लड़के वाले सीजन -2 (भाग -5) – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :

जैसा कि आपने अभी तक पढ़ा कि उमेश और शुभ्रा की शादी तय हो चुकी हैँ… दोनों की बातचीत भी फ़ोन पर धीरे धीरे शुरू हो रही हैँ… पर इधर उमेश का दोस्त राहुल मैडम कामिनी को जो उमेश को चाहने लगी हैँ, उन्हे उमेश का नंबर चुपचाप से दे देता हैँ.. उमेश शुभ्रा के ख्यालों में खोया हुआ हैँ… तभी रात 11 बजे उमेश की फ़ोन की घंटी बजती हैँ.. वो किसी साहब का फ़ोन समझ उठा लेता हैँ.. उमेश के डर से राहुल कमरे से नौ दो ग्यारह हो जाता हैँ…

अब आगे…

हेलो .. कौन ?? उमेश बोलता हैँ…

इतने भी नादान मत बनो… मैं कामिनी…

उमेश पहचान जाता हैँ फिर भी अंजान बनने का नाटक करता हैँ… वो फिर बोलता हैँ… हेलो… मैं पहचाना नहीं…

मैं कामिनी,, जो तुम्हे ट्रेन में मिली थी… क्यूँ मेरे सब्र का इमतिहान ले रहे हो उमेश…

उमेश हेलो हेलो बोल फ़ोन कट कर देता हैँ…

वो दरवाजा खोल गुस्से में बाहर जाता हैँ… राहुल को पकड़ दो चार घूसे उसके पेट में मारता हैँ…

क्या हुआ?? तुझे रात को 12 बजे भूत सवार हो गया हैँ क्या ?? क्यूँ मार रहा हैँ मुझे… मर जाऊंगा मैं …

तुझसे मैने कितनी बार मना किया फिर भी तूने उस कामिनी को मेरा नंबर दे दिया…. तुझे क्या मज़ा आता है किसी को परेशान करने में… तुझे पता है ना मेरी शादी तय हो गयी हैँ .. तू अच्छे से जानता हैँ मैं कैसा लड़का हूँ… मुझे किसी की भावनाओं से नहीं खेलना…

सोरी यार… वो तो मैडम पर तरस आ गया बस इसलिये…

सुन अब कल हम दोनों आर्मी होस्पिटल चलेंगे … कामिनी को बताकर आयेंगे कि मेरी शादी होने वाली हैँ… समझा …

ठीक हैँ… तू कितना निर्दयी हैँ… कौन सा भाभी को पता चल रहा हैँ तू यहां क्या कर रहा हैँ… कामिनी मैडम के साथ भी घूम फिर ले…

घूसे कम पड़ गए क्या ?? और खाने हैँ… उमेश गुस्से में तेज आवाज में चिल्लाया…

ठीक हैँ चल सो अब… तेरे डर से बाहर आ गया… मच्छर ने काट काटकर सुजा दिया हैँ… अगर मुझे डेंगु , मलेरिया हुआ तो मेरी मोहिनी से तुझे शादी करनी पड़ेगी…. राहुल अपने गालों को सहलाते हुए बोला…

तू नहीं सुधरेगा… चल सोते हैँ.. सुबह रनिंग पर भी जाना हैँ…

अगले दिन सुबह 10 बजे शुभ्रा का फ़ोन आता है उमेश के पास… उमेश राहुल के साथ होस्पिटल के लिए निकल रहा होता हैँ तभी… वो फ़ोन उठाता हैँ… बोलता हैँ… सुनो शुभ्रा… आज मैं एक बहुत ज़रूरी काम से जा रहा हूँ… बस ईश्वर से दुआ करना कि मेरी वजह से किसी का दिल ना दुखें… उमेश की आँखों में आंसू भरे हुए हैँ…

सुनिये … आप मुझे अपने इतनी करीब मानने लगे हैँ… आप जिस भी काम से जा रहे हो… बंशी वाला आपको सफलता दे.. वैसे पता नहीं इतना हक आप पर रखती हूँ य़ा नहीं मैं … पर क्या आप बता सकते हैं ऐसे किस ज़रूरी काम से जा रहे हैँ आप?? थोड़ी बेचैंनी हो रही हैँ…

मैं तो उसी दिन तुम्हारा हो चुका जिस दिन माँ ने तुम्हारे हाथों में शगुन रखा और तुम्हारे सर पर हाथ रखा…बस पूरा हो जायें काम तो सब बताऊंगा तुम्हे … अभी बस जाने की परमिशन दो… और हां अपनी फोटो भेजो अभी … तुम्हे देखकर हिम्मत मिलेगी मुझे…

जी… भेजती हूँ… उधर से शुभ्रा की फोटो आती हैँ वाट्सअप पर.. उमेश चेहरे पर मुस्कान लिए शुभ्रा की फोटो को अपने सीने से लगाता हैँ… और राहुल को पीछे बैठा बाइक बढ़ाता हैँ…

राहुल और उमेश होस्पिटल पर गाड़ी पार्क करते हैँ… सुन जा रिसेप्शन पर पूछकर आ ये मैडम कामिनी कहां बैठती हैँ…. उमेश राहुल से बोलता हैँ…

तू बस मेरी नौकरी खतरे में डलवायेगा … राहुल बोला…

कांड भी तो तूने ही किया हैँ… चल जा अब…

जा रहा जा रहा…

राहुल पता करके आता है … वो रूम नंबर फोर में हैं इस टाइम… थोड़ी देर में बाहर आयेंगी… अभी पेशेंट देख रही हैँ… राहुल बोला….

ठीक हैँ चल य़हीं वेट करते हैँ… राहुल और उमेश को इंतजार करते हुए दो घंटा होने को आया पर मैडम कामिनी बाहर ना आयी…

सुन मेरी परची कटा ला … पेशेंट बनकर चला जाता हूँ…

यार क्यूँ ड्रामा कर रहा हैँ.. तेरे पास नंबर तो हैँ मैडम का.. फ़ोन कर ले… तेरे फ़ोन पर तो दौड़ती हुई चली आयेंगी…

वो मैने रात को ही डीलीट कर दिया… मुझे क्या ज़रूरत उसके नंबर की…

हां भाई साधु महाराज … पता नहीं … शुभ्रा भाभी तेरे साथ कैसे निभायेंगी …

क्या बोला… अब जा नंबर लगवाआ …

राहुल नंबर लगवा आता हैँ… आधे घंटे बाद उमेश का नाम सिस्टर पुकारती हैँ… उमेश अपनी सीट से उठ बाहर जूते उतार रूम में जाता हैँ…

मैडम कामिनी ग्लबस उतारकर हाथ धो रही हैँ.. उमेश खड़ा रहता हैँ… कुछ बोलता नहीं…

तभी कामिनी मैडम बिना उमेश को देखे बोलती हैँ चेयर पर बैठ जाईये …दिक्कत क्या हैँ आपको??

जी मुझे कोई दिक्कत नहीं… दिक्कत आपको हैँ शायद…. उमेश की आवाज सुन मैडम पीछे मुड़ती हैँ… ओह हाउ लकी आई एम …

उमेश तुम … आज का तो मेरा दिन बन गया… तुम मुझसे मिलने आयें हो… मैने कहां था मेरे हुस्न से कब तक बचोगे … आखिर मुझसे प्यार हो ही गया ना तुम्हे भी …

जी आपकी गलतफहमी ही दूर करने आया हूँ….

कैसी गलतफहमी ??? मैं समझी नहीं… चलो ये सब बाद में… तुम्हारे लिए क्या मंगवाऊँ चाय, कोफी य़ा जूस… य़ा कुछ खाने में? मैडम कामिनी उमेश की तरफ प्यार भरी निगाह डालती हुई बोली…

कुछ नहीं.. देखिये मैडम.. मझे घुमा फिराकर बात करना नहीं आता … मैं इंगेज्ड हूँ…. मेरे दिल में सिर्फ और सिर्फ मेरी शुभ्रा हैँ…

कामिनी मैडम अपना आपा खो बैठती हैँ… क्यूँ मजाक कर रहे हो…. तुम्हारा वो दोस्त क्या नाम हैँ उसका राहुल… उसने तो बताया कि तुम सिंगल हो… तुम पर सिर्फ मेरा हक हैँ…

जी मेरी शादी होने वाली हैँ मैडम…. आप अपने रास्ते जाईये और मैं अपने…

अच्छा ठीक हैँ उमेश… क्या मैं उस खुशनसीब लड़की को एक बार देख सकती हूँ… मैडम कामिनी अपने गुस्से पर काबू करते हुए बोली…

उमेश यह सोचकर शुभ्रा की फोटो मैडम कामिनी को दिखाता हैं कि शायद शुभ्रा को देखकर ये मेरा पीछा छोड़ दे…

ओह… तो ये हैँ इतनी गंवार लड़की तुम्हारी होने वाली वाइफ… वैसे मुझे लगा नही था कि तुम्हारी चोइस इतनी खराब होगी… सुनो उमेश… मुझे देखो वेल सेटल्ड , स्मार्ट , बोल्ड , हॉट खुद के पैरों पर खड़ी… और क्या चाहिए एक लड़के को… तुम एक छोटी सी पोस्ट पर .. तुम्हारी किस्मत चमक जायेगी….सोच लो..हम दोनो एक साथ जमते हैँ….मैडम कामिनी उमेश के गले में हाथ डालते हुए बोली…

उमेश अपने हाथों से मैडम को दूर झटक देता हैँ..

आप निहायती बतमीज , कैरेक्टरलेस औरत हैँ… मेरी शुभ्रा की बराबरी आप सात जन्मों में नहीं कर सकती… समझी … दुबारा मुझे फ़ोन मत कीजियेगा…

अपनी इंसल्ट मैडम कामिनी पर बर्दास्त नहीं होती… वो जोर से चीखती हैँ…कोई बचाओ मुझे ये मेरी इज्जत लूट रहा हैँ…

तुम्हे तो अपना बनाकर रहूँगी… वो चीखती रहती हैँ.. बेचारा उमेश घबरा जाता हैँ…. कि अब क्या होगा??

बाहर मैडम की आवाज सुन सारा स्टाफ आ जाता हैँ… राहुल भी भीड़ देख अपने दोस्त को देखने अन्दर आता है … इधर उमेश के घर शुभ्रा के पापा ताऊ जी और दादा नारायण जी पंडितजी को लेकर शादी की तिथि तय करने आ चुके हैँ..

आगे की कहानी कल… तब तक के लिए जय श्री राम…

मीनाक्षी सिंह की कलम से

आगरा

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