डार्लिंग!कब मिलोगी” (भाग -78)- सीमा वर्मा : Moral stories in hindi

नैना बाहर निकली उसे औफिस जाने की जल्दी है।

उसकी मानसिक आंखों के आगे रह-रह कर सपना की आंखों की वह विकल हाहाकारमयी छाया, हवा से फहर- फहर करते उसके लंबे काले केश सब मिलकर एक अनोखी बेचैनी भरी कंपकंपी उत्पन्न कर रही है।

ये तो वो सपना नहीं है, जो मेरी सखी है।

जिसने एक जरा सी बात को हवा देकर वो कर दिया जिसे उसे कभी भी नहीं करना चाहिए।

मैं अभी देख कर आ रही हूं।

वो चाहत की कौन सी गुत्थी है, जिंदगी की ऐसी कौन सी कमी है ? जिसने देवेन्द्र की सारी चाहत को रगड़ कर साफ कर दिया है।

देवेन्द्र का वो तेजस्वी व्यक्तित्व जिसपर फिलहाल तो सपना ने गोबर पोत कर रख दिया है।

उसके गले में गोला सा अटक गया है।

उसकी एक इच्छा हुई थी, अब और लिहाज न करे

जो सत्य है उसे कह दे कि बस बहुत हो गया सपना,

” यह तुम्हारे झूठे अहम् की लड़ाई, खत्म करो इस गलतफहमी को “

इधर कुछ समय से आर्थिक , सामाजिक तौर पर सुदृढ़ होती नैना में सपना के सुखी वैवाहिक जीवन के सुख सम्पदा से प्रभावित हो कर एक निश्चिंतता के भाव मन में घर करने लगे हैं।

वह आज के इस कटु दांपत्य जीवन के अनुभव से फिर से डांवाडोल और अस्तव्यस्त होने लगे हैं।

बीत गए वर्षों में ,

उसके अपने छोटे से शहर से निकल कर  दिल्ली जैसे महानगर में पहुंचने तक उसके जीवन में कितना कुछ जुड़ा, टूटा और छूटा पर नैना के प्रेमिका स्वरूप वाले रूप की विश्वास की पतली सी झिल्ली में एक छेद तक नहीं हुआ है। इसका परम संतोष नैना को है।

बहरहाल ,

घर आ कर वह थकी मांदी सोफे पर किसी तरह पसर गई।  उसके स्याह पड़े चेहरे को देखकर कर मुन्नी समझ गई।

सपना के घर में कुछ तो ऐसा घटित हुआ है जिसने दीदी को परेशान कर दिया है।

वह सचेत हुई, नैना के निकट जा कर घुटनों के बल बैठ अपनी बाईं हाथ से उसके गले को पकड़ कर उसे बच्चे की तरह चुमकारा और बार-बार उत्कट मोह से चुमकारती चली गई। पुचकार भरी आवाज में ,

” दीदी इस समय आप किसी कारण से दुखी बहुत दुखी हो !

मुझसे भी कई गुणा अधिक ?”

नैना का दाहिना हाथ मुन्नी की पीठ पर था। वह अनमने भाव से उसकी पीठ थपथपाती रही कभी सहलाती रही ।

यह सच है, कि कल रात हिमांशु के साथ हुए लंबे वार्तालाप और उसके तुरंत बाद सपना का यह विकराल रूप देख वह इस वक्त विकल – बेचैन है।

इस समय वह ऐसे ही किसी अपनत्व भरे सहारे की गहन आवश्यकता  महसूस कर रही थी।

आगे…

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