अति सर्वत्र वर्जयेत् (भाग 1)- डा.पारुल अग्रवाल: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आज मनोहर जी के पास यूएस(अमेरिका) से नीलेश की मां का फोन आया था वो चित्रा का हाथ अपने बेटे के लिए मांग रही थी।नीलेश बहुत ही व्यवहारकुशल लड़का था पर चित्रा तो यूएस या विदेश जाने की बात सुनकर ही सिहर उठती थी। यूएस से आने के बाद चित्रा को सभी नाते मतलबी रिश्तें लगने लगे थे। बहुत मुश्किल से वो अपने अतीत से बाहर आई थी। मनोहर जी को समझ नहीं आ रहा था कैसे इस रिश्ते के लिए चित्रा से बात करें। ये सोचते-सोचते मनोहर जी अतीत की कुछ कड़वी यादों में खो गए।

 मनोहर जी और उनकी पत्नी सरिता जी की खुशहाल गृहस्थी थी।उनके दोनों बच्चे बेटा चिराग एमएनसी में कंप्यूटर डिपार्टमेंट में बहुत अच्छे वेतन पर लग गया था और बेटी चित्रा बीबीए कर रही थी। दोनों ही बच्चे बहुत होनहार थे। मनोहर जी और सरिता जी का व्यवहार दोनों बच्चों के प्रति बहुत दोस्ताना था। मनोहर जी को अपने बच्चों विशेषतया बेटे की इतनी कम उम्र में इतनी अच्छी नौकरी पर बहुत गर्व था। उन्हें लगता था कि उनका बेटा जीवन में जो भी निर्णय लेगा वो सही ही होगा।

कई बार आवश्यकता से अधिक विश्वास भी सही नहीं होता पर इसका पता तभी चलता है जब हम किसी अनहोनी से गुजर चुके होते हैं। ऐसा ही कुछ मनोहर जी और सरिता जी के साथ हुआ था। चिराग अपने ही साथ काम करने वाली लड़की रिया से शादी करना चाहता था।रिया काफ़ी तेज़ तर्रार और मतलबी किस्म की थी। बात करने में वो बहुत मधुर थी पर अंदर-अंदर ही उसके मन में दूसरों के लिए खुरापात चलती रहती थी।

उसके मीठा बोलने की वजह से चिराग के घरवाले भी उसके चालाकी भरे व्यवहार का पता नहीं लगा पाए। वैसे भी मनोहर जी का चिराग के प्रति अतिविश्वास ने रिया के प्रति भी कोई शक अपने दिमाग में लाने नहीं दिया। चिराग और रिया की शादी हो गई। शादी के पंद्रह दिन बाद ही जब चिराग और रिया ने ऑफिस जाना दोबारा शुरू किया तब उनको यूएस(अमेरिका) जाने का मौका मिला।

चिराग को तो पहले फिर भी लगा कि मां-पापा को छोड़कर कैसे जाएगा पर रिया ने उसको ये कहकर कि इतनी अच्छा उन्नति का अवसर और वेतन उनको यहां नहीं मिलेगा। वैसे भी वीडियो कॉल और सोशल मीडिया की वजह से दूरियां भी घट गई हैं। ये सब सुनकर चिराग भी तैयार हो गया।

चिराग ने जब मनोहर जी और सरिता जी को भी विदेश जाने के विषय में बताया तो पहले तो वो थोड़ा सकते में आ गए पर फिर चिराग की उन्नति और उसका ये कहना कि उसके यूएस जाने से चित्रा की आगे की पढ़ाई भी विदेश के विश्विद्यालय से हो सकती है जैसी बातें सोचकर उसकी खुशी में ही खुश हो गए। इस तरह चिराग और रिया विदेश चले गए। वीडियो कॉल के द्वारा उनसे बात होती रहती थी। 

इधर खबर आई कि रिया गर्भवती है। मनोहर जी और सरिता जी बहुत चिंतित हो गए कि दोनों बच्चे कैसे इस समय पर अपना ख्याल रखेंगे पर उस समय रिया ने अपने मम्मी-पापा को अपने पास बुला लिया। पहली बार था जब मनोहर जी को चिराग का ये व्यवहार अखरा था क्योंकि उनको लगा था कि चिराग उनको और सरिता जी को आने को कहेगा।

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अति सर्वत्र वर्जयेत् (भाग 2)

अति सर्वत्र वर्जयेत् (भाग 2)- डा.पारुल अग्रवाल: Moral Stories in Hindi

 

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