पत्नी का मायका – नेकराम Moral Stories in Hindi

मैंने दीवार की कील पर लटकी घड़ी की तरफ देखते हुए कहा शाम के 7:00 बज चुके हैं जल्दी खाने का टिफिन थैले में रखो श्रीमती जी रसोई में खड़ी खाना बांधते हुए बोली कई महीने हो गए मायके की शक्ल तक नहीं देखी मां का फोन स्विच ऑफ जा रहा है
मैंने खाने का थैला हाथ में लेते हुए कहा सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी है छुट्टी एक भी मिलती नहीं साइकिल भी पंचर हो चुकी है अभी मुझे ड्यूटी जाने दो ,,,,
हमारी श्रीमती जी का चेहरा उतर गया वह पलंग पर गुस्से में बैठकर मुझे देखती रही और मैं थैला लेकर सड़क पर निकल आया
बस स्टॉप पर पहुंच कर एक बस मिल गई ,, उसी में चढ़ गया,,
तभी मुझे महसूस हुआ जिस रास्ते मुझे जाना है बस उस रास्ते नहीं जा रही है लेकिन बस वाले ने बस नहीं रोकी कहने लगा तुम्हें देखकर चढ़ना चाहिए आगे कोई बस स्टॉप दिखाई देगा तो उतर जाना
आगे एक बस स्टॉप दिखाई दे गया,, बस रुकी और मैं हड़बड़ी में बस से उतरने लगा सामने से एक कार ने जोरदार टक्कर मारी और में उछल कर दूर जा गिर पड़ा,, पब्लिक इकट्ठी हो गई
जिस कार ने टक्कर मारी थी उसमें से एक महिला निकली शायद 36 या 37 वर्ष की थी,,
वह जल्दी से मेरी तरफ लपकी,, कुछ लोगों की मदद से उसने मुझे अपनी कार में बैठने के लिए कहा मैं कुछ समझता कार स्टार्ट होकर सड़क पर दौड़ने लगी एक मकान के सामने कार अचानक रुकी
उसने बताया अस्पताल जाने पर डॉक्टर तरह-तरह के सवाल पूछेंगे सामने मेरा घर है ज्यादा चोट नहीं आई है
मैं एक डॉक्टर हूं घर पर ही तुम्हारे पट्टी बांध दूंगी
वह मुझे अपने कमरे के भीतर ले गई वहां एक पलंग था वहां पर मैं लेट गया
उस कमरे में कोई न था तब मैंने पूछा तुम क्या इस घर में अकेली रहती हो,,,,,
उसने सर हिलाते हुए कहा ,,,,
मेरे पति है दो बच्चे हैं पति रात को 10:00 बजे तक घर आते हैं साथ में शराब की बोतल भी लेकर आते हैं अब तो शराब पीनी उन्होंने बहुत ज्यादा कर दी है नशे की हालत में कभी-कभी बच्चों पर भी हाथ उठा देते हैं
मैंने पट्टी को पैर में कसकर बांधते हुए पूछा आपके पति शराब कब से पी रहे हैं और उन्हें शराब पीने की आदत कैसे पड़ी
वह मुझे अपने बीते हुए कल की दुनिया में ले गई
मेरा नाम पायल शर्मा है जन्म गुजरात गांधीधाम राधानपुर में हुआ था वही पढ़ी-लिखी
20 साल की उम्र पार करते ही मां ने मेरी शादी दिल्ली शहर में कर दी
मायके आने के लिए मैं अपने पति के साथ हमेशा ट्रेन से अपने मायके जाया करती थी
पति मुझे मायके छोड़कर फिर वापस दिल्ली आ जाते थे
मैं वही मायके में ही एक दो हफ्ते रूक जाया करती थी
मेरे मायके में,,
मेरी मुलाकात एक मुकेश नाम के लड़के से हुई कभी-कभी उससे बातें हो जाया करती थी बड़ा ही हंसमुख और चंचल मन का साफ दिल का था। मेरा उससे मिलना हंस हंस के बातें करना
मेरी मां पिताजी भाई को यह अच्छा नहीं लगता था
हालांकि मैं पढ़ी लिखी लड़की हूं अच्छा बुरा मुझे सब मालूम है
उसे मैं अक्सर भाई का दर्जा दिया करती थी वह भी मुझे अक्सर दीदी कहकर बुलाता था,,
किंतु यह समाज हमेशा लोगों को गलत निगाहों से ही देखता है
शादीशुदा लड़की को किसी भी लड़के से बात करने पर परिवार वालों में तुरंत शक पैदा हो जाता है यह आज के समाज की सबसे घटिया सोच है और मोहल्ले के लोग अलग-अलग भड़काते हैं ,,,अरे तुम्हारी बेटी तो मायके में ही पड़ी रहती है मोहल्ले के लोगों को सब पता है आजकल एक मुकेश नाम के लड़के के साथ कुछ ज्यादा ही मौज मस्ती हो रही है
ऐसी जली कटी सुना सुनाकर मेरा घर से निकलना बंद करवा दिया
मैंने मां से सॉफ्टवेयर का काम सीखने की इच्छा प्रकट की तो दिल्ली आकर शहर में नौकरी करने लगी दो पैसे कमाऊंगी तो पति पर बोझ नहीं बनूंगी मां की तबीयत खराब थी मुझे अचानक अकेले ही ट्रेन पकड़ कर मायके जाना पड़ा उसी ट्रेन में मुझे फिर मुकेश मिला
वह मुझे देखकर हैरान रह गया
मैं हमेशा उसे अपना भाई मानती थी मैंने 1 घंटे उससे बातें की
कुछ घर की बातें बताई उसने भी बताया पढ़ाई पूरी हो चुकी है अब नौकरी कर रहा हूं दीदी ,,,
आप शादी के बाद खुश तो है दीदी आपके पति आपको परेशान तो नहीं करते,,
मेरी आंख से एक आंसू की बूंद टपक पड़ी मैंने रोते हुए कहां भैया अब क्या तुम्हें बताऊं लेकिन जरूर बताऊंगी वह मुझ पर शक करते हैं
शायद हमारे मोहल्ले के लोगों ने ही उनके कान भरे हैं
शक की बीमारी बड़ी गंदी होती है मैंने ना जाने कितने लोगों के घर तबाह होते हुए देखे हैं पत्नी अपना कलेजा भी निकाल कर रख दे तब भी पति औरत पर विश्वास नहीं करता है,,,
जब मैंने कोई पाप किया ही नहीं तो मैं क्यों डरूं दुनिया वालों से अपने पति से अपने ससुराल और मायके वालों से लेकिन हूं तो आखिर एक औरत ही परिवार के लिए औरत को ही झुकना पड़ता है
मुकेश भैया,,,
मेरा स्टेशन आ चुका था इतना कहकर ,, मैं ट्रेन से उतर गई
मायके पहुंचने के बाद मां का हाल-चाल पूछा तो मां ने आंखें लाल करते हुए कहा तुझे अकेले आने के लिए किसने कहा था दामाद जी कहां है
कही तुम मुकेश से मिलने के लिए मेरा बहाना बनाकर तो नहीं आई हो,,
मां,,,, तुम कैसी घटिया बातें कर रही हो अपनी बेटी से,,,मेरी सब्र का बांध टूट चुका था आजू-बाजू रहने वाले लोगों के सिखाए पढ़ाने में तुम आ चुकी हो मैं अपनी जान दे सकती हूं मगर कोई गलत काम नहीं करूंगी
मां ने छत से दामाद जी को बुलाते हुए कहा ,,,,पायल,,, मेरी बात ध्यान से सुनो दामाद जी दूसरी ट्रेन पड़कर यहां तुमसे आधे घंटे पहले ही आ चुके हैं
रात को 2:30 बजे यहां से ट्रेन सीधी दिल्ली तुम्हें पहुंचा देगी
अब तू हमेशा हमेशा के लिए अपना मायका भूल जा अगर तू मायके आई तो तू मेरा मरा हुआ मुंह देखेगी
उसी रात मैं अपने पति के साथ सन 2012 को अप्रैल के महीने में दिल्ली लौट आई आज 12 बर्ष बीत चुके हैं मां का चेहरा नहीं देखा
पति ने शहर का पुराना घर बेचकर ,,, यह नया घर ले लिया
पति ने पुराने नंबर और सिम तोड़कर फेंक दिये
और मुझे कसम दी कि तुम कोई फोन अपने पास नहीं रखोगी
12 साल से मेरे पास कोई मोबाइल नहीं है
पास की सहेली पारो वर्मा ने मुझे कार चलाना सिखा दिया और डॉक्टरनी का काम भी
मैं अपने क्लीनिक से लौट रही थी कि रास्ते में मैं ब्रेक लगा रही थी कि तुमसे टकरा गई
पायल शर्मा ने कहना जारी रखा,,,
आज हमारे देश में पति अपनी पत्नियों को मायके इसलिए नहीं ले जाते
उन्हें डर रहता है कहीं उनकी पत्नी मायके जाकर पिछली जिंदगी को दोबारा याद न कर ले पड़ोस में रहने वाले लड़कों से कोई बात ना कर ले
मर्दों के दिमाग में केवल एक ही कीड़ा रहता है शादी होने के बाद औरत को हमेशा कमरे के भीतर रहना चाहिए और किसी भी पुरुष से बात नहीं करनी चाहिए ,,,
बस यही सोचकर मर्द,,,अपनी औरत को मायके नहीं भेजते
काम धंधे का कोई ना कोई बहाना बना देते हैं डार्लिंग आज नहीं कल चलेंगे कल निकल जाता है कहते हैं परसों चलेंगे इसी तरह हफ्ते महीने बीतते चले जाते हैं क्योंकि पुरुषों के दिमाग में शक का कीड़ा पल रहा होता है
समाज में मुश्किल से बहुत कम ऐसे परिवार है जो अपनी पत्नी को मान सम्मान देते हैं उनका आदर करते हैं और सबसे बड़ी बात अपनी पत्नी पर विश्वास करते हैं
पायल शर्मा की बात खत्म होते ही,,,
मैं बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया बहन जी मेरा ड्यूटी का टाइम निकल चुका है लेट हो गया हूं मुझे अब जाना होगा
क्या पता आपके पति यहां आकर मुझपर भी शक करें
कि सामने पर्दा हिला एक आदमी दिखाई दिया
उसने मुझे देखा और कहा घबराओ नहीं मैं पायल का पति राकेश हूं
मैं पर्दे के पीछे खड़े सब बातें सुन रहा था
पायल मुझे माफ कर दो,, शक की बीमारी ने मुझे बुरी तरह तोड़ दिया था दरअसल ऐसा कुछ है ही नहीं मोहल्ले में कुछ ऐसी औरतें भी होती है जो दूसरों का घर तोड़ने में माहिर होती है दूसरों का घर टूटते हुए देखना दूसरों का घर बिखरते हुए देखना उन्हें बहुत अच्छा लगता है
मेरी आंखें अब खुल चुकी है आज मुझे मेरी आत्मा मुझे धिक्कार रही है आज मुझे आत्मग्लानि हो रहा है
बच्चे ट्यूशन से आने वाले हैं जब तक तुम कपड़े पैक करो हम अभी तुम्हारे मायके चलेंगे
रास्ते में मोबाइल की दुकान से तुम्हें एक नया फोन भी दिलवा दूंगा टच वाला
राकेश ने शराब की बोतल फेंकते हुए पायल को गले से लगा लिया
राकेश ने तुरंत कार में बिठाकर मुझे मुखर्जी नगर ड्यूटी पर पहुंचा दिया उसी रात बच्चों को लेकर अपनी पत्नी के मायके की ओर रवाना हो गया
जैसे तैसे मैंने रात काट ली सुबह घर पहुंचा हमारी श्रीमती जी आंगन में झाड़ू लगा रही थी मैंने तुरंत झाड़ू हाथ से छीनी
मुस्कुराते हुए कहा कपड़े पैक कर लो बच्चों को तैयार कर दो हम अभी के अभी तुम्हारे मायके निकल रहे हैं
मेरे मुंह से यह शब्द सुनकर,,,
हमारी श्रीमती जी का चेहरा एकदम खिल गया,,,
नेकराम सिक्योरिटी गार्ड दिल्ली से

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