बस अब और नहीं – शफ़क रश्मि : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : रीनू आज अपने मायके गई थी। जाते समय वो बहुत खुश थी क्योंकि उसकी छोटी बहन अनु , जिसकी शादी को अभी कुछ ही समय हुआ था, माँ के घर आने वाली थी। जल्दी जल्दी उसने घर के सब काम निपटाए और पति को खबर कर के बेटे को साथ लेकर मायके चली गई, क्योंकि मायका घर से बहुत दूर न था। वहां पहुंच कर सबसे खुशी से गले मिली और अनु से मिलकर खुशी के दो आंसू भी छलक पड़े।

यहां वहां की बातें करते , हंसी मज़ाक करते समय का पता ही न चला और फिर उसकी बहन से ससुराल की बातें होने लगी। बातों ही बातों में अनु ने ज़िक्र किया उसकी सास को उसका रीनू से मिलना और उसके घर जाना बिल्कुल पसंद नहीं। रीनू अवाक रह गई, उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे या उसके पति से क्या गलती हो गई। उन लोगों ने तो हमेशा अनु के ससुराल वालों को सम्मान दिया, हर तीज त्योहार पर मिलने गए, नहीं तो फोन पर बात की।हमेशा ही उनलोगों का सम्मान किया।कितनी ही बार उनकी जरूरत के  समय बिना दिन रात देखे खड़े रहे।आखिर फिर ऐसा क्या हुआ कि अनु की सास उससे इतना नाराज़ हो गई।

इसी उधेड़बुन में रीनू घर लौट आई। घर आकर भी उसका मन अनु के साथ ही था। 

रीनू को अनमना देखकर उसके पति ने पूछा,”क्या हुआ है, जबसे अनु से मिलकर आई हो,परेशान दिख रही हो?”

रीनू ने रुवांसे होकर सारी बात बताई तो उसके पति ने सलाह दी कि अनु से फोन कर के साफ साफ पूछ लो।

अगले दिन उसने अनु को फोन किया और वजह पूछी उसकी सास के नाराजगी की तो पता चला कि पिछली बार जब रीनू अनु के घर उसके ऐक्सिडेंट के बाद उस से मिलने गई थी तो  उसकी सास का हाथ किचन में नहीं बंटाया,सारा समय अनु की देखभाल में ही बीता दिया और भी कुछ कुछ छोटी छोटी बातों की वजह से वह नाराज़ थी और उस नाराजगी को उन्होंने अनु पर निकाल दिया था। रीनू बहुत दुखी हुई और ये सोच में पड़ गईं कि आखिर मेरा कसूर क्या था, बस इतना ही कि सही को सही और ग़लत को गलत कह दिया मैंने। बस इतनी सी बात पर वो मेरी सारी अच्छाई भूल गईं और इस तरह का व्यवहार किया।

उसदिन से रीनू ने ऐसे मतलबी रिश्तों से दूर ही रहने में भलाई समझी क्योंकि कुछलोग सिर्फ़ आपसे अपने मतलब और स्वार्थवश जुड़े रहते हैं,जैसे ही आप उनकी हां में हां में मिलाना छोड़ देते हैं या उनका मतलब सिद्ध होना बंद हो जाता है, आपको निकृष्ट साबित करने में वो दो पल भी नहीं लगाते हैं।

स्वरचित मौलिक कहानी

शफ़क रश्मि

लखनऊ उत्तर प्रदेश

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