लड़के वाले सीजन -3 (भाग – 17) : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : जैसा कि आप सबने अभी तक पढ़ा कि उमेश और शुभ्रा के घर धीरे धीरे रिश्तेदारों का आना शुरू हो चुका हैँ… भई शादी में दिन ही कितने बचे हैँ मात्र 6 दिन….. शुभ्रा और उमेश की नजदिकियां भी  बढ़ रही हैँ…. शन्नो बुआ आ चुकी हैँ… वो शुभ्रा को रोकने टोकने लगी हैँ…. उमेश के घरवालों ने बैंगनी रंग का लहँगा भेजा हैँ शुभ्रा के लिए… शन्नो बुआ को रंग अच्छा नहीं लगता…. वो कहती हैँ शुभ कामों में काला, नीला नहीं पहनते … जिस से घर की अन्य महिलायें भी सहमत नजर आती हैँ… उमेश की माँ वीना जी को बुआ के कहने पर फ़ोन लगाया जाता हैँ…. फ़ोन उठता हैँ… बुआ कहती हैँ… हेलो …

अब आगे…..

हेलो राम राम सा… मैं शुभ्रा की बुआ बोल रही शन्नो??

राम राम जी…. कहिये शन्नो जी आप कैसी हैँ?? घर आ गयी हैँ तो अब रौनक आ गयी होगी घर में …. वीना जी बोली…

जी वो तो तुमने सही कहीं छोरे की माँ…. मेरे बिना तो काऊँ ब्याह में रंग ही ना जमे … एक बात कहनी तुमते बहनजी   ??

हां कहिये शन्नो जी…. आप एक क्या दो बात कहिये… अच्छा ये बताईये लहँगा कैसा लगा हमारी बहू शुभ्रा को??

य़ाई लिए तो फ़ोन करो …. कैसो रंग भेज दियो हैँ ल्हंगो को…. बैंगनी रंग और कालो रंग शुभ कामों में ना चलतो … आपको पतो होनी चाहिए….

जी… माफ कीजियेगा शन्नो जी अगर नहीं चलता होता तो क्यूँ दिखाता हमें दुकान वाला…. और वो पूरा बैंगनी नहीं हैँ , बीच बीच में गुलाबी रंग की चमक हैँ उसमें … थोड़ा ध्यान से देखिये रोशनी में…. वैसे भी उसके संग की सब चीज ले ली हैँ… फिटिंग भी हो गयी हैँ…. वीना जी बोली…

पहले मोये रोशनी में देख लेने देयो ….. तब तुमायी बात को जवाब दूँगी …. फ़ोन काटियो नाये… .

जी ठीक हैँ….

शन्नो बुआ बैठक की सारी लाईटें जलाती हैँ… भाभी देखियों क्या लहँगा में गुलाबी रंग की चमक दीख रही हैँ… मोये तो ना पतो चल रही ….

लाओ मैं देखूँ …. ताई बोली….

एक एक कर घर के सभी सदस्यों ने लहंगे को लाईट के सामने कर देखा…

मोये तो ना दीखी जीजी… वहां बड़ी बड़ी  दुकानों पे कपड़े की  चमक वारी बहुत लाईट होवे हैँ… हजारों कपड़ा होवे हैँ… तो दुसरें कपड़ा की चमक भी पड़ जावें हैँ… गुलाबी ना जे बैंगनी ही हैँ जीजी… ताई सुमित्रा बोली…

सही कही भाभी… तब तक ज़िनका सुबह से इंतजार हो रहा था वो भी आ गयी… घर की रौनक बन्नो बुआ और उनके पति मतलब फूफा जी….

सभी ने उनको प्रणाम किया ….

जीजी जीजा जी पानी वानी बाद में पीना… पहले बतइयो का य़ा लहँगा में गुलाबी चमक हैँ… शन्नो बुआ, बन्नो बुआ और अपने जीजा जी से पूछती हैँ….

ला शन्नो मुझे दिखा… मेरी आँखें बहुत तेज हैँ….

हां फूफा जी… चार आँखें जो हैँ आपकी…विक्की फूफा जी से मजाकिया लहजे में बोला….

तू नहीं मानेगा… तुझे तो बाद में देखता हूँ…. फूफाजी अपनी एनक ऊपर करते हुए लहंगे को आगे पीछे करते देखते हैँ….

हां भई … इसमें तो ज्यादातर गुलाबी रंग ही चमक रहा हैँ… यहां आ शन्नो …. शन्नो बुआ भी पास आकर देखती हैँ…

हां जीजा जी…मान गए तुम्हे … अब तक ना आयें तुम … पहले आना था तुम्हे …

सबके मन में तसल्ली मिली कि चलो लहँगा तो फाईनल हुआ….

शन्नो बुआ ने वीना जी से कहा … ठीक हैँ बहनजी … हत हैँ गुलाबी रंग लहंगा में…. पर अगर आप लोग लाल य़ा महरून लेते तो अलग ही चमकती छोरी…. चलो कोई ना … अब तो लै लयो….

जी आज कल ट्रेंड में हैँ… इसलिये ही लिया…. मेरी बहू बहुत सुन्दर लगेगी इस लहंगे में…. देखियेगा आप….

जी ठीक हैँ… फ़ोन राख रही…. घर में जीजी जीजा आयें गए हैँ… फिर होगी आपसे बात वात …. और सब बढ़िया….

हां जी शन्नो जी सब बढ़िया… बस तैयारी में लगे हैँ… दिन ही कितने बचे हैँ अब… कल उमेश भी आ जायेगा….

छोरा कूँ नैक ठीक से खिलइयो पिलइयो … बहुत दुबलों हैँ… जंचे तोऊँ ब्याह में….

जी ठीक हैँ… सही कह रही आप… अब घर पर रहेगा तो सेहत ठीक हो जायेगी…

ठीक हैँ बहन जी…… राम राम…

राम राम शन्नो जी…

इधर उमेश और राहुल की भाग दौड़ चल रही हैँ… सामान लाना.. कपड़े पैक कर रहे हैँ…. कल सभी दोस्तों को अपने यार की शादी में शामिल होने के लिए निकलना जो हैँ…

भाई कुछ भी कह …. ज़ितनी मेहनत तू मुझसे करवा रहा हैँ अपनी शादी में… मेरी शादी में 10℅ भी नहीं करेगा तू इसकी…. उमेश के कपड़ों पर प्रेस करते हुए राहुल बोला….

टेंशन नॉट भाई… तेरी भी ऐसी से हेल्प कराऊँगा … तेरे जैसा दोस्त कहां मिलेगा मुझे जो अपने ज़िगरी दोस्त की शादी के लिए खुद की शादी पोस्टपोन कर दें …. तेरी शादी 25 नवम्बर की फिक्स थी मेरी वजह से फरवरी में करवा दी तूने…. आज उमेश खुले दिल से राहुल की तारीफ कर रहा था…

अब बस भी कर यार…. रूलायेगा क्या … तभी विक्रम गाना गाता हुआ आया…

तेरे जैसा यार कहां ,, कहां ऐसा य़ाराना …

उनका साथ का एक और साथी विनय बोला…

सुन उमेश… सारे जहां से प्यारा हैँ तू मेरा यार…. भाभी जी के आ जाने से हम को भूल ना जाना यार….

सभी दोस्त आज ईमोशनल हो गए हैँ.. ये समय ही कुछ ऐसा होता हैँ… सभी एक दूसरे को कस्के गले लगा लेते हैँ…

तभी यूनिट के क्लर्क साहब हाथ में मिठाई का डिब्बा लिए आतें हैँ ज़िसे देख सभी शांत खड़े हो ज़ाते हैँ…

जय हिन्द साब… विक्रम जय हिन्द करते हुए बोला… सभी साहब को जय हिन्द करते हैँ…

उमेश ले मुंह मीठा कर … साहब बोले…

क्यूँ सर इसकी शादी तो 23 को हैँ आज क्यूँ मुंह मीठा करा रहे हैँ…

भई अपने उमेश और विक्रम का प्रमोशन हो गया हैँ दोनों नायब सूबेदार बन गए हैँ…

क्या सच में सर?? उमेश के चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी…

हां भई … मैं क्या झूठ बोलूँगा…. ये देखो…. अपने हाथ में पकड़ा हुआ कागज दिखाते हुए साहब बोले…

सभी लोगों ने उमेश को विक्रम को कांधे पर उठा लिया….

सभी बहुत खुश थे…

अब मौका भी हैँ….उमेश औए विक्रम का प्रमोशन, और अपने भाई उमेश की शादी… आज तो पार्टी बनती हैँ… विनय और राहुल एक साथ बोल पड़े…

हां हां क्यूँ नहीं… कल निकलना हैँ… आज रात को पार्टी हो जायें .. क्यूँ क्या बोलता हैँ उमेश…

ठीक हैँ… तैयार हूँ मैं भी … तुम लोग जाओ तैयारी करों … मैं माँ पापा को प्रमोशन को बात बताके आया…

भाभी को भी तो बतायेगा…. उनका भी तो बोल… राहुल उमेश के कंधो पर हाथ मारकर बोलते हुए चला गया….

उमेश पहले अपने घर में माँ पापा को बताकर उनका आशिर्वाद लेता हैँ… सभी बहुत खुश होते हैँ कि भई बहू तो सच में हमारे घर के लिए बहुत शुभ हैँ…

उमेश शुभ्रा को फ़ोन लगाता हैँ…. उस से पहले उसके फ़ोन पर एक मेसेज देख वो एक मिनट को रुक जाता हैँ…

ज़िसमें लिखा था …. मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी  सदा खुश रहो तुम , दुआ हैँ मेरी…

तुम्हारी ना हो सकी…..

उमेश मेसेज को देख शांत पड़ जाता हैँ…

आगे की कहानी कल… तब तक के लिए जय जय श्री राधे

मीनाक्षी सिंह की कलम से

आगरा

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