बस अब और खून के आंसू नहीं रुलायेगा तू बहू को  – मीनाक्षी सिंह

अंदर से जोर जोर से बहू के रोने की आवाज आ रही थी ,खिड़की से झांककर देखा रमेशजी (ससुर ) और मधुजी (सास ) ने तो

गिड़गिड़ाने लगे -छोड़ दे बहू को नीरज (बेटा ) ! मर जायेगी वो और कितना मारेगा उसे बेल्ट से ! मधुजी सिस्कियां भरती हुई बोली !

माँ जी ,पापा जी बचा लिजिये ,मुझे मार डालेंगे ये ! तब तक कमरे में सोया पांच साल का मासूम पोता जय उठा ! पापा को रोकने लगा – क्यूँ मारते हो मेरी मम्मी को रोज ! मैं तुम्हे मार ड़ालूंगा ! छोटा सा मासूम बच्चा अपनी माँ की ऐसी हालत नहीं देख पा रहा था ! पर जैसे ही उसके बाप ने उसे गुस्से से लाल आँखों से पलट कर देखा तो बेचारा जय सहम गया ! जल्दी से दरवाजा खोल बाहर आया ! अपने दादू से चिपक गया !

तभी जल्दी से मधुजी और रमेशजी ने नीरज के हाथ से बेल्ट ली ! पता नहीं आज 65 वर्षीय रमेशजी में कहाँ से इतनी ताकत आ गयी ! उसी बेल्ट से अपने बेटे पर प्रहार करने लगे – कितनी बार बहू से कहाँ इस हैवान को छोड़कर चली ज़ा ,क्यूँ सह रही हैँ इतनी तकलीफ ,पर बहू को ऊपर वाले ने पता नहीं किस मिट्टी का बनाया हैँ वो अपने बेटे और हम दोनों असहाय लोगों की खातिर यह सोचकर सहती रही – शायद उसकी पूजा का फल उसे मिल जायें – ये राक्षस सुधर जायें ! पर अब नहीं ! रमेशजी बेटे पर प्रहार करते हुए दहाड़ते रहे !

जी ,मेरी परवरिश में ही शायद कोई कमी रह गयी तभी एक ही बेटा वो भी हाथ से निकल गया ! कब गलत संगत में पड़ गया ! रोज का शराब पीना ,बहू को गलत काम के लिए घसीटकर ले जाना ,छोटे से मासूम को भी नहीं छोड़ता ये पापी ! उसे भी मार मारकर सुखा दिया हैँ ! मधुजी अपनी साड़ी से अपना मुंह दबाती हुई बोली !




पर अब नहीं मधु ,अब ये पापी हमारी फूल सी बहू को खून के आंसू नहीं रुलायेगा ! बुढ़ा ज़रूर हो गया हूँ पर अभी भी अपने परिवार को पालने की ताकत रखता हूँ ! निकल जा कमीने इस घर से ! दुबारा इस घर में पैर मत रखना ! रमेश जी ने धक्का देकर अपने एकलौते बेटे को घर से बाहर निकाल दिया !

दोनों बुढ़े माँ बाप किसी तरह खुद को संभालते हुए एक दूसरे को पकड़ सिस्कियां भरते रहे ! बहू भी आकर दोनों के पैर पड़ गयी ! मधु जी ने बहू को उठा सीने से लगा लिया !

पूरा  मोहल्ला रमेशजी और मधु जी के फैसले पर अाश्चर्य में पड़ गया ! एक 80 वर्षीय बुढ़िय़ां भीड़ से निकलकर आयी और जोर से ताली बजाती हुई बोली – काश इतनी हिम्मत मैने भी की होती तो शायद आज मेरी बहू फांसी पर ना झूलती !

उस दिन की बात है और आज की ! मधुजी ,रमेशजी बहू पोते के साथ  रह रहे हैँ और अपनी बहू रूपी बेटी के लिए एक योग्यवर की तलाश कर रहे हैं !

मीनाक्षी सिंह की कलम से

आगरा

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