हृदय परिवर्तन शिव कुमारी शुक्ला Moral stories in hindi

चारु राखी की थाली सजाये बैठी थी उसमें राखी थी, आरती का दीपक, कुंकुम चावल, मिठाई और भैया पर न्यौछावर करने के लिए रुपये रखे थे। वह घर के मन्दिर में भगवान के सामने बैठी एक टक श्री कृष्ण जी की फोटो निहारे जा रही थी जैसे कि वह मन ही मन उनसे प्रार्थना कर … Read more

अतृप्त आत्मा प्यार कि खोज में – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

आभा रो रोकर थक चुकी थी। कोई उसे सांत्वना देने वाला नहीं था। पूरा परिवार चैन की नींद सो रहा था ।उसका पति अभीर भी घोडे बेंच कर सो रहा था ।उसे होश नहीं था कि बगल में लेटी  पत्नी रो-रोकर हलकान हो रही है। आभा बैड पर से उठकर  खिड़की के पास आकर खड़ी … Read more

जहां चाह वहां राह – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

विनी क्या कर रही है।  अरे माँ चार दिन रह गए मेरा स्कूल खुलने वाला है सो नई किताबें आयेंगीं उन्हीं के लिए अलमारी साफ कर रही हूँ।  पर बेटा तेरे पापा तो  मना कर रहे हैं आगे पढ़ाने से। क्यों मम्मी क्या हुआ  मैं तो पूरे जिले प्रथम आई हूँ अपने स्कूल में और … Read more

मतलबी खोखले रिश्ते – शिव कुमारी शुक्ला  : Moral stories in hindi

निर्मल और पत्नी महिमा में आज फिर किसी बात को लेकर नोंक झोंक हो रही थी। और वह पत्नी पर बुरी तरह बिफर रहा था जो मुँह में आता बिना सोचे-समझे बोले चला जा रहा था और अन्त में उसका तय वाक्य एक  मिनिट में बाहर का रास्ता दिखा दूंगा, जब बेघर हो जाओगी तब … Read more

सतरंगी जीवन – शिव कुमारी शुक्ला  : Moral stories in hindi

अवनी अपनी पी.जी. की परीक्षा देकर आज घर लौटी थी। वह अपने मम्मी-पापा एवं बुआ से मिलकर बहुत खुश थी। आज मम्मी ने उसके मन पसंद नाश्ता – खाना सब बनाया था। डाइनिंग टेबल पर बैठीं अवनी को मम्मी गर्म-गर्म पकौड़े  खिला रहीं थीं और बातें करती जा रही थीं । तभी उसका उसका ध्यान … Read more

ऐसी थी दादी अम्मा – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

अरे मनीषा इन कमजलीयों के  लिए क्या जरुरत थी नये कपडे लाने की पुराने ही धोकर  पहना देती। मेरे राजा बेटे के लिए एक ही जोडी लाई उसके एक-दो जोडी और ले आती।  यह सुनकर मनीषा जी का मन आहत हो गया। दीवाली जैसे त्यौहार पर भी कोई अपने बच्चों को कोसता है क्या । … Read more

मां की सीख – एक बेटी को : Moral stories in hindi

संजय जी की कोठी  रोशनी में नहाई जगमगा रही थी। कोठी से लेकर लान तक रोशनी की सजावट की गई थी। आज उनके बेटे शैलेश की शादी का रिसेप्शन  जो था। मेहमानों की आवाजाही लगी थी। चूंकि संजय जी अच्छी बड़ी पोस्ट पर कार्यरत थे सो कुछ संभ्रांत व्यक्ति भी वहां उपस्थित थे। स्टेज पर … Read more

इल्जाम – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

घर आते ही देव अपनी पत्नी संगीता पर बरस पडा कैसे हिम्मत हुई तुम्हारी उस  पराए मर्द के साथ  डांस  करने की। मेरी इज्जत का तुम्हें जरा भी ध्यान नहीं रहा। क्या सोचेंगे लोग मेरे बारे में कि मेरी पत्नी दूसरे  मर्दों के साथ डांस करती है।आज संगीता भी चुप न रही बोली वैसे ही … Read more

अनामिका – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

मम्मी मम्मी सुनो तो मेरी शादी करवा दो ।हैं तू ये क्या बोल रहा है शादी कर दूं पर किससे । मम्मी लडकी से और किससे । कौनसी लड़की यहाँ कहाँ तुझे लडकी मिल गई। इतने दिनों से मैं जब कह रही थी तो हाथ नहीं रखने देता था अब यहां   एक ही दिन … Read more

भविष्य के गर्भ में- शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

देवरानी केतकी के बोल सुन गिरिजा जी जेठानी स्तब्ध रह गई। उम्र में बेटी के बराबर केतकी किस तरह ताने मार कर गिरिजा जी का सीना छलनी कर गई। आप तो बांंझ हो  आप क्या जानो बच्चे कैसे पाले जाते हैं। बच्चे होते तो न आप बच्चों की परवरिश, उन‌की आद‌तें, उनकी अटपटी फरमाइशों के … Read more

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