रिश्तों का बदलाव तब और अब…. – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

” समय कितना बदल गया,साथ ही खुशियों के मायने भी “रेवती जी ने उदासी से कहा। “तुम ठीक कह रही हो, पहले हमारी खुशी परिवार के साथ होती थी, पर आज खुशियाँ भी अपना अर्थ बदल दी, प्रतिस्पर्धा इस कदर बढ़ गई इसमें रिश्ते भी डूब जाते हैं, क्योंकि मैं इतना भारी हो जाता, जिसमें … Read more

ये आपकी गलतफहमी है कि बदनामी सिर्फ लड़की वालों की होगी… – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” क्या हुआ बाऊ जी, किसका फ़ोन था?? ,, मेंहदी रचे हाथ लिए जब वसुधा कमरे में आई तो अपने पिता को फोन के पास परेशान बैठे देख पूछ बैठी। ” कुछ नहीं बेटा, बस यूं ही किसी रिश्तेदार का था …..! और तुम इधर उधर क्यों घूम रही हो बेटा… थोड़ा आराम कर लो … Read more

जे किसी से कम है का – वीणा : Moral Stories in Hindi

मौसी –माँ कहाँ है? ..दिख नहीं रही। पता नही..अभी तो कुछ देर पहले  तो यहीं थी। ये दीदी…तुमने देखा क्या माँ को..कहीं नहीं दिख रही, तब से ढूंढ रहा हूं। नीरज परेशान सा था। तभी शोर होने लगा..जल्दी आओ सब। पंडित जी घृतढारी के लिए कह रहे हैं। मुहूर्त हो गया है।  तभी किसी ने … Read more

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन – चम्पा कोठारी : Moral Stories in Hindi

यह विवरण कलयुग में 20 वी सदी के आरंभ की है. धरा की गोद में रहने वाले पेड़ पौधों की छाँव में दिन ब्यतीत हो रहे थे। मिट्टी पत्थर, घास फूस की झोपड़ियाँ ही इंसानों व पालतू जानवरों का आशियाना थे। सभी चाहे इंसान हो या पालतू जानवर एक दूसरे के सुख दुख में सहयोगी … Read more

बुरा वक़्त – लक्ष्मी कानोडिया : Moral Stories in Hindi

पति की अचानक मौत होने से पूनम के सिर पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा। ख़बर सुनते ही वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो उसने‌ अपने बच्चों से कहा- ताऊजी, ताई जी है वह भी हमारी सहायता करेंगे। लेकिन तुम दोनों भाई बहनों को पढ़ाई में खूब मेहनत करनी है। बेटा पढ़ाई लिखाई … Read more

बेगाने शहर मे अपना सा कोई! – मनीषा भरतीया : Moral Stories in Hindi

“अरे करमजली सोती ही रहेगी क्या? इतना काम पड़ा है कौन करेगा?” “आई चाची” कहकर नीता उठने लगी। नीता जब 10 साल की थी, उसके माता-पिता की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। बस तभी से चाची की जली कटी बातें सुनकर नीता बड़ी हो रही थी। नीता घर का सारा काम करती, … Read more

आप साथ देंगी ना सासु माँ – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“बहू ये क्या तमाशा था… ये सब लड़कियाँ कौन थीं और तुमने उन्हें यहाँ क्यों बुलाया था?” सुनंदा जी ग़ुस्से में बहू राशि से बोलीं “ मुझे उनसे काम था…।” संक्षिप्त उत्तर दे राशि एक बंद पड़े कमरे की ओर बढ़ गई “ अब वहाँ क्या करने जा रही हो…. जब से आई हो दिमाग़ … Read more

पत्नी जी आज तुम बस आराम करोगी – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

बहुत दिनों बाद आज रविवार को बच्चों के साथ राशि गप्पें मार रही थी…पति निकुंज की कल से दूसरे शहर में ट्रेनिंग शुरू होने वाली थी तो वो सुबह ही निकल गए थे । ऐसा वक्त बहुत कम मिलता था जब दोनों बच्चे और राशि एक साथ गप्पें मारते…आज तो दोनों ने कह भी दिया … Read more

खुशियों की नई परिभाषा – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आज मन बहुत अशांत था। बचपन और माँ बहुत याद आ रही थी । सुनने वाले बोलेंगे पचपन में बचपन क्यों याद आना..। पर शायद हर इंसान के दिल में एक बच्चा छुपा होता है,जब दिल पर चोट पड़ती तो, उसे अपना बचपन और माँ शिद्दत से याद आते । पत्नी के मन की उथल … Read more

प्रेम की पीड़ा – गणेश पुरोहित   : Moral Stories in Hindi

नीमा की असामयिक मौत उसके वृद्ध माता-पिता के लिए एक वज्रपात से कम नहीं थी। अनूप जो इस परिवार के घर में किराये पर रहता था, वह भी इससे बूरी तरह आहत हुआ था। सुबह नींद खुलते ही उसे यह दुखद समाचार मिला और वह दिन भर थकावट भरी भाग-दौड़ में व्यस्त रहा था। रात … Read more

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