गंगा नहाना – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : बीपी सुगर थायराइड  का सौगात तो मम्मी को इतने साल की सेवा के रूप में पापा आप ने दिया हीं है…. अब और नही अपने पिता के उठे हुए हाथ को मजबूती से पकड़े रौशन नम्रता मगर दृढ़ता से बोला..…

                 सास ससुर और पति तीनों अवाक थे.…मुझमें भी अपने बेटे की हिम्मत देख न जाने कहां से इतनी हिम्मत आ गई. ..

पच्चीस साल का दबा हुआ आक्रोश आज बांध तोड़ कर बह चला… मैं भावना अपने दोनो बच्चों पति और सास ससुर की मौजूदगी में फट पड़ी जब सासु जी ने हमेशा की तरह पति के बुरे बर्ताव के बाद भी पति के साथ प्रेम से पेश आने और आदर भाव रखने की सिख देने लगी… और मां की सह पर पति  हमेशा की तरह हाथ उठाने की कोशिश की.…

मां बाप ने शादी कर #गंगा नहा लिया #बेटी जिए या मरे अपनी किस्मत से. सास ससुर ने मुफ्त की फुल टाईम कामवाली जो उनके बेटे के बुरे व्यवहार के बाद भी रिश्ता को जोड़े बनाए रखने का एक तरफा प्रयास करे… मेरे अस्तित्व की जीवन की यही परिभाषा है..

                  इन पच्चीस सालों में मेरे तथाकथित जीवन साथी ने मुझे कितनी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी है ये मैं हीं जानती हूं.. जब रिश्ते की बुनियाद हीं खोखली हो तो वो रिश्ता बालू की भीत की तरह कभी भी ढह सकती है.. और इस रिश्ते को मेरा नफरत कब का दीमक की तरह खोखला कर दिया है…. किसी के सामने मुझे बेइज्जत कर देना… कभी भी हाथ उठा देना.. कभी इस इंसान ने मुझे पत्नी का मान सम्मान दिया हीं नहीं…

सास ससुर अपने बदतमीज बेटे के लिए पत्नी और अपनी सेवा के लिए बहु नाम की हाड़ मांस के पुतले को घर में लाकर #गंगा नहा लिया था #पड़ोसी दबे जुबान कहते थे ये लड़का बहुत  बिगड़ा हुआ शुरू से हीं है इसलिए आज तक कुछ नहीं कर पाया.. कितने पैसे व्यापार के नाम पर गवां दिया.. इन लोगों ने बहुत चालाकी से साधारण परिवार की लड़की से इसका रिश्ता तय किया…. और  लड़की के परिवार की सोच और मानसिकता  का पता  पड़ोसियों से लगा लिया था.. 

बेटी का ब्याह कर  दिया  और #गंगा  नहा लिया # अब बेटी अपनी किस्मत से सुख या दुःख करे….मैने तुम दोनो की परवरिश और पढ़ाई के लिए आज तक इतना कुछ सहा है पर अब नही.. रौशन तुम छः महीने बाद नौकरी में आ जाओगे और रंजना भी अपने पैरों पर खड़ी हो गई है..

अब मैं सदा के लिए ये घर ये रिश्ता सब छोड़ के जा रही हूं.. एक एनजीओ में मेरी बात हुई है.…अब मैं अपने लिए जिऊंगी.. अब तक तो मां बाप और सास ससुर ने मुझे मोहरा बना #गंगा नहा लिया #, उनकी परछाई से दूर बहुत दूर जा रही हूं.. तुम दोनों को जब भी मेरी जरूरत पड़े एक आवाज देना तुम्हारी मां तुम्हारे सामने होगी… मैं वो मां नही हूं जो अपने बच्चों को मझधार में छोड़ कर #गंगा नहा लेते #हैं…

                रौशन ने मेरा हाथ पकड़ लिया मां हम तीनों यहां से एक साथ जायेंगे… छः महीने तुम रंजना के साथ रहोगी फिर मेरी नौकरी लग जायेगी तब मैं तुम्हे अपने साथ ले जाऊंगा मां… तुम हमारी हिम्मत हो हमारी किस्मत हो पहचान हो… विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी इसी मां की बदौलत इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लिया.. कैंपस सिलेक्शन में मेरा नाम आ गया… छः महीने बाद में इंटरनेशनल कंपनी में इंजीनियर बन जाऊंगा…

रंजना बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी कर रही है… मां सही मायने में आज हम तीनों इनलोगों से दूर जाकर #गंगा नहा लेंगे #हम तीनों खूब मस्ती करेंगे मां… हम  तीनों हंसी खुशी जिएंगे मां…रंजना ने भरी आंखों और रुंधे गले से कहा मां तुम्हारा दुःख हमसे छुपा नहीं है..हम सही वक्त का इंतजार कर रहे थे…और यही सोच कर हम दोनों यहां आए थे मां…अब और नही मां.. रौशन और रंजना का हाथ थामे मैं सदा के लिए उस नरक से बाहर निकल खुली हवा में सांस ली…. सच आज मैने भी अपने अतीत को पीछे छोड़# गंगा नहा लिया था #

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

 

Veena singh

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