मुसीबत – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पांचवी कक्षा में संजय का नामांकन हुआ. सारे बच्चों से अलग गुमसुम सा रहता! उसी स्कूल में दो साल पहले तीसरी कक्षा में एडमिशन लिया था कविता ने! ये उम्र होती है जिसमे लड़कियां और लड़के मस्त बेफिक्र और खूब बातूनी होते हैं. लड़कियां भी खूब शरारती नटखट और शोख होती हैं!

पर संजय और कविता अपने उम्र के बच्चों से बिल्कुल अलग थलग किसी दूसरी दुनिया के प्राणी लगते थे!

ममता के विषय में टीचर और सहपाठियों को जानकारी थी कि उसकी मां जब वो पांच साल की थी तब दुनिया से चली गई थी! दूसरे बच्चे को जन्म देते समय डॉक्टर की गलती और लापरवाही से जच्चा और बच्चा दोनो नही बच पाए!

कविता छोटे भाई की प्रतिक्षा में एक एक दिन गिन रही थी . भाई के साथ खेलने की कल्पना करती! अक्सर परिवारों में बेटी के बाद बेटा हीं होगा ये बातें दावे से होने लगती है! कविता का परिवार भी इस सोच से अलग नहीं था!

संजय के माता पिता एक दुर्घटना में चल बसे थे! संजय सात साल का था तभी! चाचा चाची समाज परिवार के दबाव से कुछ संजय के पिता के मिलने वाले दुर्घटना बीमा के पैसे के लालच से संजय को अपने पास रखा! प्यार दुलार में पला संजय के लिए ये बहुत बड़ा सदमा था!स्कूल में एकटीचर थी शिवानी मैम संजय से विशेष स्नेह था, अपने बेटे जैसा समझती थी, बातें करती अपने लंच काकुछ हिस्सा अक्सर संजय कोअपने हाथों से खिलाती, शिवानी मैम का बेटा चार साल की उम्र में वाहन के धक्के से असमय काल कलवित हो गया था, संजय में उसकी छवि देखती थी!! चाची का व्यवहार संजय के प्रति बहुत खराब था! अपने बच्चों के छोटे मोटे काम संजय से करवाती. अपने बच्चों के छोड़े हुए कपड़े संजय को अहसान के साथ देती! अक्सर ताने देती न जाने तुम्हे क्या सूझी #मुसीबत# मेरे गले में बांध दी..अपने माता पिता का राजकुमार आज नौकरों सा जीवन जी रहा था! संजय ज्यादातर चुप हीं रहता! मामा आए तो उसका एडमिशन करवा अपना फर्ज पूरा कर लिया! चाची तो पढ़ाना भी नही चाहती थी!

कविता के पिता ने दूसरी शादी कर ली! वंश बेल को आगे बढ़ाना था. परिवार और रिश्तेदारों से कहा कविता की देखरेख के लिए शादी कर रहा हूं.

मैने अपने बड़े बुजुर्गों से अक्सर ये कहते सुना है मां जब सौतेली आती है तो पिता भी पराया हो जाता है. यही हुआ कविता के साथ! सौतेली मां के लिए कविता #मुसीबत #थी मनहूस थी…. इसकी मां ने जाते जाते ये मुसीबत मेरे लिए छोड़ गई..

समय अपनी गति से पंख लगा कर आगे बढ़ता रहा! कविता और संजय थोड़ी बहुत आपस में बात कर लेते! सौतेली मां ने एक बेटे को जन्म दिया! पिता बेटी से और दूर हो बेटे में रम गए. पत्नी भी भाग्यशाली और पूजनीय हो गई. बेटे को जन्म दिया था.

कविता छोटी उम्र में जब अल्हड़पन उस उम्र की लड़कियों की पहचान होती है, धीर गंभीर बनी रहती! छोटे भाई को गोद मे लेना तो दूर छूना भी मना था. गिरा देगी ये लड़की! धीरे धीरे घर की जिम्मेवारी कविता के नाजुक कंधे पर आ गई.

संजय और कविता दोनो धीरे धीरे एक दूसरे से खुलने लगे. दो दुखियारे बच्चे! उफ्फ!!

संजय और कविता दोनो एक दूसरे को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते. धीरे धीरे दोनो अपनी कक्षा के सबसे जहीन विद्यार्थियों में गिने जाने लगे.

समय ने दोनो बच्चों का बचपन छीन लिया था.

समय गुजरता रहा. प्लस टू की परीक्षा में संजय और कविता अपने स्कूल और जिले का नाम रौशन किया. कविता को अपनी मां और संजय को अपने माता पिता दोनो बहुत याद आ रहे थे! वो होते तो आलम कुछ और हीं होता. दोनो एक दूसरे केआंसू पोंछे.

अब समस्या थी आगे की पढ़ाई! संजय के चाचा चाची आगे की पढ़ाई का खर्च देने से साफ इंकार कर दिया! बेचारा संजय!

जिसका कोई नही होता उसके लिए धरती पर हीं मनुष्य के रूप में भगवान सा अवतरित हो जाता है.

संजय के स्कूल की टीचर शिवानी मैम !

जो क्लास 5से हीं संजय पर विशेष स्नेह और ममत्व रखती थी. संजय की पढ़ाई का जिम्मा ले लिया. संजय को मेडिकल में जाने की बहुत इच्छा थी. शिवानी मैम ने कोटा भेजा कोचिंग के लिए.

पहले एटेंप में हीं संजय मेडिकल क्वालीफाई कर लिया. अब संजय और शिवानी मैम की कठिन परीक्षा शुरू हुई. रांची मेडिकल कॉलेज में संजय को दाखिला मिला.

कविता की भी रुचि मेडिकल पढ़ने में थी पर वो बेबस थी. उसकी किस्मत में कोई शिवानी मैम नही थी!!

कविता की एक बहन भी आ गई थी. कविता की जिम्मेदारियों में इजाफा करने के लिए! पिता दूसरी मां के सम्मोहन में कविता को भूल से गए थे. अब तो संजय भी दूर चला गया था. आंसू पोंछने वाला भी कोई नही था खुद रोती भी और आंसू भी पोंछती. जब सौतेली मां अपने दोनो बच्चों से लाड प्यार करती कलेजे से लगाती, कविता के दिल में सहस्त्र खंजर घुसाने का असहृय दर्द होता. काश….

कविता ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में पहुंच चुकी थी. संजय भी हर सेमेस्टर में अच्छे अंक लाता.

ग्रेजुएशन करते हीं कविता की सौतेली मां अपने मायके की रिश्तेदारी में कविता के लिए एक रिश्ता देख रखा था. कविता आगे पढ़ना चाहती थी  पर सौतेली मां कविता नाम की #मुसीबत # से पीछा छुड़ाना चाहती थी.. और पिता वही करते जो सौतेली मां कहती. वही सुनते जो वो सुनाती. बहुत पढ़ाई हो गई. ज्यादा पढ़ी लड़कियां बिगड़ जाती है और अपने मन की हो जाती है.

संजय को कविता के पल पल की जानकारी रहती. पर वो मजबूर था. उसकी पढ़ाई का खर्च शिवानी मैम दे रही थी.

कविता को देखने लड़के वाले आए. लड़का भी आया था.औरते निहायत हीं जाहिल और गवार थी. उटपटांग प्रश्न पूछ रही थी कविता से. लड़का भी कविता को बिलकुल समझ में नहीं आ रहा था. लड़का अकेले में कविता से कुछ देर बात करना चाहा.

कविता बिना इच्छा के बेबस सी गई. एकांत पाते हीं लड़के ने कविता का हाथ पकड़ लिया. कविता असहज हो उठी. लड़का बोला अब तुम मेरी हो मैं तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता हूं. कविता हाथ छुड़ा कर धक्के दे जल्दी से बाहर आ गई! घबराई पसीने से लथपथ. पीछे से लड़का आया खींसे निपोरते हे हे शरमा गई जब मैं इससे बात करना चाहा.

कविता की सौतेली मां ने रिश्ते पर मुहर लगा दी. चलो #मुसीबत # से छुटकारा मिलेगा..तय हुआ की शुभ दिन को सगाई की रस्म पूरी की जाएगी. कविता के पापा निहाल थे अपनी पत्नी की व्यवहार कुशलता पर.

कविता अपने भाग्य पर आंसू बहा रही थी. संजय को फोन कर खूब रोई कलेजा फाड़कर!

संजय एक फैसला ले चुका था. कोर्ट में शादी करने की सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली.

रांची से अपने दोस्तों के साथ संजय आया. शिवानी मैम और दोस्तों की मौजूदगी में कोर्ट में कविता से शादी कर, मंदिर में भगवान के दरबार में कविता की मांग सिंदूर से भर हमेशा के लिए एक दूजे के हो गए थे. दो गमों के राही आज खुशियों की मंजिल पा चुके थे. कविता को अब भगवान और अपनी किस्मत से कोई शिकायत नहीं थी!! अपने भाग्य पर आज कविता को नाज हो रहा था!! क्योंकि आज कविता किसी की किस्मत थी #मुसीबत #नही … जो आज तक उसे समझा जाता था अपने हीं घर में…खुशियां हीं खुशियां बिखरी पड़ी थी उसके कदमों में!!

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

 

      Veena singh

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