शुरुआत की बात (भाग 1)- लतिका श्रीवास्तव  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “मां चरणस्पर्श “नई नवेली बहू पल्लवी  सुबह सुबह ही सिर पर आंचल रख शोभाजी के पैरों पर झुकने लगी तो नई नवेली सास शोभा जी ने झटके से अपने पैर हटा लिए…!

पल्लवी आधी झुकी सी खड़ी रह गई थी।

अभी मेरी पूजा खत्म नहीं हुई है जब तक मैं ठाकुर जी की पूजा खत्म नहीं कर लेती कोई मुझे और ना मैं किसी को स्पर्श करती हूं….और ना ही कोई बातचीत करती हूं शोभा जी ने रूखे स्वर में बहू से कहा तो नई बहू अपने स्पर्श को समेटे सिमट सी गई थी।

ससुराल और ठसके दार सासू जी का रौब अनजाने ही दिल में उतर गया था ।अरे तो यही बात हंसकर आहिस्ता से भी तो कह सकतीं थीं उसने सोचा अक्खड़ सास बनना जरूरी रहता है क्या!!

मायके से तो मां ने यही सिखा के भेजा बेटा सासू मां को अपनी मां से बढ़ कर मानना सुबह जल्दी उठ जाना नहा धो कर तैयार हो जाना और सबसे पहले सास ससुर के पैर छू कर आशीर्वाद लेना फिर रसोई का कोई काम करना।

बिचारी पल्लवी इसीलिए सुबह से तैयार होकर सासू मां के चरण वंदन के लिए आ गई थी लेकिन खुश होने के बजाय उनका रूखा और उपेक्षा पूर्ण बर्ताव उसके सुंदर से चेहरे को कुम्हला गया था …..डरते डरते ससुरजी के पास गई और उनके चरण स्पर्श करने झुकने लगी …आशंकित थी कि अब ससुरजी भी पता नही कैसा व्यवहार करेंगे…!लेकिन आशंका के विपरीत उन्होंने बहुत खुश होकर अपने पैर छूने दिए और तुरंत स्नेह भरा हाथ बहू के सिर पर रख कर सदा खुश रहो बेटा का आशीर्वाद भी दे दिया..!

वास्तव में नई दुल्हन को इसी आशीर्वाद की आवश्यकता थी और बेटा शब्द सुनकर और स्नेह भरे आत्मीय व्यवहार से तुरंत ही उसका कुम्हलाया चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा था।

पिता जी आप चाय पिएंगे ….उसका स्वर अचानक एक उल्लसित बेटी का ही बन गया था … हां हां बेटा मैं तो इसी दिन का इंतजार ही कर रहा था कि कब मेरे बेटे की शादी होगी और मुझे सुबह की चाय का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा पिताजी की दिली खुशी उनकी बातों से छलकी पड़ रही थी।

क्यों पिताजी चाय के लिए लंबा इंतजार क्यों!!पल्लवी मासूमियत से पूछ बैठी।

अरे बेटा देख रही हो तुम्हारी मां का पूजा पाठ लंबा चलता है जब तक पूजा खत्म नहीं होती वह….उन्होंने पल्लवी को हंसाने की कोशिश में मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखा मानो वाक्य पूर्ण करवाना चाहते हो…

“….वह किसी को स्पर्श नहीं करती….और बिना नहाए धोए उनके चौके को कोई स्पर्श नहीं कर सकता…..पल्लवी ने तुरंत वाक्य पूरा कर दिया तो पिताजी जोर से हंस पड़े हां हां तू तो बड़ी समझदार है बेटी कल से सबसे पहले आकर चाय बना लाना हम दोनो बैठ कर पी लेंगे।उन दोनों की समवेत खिलखिलाहट पूजा में ध्यान लगाने की कोशिश करती शोभा जी के कानों में कांटे चुभा गई कितना समझाया सिखाया था इनको कि आते ही नई बहू की तारीफ करने की ज्यादा सिर पर बिठाने की जरूरत नहीं है …सिर पर नाचेगी तो संभालते नही बनेगा..पर कोई फायदा ही नहीं..!

अगला भाग

शुरुआत की बात (भाग 2) – लतिका श्रीवास्तव  : Moral Stories in Hindi

 

लतिका श्रीवास्तव 

#सासूजी तूने मेरी कदर ना जानी

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!