वो मुलाक़ात मेरे लिए आख़री थी (अंतिम भाग )- अनु माथुर  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  :

अब तक आपने पढ़ा आरती और आनंद दो बार मिलते मिलते रह गए..

अब आगे….

पूजा के एक दिन पहले रात को आनंद और अदिति शशांक के कमरे में बात कर रहे थे…

अदिति ने कहा – चाचा आपने कुछ सोचा भाई और श्रेया के लिए

नहीं अदिति weekend wala plan cancle हो गया… अब कुछ और सोचना पड़ेगा |

हम्म अदिति ने दुखी होते हुए कहा ..वो एकदम से बोली बाहर ना सही भाई अपने दिल की बात घर पर ही कह सकते है

वो कैसे आनंद ने पूछा

अरे कल…. कल पूजा है और कल श्रेया रात तक यहीं रुकने वाली है

Good idea आनंद ने कहा… शुभ दिन

क्या आप दोनों भी ये सब ले कर बैठ गए

शशांक ने उठते हुए कहा

अदिति ने कहा – आपने कुछ नही कहा ना भाई तो देखना उसकी शादी किसी और से हो जायेगी |

उसकी इस बात पर शशांक रुक गया….

अदिति ने कहा – आपको बस उसे यही तो कहना है कि आप उसको पसंद करते हो इसमें क्या बड़ी बात है … कल मैं किसी भी बहाने से उसे आपके कमरे में भेज दूँगी.. और आप कह देना

उसने मना कर दिया तो?

अरे नहीं करेगी… मुझे पता है

अदिति….तुम्हें तो script writer होना चाहिए था ये कहाँ तुम काले कोट के चक्कर में पड़ गयी आनंद ने कहा

और तुम  शशांक ready हो जाओ अपने दिल की बात कहने के लिए…..

चलो अदिति… कह कर आनंद जाने लगा तो शशांक ने कहा – चाचा आपने भी तो कही थी दिल की बात

आनंद उसकी तरफ घूमा और  बोला  ….

शायद मैंने कहने में देर कर दी थी.. .. पर तुम मत करो चलो अब सो जाओ कहकर आनंद कमरे से बहार निकल गया |

अदिति ने शशांक से जाते – जाते बोली  क्या भाई.. आप भी ना क्या ज़रूरत थी ये कहने की ? और वो भी चली गयी

शशांक ने अपने मन में कहा – पता नही चाचा ये सब कैसे सह गए…

पूजा वाले दिन सब लोग कुछ कुछ कामों में busy थे

आनंद से अदिति से कहा वो देखो शशांक कैसे दरवाज़े की तरफ बार बार देख रहा है…

अदिति ने हँस कर कहा – हाँ देखा मैंने भी

वैसे आयी नही श्रेया

आती ही होगी…. मैं पूछती हूँ .. अदिति ने श्रेया को फोन किया

कहाँ हो मैडम

बस 15 में  मिनट आ रहीं हूँ… क्या हुआ कुछ लाना है क्या?

नहीं बस तू आ जा

Ok बोल कर श्रेया ने फोन काट दिया

तभी आनंद  का फोन बजा…. आनंद ने अपने फोन की तरफ देखा और अदिति को कहा – अदिति मेरा बहुत important call है मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ…बस 10 mnt .तुम देख लेना please मैं आता हूँ

चाचा मम्मी ने माना किया था ना कोई ऑफिस वर्क नही

अरे बस 10 mnt आता हूँ मैं

तुम देख लेना

कह कर आनंद अपने कमरे में चला गया |

क्या क्या संभालूँ मैं… हे भगवान् कोई मुझे संभलने वाला भी भेज दो अदिति ऊपर की तरफ देखते हुए बोली

तथास्तु… कहते हुए श्रेया आरती के साथ अंदर आ रही थी…

आ गयी… तुम नमस्ते aunty

तभी मधु भी किचन से बहार आयी… और आरती  श्रेया से मिली

आरती ने कहा – मैं कुछ करा दूँ आपके साथ

नहीं नहीं…किचन का काम तो हो गया अब बस यहीं पूजा कर ही देखना है |

अदिति सबको चाय दे आओ और इनको… अरे आपका नाम तो हमें पता ही नही हम तो श्रेया की बुआ के नाम से ही जानते है आपको

आरती सक्सैना… आप मुझे आरती बुला सकती हैं |

अदिति ने श्रेया से कहा – तू चल मेरे साथ चाय दे दें सबको …

अदिति ने चाय की ट्रे पकड़ी और श्रेया को सबको चाय देने को कहा

सबसे आखिर में वो शशांक के रूम में गयी

उसने रूम में knock किया

आ जाओ शशांक ने अंदर से कहा

श्रेया अंदर गयी तो उसके पीछे से अदिति ने  दरवाज़ा थोड़ा सा बंद कर दिया और छुप कर देखने लगी

श्रेया ने शशांक से कहा – ये चाय

रख दें आप यहाँ

श्रेया जाने लगी शशांक ने कहा श्रेया

हम्म कह कर उसने पीछे देखा

वो मैं कह रहा था… पूछना चाहता था कि तुम हमारी law firm join करना चाहोगी क्या?

श्रेया ने थोड़ा रुक कर कहा – हाँ आपकी law firm तो मुंबई की top law firm मे से है… ज़रूर करूँगी |

अदिति ने बाहर खड़े हुए अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोला

ये देखो ….अरे इनको कहना था कि मैं तुम्हें पसंद करता हूँ और ये law firm की बात कर रहे है….

श्रेया जाने लगी तो शशांक ने कहा – श्रेया…

हाँ…. कह कर वो उसकी तरफ मुड़ी.. अगर मैं तुमसे ये कहूँ कि मैं तुम्हें पसंद करता हूँ.. और तुम्हारे साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बिताना चाहता हूँ… क्या तुम  मेरा साथ दोगी कहते हुए उसने अपना एक हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया

उसके ऐसे अचानक ये पूछने से श्रेया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा उसने एक पल को सोचा और अपना हाथ शशांक के हाथ पर रख दिया…. शशांक ने उसके हाथ को अपने हाथों में कस लिया |

श्रेया जाने लगी तो उसने उसे अपनी तरफ खींचा उसके झुके हुए सर को ऊपर उठाया उसके माथे को चूमा और बोला – love you

श्रेया अपने में ही सिमटी जा रही थी… उसने अपना हाथ शशांक से छुड़ाया और कमरे से बाहर आ गयी… उसने एक बार पीछे मुड़ कर देखा और आगे बढ़ी तो अदिति से टकरा गयी…

अदिति ने उसे देखा और और इशारे से पूछा क्या हुआ… श्रेया ने कुछ नही कहा.. तो अदिति ने उसके कान के पास आ कर कहा – अब मैं तुझे भाभी बुला सकती हूँ ना….. श्रेया उसे हैरानी से देखने लगी.. ऐसे मत देख मुझे सब पता है … श्रेया मुस्कुरा दी |

चल अब मम्मी बुला रही है…. भाई आ जाओ कहते हुए वो पूजा जहाँ हो रही थी वहाँ आ गयी..

आरती मधु के साथ पूजा की तैयारी में मदद कर रही थी श्रेया और अदिति भी वही आ गयी..

मधु ने कहा बस पंडित जी आ जाए तो हम पूजा शुरु करते है…

तभी आनंद अपने रूम से बाहर आया….

मधु ने आनंद को आते हुए देखा तो आरती से कहा ….आप सबसे मिल ली हमारे घर में…

.बस एक को छोड़ कर.. आए मिले हमारे घर की रौनक से हमारे देवर और अदिति शशांक के चाचा… (आरती तब तक पीछे मुड़ गयी थी) आनंद से

और आनंद ये हैं  श्रेया की बुआ आरती सक्सैना

आनंद ने जब सामने देखा तो वहीं रुक गया |

आनंद और आरती एक दूसरे के सामने थोड़ी सी दूरी पर खड़े हुए थे….

आनंद हैरानी से आरती की तरफ देख रहा था….आनंद को देखकर आरती के दिल की धड़कन एक पल को रुक गयी..

.उसकी नज़रे झुक गयी उसकी सांसे उपर नीचे होने लगी थी ….आनंद को देख कर उसका दिल फिर उससे बगावत कर बैठा और ज़ोर से धड़कने लगा |

उसने एक कदम पीछे किया … और गिरने को हुयी तो मधु ने उसको पकड़ लिया… उसको ऐसे देख कर मधु ने पूछा क्या हुआ आरती… श्रेया उसे ऐसा देख कर उसके पास आयी…. आरती के हाथ पैर ठंडे हो गए थे….

मधु ने आरती को पास में रखी हुयी chair पर बिठाया…. अदिति तब तक पानी ले आयी थी… आरती ने श्रेया का हाथ कस के पकड़ा हुआ था…

आनंद ये सब देख रहा था…

आरती ने श्रेया से कहा मुझे जाना है …मधु ने कहा ऐसे नहीं जा सकती आरती आप.. आपकी तबियत ठीक नहीं लग रही है… यहीं रुकें आप..

श्रेया मुझे जाना है… आरती ने फिर कहा

आप ज़िद मत करिए जाने की.. मधु ने फिर कहा

रहने दें भाभी… ये नहीं रुकेंगी….

सबने देखा तो आनंद उन सबके पास आ रहा था… उसके चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था

इनको कोई फर्क नही पड़ता.. कोई इनकी कितनी भी परवाह करे या इनसे कितना भी प्यार करे… इनको बस अपने बारे में सोचना है….. क्यों आरती सक्सैना मैं सही कह रहा हूँ ना …? कहते हुए आनंद उसके करीब आ गया था

श्रेया ने कहा – सर आप ये सब क्या कह रहे है मेरी बुआ के बारे में?

वही जो सच है… कोई फ़र्क नहीं पड़ता इनको…. किसी की परवाह नही करती ये..चाहे कोई मर भी जाए

आनंद… आरती ने उसकी मर जाने वाली बात पर तेज़ से उसका नाम लिया

क्यों.. क्या हुआ  ? डर गयी आरती ….आनंद ने कहा

आरती खड़ी हुयी और बाहर की तरफ जाने के लिए जैसे ही उसने अपना कदम बढ़ाया…. आनंद ने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले जाने लगा….

आनंद ….आरती ने पुकारा

लेकिन आनंद ने उसकी कोई बात नही सुनी… और उसे अपने कमरे में ले जाकर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया |

श्रेया ने बुआ पुकारा तो मधु ने उसे रोक दिया मधु समझ चुकी थी आरती वही है जिससे आनंद मुहब्बत करता था

एक बार फिर आनंद और आरती आमने सामने खड़े थे…. आरती की धड़कनें बेकाबू हो रहीं थी….. आनंद उसकी तरफ बढ़ा… आरती ने उसे देखा तो उसका चेहरा गुस्से से भरा हुआ था …आरती पीछे की तरफ बढ़ने लगी…. और दीवार से जा लगी… आनंद ने   अपने दोनों हाथ दीवार पर रखे और जोर से बोला

क्यों… आख़िर क्यों… आप मुझे छोड़ कर चली गयी… बिना कुछ बताए… मैंने कहा था ना कि मैं साथ दूँगा आपका… फिर किस बात का डर था आपको…. कुछ था तो आप बोलतीं ना मुझसे…. मैं ढाल बन कर खड़ा रहता आपके सामने… किसी को आप तक पहुँचने ही नहीं देता….फिर क्यों किया ऐसा आपने बोलें

आरती चुप खड़ी थी उसकी आँखों से आँसू बहे जा रहे थे…. आनंद ने उसके दोनों हाथों को कस के पकड़ा और बोला जवाब दें आप – क्यों किया आपने ऐसा

पता है आपको मैं कितना तड़पा हूँ आपके लिए … आपका कोई पता नहीं था मेरे पास… पागलों की तरह मैं आपको उस दिन ढूँढ रहा था…. एक पल आपके बिना जीना मुश्किल था मेरा ….7 साल कैसे बिताए मैंने…. आपको पता है… आनंद का हाथ आरती की बाहों पर कहते -कहते कस्ता ही चला जा रहा था…

आरती का चेहरा आँसुओं से भर गया था… आनंद फिर बोला… उम्र का ही तो फासला था ना…. बस इतना ही था ना… दुनियाँ वालो की बातें मेरे प्यार से बड़ी हो गयीं आपके लिए…… आपने एक पल के भी ये नही सोचा की आपके चले जाने के बाद मेरा क्या होगा ? मैं कैसे जीऊँगा..

सोचा आपने….

नहीं ….आपने बस अपने बारे में सोचा …

एक शाम जिस आनंद को आपने ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी दी….. दूसरे ही पल उसे मरने के लिए छोड़ दिया

आरती ने भरे हुए गले से बोला… बस करें आप……आनंद….और उसके दोनों हाथों को उसके हाथों से अलग कर दिया …

आज मुझे हर बात का जवाब चाहिए आरती ..

क्यों किया आपने ऐसा.. ?

क्यों मेरे बारे में नहीं सोचा ?

सोचा….मैंने बस आपके बारे में ही तो सोचा आनंद आरती ने ज़ोर से कहा….

कैसे कह दिया आपने कि मुझे आपकी परवाह नहीं थी…. हाँ मैं आपको अकेला छोड़ कर चली गयी क्योकि मैं सब कुछ सह सकती थी… लेकिन कोई आपको कुछ कहे ये मैं बिल्कुल भी नहीं सह सकती

मुझे पता था आप मेरा साथ देंगे… मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे… लेकिन रुक जायेगी आपकी ज़िंदगी मेरे साथ…आप उम्र के उस दौर से गुज़र रहे थे… जहाँ आपका सारा भविष्य आपके सामने खड़ा था…. मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती थी आपको ऐसे बंधन में कैसे बांध सकती थी जिसमें बंध कर आप वहीं रह जाते…

तो बोलती ना आप ये बात मुझसे… आनंद ने कहा

क्या आप समझते उस वक़्त मेरी बात को ?

नहीं आनंद….आप समझना चाहते तो भी नही समझते… दिल और दिमाग की लडाई में आपका दिल जीत जाता…

आपको छोड़ कर जाना मेरे लिए भी आसान नही था आनंद… मर ही गयी थी मैं उस वक़्त जब आपको टैक्सी के पीछे दौड़ते हुए देखा था.. 7 सालों में एक पल के लिए भी मैं उस पल को नहीं भूली

मेरे लिए आपसे वो आख़री मुलाक़ात थी ये सोच कर ही मेरी जान निकली जा रही थी |

कहते कहते आरती रो पड़ी…. आनंद ने उसे अपनी तरफ खींचा और गले से लगा लिया…. आरती हिचकियाँ भर रही थी …. उसने आनंद की shirt को कस के पकड़ रखा था… मुझे माफ कर दें आनंद आपको इतना दुख देने के लिए उसने रुँधे हुए गले से कहा

आनंद ने उसे और कस के अपनी बाहों में भर लिया |

आरती और आनंद दोनों एक दूसरे की बाहों में थे…. दोनों की आँखें आँसुओं से भीगी हुई थी | सारे गिले शिकवे दूर हो गए थे |

आनंद ने आरती को अपने से अलग किया उसके बहते आँसुओं को पोंछा और उसके माथे को चूम लिया |

उसने आरती का हाथ अपने हाथों में लिया और  दरवाज़े की तरफ जाने लगा….. आरती ने उसके हाथ को धीरे से पीछे की तरफ किया और ना में सिर हिलाया…आनंद ने मुस्कुराते हुए आँखों के इशारे से उसे सब ठीक होने का कहा |

दोनों बाहर आ गए… सबसे दरवाज़े की तरफ देखा तो आनंद आरती का हाथ पकड़े हुए आ रहा था

आनंद ने शेखर और मधु को सारी बात बता दी थी….मधु और शेखर आनंद के लिए खुश थे |

पूजा भी संपन्न हो गयी थी …..मधु ने सुमन को सब बताया… और श्रेया ने रेखा को |

दोनों ही तरफ से सबसे इस रिश्ते को मंज़ूरी दे दी थी |

शशांक और श्रेया के भी रिश्ते को मंज़ूरी मिल गयी थी… लेकिन अभी श्रेया पढ़ रही  थी इसलिए बस रोका हुआ था |

आरती और आनंद की शादी बरेली में हुयी..वो आनंद के साथ मुंबई वापस आ गयी थी |

रात को आनंद balcony में खड़े हुए चाँद को देख रहा था… आरती उसे ऐसे देखा तो पूछा क्या देख रहे हैं आनंद…

आनंद ने कहा – देख नही रहा सोच रहा हूँ

क्या – आरती ने पूछा

आनंद ने उसे अपनी तरफ खींचा और गले से लगाते हुए  बोला.. ये कि अब तो हमारी उम्र का फासला रहा ही नही ना |

आरती ने आनंद की तरफ देखा और बोली

वो कैसे… ?

वो ऐसे कि अब हम दोनों 3 वाली line में हैं ना..

आरती ने एक पल को सोचा और मुस्कुरा दी |

आनंद ने उसे और कस के उसे अपनी बाहों में भर लिया |

समाप्त…

आशा करती हूँ आपको आनंद और आरती  की ये कहानी पसंद आयी होगी |  फिर मिलूँगी एक नई कहानी के साथ |

आप सबने इस कहानी को इतना प्यार दिया इसके लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया

धन्यवाद

स्वरचित

कल्पनिक कहानी

अनु माथुर

भाग 7 का लिंक 

वो मुलाक़ात मेरे लिए आख़री थी (भाग -7 )- अनु माथुर  : Moral stories in hindi

भाग 1 का लिंक 

वो मुलाक़ात मेरे लिए आख़री थी – अनु माथुर  : Moral stories in hindi

 

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