आखिर मेरी क्या गलती थी – सुषमा तिवारी

आज मैं  पूरे 2 सालों बाद माएके जा रही हूँ , हर साल गर्मी की छुट्टियों मे कहीं  घूमने चले जाते थे 

मायके जाने का सुकून और खुशी लिए मैंने मायके के बिल्डिंग में कदम रखा तो नितिन भाई दिखे, मैं लिफ्ट मे घुसी और वो निकले। मेरे हाय के जवाब में फीकी सी स्माइल देके निकल गए। बड़ा आश्चर्य हुआ, वो हमारे ही फ्लोर पर रहते थे। शर्मा अंकल, आंटी ये बड़ा लड़का नितिन और छोटा बंटी। अंकल नेवी से रिटायर्ड और दोनों लड़के मर्चेंट नेवी में थे। प्यारा सा खुशहाल परिवार। 

 

घर जाके उत्सुकता वश मम्मी से पहला सवाल यही था, इन्हें क्या हुआ? नितिन भईया आधे हो गए हैं, ढंग से बात भी नहीं की? 

माँ – तू भी कहाँ आते ही पड़ गई इन सब में.. लंबी कहानी है, बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ है। पर मां उनकी तो हाल ही में शादी हुई थी ना? 

 स्मृति पटल पर डेढ़ साल पहले की घटनाएँ घूम गई। कितने उत्साहित थे वो, चेहरे पर कितनी चमक.. शुरू से ही वो काफी रिज़र्व स्वभाव के थे। अपनी जॉब के साथ पढ़ाई पूरी कर रहे थे, छह महीने की छुट्टी मे सगाई शादी सब कुछ था, साथ ही कितने उत्साहित होकर वजन कम किया था। लड़की, शलिनी उसी शहर की थी। बड़े धूमधाम से शादी हुई और दुल्हन भी जैसे कोई अप्सरा। रथ पर लेकर आए थे उसे, और वो भी बड़ी हंसमुख थी। 

माँ से पता चला कि नितिन के वापस शिप पर जाने के बाद शलिनी ने कोई हाबी क्लास जॉइन कर ली जो उसके मायके से नज़दीक था। फिर एक दिन पता चला वो ससुराल वापस आने को राज़ी नहीं थी। अंकल आंटी कई बार मनाने गए। माँ ने बताया उसके घरवालो ने कहा आप लोगों ने धोखे में रखा और बताया नहीं की नितिन अंकल के पहली बीवी का बेटा है, सौतेला है। “क्या ये तो हमे भी नहीं पता था ना माँ, आंटी हमेशा बंटी से ज्यादा इन्हें ही प्यार करती थी”? “हाँ बेटा फिर बात तलाक तक आ पहुंची, शलिनी वापस आने को राजी नहीं, घरवाले कहते हैं पहले घर नितिन के नाम कर दो तब तसल्ली होगी। नितिन को पता चला तो वापस आया पर कितनी मिन्नतों पर भी शलिनी ने उससे बात नहीं की। तलाक हो गया। अब कोई कहता है कि बात कुछ और थी लड़की का चक्कर था क्लास के बहाने जाती थी, तो कोई कहता है मानसिक रोगी थी, अब भगवान जाने “माँ ने बताया। 

नितिन डिप्रेशन में चला गया, यही कहता बस एक बार वो मुझसे बात करके बता देती, मेरा कसूर क्या था? मैंने उसे दिल से चाहा था सज़ा देने से पहले कसूर तो पता चलता। घर में बंद रहते, जॉब छोड़ दी। घरवाले दूसरी शादी की बात करते तो कहते अब मुझसे नहीं होगा। 

 बहुत बुरा लगा, नारी उत्पीड़न की ख़बरों में नितिन जैसों को कौन पूछता है। ज्यादातर आत्महत्याएं पुरुष ही करते हैं मानसिक तनाव में। 

मैं वापस आई तो सुबह की चाय देते हुए पतिदेव से कहा “शाम को पिक्चर चले?” देखा मैंने कहा था ना बस अखबार मत पढ़ो, मूड अच्छा रहेगा,.. बंदा हाजिर रहेगा “हँसते हुए पतिदेव ने कहा । मन किया नितिन की बात बताऊँ पर मैं सिर्फ इतना ही कह पाई हाँ आप सही कहते हैं जी। 

दोस्तों मेरी ये कहानी सत्य घटना पर आधारित है, तो ये मेरे विचार थे। कोई त्रुटि रह गई हो तो सुझाव आमंत्रित है। आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में शेयर करे। धन्यवाद! 

©सुषमा तिवारी 

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