पुष्पा का तनाव – सुभद्रा प्रसाद : Moral stories in hindi

 छह महीने से शुभम घर नहीं आया था | माँ पुष्पा देवी बहुत तनाव में  थी | शुभम उनकी इकलौती संतान था | बहुत ही होनहार, आज्ञाकारी और संस्कारी था | पढाई में तेज होने के साथ-साथ संस्कार और व्यवहार में भी अच्छा था | सभी के साथ उचित व्यवहार करता था | अपनी पढाई … Read more

धिक्कार है धिक्कार – सुभद्रा प्रसाद : Moral stories in hindi

रात के दो बजकर दस मिनट हो चुके   थे |प्रियंका स्टेशन के प्लेटफार्म  पर शाल ओढ़े चुपचाप बैठी थी | उसे समझ नहीं आ रहा था,  वह क्या करे? रात दो बजे वाली ट्रेन आकर आगे जा चुकी थी और उसका मन तेजी से पीछे की ओर भाग रहा था |       … Read more

दायित्व अपना-अपना – सुभद्रा प्रसाद: Moral stories in hindi

आदित्य ने आफिस से आकर अपना बैग टेबल पर रखा तो उसकी निगाह फिर उस लिफाफे पर पड़ गई, जो उसे परसों मिला था  | यह लिफाफा उसके पिता ने उसे भेजा था और आदित्य ने उसे बिना खोले ही रख दिया था | वही, पिताजी ने उसे भारत आने के लिए लिखा होगा ,उसने … Read more

परिवार की अहमियत – सुभद्रा प्रसाद: Moral stories in hindi

Moral stories in hindi

शाम का धुंधलका फैलने लगा था |शंकर बाबू अपने हाथों में सब्जी का थैला थामे जल्दी जल्दी पुल पार कर रहे थे | एक दोस्त से बात करने के चलते कुछ देर हो गई थी और अब वे जल्दी से घर पहुंचना चाह रहे थे|  पुल ज्यादा लंबा नहीं था |नीचे नदी बह रही थी … Read more

मेरे लिए आपका आशीर्वाद ही काफी है – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  आकाश और पूनम दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे | दोनों ने एक ही साथ एक ही कालेज से मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी और संयोग से दोनों को नौकरी भी एक ही कंपनी में मिल गया | कालेज के समय से शुरू हुई दोस्ती प्यार में बदल … Read more

थैली भर के आशीर्वाद-  सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  “अरे ये क्या बेटा, गगन, मैंने तो तुम्हें सब्जी लाने को भेजा था, पर तुम तो खाली थैली लेकर आ गये |” माँ ने अपने पंद्रह वर्षिय पुत्र गगन को खाली थैली  लेकर घर में आते देखकर कहा |       ” खाली थैली नहीं मां, थैली भरकर आशीर्वाद लाया हूँ |” … Read more

आंखे चार  : hindi stories with moral

hindi stories with moral : रजनी बड़ी तेजी से सीढ़ियों पर चढी जा रही थी | सोच रही थी,आज आफिस में उसका पहला दिन था और कहीं आज ही देर न हो जाये |लिफ्ट उपर गया हुआ था और आफिस पहली मंजिल पर ही है, यह सोचकर रजनी फटाफट उपर आ गई |आफिस में वह … Read more

मैं सिर्फ आपकी पत्नी नहीं किसी की बेटी भी हूँ – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “आ गई महारानी ” बहू को घर में घुसते देखकर संध्या जोर से बोली |         माँ की आवाज सुन पवन कमरे से बाहर आया और  दीपा की ओर देखते हुए चिल्लाकर बोला -” कहाँ थी तुम? हम कबसे तुम्हारी राह देख रहे हैं | आफिस तो छ बजे बंद हो … Read more

दर्द जो कोई नहीं बांट सकता –  सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  ” बधाई हो भाभी, बेटा अफसर बन गया है और बहू भी अफसर ही आई है |दोनों तुम्हारी इज्जत करते हैं, बात मानते हैं और अब तो तुम्हें अपने साथ घूमने ले जा रहे हैं |बेटा -बहू तो बहुतों के है, पर कोई अपनी माँ के लिए इतना नहीं  करता … Read more

चहकता घर-आंगन- सुभद्रा प्रसाद : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : नयना बहुत परेशान थी |उसे समझ नहीं आ रहा था, वह कैसे संभाले, सबकुछ | घर, आफिस, बच्चे और  उपर से प्रशांत की यह हालत |सबकुछ तो ठीक ही जा रहा था|  प्रशांत  और वह दोनों मिलकर सब संभाल ही रहे थे, पर प्रशांत के इस एक्सीडेंट ने तो सबकुछ … Read more

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