लड़के वाले सीजन -2 (भाग -4) – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :

जैसा कि कहानी में आपने अभी तक पढ़ा कि उमेश को शुभ्रा का नंबर उसके प्रिय छोटे भाई समीर ने दे दिया हैं.. अपने काम निपटाकर उमेश शुभ्रा को फ़ोन लगाता हैं.. उमेश बोलता हैं… हेलो .. 

उधर से धीमी आवाज में शुभ्रा बोलती हैं… 

हेलो … 

अब आगे… 

जी नमस्ते .. उमेश को समझ नहीं आता वो शुभ्रा से बात कैसे शुरू करें … इसलिये उसे कुछ सुझता नहीं तो दोनों तरफ से खामोशी महसूस कर वो नमस्ते बोलता हैं… 

शुभ्रा नमस्ते सुन खिलखिलाकर हंसती हैं… वो भी  बोलती हैं… 

जी नमस्ते… 

मैने कुछ गलत कहां क्या ?? उमेश शुभ्रा के हंसने की वजह से पूछता हैं… 

जी नहीं नहीं… वो तो बस ऐसे ही… 

फिर दोनों तरफ से सन्नाटा छा  जाता हैं… 

जी घर में सब कैसे हैं… आपके पापा, दादा जी, माँ और बाकी सब लोग?? उमेश बात बढ़ाते हुए बोलता हैं… 

जी सभी लोग अच्छे हैं.. बस दोनों बुआ जी जा रही हैं आज.. उसी की तैयारी चल रही हैं… फूफा जी आयें हुए हैं… 

जी आपके घर की तैयारी और खातिरदारी तो अलग ही होती हैं… अच्छे से देख आयें हैं हम… 

शुभ्रा फिर हंस ज़ाती हैं… आपने समीर जी के हाथ मुझे फ़ोन क्यूँ भिजवाया… 

क्या आपको नहीं पता … क्यूँ भेजा हैं… शादी तय होने के बाद क्या आपका मन नहीं हैं मुझसे बात करने का… अगर आपको बुरा लगा हो तो नहीं करूँगा फ़ोन… पर जबसे आपको देखा हैं… बस आपका चेहरा नजरों के सामने से हटता ही नहीं… 

शुभ्रा शर्मा जाती हैं… जी ऐसी बात नहीं .. पर आप जानते हैं ये इतना बड़ा फ़ोन हैं पहली बार जीवन में अपने घर वालों से कोई चीज छुपा रही हूँ… हाथ कांप रहे हैं मेरे आपसे बात करते हुए… इतने लोग हैं घर में … किसी की नजर पड़ गयी तो मेरी जान आफत में आ जायेगी…. 

जी जान तो अब आपकी हमारे पास हैं… आप छत पर बात कर सकती हैं आकर… 

जी बुरा ना माने तो…आप मुझसे कोलेज टाइम पर थोड़े समय के लिए बात कर लिया कीजिये … मेरी ज्योईंट फैमिली हैं… सबकी निगाह रहती हैं… माँ पापा को मेरी वजह से सुनने को मिलेगा अगर किसी ने मुझे आपसे बात करते हुए देख लिया तो… 

उमेश उदास हो जाता हैं… जी ठीक हैं.. आपकी और आपके माँ पापा की इज्जत मेरी भी इज्जत हैं… आपको जैसा ठीक लगे मैं कोलेज के टाइम कर लिया करूँगा आपको फ़ोन… पर हां  बाकी का पूरा दिन कैसे कटेगा मेरा… क्या आप अपनी एक फोटो भेज सकती हैं.. आपको देखकर ही मन को तसल्ली दे लूँगा… 

शुभ्रा बोलती हैं.. जी एक मिनट रुकिये … वो अपने बाल आगे कर एक फोटो क्लिक करती हैं बस फॉरवर्ड करने वाली होती हैं उमेश को कि दादाजी की आवाज आती हैं… शुभ्रा लाली ही नहीं दिख रही… शन्नो बन्नो जाये  रई  हैं… कहां गयी छोरी… 

जी मैं चलती हूँ.. दादा जी बुला रहे हैं.. बाद में भेज दूँगी फोटो… और सुनिये आप भी … 

शुभ्रा सुनो .. बस उमेश इतना बोलता हैँ  कि शुभ्रा फ़ोन काट देती हैँ.. भागती हुई बैठक में बुआ फूफा को विदा करने आती हैँ… 

बेचारा उमेश उदास हो जाता हैँ… तभी राहुल आता हैँ… चल भाई… वाक करके आतें हैँ… 

चल यार… वैसे भी मन नहीं लग रहा… 

दोनों लोग पार्क में सायकिल चला रहे हैँ.. तभी सामने से एक बड़ी सी गाड़ी से कामिनी मैडम उतरती हैँ…. 

ओह… तो यहां हैँ आपके क्वार्टस .. 

जी मैम… नाइस टू मीट यू  अगेन …. राहुल बोलता हैँ.. 

आपके फ्रेंड को बोलने में दिक्कत हैँ क्या कुछ बोलते ही नहीं…. . 

जी नहीं… बताया था ना मैने आपको ये थोड़ा शरमीला हैँ… वैसे मैम आप बहुत ब्यूटीफुल लग रहे हो… 

जी थैंक्स… आपको मैं कैसी लग रही हूँ?? क्या नाम हैँ आपका?? . 

जी राहुल… 

आपसे नहीं इनसे पूछ रही हूँ… उमेश एक मैडम कामिनी की तरफ डालता है … पिंक कलर की टी  शर्ट , डेनिम  ब्लू कलर की जींस में खुले स्टेप कटे बाल… चेहरा चमकता हुआ कुल मिलाकर बहुत ही सुन्दर लग रही थी कामिनी मैडम… अपने हाथों में गाड़ी की चाभी घुमा रही थी… 

जी उमेश…. 

जी मैने सिर्फ नाम नहीं पूछा. .. मैं आपको कैसी लग रही हूँ.. ये तो बताईये .. 

जी जैसी हैँ.. वैसी ही लग रही हैँ… 

तो कैसी हूँ मैं … चलिये एक बार ही सही आपने मेरी तरह देखा तो… आप हमेशा से ही ऐसे हैँ य़ा लड़कियों से घबराते हैँ… 

जी किसने कहां मैं घबरा रहा हूँ… 

चलिये आपने बोलना तो शुरू किया… 

मैडम चालू बहुत हैँ… लोगों के मुझ से बुलवाना जानती हैँ… मन ही मन उमेश बुदबुदाया … 

जी आपकी कोई गर्ल फ्रेंड हैं क्या तभी आप उसके डर से मुझसे बात नहीं कर रहे?? 

उमेश कुछ बोलने ही वाला होता हैँ कि तभी समीर का फोन आ जाता हैँ… वो एक्स क्यूज मी बोल दूर बात करने चला जाता हैँ.. 

जी आपके दोस्त इंगेज्ड हैँ क्या ?? . 

मजाकिया स्वभाव का राहुल उमेश को दूर से देख कामिनी मैडम से धीरे से बोलता हैँ… जी नहीं… अभी तो उसकी मस्ती करने की उम्र हैँ… 

ये सुन कामिनी मैडम गदगद हो ज़ाती हैँ… क्या आप मुझे उनका नंबर दे सकते हैँ… मैं आपका नाम नहीं लूँगी… 

वो खा जायेगा मुझे…. 

जी आप मेरी तकलीफ भी तो समझिये … मुझे नींद नहीं आ रही रातों को…. जब से आपके दोस्त को देखा हैँ…. पेशेंट भी ठीक से नहीं देख पा रही हूँ…. बस उनका ही चेहरा आँखों के सामने आ रहा हैँ… 

यह सुन बेचारे राहुल को मैडम पर तरस आ जाता हैँ… वो धीरे से फ़ोन निकाल मैडम को उमेश का नंबर दे देता हैँ… 

थैंक यू सो मच… यू आर सो  नाइस…. इतना बोल मैडम उमेश की तरफ प्यार भरी निगाह डाल आगे बढ़ ज़ाती हैँ… 

हां बोल छोटे… घर में सब ठीक हैँ ना … इस टाइम कैसे फ़ोन किया ?? तू तो कोचिंग में होगा ना … 

हां भाई… पर आपको एक खुशखबरी देनी हैँ… 

कैसी खुशखबरी … तू आईबीपीएस मेंस में पास हो गया क्या ?? 

भाई आपको इसके अलावा कुछ सुझता भी हैँ… जब होना होगा हो जाऊंगा पास …. 

देख छोटे तू पढ़ाई में बहुत ढील देता हैँ… पढ़ता क्यूँ नहीं… 

ठीक हैं फिर मैं कुछ नहीं बता रहा वैसे भी भाभी को लेकर थी बात … 

अच्छा…ठीक हैँ… बस पढ़ाई पर ध्यान दे… बता क्या बात थी… शुभ्रा का नाम सुन उमेश थोड़ा गुस्से को शांत करते हुए बोला… 

वो भाई .. कल भाभी के दादा जी और पापा आ रहे हैँ…सगाई और  शादी की डेट फिक्स करने…. सुनने में आ रहा हैँ कि अगले महीने नवंबर में आप घोड़ी पर बैठ सकते हैँ… 

यह सुन उमेश मन ही मन ख़ुशी से झूम उठता हैँ… फिर अपनी उत्सुकता  को छुपाते हुए वो बोलता हैँ ..ठीक हैँ छोटे… अच्छे से खातिरदारी करना उनकी…. और हां शाम को माँ पापा से विडियो कॉल करा देना… दोनों को देखने का बहुत मन हो रहा हैँ… 

फिकर नॉट भाई… आपके ससुराल वालों की खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहेगी…. ठीक हैँ जय श्री राम भाई… 

जय श्री राम छोटे… 

कॉल कट कर उमेश राहुल के पास आता है …. तू उस मैडम को अपने फ़ोन पर क्या दिखा रहा था… अगर पिछली बार की तरह तूने फिर कुछ रायता फैलाया तो तुझे छोडूँगा नहीं अबकी बार …. 

अरे नहीं यार… वो तो मैं सर का मेसेज देख रहा था… उन्होने हम दोनों को ऑफिस में बुलाया हैँ… 

चल फिर … आपनी सायकिल उठा दोनों लोग अपने रूम पर आ ज़ाते हैँ…. रात हो चली हैँ.. उमेश कई बार फ़ोन देखता हैँ कि शायद शुभ्रा ने फोटो भेजी हो… पर अभी तक कोई फोटो नहीं आयी हैँ…. शुभ्रा ने मुझसे भी  फोटो भेजने के लिए कहा था ना … जैसे मुझे बेचैन कर रही हैँ मैं भी नहीं भेजूँगा तब तक जब तक वो नहीं भेजती … इसी कशमकश वो करवटें बदलता रहता हैँ… तुझे क्या हुआ तू क्यूँ कुकुरमुत्ते की तरह मेरे बेड के आस पास चक्कर लगा रहा हैँ… कुछ गोलमाल तो नहीं हैँ… उमेश राहुल से बोलता हैँ… 

अरे नहीं यार… दोस्त का विश्वास नहीं तुझे… 

ये दोस्त विश्वास लायक नहीं… उमेश गुस्से में बोला… 

राहुल कुछ  ना बोला… बस उमेश के फ़ोन को घूरता रहा… जैसे ही उमेश का फ़ोन रात 11बजे बजा… राहुल अपने बेड से जल्दी से उठ दरवाजे से बाहर भाग गया… वो समझ गया कि इस टाइम उमेश के फ़ोन पर कामिनी मैडम ही होंगी… 

उमेश ने अंनोन नंबर देख सोचा शायद किसी साहब का फ़ोन हो तो उठा लिया… 

हेलो… उमेश बोला… 

उधर से आवाज आयी… ऐसे अंजान मत बनो…पहचान तो गए होगे…मैं कामिनी… 

आगे की कहानी कल… पाठकों ,, ये जीवन का एक पड़ाव हैँ… कई लोगों के जीवन में आता है … कोई इस पर काबू पा लेता हैँ कोई इस धारा के साथ बह जाता हैँ… हमारी कहानी का उमेश क्या करेगा उसके लिए बने रहिये और ऊपर वाले का शुक्र अदा कीजिये जो दिया पर्याप्त हैँ जो दोगे वो भी पर्याप्त ही होगा… 

जय जय श्री राधे… 

मीनाक्षी सिंह की कलम से

आगरा

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