डार्लिंग!कब मिलोगी” (भाग -86)- सीमा वर्मा : Moral stories in hindi

“मुझे  लगता है, तुम दोनों मेरे पास खुद स्वार्थवश आए हो या फिर किसी के द्वारा अपना स्वार्थ साधने हेतु भेजे गये हो ?

कारण जो भी हो इतना अवश्य है।

यह हमारी भलाई के लिए ही हो रहा है। और मैं इसके लिए सदा तुम्हारा आभारी रहूंगा “

उन्होंने एक लंबी सांस ली…

” अपनी नवजवान पत्नी को उसकी अल्पायु में ही खो देने के पश्चात् मैं यह जान पाया कि जीवन कितना अनमोल है। लेकिन उससे भी अनमोल  एक और चीज है।

” जिसका नाम ‘दिल’ है यह दिल कितना अनमोल है … इसे वहीं जान पाता है जिसने इसकी कद्र की है ,

जवान दिल और जवानी कितनी अनमोल होती है ? उससे पूछो जिसने इसे व्यर्थ में गंवाया है “

बोलते -बोलते वे जोश में आ गये ,

” क्योंकि ? मानव जीवन बार- बार नहीं मिलता।

अगर मुझे यह विश्वास हो जाए कि कुसुम उस लड़के को इतना चाहती है , और वह लड़का कुसुम को इतना चाहता है ,

कि एक दूसरे के बिना उनका जीवन व्यर्थ हो जाएगा तो मैं फिर हिन्दू और मुस्लिम समाज की परवाह किये बिना कुसुम को उससे शादी करने की अनुमति दे दूंगा “

” मेरी बेटी की खुशी से बढ़कर मेरे लिए और कोई खुशी नहीं है “

” वाह …!”  दोनों खुशी से उछल पड़े।

“मतलब आप तैयार हैं ?”

“बिल्कुल ” कहते हुए राॅय बाबू भी उनकी खुशी में शामिल हो गये हैं।

नैना सोच रही है …  ” पिता ऐसे भी होते हैं। बच्चों की खुशी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को  तत्पर रहने वाले ? “

वे दोनों उठ कर खड़े हो गए।

” अब हम चलेंगे राॅय बाबू ‌,

” बैठो चाय पीकर जाना, आगे की बातचीत के साथ ही तुम दोनो के एग्रीमेंट लेटर पर भी साइन करने की भावी योजना भी तैयार हो जाएगी “

नैना ने हामी भर दी।

अगले नाटक की स्क्रिप्ट नैना की ओर बढ़ाते हुए,

” तब तक तुम इसे पढ़ लो, तुम्हारे  लिए तीन नाटकों में मुख्य भूमिका के रोल है। जिसमें छोटे- मोटे रोल के लिए अन्य सहायक अभिनेत्रियों के चयन बाद में किए जाएंगे “

–शोभित  …

” मैं बहुत खुश हूं। सच्चाई यह है कि मेरे मन से भारी बोझ उतर गया “

वे शोभित से बातों में मशगूल हो गए।

नैना ने स्क्रिप्ट खोली।

शुद्ध हिंदी में थी। पहले पन्ने पर शीर्षक लिखा था ‘ नये युग का आगाज़ “

आगे …

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