करवा चौथ और किरण का आगमन,,,, – मंजू तिवारी

आज से लगभग 40 साल पहले करवा चौथ के दिन किरण का जन्म हुआ था किरण की जन्म से किरण की दादी के पैर जमीन पर नहीं पढ़ रहे थे ,,,किरण का हॉस्पिटल की जिस वार्ड वार्ड में जन्म हुआ था उसमें अधिकतर सभी के बेटे ही पैदा हुए थे,,, और सभी ने करवा चौथ पर होने की वजह से अपने बेटे का नाम करण सिंह कह रहे थे। किरण की दादी को इस बात का लेश मात्र भी अब अफसोस ना था कि उनके यहां बेटी आई है सभी ने अपने बेटों का नाम करण सिंह रखा तो उन्होंने अपनी पोती का नाम किरण रखा,,,,

घर आकर किरण की छटी यानी जन्मोत्सव बहुत भारी करने की तैयारी में लग गई। लोग कहते कोई बेटियों का भी इतना भारी प्रोग्राम करता है क्या,,,,? मैं तो अपनी पोते का जन्मोत्सव जरूर मनाऊंगी क्योंकि बेटी एक जनमिया होती है और उसके उत्सव मनाने वाला कोई नहीं होता यही तो एक उत्सव है जिसको मनाया जाता है ।,,,जन्मदिन मनाने की उस समय में रिवाज ना थी घर में ना बेटियों के जन्मदिन मनाया जाते थे ना बेटों के,,, दादी ने बहुत बड़ा छठी का प्रोग्राम रखा,,,, जिस दिन करवा चौथ होती उस दिन कहती इसी दिन मेरी किरण का जन्म हुआ था,,,

 किरण की दादी दादा उसको बहुत-बहुत स्नेह करते,,, उसकी सारी जिद पूरी करती है। मम्मी भी चंद्रमा की पूजा करने के बाद उसी थाली से  मंजू का टीका करती,,,, एक  दिन की बात है दादी ने सुना इटावा जिले में कोई मंजू चंद्रा नाम की डीएम आई है ।,,,वह बहुत अच्छा काम कर रही है।,,, सारे जिले में हड़कंप मचा हुआ है।,,,,, किरण की दादी उससे प्रभावित हो गई और किरण का नाम बदलकर मंजू रख दिया,,,,, दो 4 महीने तक किरण का नाम किरण रहा चौथे पांचवें महीने से उसे सब मंजू कहकर बुलाने लगे,,, मंजू के घर जब कोई  आता सब कहते हैं ।यह क्या किया मंजू नाम रख दिया,, अरे वह तो बहुत पहुंची हुई है।,, इटावा में सभी को ठिकाने पर लगा दिया,,,,, तो  दादी कहती है मेरी मंजू भी ऐसी ही बनेगी,,,, और मंजू को मंजू चंद्रा डीएम के किस्से सुनाती रहती ,,,, 

किरण से मंजू नाम बदलने की कहानी भी उसकी मम्मी उसे बताती कि तुम्हारी दादी कैसे कहती थी,,,, जिस से प्रेरित होकर नाम रखा जाता है और उस शख्सियत की बात अगर लगातार की जाए तो थोड़ा ना थोड़ा उस व्यक्तित्व का असर पढ़ने लगता है। तो ऐसा मंजू के साथ भी हुआ ,,मंजू  डीएम तो नहीं बन पाई लेकिन उस समय जो एक छोटे शहर में साधन उपलब्ध थे उसके हिसाब से ठीक-ठाक ही कर लिया,,,,, 

बचपन से ही मंजू के दिमाग में था कुछ अलग करना है कुछ अपनी अलग पहचान हो,,, सबसे हटकर।,,,,, शायद वह पहचान बन रही है।  मायके में जो लड़की सांवली और बड़ी बड़ी आंखों वाली तेजतर्रार होती है ।तो कहते हैं यह अपनी बुआ मंजू पर गई है। लोग अपनी बेटियों को सही दिशा देने के लिए एक बार अपने मायके में उसका नाम जरूर लेते हैं। लगभग ससुराल में भी ऐसा ही  है।,,,,,, मंजू को बहुत अच्छा लगता है। कि उसकी दादी ने अनजाने में ही उसको व्यक्तित्व इतना अच्छा गढ दिया,,,, इसके लिए मैं अपनी दादी दादा मम्मी पापा को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं। अब करवाचौथ दिन चंद्रमा की पूजा करने के बाद मंजू के पति मंजू का केक कटवाकर जन्मदिन मनाते हैं ।क्योंकि वो मंजू मैं ही हूं।

करवा चौथ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं सभी एडवांस में,,,

मंजू तिवारी, गुड़गांव

 

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