तलाक – मंजू ओमर   : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: बेटे के जवान होते ही हर मां बाप के मन में बेटे के सिर पर सेहरा देखने की इच्छा बलवती होने लगती है।रेखा भी अपने 28 साल के बेटे की शादी का सपना संजोने लगी ।बेटा बहुत मुश्किल में शादी के लिए तैयार हुआ तो रेखा बेटे के लिए रिश्ता ढूंढने लगी। कोशिश शुरु हो गई पेपर , मैगजीन और कई मेट्रो मोनियल साइड पर विज्ञापन दें दिया।

कुछ रिश्ते पसंद आए तो बेटा उसे मना कर देता था। फिर मैगजीन के माध्यम से एक लड़की बेटे ने पसंद की , हालांकि उस रिश्ते से रेखा और उनके पति पूरी तरह सहमत नहीं थे लेकिन फिर बेटे की पसंद का ख्याल रख कर उन्होंने हां कर दी । लड़की देखा तो रेखा को भी पसंद आ गई अच्छी पढ़ी लिखी सुंदर लड़की थी । रेखा का बेटा भी इंजीनियर था ।

फिर बात पक्की हो गई और पांच महीने बाद शादी की तारीख तय हो गई । इन पांच महीने में काफी बातचीत होती रही बहूं और बेटे में जैसा आजकल होता है। आखिर में वो दिन भी आ गया जब बेटे की शादी हुई लेकिन ये क्या लड़की बहुत तेज तर्रार निकली । हनीमून पर ही दोनों का झगड़ा हो गया ।

हम लोगों ने ध्यान नहीं दिया लेकिन फिर बार बार हर छोटी-बड़ी बात में झगड़ा होने लगा । रेखा और उनके पति और बहू के मां बाप ने भी कई बार बीच में पड़कर मामले को सुलटाया लेकिन ये सिलसिला खत्म होने की बजाय और बढ़ता गया ।अब बात यहां तक आ गई कि बहू बात बात में तानें मारने लगी कि शादी में मेरे घर से जो कार मिली है उसे तुम जभी चलाओगे जब मैं कहीं जाऊंगी अकेले तुम नहीं ले जा सकते ।

तुम्हारी तो औकात नहीं है कार खरीदने की ।और यहां तक कि शादी में जो पैसा खर्च हुआ है उसका आधा मुझे वापस करों ।जब ये बात बहू के मां बाप को बताई गई तो वो सुनकर दंग रह गये कि तुम ये क्या कर रही हो , पैसे तो तुम्हारी शादी में हमने खर्च किए हैं तुम क्यों मांग रही हो । लेकिन वो नहीं मानी कहने लगी जब लडका लडकी बराबर है तो पैसे भी बराबर से खर्च होंगे ।हर समय तनाव की स्थिति घर में रहने लगी।

                   आखिर में दो साल बाद नौबत तलाक की आ गई। रेखा और उनका परिवार सदमे में आ गया । समाज में जिल्लत और उठानी पड़ रही थी । लेकिन क्या करें जब लड़की लड़का साथ रहना ही नहीं चाहते आखिर में पारिवारिक सहमति से दोनों का तलाक हो गया । रेखा और उनके पति तो अवसाद में ही चले गए कि ये क्या हो गया कितनी खुशी खुशी शादी की थी ।

लेकिन शादी के दो साल बाद बेटे की फिर से शादी हो गई।दुख के बादल फिर छंट गए और गहरे दुख के बाद फिर खुशियां लौट आई रेखा के घर ।आज रेखा के घर जुड़वां पोते पोतियों ने जन्म लिया है एक साथ ढेर सारी खुशियां आ गई है । सभी पुराने ग़म को भूल कर खुशी से झूम रहे हैं । भगवान ने दो नाती पोतों की खुशियों से झोलियां भर दी है । यही है सुख दुख की आंख मिचौली ।

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

1 thought on “तलाक – मंजू ओमर   : Moral stories in hindi”

  1. Please🙏 “फिर एक बार भाग 18” jldi laye…. I’m waiting⏳… Aur ye kahani bhi bhut achi h 😊🤗…..

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