ही थी कि पति मोहित आ गए….

सामान ले आई ना सारा….. टोटल 8 लोग है ….. कोई चीज कम नहीं पड़नी चाहिए…..

जी ले आयी …..

क्या बनाया है खाने में…. ??

वंदना खाना लेकर आयी …..

हर दूसरे दिन चावल बनाकर रख देती हो…. घर में रहकर भी तुमसे कुछ नहीं होता… एक वर्किंग लेडीज है जो घर  बाहर, बच्चे सब मेनेज करती है …. तुम ही खाओ ये चावल…. आदमी सुबह का गया शाम को आता है ….. और खाने में ये मिलता है …. गुस्से में मोहित उठकर बिना खाना खाये चला गया…..

वंदना ने मोहित से माफी मांगी… उसे मनाकर लायी… खाना खिलाया …. मोहित  खा पीकर सो गया…. वंदना रात के दो बजे भी रिंकी को गोद में ले दूध पिला रही थी…..

दिमाग में अगले दिन की टेंशन अलग हो रही थी वंदना को….

वो सुबह जल्दी ही उठ गयी….

झाड़ू पोंछा कर नहा धोकर पूजा पाठ किया वंदना ने… कपड़े धोकर डाल दिये …. मोहित और बच्चों के उठने से पहले नाश्ता बना दिया…..

अब उसने मेहमानों के लिए खाना पीना बनाना शुरू किया …. बिना नमक डाले बूंदी का रायता बनाके, सलाद काटकर ,कस्टर्ड बनाकर  फ्रीज़ में लगा दिया …..

नाश्ते में कटलेट , पकोड़े , सैंडविच का इंतजाम किया … इतनी स्पीड से काम कर रही थी वंदना कि कोई भी उसे देखता तो तरस खा जाता….. खाने में शाही पनीर , मशरूम  मिक्स वेज, पुलाव, पूरी, भरवा बैंगन , कुन्द्रू बनाये….

सभी लोग उठ चुके थे….

मोहित उठकर खुद को टिप टॉप करने लगा….

थोड़ा रिंकी को ले लो….. मैं भी तैयार हो जाऊँ, सब लोग आ रहे है ….

वंदना बोली….

तुम्हे कौन देखेगा….. तुम बस खाना देने आना… अंदर बच्चों को देखना….. रिंकी को आंटी के यहां दे आना य़ा फिर पूरी बनानी होंगी….. इसलिये ……

वंदना को गुस्सा तो बहुत आयीं पर वो कुछ बोली नहीं….

सभी मेहमान आ चुके थे…..

वंदना ने सभी की पत्नियों को देखा… सब इतनी स्मार्ट एंड वेल मेंटेन  लग रही थी…. वंदना ने खुद को देखा और उन्हे तो ,,उसे खुद की  हालात पर उसे रोना आ गया…

फिर भी किसी तरफ साड़ी पहन उसने फेयर लवली लगाकर अपने होंठ रच लिए… कम से कम कुछ तो ठीक लगूँ ……

मोहित सोफे पर लाड साहब की तरफ हाथ रखकर बैठा हुआ था…. वंदना नाश्ता लेकर आयी …..

वंदना को देख एक दोस्त की वाइफ बोली….

आपकी वाइफ क्या करती है मोहित जी….??

शी इज जस्ट अ हॉउस वाइफ…..

कोई जॉब वोब नहीं…. इतनी एजुकेटेड ही नहीं है आप लोगों की तरह …. घर के काम भी ठीक से नहीं होते…… माँ पापा की पसंद  थी … मना नहीं कर पाया…. शादी कर ली… नहीं तो मुझ जैसे को तो कोई जॉब वाली मिलनी चाहिए थी…..

मोहित वंदना का मजाक बनाते हुए बोला…..

मोहित के मुंह से यह बात सुन  वंदना की आँखों से आंसू बह निकले….

वो गुस्से से तिलमिला उठी…. मेरी ये अहमियत है मोहित की नजरों में ……

उसने भारी मन से सबको खाना दिया …..

अपने कमरे में आयी…. रिंकी और बेटे को सुला दिया…. उसने अपने आंसू पोंछे….. एक चिठ्ठी लिखी…..

हाथ में एक बैग लिया …. बच्चों के माथे पर चूम घर के पीछे के दरवाजे से स्टेशन आ गयी….

मोहित इस बात से बिल्कुल अंजान था…..

सभी लोग चटकारे लेकर खाना खा रहे थे….

कुछ भी हो मोहित जी….. आपकी वाइफ बहुत अच्छा खाना बनाती है ….. दो छोटे बच्चों को संभालते हुए, इतने बड़े घर की क्लीनिंग  ,,,,कूकिंग इतने अच्छे से करना कोई मजाक की बात नहीं …. ऊपर से आपके घर में कोई मेड भी नहीं है …..मैं तो रोहित से कभी नहीं कह सकती कि गेस्ट बुला लो… कभी बुलाते भी है तो बाहर ही खाने ज़ाते है सबको लेकर… दो मेड है मेरे यहां…. एक ही बेबी है … बट आई कांट मेनेज … हैट्स ऑफ़ टू योर वाइफ मोहित जी…..

यह बात सुन मोहित गर्व से फुला नहीं समा रहा था…..

तभी एक दूसरा दोस्त बोला… यार मोहित…. तूने भाभी जी को इतना कुछ बोल दिया… उन्हे बुरा तो ज़रूर लगा होगा यार… वो कुछ बोली भी नहीं …. विनीता तो मेरा सर फोड़ देती इतना बोल देता तो… बिल्कुल भारतीय पत्नी है वो…

प्लीज मोहित भाभी जो को बुलाओ ….. उन्हे भी हम सबके साथ बातें करने दो……

सबके कई बार फोर्स करने पर मोहित अंदर आया… उसने चारों तरफ वंदना को देखा… वो कहीं नहीं दिखी … बच्चे भी सोकर उठ चुके थे…..

दोनों जोर जोर से रो रहे थे… मोहित ने झल्लाकर रिंकी को गोद में लिया …. उसने टेबल पर रखी चिठ्ठी पढ़ी….

उसने पढ़ना शुरू किया ….

मोहित जी…. मैं जा रही हूँ घर छोड़कर….. क्यूँकि मैं आपके लायक नहीं…. आई एम जस्ट अ हॉउस वाइफ ना तो आप अब किसी नौकरी वाली शहर की लड़की से शादी कर लीजियेगा….. जो आपकी  और बच्चों की अच्छे से देखभाल कर सके …. घर और बाहर सब देख सके…. मैं अपने कलेजे के टुकड़ो को इसलिये नहीं लायी क्यूँकि मैं कमाती नहीं हूँ…. मुझे उम्मीद है आप उनकी देखभाल अच्छे से कर सकेंगे….. मेरा भी अपना आत्मसम्मान है मोहित जी…. जब मेरी आपकी नजरों में कोई अहमियत ही नहीं तो क्या  फायदा उस घर में रहने का…. आप सिर्फ मुझसे कुछ कहते थे तो मुझे इतना बुरा नहीं लगता था पर आज आपने समाज के सामने बेइज्जत किया जो मेरे बरदाश्त के बाहर था…. पता नहीं कहां जाऊंगी पर उस घर में नहीं आऊंगी….. शाम तक का खाना बना रखा है …..अगले  जन्म में शायद मैं आपके लायक हो जाऊँ…..अपना और अपने बच्चों का  ख्याल रखियेगा…..इस  जन्म में तो सिर्फ आपकी हो चुकी वंदना…..

मोहित के हाथों से चिठ्ठी पढ़ते हुए ना जाने कब रिंकी जमीन पर फिसल गयी …. पता ही नहीं चला उसे….. मोहित की आँखों में इतने आंसू थे कि उसे सब धुंधला दिख रहा था….

उसने रिंकी को उठाया… ज़िसकी रोते रोते सांस भी चढ़ आयी थी …. बेटा भी मम्मी मम्मी बोलकर जोर से रो रहा था….. बच्चों की आवाज सुन मोहित के सभी दोस्त अंदर आ गये थे…

क्या हुआ मोहित यार… बच्चे इतना क्यूँ रो रहे थे….

मोहित डबडबायी आँखों से बोला… तुम लोग अभी जाओ….

सभी लोग आपसी झगड़ा समझ चले गए….

रिंकी ने पोटी कर दी तभी …. मोहित को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे साफ करे … कभी की हो तो जाने….. उसने वाश बेशिन में खड़ा कर दिया रिंकी को… किसी तरफ उसे साफ किया ….. रिंकी के कपड़ो में , मोहित के कपड़े भी पोटी से खराब हो गए थे….

रिंकी का  चेहरा रो रोकर लाल हो गया था….

मोहित ने रिंकी को गोद में लेकर ही दूध गर्म किया …. दूध ज्यादा गर्म हो गया…. रिंकी का  मुंह जलने लगा…. मोहित ने पानी में रख दूध ठंडा किया ….. उसने फिर रिंकी को दूध पिलाना शुरू किया …. रिंकी बिल्कुल बोतल मुंह में नहीं ले रही थी… उसे वंदना के दूध की आदत जो थी….

रिंकी और बेटे के रोने से मोहित का सर दर्द से फटा जा रहा था….

उसने किसी तरह दोनों बच्चों को बाइक पर बैठाया….

उसने रास्ते भर वंदना को ढूँढ़ा , वो कहीं नहीं दिखी…. फिर मोहित सोचा एक बार स्टेशन चलकर देखता हूँ…. शायद अपने घर जा रही हो……

वो स्टेशन आया… उसने इधर उधर नजर दौड़ायी …. उसे वंदना कहीं ना दिखी….. मोहित एक हाथ से रिंकी को गोद में लिए , दूसरे हाथ से बेटे की ऊंगली पकड़े बहुत ही बेबस नजर आ रहा था….

तभी बेटा चिल्लाया…… पापा… मम्मी….

कहां??

वहां पे….

बेटे ने बेंच पर बैठी वंदना की तरफ इशारा किया ….

सच में ये तो वंदना ही थी…. मोहित वंदना की ओर दौड़ा …..

वंदना की आंखे रो रोकर सुर्ख लाल पड़ी थी…..

मोहित वंदना के पास आया… उसने रिंकी को वंदना की गोद में डाल दिया….. घुटने के बल बैठ गया…. हाथ जोड़कर बोला…

वंदना माफ कर दो मुझे…. तुम्हारी,,,मेरी और बच्चों की ज़िन्दगी में क्या अहमियत है मैं तीन घंटे में ही समझ गया….. मुझे नहीं चाहिए जॉब वाली वाइफ….. मेरे लिए तो मेरी वंदना ही दुनिया की सबसे अच्छी पत्नी है …. घर चलो वंदना…. आज के बाद तुम्हे कुछ नहीं बोलूँगा…. एक मेड लगा दूँगा…. हर काम में हाथ बंटाऊँगा……तुम कैसे कर लेती हो इतना कुछ….. मेरी भी हर ख्वाहिश पूरी करती हो…मुझे और हमारे बच्चों को, हमारे घर को तुम्हारी ज़रूरत है …..

मोहित रो रोकर बोला…..

वंदना ने मोहित के हाथों को चूम लिया …. जी माफी मत मांगिये…. मैं भी इन तीन घंटों  में आपकी अहमियत समझ गयी…. ये दुनिया अकेली औरत को कितनी गंदी नजर से देखती है …. घर छोड़कर तो आ गयी पर डर बहुत लग रहा था आपके बिना….. मुझे माफ कर दीजिये ……

मोहित ने वंदना को गले से लगा लिया …… लो रिंकी को दूध पिला दो….. रो रोकर आज तो इसकी जान ही चली ज़ाती…..

मैं बैठा हूँ…. तुम पिला दो दूध….

वंदना ने रिंकी को बिना किसी डर के सभी के सामने आँचल कर दूध पिलाया …. आज उसके साथ उसका पति जो था…. तो डर किस बात का था…..

मीनाक्षी सिंह की कलम से 

आगरा

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