विजेता – अल्पना श्रीवास्तव : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : आज बहुत बड़ी रेस जीत कर आई हो जैसे, ऐसा महसूस कर रही थी नित्या पर इतनी दूर दौड़ने की थकान बिल्कुल नहीं थी। खुद को हल्का और जीत के उत्साह से सराबोर पाया था, इस जंग के बाद भी उसने। पता नहीं कब ड्रेसिंग टेबल के सामने जा पहुंची।

 सांवला रंग और साधारण नाक नक्श, कभी किसी से अपनी तारीफ में कोई शब्द शायद ही सुना हो उसने।  कभी उम्मीद भी नहीं की। कॉलेज में सहेलियां फैशनेबल कपड़ों में सज संवर कर आतीं पर नित्या ने कभी अपने रखरखाव पर ज्यादा मेहनत नहीं की। मां कभी खुद, और कभी उसकी सहेलियों से कहकर उसके लिए मॉडर्न कपड़े मंगवा देतीं तो पहन भी लेती पर अपने साधारण रंग रूप को स्वीकारते हुए कभी बहुत उत्साहित नहीं हुई।

हां पढ़ाई में जरूर उसकी रूचि थी। इसलिए पढ़ाई पूरी होते होते ही बैंक में जॉब भी मिल गई। इस जॉब में आने के बाद नित्या को वह खुशी मिली जो अब तक शायद किसी और बात से नहीं मिली थी। पूरे उत्साह से, ढंग से तैयार होकर नित्या सुबह बैंक जाती और पूरे मनोयोग से अपना काम करती।

उसके साथ ही दो नए लोगों ने भी बैंक जॉइन किया था……. काजल और निखिल। काजल हंसमुख और सुंदर सी उसकी हम उम्र ही थी। निखिल थोड़ा बातूनी और बेहद आकर्षक व्यक्तित्व वाला युवक… ब्रांडेड कपड़ों, घड़ियों आदि का बेहद शौकीन।

 साथ-साथ जॉब  ज्वाइन करने के कारण तीनों की अच्छी दोस्ती हो गई। यूं तो तीनों ही एक दूसरे का खूब ख्याल रखते थे लेकिन कई बार नित्या को लगता की निखिल का काजल की तरफ झुकाव बढ़ने लगा है। वह जब तब काजल को बातों बातों में छेड़ता, तंग करता और काजल भी उसकी बातों का जवाब उन्मुक्त होकर बराबरी से देती। नित्या उनकी इन बातों पर मुस्कुरा भर देती।

शहर में नई पिक्चर लगी थी जिसके बड़े चर्चे हो रहे थे।एक दिन निखिल सुबह बैंक आते ही काजल के पास जाकर बोला…. आज शाम के शो की टिकट ली है। काजल तुम अपने काम से जल्दी फ्री हो जाना। फिर पास बैठी नित्या की तरफ देख कर बोला, करवाना तो मैं तीन टिकट चाहता था पर बड़ी मुश्किल से दो ही मिलीं।…. तो तू नित्या को साथ ले जा। मैं तो आज बिल्कुल नहीं जा सकती। निखिल कुछ पूछता इसके पहले ही काजल ने आगे कहा …. आज मेरा मंगेतर बैंगलोर से आ रहा है सो अगले चार-पांच दिन मेरे तो….. खुशी से झूमते हुए काजल ने हाथ हवा में लहरा दिया। आर यू इंगेज्ड? कांग्रेचुलेशन! नित्या ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया …. अब तक बताया क्यों नहीं था? अरे यार आज शाम सहर्ष बैंक ही आने वाले हैं। सोचा था सीधा मिलवा कर तुम दोनों को सरप्राइस दूंगी। अब तक खामोश खड़े निखिल ने भी काजल को बधाई दी और अपनी सीट की ओर बढ़ गया।

शाम को एक शांत, सुदर्शन आईटी इंजीनियर से काजल ने अपने दोनों मित्रों को मिलवाया। थोड़ी बातचीत के बाद काजल ने कहा, हम तो अब निकलते हैं और तुम दोनों भी जाओ तुम्हारी मूवी का टाइम हो रहा है। नहीं मुझे आज घर जल्दी जाना है… निखिल के कुछ कहने के पहले  ही नित्या ने कहा।

कुछ दिनों में जिंदगी फिर अपनी सामान्य चाल चलने लगी। नित्या ने महसूस किया निखिल के कहकहे थोड़े कम हो गए थे। काजल अपनी शादी के उत्साह में डूबी, अपनी शॉपिंग और अन्य तैयारियों के किस्से सुनाती रहती।

अपनी शादी वाले दिन काजल जिद करके नित्या को अपने साथ पार्लर  ले गई। काजल का मन रखने के लिए नित्या ने भी हल्का सा मेकअप करवा लिया। शाम को पार्टी में आए हुए स्टाफ मेंबर्स से बड़े सारे काँप्लीमेंट्स मिल रहे थे। निखिल से सामना हुआ तो वह बरबस बोल पड़ा… अच्छा तो यह आप हो? भई वाह!

 शादी के बाद काजल ने अपना ट्रांसफर बैंगलोर करवा लिया। नित्या और निखिल बैंक में पहले की तरह बिजी हो गए। नित्या महसूस कर रही थी कि निखिल अब उसका पहले से ज्यादा ख्याल रखने लगा है। कभी कभार उसको उसके घर भी छोड़ देता। हांलाकी उसके कहने पर भी घर के अंदर कभी नहीं आया। ज्यादातर दोनों बैंक के बाद बाहर ही साथ थोड़ा समय बिता लेते। काजल भी नित्या से फोन पर यह सब जानकर खुश थी।

यूं ही एक दिन निखिल ने नित्या से एक रेस्टोरेंट की तारीफ करते हुए साथ डिनर की पेशकश की। “आज नहीं, फिर किसी दिन..  बल्कि इसी शनिवार को। मां तीन दिन के लिए मौसी के यहां जा रही हैं, उन्हें भी मुझे अकेले छोड़ने का गिल्ट नहीं रहेगा” नित्या ने बात पूरी की।

रविवार सुबह नित्या सोकर उठी तो तेज बारिश हो रही थी। कल देर रात निखिल डिनर के बाद घर छोड़ कर गया था, तब तो मौसम साफ था। आज का पूरा दिन सिर्फ मेरा और इस मौसम में बैंक भी नहीं जाना.. सोचकर नित्या मुस्कुरा दी और वापस रजाई में घुस गई।

कुछ देर करवटें बदलने के बाद वह समझ गई अब नींद नहीं आने वाली। बेड की साइड टेबल पर निगाह दौड़ाई। मां होतीं तो अब तक वहां चाय की प्याली नजर आ गई होती। वह खुद अपने लिए चाय बनाने की हिम्मत जुटा ही रही थी कि डोरबेल की आवाज सुनकर चौंक गई। इतनी बारिश में तो काम वाली सुधा के आने की उम्मीद नहीं थी सोचते हुए वह दरवाजे की ओर बढ़ी। दरवाजा खोलते ही नित्या हैरान हो गई ।सामने निखिल खड़ा था…. इतनी बारिश में बाहर ही खड़ा रख्खोगी क्या? निखिल खुद ही उसे साइड में करके अंदर आ गया और हाथ में पकड़ा हुआ पैकेट सामने टेबल पर रख कर उसकी तरफ मुखातिब हुआ…. मैंने सोचा क्यों ना आज खुद को लंच के लिए तुम्हारा मेहमान बना लिया जाए। नित्या छेंपी सी हंसी हंस दी। निखिल को ड्राइंग रूम में बैठा कर नित्या जल्दी से अंदर आई। शीशे में अपनी शक्ल देख कर थोड़ा इंबैरस फील कर रही थी। फटाफट उसने मुंह धो कर नाइट सूट चेंज किया और पता नहीं क्यों हल्का सा फेस टच अप भी कर लिया।

दो कॉफी मग्स के साथ जब वह ड्राइंग रूम में पहुंची तो उसने देखा निखिल ड्राइंग रूम में लगी उसकी पेंटिंग निहार रहा है। उसे देखते ही तारीफ करते हुए बोला अच्छा ज़नाब आप पेंटर भी हैं। धीरे धीरे आपके टैलेंट सामने आ रहे हैं नित्या को प्रशांसात्मक नजर से देखते हुए निखिल ने कहा। कॉफी के साथ दोनों थोड़ी देर तक ऑफिस और इधर-उधर की हल्की फुल्की बातें करते रहे।

नित्या आश्वस्त थी की मम्मी जाते जाते उसकी पसंद की दो – तीन अच्छी डिशेज बनाकर फ्रिज में रख गई थी। सो लंच की कोई चिंता ना थी। अचानक निखिल ने टेबल पर रखे हुए पैकेट को खोलकर एक वाइन की बोतल निकाली और नित्या की तरफ बढ़ा दी…. तुम्हारे लिए। मैं?… चौंक कर नित्या ने कहा मैं वाइन नहीं पीती।

अच्छा! यह तो और भी अच्छी बात है। आज शुरुआत मेरे साथ ही होगी… कहते हुए निखिल अधिकार पूर्वक डायनिंग एरिया के क्रोकरी  शेल्फ से दो गिलास ले आया। नित्या के चेहरे पर गहरा संकोच देखकर वह बोला …अरे यह तो माइल्ड ड्रिंक है, इसमें कुछ नहीं होता और फिर आज का मौसम भी तो देखो और ये भी देखो कि मैं आज बिना बुलाए तुम्हारे यहां आ गया। यह कहते हुए निखिल ने नित्या के हाथ में गिलास थमा दिया। चियर्स!

निखिल का अपने आप उसके घर आ जाना कहीं नित्या को एक अनजानी सी खुशी दे रहा था। एक आकर्षण जो पिछले कई दिनों से वह निखिल के प्रति महसूस कर रही थी, आज उसे लगने लगा था की शायद वही फीलिंग्स निखिल की भी हैं। वह मना ना कर सकी। साथ बैठ कर छोटे-छोटे घूट लेती रही।

 उसकी आंखें थोड़ी भारी हो रही थी। निखिल ने दोबारा अपने गिलास में वाइन डालकर उससे पूछा तो नित्या ने मना कर दिया। निखिल ने अब कोई जोर भी नहीं दिया। थोड़ी देर में नित्या ने डाइनिंग टेबल पर लंच लगा दिया।

लंच के बाद घर पर ही मूवी देखने का प्रोग्राम बना। नित्या निखिल के बराबर वाले सोफे पर बैठ ही रही थी कि निखिल ने अचानक उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लिया।  निखिल का यह व्यवहार नित्या के लिए नया था पर वह तो मंत्रमुग्ध सी निखिल के साथ किसी और दुनिया के सपने देखने लगी थी। वह सोच रही थी, अब मां के आते ही वह उन्हें निखिल के बारे में सब कुछ बता देगी। कितनी चिंतित रहती है माँ उस के भविष्य को लेकर। निखिल से मिलकर कितनी खुश होंगी। निखिल के हाथों का दबाव उसने अपने कंधे पर महसूस किया। मूवी देखते देखते  अचानक निखिल उसके साथ इंटिमेट होने की कोशिश करने लगा। नित्या को यह सब बहुत अजीब लग रहा था। उससे निखिल को पीछे की तरफ धकेला लेकिन निखिल फिर उसके पास आ गया तब नित्या ने खड़े होने की कोशिश करते हुए कहा… अभी नहीं निखिल यह सब शादी के बाद। दो दिन में माँ आ जाएंगी। तुम आकर उनसे मिल लेना। वह शादी के लिए मना नहीं करेंगी।

शादी? यह शादी कहां से आ गई बीच में? हमारे बीच में क्या कोई शादी की बात हुई है? हम तो दोस्त हैं, जब तक साथ में है, एंजॉय करेंगे। यह शादी के लफड़े मुझे पसंद नहीं। क्या?… नित्या को करंट सा लगा। निखिल को जोर से पीछे की तरफ धकेलते हुए वह जोर से चीखी…समझ क्या रखा है तुमने मुझे? मैं इस तरह की लड़की हूं? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी?

यह सब सुनकर निखिल जो अब तक शालीनता से पेश आ रहा था, अचानक उसके चेहरे के रंग बदल गए। नित्या के दोनों कंधों को पकड़ कर जोर से बोला यह शादी के सपने कहां से देखने लगी तुम? शक्ल देखी है अपनी? कल तुम्हारे साथ जो सेल्फी ली थी वही देख लो। मेरे शरीर की मैल भी तुमसे साफ निकलेगी। मैं तो एहसान कर रहा था तुम्हारे जैसी ऑर्डिनरी लड़की को थोड़ा अच्छा टाइम देकर और तुम तो गले ही… निकल जाओ मेरे घर से …. उसकी बात बीच में ही काट कर नित्या जोर से चिल्लाई । अच्छा हुआ तुम्हारे गोरे रंग के पीछे छिपा हुआ काला मन तुमने खुद मुझे दिखा दिया । तुमने शायद मुझे अपने जैसा समझ लिया… सबके लिए अवेलेबल… नहीं मैं वह नहीं हूं। मैं बहुत खास हूं… किसी एक खास इन्सान के लिए बनी हूँ।

तुम पर विश्वास करना मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी… और तुम्हारे साथ बिताए ये दो-तीन घंटे मेरी जिंदगी का सबसे बुरा वक्त है। निकल जाओ मेरे घर से… उसे ढकेलते हुए नित्या सड़क तक ले आई।

निखिल भी नित्या के तेवर देखकर थोड़ा घबरा सा गया था। जल्दी से अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट करके वहां से चला गया।

मूसलाधार बारिश में नित्या बहुत देर वहीं खड़ी रही….अपने तन और मन को देर तक धो कर वह अपने घर की तरफ चल दी….एक विजेता की तरह।

लेखिका

अल्पना श्रीवास्तव

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