माँ जी सहारे की ज़रूरत आपको होगी ,,मुझे नहीं – मीनाक्षी सिंह 

ख़ुशी – माँ जी कितनी बार कहाँ हैँ आपसे मेरे पीछे मत पड़िये ! मैं कोई दो साल की बच्ची तो नहीं जो आपकी मर्जी से चले ! मुझे पता है मुझे प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए क्या  नहीं ! डॉक्टर ने मुझे डाईट चार्ट दिया हैँ ! मैं उसे फौलो कर रही हूँ ! 

संगीता जी – बहू ,ये आजकल के डॉक्टर सब चीजों की मनाही कर देते हैँ ! हर महीने  अल्ट्रासाउंड कराते हैँ ! हमारे समय में पूरी गरभावस्था में बस तीन बार डॉक्टर वो टीवी वाली मशीन से बच्चा दिखाती थी ! अब तो बस चोचले शुरू हो गए हैँ इसलिये दिक्कतें बढ़ गयी हैँ ! हम तो सब खाते थे जो मन होता था ! बच्चें भी 4-5 किलो से कम वजन के नहीं होते थे ! आजकल तो सुनकर हैरानी होती हैँ दो ढाई किलो के बच्चों में ही पेट फाड़ देते हैँ माँ का ,क्या कहते हैँ उसे आपरेशन ,वो कर देते हैँ ! तभी कहती हूँ सब कुछ खा ! देखना कैसा सलोना सा स्वस्थ बच्चा होगा तुझे ! 

संगीता जी  सारी  बात एक सांस में बोल गयी ! बोलने में तो वो  हमेशा से ही निडर रही ! मोहल्ले की दाई के रुप में जानी जाती थी हमेशा से संगीता जी ! अकेले ही काफी थी जच्चा  की डीलीवरी कराने  में ! पर बहू उनकी एक ना सुनती थी ! आजके ज़माने की जो ठहरी ! एकलौता बेटा राम !पति की दो साल पहले   मृत्यु हो गयी ! पहली बार घर में न्नहे – मुन्ने बच्चें की किलकारी गूंजने वाली थी इसलिये संगीता जी कोई कमी नहीं रखना चाहती थी ! बहू का ध्यान रखना ख़ुशी को बहुत बन्दिश महसूस कराता था ! खैर कहानी में अब आगे बढ़ते हैँ ! 

ख़ुशी – माँ जी अगर आप ऐसे ही रोका टोकी करेंगी तो मैं यहाँ नहीं रहूंगी ! मुझे इस कंडीशन में टेंशन बिल्कुल नहीं चाहिए ! राम आयेंगे तो कह दूंगी कि अब हम यहा नहीं रहेंगे ! कम से कम आपकी ये रोज रामाय़ण तो नहीं सुननी पड़ेगी ! उफ़ तंग आ गयी हूँ आप और आपकी बातों से ! 



संगीता जी – मैं कौन  होती हूँ तुझे और राम को रोकने वाली ! इसी दिन के लिए तो पैदा किया था राम को कि बुढ़ापे में  मुझे छोड़कर  चला जायें ! जा ज़ा ले जा राम को ! खुश रहो तुम ! देखना मेरे बिना ऐसी हालत में कितनी दिक्कत आयेगी तुझे ! ऐसे समय में किसी ना किसी सहारे की ज़रूरत होती हैँ ! मेरे पेट में जब राम था भले ही कितना भी काम करना पड़ता हो पर मेरी एक दर्द भरी आवाज पर पूरा घर दौड़कर चला आता था सब जबान के ज़रूर सख्त थे पर दिल के बहुत कोमल ! पर आजकल के बच्चें पता नहीं किस धुन में रहते हैँ ! 

ख़ुशी – माँ जी सहारे की ज़रूरत आपको होगी आपकी उम्र जो हो गयी ,मुझे किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं ! मैं अपना ख्याल खुद रख सकती हूँ ! 

तब तक राम भी आ गया ! राम बेटा,, बहू कुछ दिन तेरे साथ अकेले रहना चाहती हैँ ! ऐसा कर तू जो हमारा पुराना घर हैँ वहाँ कुछ दिन रह ले बहू के साथ ! ऐसे समय में पति की ज्यादा ज़रूरत होती हैँ पत्नी को ! 

राम – पर माँ ,ख़ुशी पहली बार माँ बन रही हैँ ! मैं तो वैसे ही घबराया हुआ हूँ ! इसके मायके में भी कोई नहीं हैँ जो इसकी देखभाल के लिए आ जायें ! नहीं नहीं ,,मैं कहीं नहीं जा रहा ! आप हो यहाँ तो टेंशन फ्री होकर नौकरी कर लेता हूँ ! 

ख़ुशी – मुझे नहीं रहना राम यहाँ ! मैं माँ जी के साथ नहीं रहना चाहती ! मुझे टोका – टाकी पसंद नहीं ! 

राम – तो क्या हुआ ख़ुशी ,माँ तुम्हारे और बच्चें के भले के लिए ही तो कहती हैँ ! वरना उन्हे क्या मतलब ! 

संगीता जी – राम बहू से कुछ मत कह ! ये समय ऐसा होता हैँ ! उसे मानसिक शांति चाहिए ! उसे ले जा ! मैं कौन सा दूर हूँ ! कोई दिक्कत हो तो तुरंत फ़ोन कर देना मैं आ जाऊंगी ! 

राम – माँ तुम अकेले कैसे रहोगी ?? 

संगीता जी – तेरी माँ हूँ मैं ! अभी इतनी बुढ़ी नहीं हुई ! जा पगले ! अपना ख्याल रख सकती हूँ ! 

अगले दिन भारी मन से संगीता जी ने बहू बेटे को विदा कर दिया ! 



तीन महीने बाद जब राम बाहर किसी मीटिंग के सिलसिले में गया हुआ था ,अचानक से ख़ुशी के दर्द शुरू हो गए ! उसने राम को फ़ोन कर बताया ! 

राम ने तुरंत संगीता जी को फ़ोन किया ! वो  राम को चिंता ना करने की हिदायत देकर बैंक की पासबुक लेकर चल दी ! रास्ते में जल्दी से बैंक से पैसे निकाले ! ख़ुशी के पास पहुँची ! ख़ुशी दर्द से कराह रही थी ! माँ जी मुझे बचा लिजिये ! बहुत दर्द हो रहा हैँ ! संगीता जी ने ख़ुशी को कस्के पकड़ा ! बोली – पगली ,घबरा मत ! तेरी माँ आ गयी हैँ ! सब अच्छा होगा ! उन्होने जल्दी से ख़ुशी को एक ग्लास दूध में घी मिलाकर पिलाया ! बाहर से गाड़ी बुलायी ! राम भी निकल चुका था ! डॉक्टर के यहाँ पहुँचते ही डॉक्टर बोली ! बच्चा नीला पड़ गया हैँ ! बच्चेदानी का मुंह भी ठीक से नहीं खुला हैँ ! ऑपेरेशन करना पड़ेगा ! पचास हजार रूपये जमा करवा दीजिये ! संगीता जी ठहरी दाई ! मन नहीं माना ! पर  उन्होने ख़ुशी की हालत देखी ! इस समय उन्होने डॉक्टर से बहस करना उचित ना समझा ! उन्होने तुरंत पैसे जमा करवाये ! ख़ुशी का ऑपेरेशन हुआ ! ख़ुशी संगीता  जी का हाथ ही नहीं छोड़ रही थी ! 

राम ने संगीता जी को फ़ोन लगाया ! माँ संगीता कैसी हैँ ?? मैं बस पहुँचने वाला हूँ ! 

संगीता जी – घबरा मत ! ख़ुशी और बच्चा दोनों ठीक हैँ ! 

राम – माँ बच्चा हो गया ! राम ख़ुशी से झूम उठा ! माँ हमारे घर में लक्ष्मी आयी हैँ य़ा राम ?? 

संगीता जी – पगले ,सजा ले घर को गुलशन सा ,तेरे घर राम आये हैँ !! 

संगीता जी की आँखों से ख़ुशी के आंसू छल्ल से गिर गए ! 

ख़ुशी भी होश में  आने के बाद बस संगीता जी का हाथ पकड़े रही ! माँ जी ,आपने सच कहा था ,सभी को सहारे की ज़रूरत होती हैँ ! मैं गलत थी ! मुझे माफ कर दिजिये ! आप नहीं होती तो पता नहीं आज क्या होता ! ख़ुशी सिस्कती  हुई बोली ! 

संगीता जी – मैं कैसे ना होती! तुम लोग ही तो मेरा  जीवन हो ! मुझे भी तो तुम्हारे सहारे की ज़रूरत हैँ ! अब आराम  कर ! राम से बात कर ! आ गया हैँ ! तुझे देखने के लिए परेशान हैँ ! भेजती हूँ अंदर ! बहुत बहुत धन्यवाद बहू हमें इतना प्यारा उपहार देने के लिए ! 

संगीता जी ख़ुशी के गालों पर थपकी देती हुई ,,अपने पोते को गोदी में लिए बाहर आ गयी ! 

#सहारा 

स्वरचित 

मौलिक अप्रकाशित 

मीनाक्षी सिंह 

आगरा

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