ये औरत मेरी पत्नी है – सविता गोयल : Moral stories in hindi

रिपोर्ट को हाथों में लिए वो कई देर तक बिना किसी भाव के खड़ी रही.. उसमें सही लिखा था या गलत यकीन नहीं हो रहा था।  डाक्टर ने उसे सम्बोधित करते हुए कहा, ” हैलो. रागिनी, क्या हुआ !! ये सच है….. यू आर प्रैग्नेंट.. ।,,  रागिनी के चेहरे पर मिश्रित से भाव उभर आए … Read more

मेरा बेटा मुझसे दूर हो ये मैं होने नहीं दूंगी !! – सविता गोयल Moral stories in hindi

” क्या बात है बहू, आज बड़ी जल्दी जल्दी हाथ चल रहे हैं। ,, अपनी बहू यामिनी जिसकी शादी को अभी दो महीना ही हुआ था उसे आज रात के खाने की तैयारी शाम को ही करते देख सावित्री जी ने आश्चर्य से पूछा। ” वो मम्मी जी,….  इनका फोन आया था कि आज शाम … Read more

घर की इज्जत – सविता गोयल : Moral stories in hindi

मिनाक्षी की शादी एक सम्पन्न परिवार में हुई थी। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी ससुराल में| शहर में बहुत इज्जत और नाम था उसके ससुर जी का| घर में एक जेठ-जेठानी और एक कुंवारा देवर था जो बाहर पढ़ता था| मिनाक्षी की जेठानी बहुत ही सीधी-साधी सी थी, बस अपने काम से मतलब … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – सविता गोयल : Moral stories in hindi

  ” मम्मी जी, मैं सोच रही थी कल से से आफिस ज्वाइन कर लूँ …. वैसे भी नन्नू छह महीने का हो गया है …।,, वृंदा जी की छोटी बहु टीना ने अपनी बात घरवालों के सामने रख दी ।  ” हाँ, हाँ बहु …., वैसे भी मैं और कावेरी ( बड़ी बहु) तो हैं … Read more

मजबूरी – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  आज संडे कि सुबह थी ।लेकिन मधु बहुत चिड़चिड़ी लग रही थी।मधु ने खिचड़ी बनाकर अपने सास ससुर को दी और कपड़े सुखाने के लिए छत पर जा ही रही थी कि आशीष से सामना हो गया।  “आशीष मैं अब तंग हो चुकी हूँ। नहीं होती अब मुझसे तुम्हारे मम्मी … Read more

तृप्ति -सविता गोयल  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi:  ” ये क्या भईया !! ना आपने सारे नाते रिश्तेदारों को न्योता दिया और ना ही भोज का आयोजन सही तरीके से रखा। समाज में क्या इज्जत रह जाएगी हमारी। अरे पैसे कम पड़ रहे थे तो एक बार बोल दिया होता मैं ही कुछ इंतजाम कर देता…. मेरे ससुर जी … Read more

आत्मसम्मान किसका बड़ा? – सविता गोयल : hindi stories with moral

hindi stories with moral :  “सगुनी, तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे झूले पर बैठने की? क्या तू भूल गई कि ये मेरा झूला है?  गंवार कहीं की… ” शकुन्तला गुस्से में अपनी नौकरानी सगुनी को जोर-जोर से डांट रही थी।          “माफ कर दो छोटी ठकुराइन, भूल हो गई। बस इतना सुन्दर झूला देखकर मन कर गया … Read more

घर दीवार से नहीं परिवार से बनता है। – सविता गोयल : hindi stories with moral

hindi stories with moral :  “मुझे नहीं जाना यहाँ से कहीं, मेरी डोली इसी घर में आई थी और मेरी अर्थी भी इसी घर से उठेगी|”  “लेकिन माँ, यहाँ रखा भी क्या है अब? आप क्यों जिद पर अड़ी हैं। अब तो पापा भी नहीं रहे। आपको यहाँ किसके सहारे छोड़ कर जाएं? क्यों आप … Read more

बेटी मुझे अपने घर जाना है – सविता गोयल : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : भाभी आप मां का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखतीं। मां के दांत में दर्द है फिर भी उन्हें खाने में सिर्फ सब्जी रोटी दे दी। दलिया या फिर खिचड़ी हीं पका देती।,, रितु ने अपनी भाभी माधवी से कहा।  “लेकिन दीदी, मां ने हीं खिचड़ी के लिए मना कर दिया … Read more

छोटी सोच –  सविता गोयल  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : राधीका कोई पंद्रह साल की थी जब उसके पिता जी परिवार सहित गाँव छोड़ कर शहर में आ बसे थे। उसकी शादी भी शहर में ही एक बडे़ घराने में हो गई। लेकिन आज भी वो खुद को गाँव से जुड़ा हुआ महसूस करती थी। जब दस साल बाद राधिका … Read more

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