“शहादत” – कविता भड़ाना

तेरी मिट्टी में मिल जावा

गुल बनके में खिल जावा

इतनी सी है दिल की आरज़ू “

“चारो तरफ फैले घोर अंधकार में, लगातार गरजती, बरसती गोलियों की बरसात, कानफोड़ू बारूद के आग उगलते हुए तेज धमाकों और चारों तरफ बिखरे हुए मानव अंग,इन सबके बीच रोहन ने आंख खोली, पर एक तेज दर्द की लहर से उसका जिस्म तड़प उठा। सर चकरा रहा था और बेहोशी सी छाने लगी, शरीर पर लगी गोलियों से बहते हुए खून से, रोहन ने एक बार फिर कोशिश की उठने की,पर लड़खड़ा कर गिर गया।



आसपास नजर उठा कर देखा की शायद उसका कोई साथी उसकी तरह अभी भी  सांस ले रहा हो, या कोई आवाज देकर कहे की चल यार रोहन देख हम ये जंग जीत गए। कारगिल की चोटी पर हमारा तिरंगा प्यारा लहरा रहा है,आओ सलामी मिलकर देंगे…. पाकिस्तानियों के नापाक इरादों को नाकाम करने का जश्न अपनी पूरी बटालियन के साथ मनाएंगे।पर रोहन को कही कोई हलचल होती नही दिखी।

दिखी तो वहा से बहुत दूर दिल्ली शहर के, मॉडल टाउन के, हाउस नंबर 3 में छुट्टियों में आने वाले बेटे का इंतजार करती “मां”… रक्षाबंधन पर घर आने वाले भाई का इंतजार करती एक “बहन”… ऊपर से बेहद सख़्त दिखने वाला पर बेटे पर जान छिड़कने वाला एक “पिता”….और रोहन के बचपन का प्यार “नेहा”जिसके साथ जल्दी ही शादी होने वाली थी।सब कुछ रोहन की आंखों के आगे घूम रहा था,और सांसों की डोर भी शायद छूटती जा रही थीं।

एक सैनिक के लिए देश ही सर्वप्रथम होता है,बाकी सब रिश्ते बाद में।……..

राजपूत रेजिमेंट में तैनात लेफ्टिनेंट रोहन कपूर ने अपने 20 सैनिकों के साथ कारगिल पर कब्जा जमाए रखा और पाकिस्तानियों से डटकर मुकाबला किया और पूरी वीरता के साथ मुक़ाबला करते हुऐ आखिरकार कारगिल की चोटी पर अपना तिरंगा लहरा ही दिया,सभी पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार कर और खुद गोलियों से छलनी हुए शरीर से बहते हुए रक्त की परवाह न करते हुए

अपने एक एक सैनिक को देख रहे थे की शायद किसी में तो जीवन हो,पर हर तरफ फैले सन्नाटे और बीच बीच में हो रही गोलीबारी और गोलों के धमाकों के बीच किसी में भी कोई हरकत नहीं थी।रोहन की आंखे भी अब बंद होने लगीं है,

इसी बीच दूसरी रेजिमेंट के आने की पदचाप से रोहन में जैसे जीवन का नवसंचार हो गया हो, लड़खड़ाते हुए कदमों से वह उठा,एक भरपूर नजर अपने प्यारे तिरंगे पर डाली और सैल्यूट कर, भारत माता की गोद में सदा के लिए सो गए। अपने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को आहूति खुशी खुशी देने वाले सभी फौजी भाइयों को शत शत नमन।।।।



“हमारा तिरंगा हवा से नहीं

देश के सैनिकों की सांसों से लहराता है।”

आजादी की 75th वी वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं।।

#रक्षा 

स्वरचित

कविता भड़ाना

1 thought on ““शहादत” – कविता भड़ाना”

  1. मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूं,
    जो मिट गया वतन पर मैं वो शहीद हूं।
    भारत माता की जय!

    Reply

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!