कैसा ये इश्क है ( भाग – 14) – संगीता अग्रवाल : hindi stories with moral

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केशव एक बार तो आवाज़ देते मुझे मैं सब भुला लौट आती पर तुमने तो यूँ मुंह फेर लिया जैसे कोई रिश्ता ही नही था हममे !” मीनाक्षी के दिल से आवाज़ आई।

” मन कर रहा है अभी तुम्हे बाहो मे भर लूँ और कहूँ तुम होती कौन हो मुझसे दूर जाने वाली पर किस हक से रोकूं ये दूरी भी तो मैं ही लाया हूँ हमारे बीच !” केशव के मन से भी आवाज़ आई।

मीनाक्षी यूँही सोचते सोचते चली जा रही थी चलते चलते वो सडक पर आ गई । उसे सडक के दूसरी तरफ जाना था क्योकि उसकी गाडी वही थी । इधर केशव मीनाक्षी की तरफ बढ़ा क्योकि अब वो उसे दूर नही जाने देना चाहता था। आज जब ये एहसास हुआ मीनाक्षी हमेशा को उससे दूर हो जाएगी तब उसकी ईगो ने उसके प्यार के आगे दम तोड़ दिया और एक पुरुष हार गया और एक प्रेमी जीत गया।

इससे पहले की केशव मीनाक्षी को आवाज़ देता वो कोर्ट एरिया से निकल सडक पर आ गई और वो जैसे ही सडक के बीचो बीच आई अचानक एक तेज रफ़्तार गाडी आई और उसे टककर मारती निकल गई ।

” मी..नू …!!” केशव जो मीनाक्षी को आवाज़ ही देने वाला था चिल्लाता हुआ भागा । आस पास के लोग भी वहाँ जमा हो गये । बाहर खड़े पुलिस वाले उस गाडी का पीछा करने चले गये । इधर सुरेंद्र जी और अनिता जी भी गाडी से निकल ” मीनाक्षी ” चिल्लाते उस तरफ भागे ।

इन सबके बीच मीनाक्षी पड़ी थी खून से लथपथ एक दम शांत।

” मेरी बच्ची …कोई एम्बुलेंस बुलाओ जल्दी !” सुरेंद्र जी बेटी के पास बैठते हुए बोले।

” मीनू आँखे खोलो मीनू …अरे कोई एम्बुलेंस बुलाओ जल्दी!” खून से लथ पथ मीनाक्षी का सिर अपनी गोद मे रखते हुए केशव चिल्लाया। तब तक अदालत परिसर मे खड़ी एम्बुलेंस वहाँ आ गई और केशव स्ट्रेचर का इंतज़ार किये बगैर मीनाक्षी को गोद मे उठा एम्बुलेंस की तरफ भागा और बहुत एहतियात से उसे एम्बुलेंस मे लिटा दिया।

” तुम अब ये हक खो चुके हो …मेरी बेटी की इस हालत के जिम्मेदार तुम्ही हो !” जैसे ही केशव एम्बुलेंस मे चढ़ने लगा अनिता जी उसे रोकते हुए बोली।

” मीनू अभी भी मेरी पत्नी है अभी कोर्ट ने फाइनल फैसला नही सुनाया है !” केशव बोला उसकी आँखे आंसुओ से भीगी थी सुरेंद्र जी ने उसकी आँखों मे जाने क्या देखा की पत्नी को इशारे से चुप रहने को कहा।

” केशव और अनिता जी एम्बुलेंस मे बैठ गये और सुरेंद्र जी ने गाडी मे बैठ ड्राइवर को गाडी एम्बुलेंस के पीछे लगाने को बोल दिया।

” डॉक्टर …डॉक्टर मेरी मीनू को देखिये जल्दी !” अस्पताल पहुंच स्ट्रेचर के साथ भागता केशव चिल्लाया।

” श…ये अस्पताल है !” रिसेप्शन पर बैठी नर्स बोली।

” हाँ पता है अस्पताल है आप जल्दी से डॉक्टर को बुलाइये देखिये कितना खून निकल गया है !” केशव चिल्लाते हुए बोला और मीनाक्षी के सिर पर हाथ फेराने लगा । तब तक सुरेंद्र जी ने अंदर डॉक्टर से बात की और मीनाक्षी को।उपचार के लिए ले जाया गया। केशव को डॉक्टर्स ने बड़ी मुश्किल से बाहर रोका।

मीनाक्षी को उठा एम्बुलेंस तक लाने मे केशव खुद खून से भीग गया था मीनाक्षी के अंदर जाते ही वो बैचेनी से चहल कदमी करने लगा । उसकी लाल आँखे , चेहरे पर चिंता और डर साथ ही खून मे सने कपड़े उसे भयावह और दयनीय बना रहे थे । एक तरफ सुरेंद्र जी और अनिता जी बैठे थे।

” क्या हाल हो गया मेरी बच्ची का …कुछ महीने पहले कैसी चहकती थी और अब अब तो हंसना भूल चुकी है और अब तो ….।” अनिता जी रोते हुए बोली।

” सब्र रखो मीनाक्षी की मां सब ठीक होगा !” सुरेंद्र जी खुद चिंतित थे पर पत्नी को दिल्लासा दे रहे थे।

इधर केशव अतीत की बाते याद कर रहा था किस तरह वो मीनाक्षी से मिला , कैसे उससे अपनी भावनाये व्यक्त की , उनकी शादी और फिर वो सब । अपने किये व्यवहार को याद कर अब उसे शर्मिंदगी भी हो रही थी।

” राजकुमारियों जैसी पली मीनू ने मेरे प्यार मे झोंपड़ी मे रहना पसंद किया । मेरे लिए अपने महंगे शौक छोड़ दिये । मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाती रही वो और मेरे अत्याचार भी सहती रही बदले मे मैने क्या दिया उसे । आज जिंदगी मौत से लड़ रही है वो सिर्फ मेरे कारण !” केशव खुद से बोला।

तभी नर्स बाहर आई तो सुरेंद्र जी लपक कर उसके पास आये।

” सिस्टर मेरी बेटी कैसी है ?” सुरेंद्र जी ने पूछा

” देखिये अभी कुछ नही कहा जा सकता अभी डॉक्टर ट्रीटमेंट कर रहे है !” नर्स बोली।

” अगर मेरी मीनू को कुछ हो गया ना तो आग लगा दूंगा इस अस्पताल को !” केशव रोता हुआ चिल्लाया।

” केशव शांत रहो गुस्से से हर बार बात बिगाड़ देते हो तब भी खुद को नही सुधारते । इतना सब हो गया पर अभी भी तुम्हे अक्ल नही आई । आज जो मीनाक्षी बिटिया यहां है वो तेरे गुस्से के कारण ही !” सरला जी बेटे से बोली। सरला जी को केशव के वकील ने ही फोन करके सब बताया था तब वो पति के साथ भागी आई थी अस्पताल।

” माँ अगर मैं गुस्सा नही करूंगा कभी भी तो मेरी मीनू ठीक हो जाएगी ? बोलो ना माँ वो ठीक हो जायेगी ना !” माँ की बात सुनकर केशव बोला और माँ के आंचल मे मुंह छिपा फूट फूट कर रोने लगा। सुरेंद्र जी जो खुद बेटी के गम मे डूबे थे उन्हे केशव की ये हालत भी विचलित कर रही थी। भले ये वही केशव है जिससे उनकी बेटी प्यार करती थी और अब ये रिश्ता टूटने वाला था पर वो था तो किसी का बच्चा ही । वो भगवान से दुआ कर रहे थे कि मीनाक्षी जल्दी से ठीक हो जाये।

तभी डॉक्टर बाहर आये।

” डॉक्टर साहब मीनू कैसी है ?” केशव ने पूछा

” देखिये हम जो कर सकते थे वो हमने किया बाकी सब भगवान के हाथ मे है । अगर उन्हे 24 घंटे मे होश आ गया तो ठीक वरना तो कोमा मे जाने के भी चांस है !” डॉक्टर बोला।

” नही !” अनिता जी ये सुनकर रो दी सुरेंद्र जी उन्हे दिल्लासा देने लगे । इधर सरला जी और कैलाश जी केशव से भगवान पर भरोसा रखने को कहने लगे।

केशव वहाँ से उठकर अस्पताल परिसर के मंदिर मे जाकर हाथ जोड़ खड़ा हो गया । सरला जी बेटे के पीछे जाने को उठी ।

” नही केशव की माँ उसे रहने दे कुछ समय भगवान् के पास हो सकता है थोड़ी सद्बुद्धि आये इसे और ईश्वर को इसपर तरस !” कैलाश जी उन्हे रोकते हुए बोले।

” भगवान तुम मुझसे नाराज़ हो क्योकि गलत मैं हूँ मैने अपने गुस्से मे ये सब किया तो सजा भी मुझे मिलनी चाहिए ना इसमे मीनू और उसके परिवार का कोई दोष नही भगवान आप मेरी मीनू को ठीक कर दो मैं खुद को पूरी तरह बदल लूंगा प्लीज भगवान मैं मीनू से दूर भले रह रहा था पर उसके बिना रहना नामुमकिन है । मुझे माफ़ कर दो भगवान और मेरी मीनू को ठीक कर दो !” हाथ जोड़े केशव बोला। क्योकि मंदिर पास मे ही था इसलिए वो सबको दिखाई दे रहा था पर वो क्या बोल रहा है ये सुनाई नही दे रहा था किसी को भी ।

क्योकि सुरेंद्र के पिता का अपना एक रुतबा था इसलिए उन्होंने सबके वहाँ रुकने की इजाजत ले ली थी। जैसे जैसे समय गुजर रहा था सबके दिल की धड़कन बढ़ रही थी । धीरे धीरे रात बीतती जा रही थी सब थक हार कर ऊंघने लगे थे । वैसे तो सुरेंद्र जी ने एक कमरा और ले लिया था पास का किन्तु वहाँ कोई नही गया सब जहाँ तहाँ झपकी लेने लगे । एक केशव था जो अपनी जगह से हिला भी नही ।

रात बीत गई और सुबह की पहली किरण के साथ सब जाग गये ।

” दस घंटे बीत गये पर केशव अपनी जगह से हिला नही !” सुरेंद्र जी आंखे मलते हुए बोले।

” वो चाहे जो करे मुझे अपनी बेटी से मतलब है बस और दस घंटे बीत गये उसे होश नही आया !” अनिता जी बोली।

” भगवान पर भरोसा रखो सब ठीक होगा !” सुरेंद्र जी बोले किन्तु उनकी खुद की आँखों मे डर था। वो वहाँ से उठकर मीनाक्षी के कमरे तक आये और वहाँ बनी छोटी सी खिड़की से बेटी को निहारने लगे ।

कभी नन्ही सी मीनाक्षी पापा पापा कह उनके गले लग जाती थी और आज निस्तेज सी पड़ी है जिंदगी मौत से जूझती । कहने को माँ का कलेजा बच्चो के दर्द से फटा जाता है और पिता को कठोर होने की उपाधि मिली है पर एक पिता ही जानता है वो ऐसी स्थिति मे कैसे खुद पर नियंत्रण रखता है क्योकि उसे सब कुछ संभालना भी होता है । इस वक़्त सुरेंद्र जी भी टूटे हुए थे उनका मन कर रहा था वो फूट फूट कर रो दे किन्तु वो ऐसा नही कर सकते थे पुरुष जो थे । एक रात मे वो मानो दस साल ज्यादा उम्र के नज़र आ रहे थे जो उनके चेहरे पर तेज रहता था वो तो गायब ही हो गया था क्योकि जो ये सुरेंद्र जी थे ये कोई बड़े व्यापारी नही थे ये तो एक बेटी के पिता थे उस बेटी के जो उनके सामने इस दशा मे पड़ी थी। तभी उनके कंधे पर किसी ने हाथ रखा । अपने आंसुओ को जल्दी से साफ कर वो पलटे।

” सुरेंद्र जी खुद को संभालिये बिटिया को कुछ नही होगा !” कैलाश जी ने उन्हे दिल्लासा दी।

” कैसे संभालू कैलाश जी जिस बेटी का हँसता चेहरा मेरी जिंदगी हुआ करता था आज वो खुद जिंदगी के लिए लड़ रही है !” सुरेंद्र जी भरे गले से बोले।

” मैं समझ सकता हूँ आपकी मनोदशा किन्तु इस वक़्त आपको भाभी जी को भी सम्भलना है और माधव बेटा को भी इसलिए आपको मजबूत बनना होगा । ” कैलाश जी बोले।

“हम्म!” सुरेंद्र जी बस इतना बोले । कैलाश जी उन्हे वहाँ से हटा कर ले आये और कुर्सी पर बैठा दिया। सभी को इंतज़ार था डॉक्टर के लौटने का इस बीच सरला जी केशव के पास भी हो आई किन्तु वो वहाँ से हिला भी नही ।

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