ऐसा भी हो सकता है- नेकराम Moral Stories in Hindi

शहर में एक फ्लाई ओवर से 10 मीटर की दूरी पर
वह बूढ़ा सा दिखने वाला व्यक्ति केसरी लाल कई वर्षों से बस स्टॉप के किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट भरा करता है पास में ही एक कच्ची बस्ती है वहां पर उनकी एक छोटी सी झोपड़ी है उसी झोपड़ी में अपनी पत्नी राधा बड़ी बेटी गुड़िया छोटे बेटे मोहन के साथ ईश्वर की दया से दिन बिता रहा था
केसरी लाल का बेटा मोहन कक्षा सातवीं में घर से ढाई किलोमीटर दूर सरकारी स्कूल में पढ़ता है
मोहन ने कई बार पिता से साइकिल खरीदने का जिक्र किया पिता जब रात को थके हारे घर लौटते तो मोहन दिन भर की परेशानियां गिनाना शुरू कर देता ,,,,,, पापा जी तुम तो हमारी मजबूरी समझते ही नहीं हो
घर से मुझे रोज पैदल ही स्कूल जाना पड़ता है हमारे स्कूल के कई बच्चों के पास साइकिल है वह साइकिल चलाकर 10 मिनट में स्कूल पहुंच जाते हैं और मैं पैदल के चक्कर में अक्सर स्कूल लेट हो जाता हूं
कब से कह रहे हो मेरी नई साइकिल आ जाएगी ,,,कब आएगी ,,
मोहन की मां ,, मोहन की बात को काटते हुए बोली,,,,
तुम्हारे पापा अभी-अभी थके हारे आए हैं उन्हें खाना खा लेने दो
अभी घर का बजट ठीक नहीं है चाय भी बहुत कम बिक रही है
चीनी और चाय पत्ती कितनी महंगी हो गई है और दूध का तो नाम ना लो
अब चाय बेचने में वह बात नहीं रही
थोड़ी बहुत बचत होती है तो आधे से ज्यादा तुम्हारे पिता चाय उधार बाटकर आ जाते हैं
मैं बड़ी मुश्किल से घर चला पाती हूं यह देखो तुम्हारे पिता कुल 900 रूपए कमा कर लाए हैं
इन पैसों में से अभी पांच किलो चीनी भी खरीदनी है कल सुबह के लिए
चाय पत्ती और दूध भी और पूरे दिन गैस भी जलती है
और थोड़ी सी चाय ठंडी हो जाए तो ग्राहकों के लिए दोबारा गर्म करनी पड़ती है
महीना पूरा होते ही पास की चौकी से एक हवलदार आता है 500 रूपए उसे भी देने पड़ते हैं
और सुबह झाड़ू लगाने वाली हमेशा चिक-चिक करती है उसका मुंह बंद रखने के लिए महीने के 200 रुपए उसे भी देने पड़ते हैं
तुम्हारे पापा कई महीनो से एक ही कमीज पहन कर चाय बेच रहे हैं
सर्दी का मौसम है सोचा था तुम्हारे पापा के लिए बाजार से एक गर्म स्वेटर खरीद लूं ,,,,
बाजार में तुम मेरे साथ थे तुमने कहा मेरा बस्ता फट गया है मम्मी ,,,,,तो मैंने तुम्हें नया बस्ता दिलवा दिया और तुम्हारे पापा का स्वेटर आते-आते रह गया ,,तुम्हें अपनी साइकिल की पड़ी हुई है ,,
मुट्ठी में पैसे बचते ही नहीं तुम्हारे पापा के जूते कई जगह से फट चुके हैं नए जूते नहीं खरीद पा रही हूं 3 सालों से वही पुराने जूतों से घसीट घसीट कर काम चला रहे हैं ।
कोई बहुत बड़ा बिजनेस तो है नहीं तेरे पापा का,,, कि तेरे लिए नई साइकिल खरीद ले,,, बाजार में छोटे से बच्चे की नई साइकिल की कीमत भी कम से कम पांच हजार रुपए है
मुझे देख,,,, एक पुरानी साड़ी कब से पहन रखी है हर बार नया त्यौहार आता है सोचती हूं इस त्यौहार में नई साड़ी अवश्य लूंगी मगर वह त्यौहार भी यूं ही निकल जाता है और मैं मन मार के रह जाती हूं
गुड़िया नौवीं क्लास में पढ़ती है उसकी शादी के लिए भी तो पैसे इकट्ठे करने हैं
लेकिन घर में एक फूटी कोड़ी भी जमा नहीं हो पाती है
इसीलिए कहती हूं स्कूल में अपने दोस्तों की होड़ नहीं करनी चाहिए
हम भला उन मकान में रहने वाले बड़े लोगों की बराबरी कैसे कर सकते हैं ।
मोहन के पिता केसरी लाल ,,, कुछ सोचते हुए बोले बचपन में हम भी पैदल ही स्कूल जाया करते थे कभी-कभी तो पैर भी दर्द हो जाया करते थे लेकिन अब जमाना बदल गया है गरीब से गरीब मां-बाप भी अपने बच्चों के लिए बच्चों की पढ़ाई की खातिर बच्चों को नया बस्ता नई ज्येमेट्री बॉक्स नए जूते और नई वर्दी कैसे ना कैसे करके दिला ही देते हैं
तो फिर हम क्यों पीछे रह जाए
मेरे बच्चे मेरे लाल तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है कुछ भी हो जाए मैं तुम्हारे लिए नई साइकिल का इंतजाम जरूर करूंगा ताकि तुम्हें स्कूल पैदल न जाना पड़े
तुम्हारा स्कूल दोपहर का है सुबह का स्कूल गुड़िया का है
सप्ताह में सात दिन होते हैं
,,, मेरे लिए बेटा और बेटी दोनों बराबर है
इसीलिए तीन दिन मोहन साइकिल ले जाएगा स्कूल,,,
और तीन दिन गुड़िया ले जाएगी साइकिल स्कूल में,,
संडे के दिन साइकिल घर के आंगन में खड़ी रहकर आराम करेगी
पापा की बातें सुनकर मोहन और गुड़िया जोर-जोर से हंसने लगे नई साइकिल कैसी होगी कब आएगी इन्हीं सपनों में डूबे हुए सारा परिवार रोज की तरह आज फिर सो गया।
सुबह सूरज निकल चुका था केसरी लाल बीवी बच्चों के जागने से पहले ही बिना कुछ खाए पिए ही फ्लाइओवर के निकट बनी अपनी चाय की छोटी सी दुकान की तरफ चल दिया रास्ते में चलते-चलते उसे याद आया उसका एक मित्र चाय का खोखा खरीदने की बात कर रहा था
पूरे 5 हजार रुपए देने के लिए तैयार था
उस समय मैंने अपने मित्र को कहा था यह तो मेरी रोजी-रोटी है मैं यह कैसे बेंच सकता हूं इस छोटी सी दुकान से मेरा परिवार पलता है
और उसे मैंने खरी खोटी सुना कर खाली हाथ लौटा दिया था
चौक पर पहुंचने के बाद केसरी लाल रूका एक रास्ता चाय की दुकान की तरफ जा रहा था और दूसरा रास्ता केसरी लाल का मित्र संजय कुमार के घर जा रहा था,
अगर चाय का ठिया बेंच दूं तो मोहन के लिए बाजार से एक नई साइकिल खरीद लाऊंगा फिर मोहन और गुड़िया को स्कूल पैदल नहीं जाना पड़ेगा
लेकिन अगर चाय का ठिया बेंच दिया तो दो पैसे कहां से कमाऊंगा
और जो इतने लोगों को चाय उधार दी हुई है उनसे पैसे कैसे वापस लूंगा
केसरी लाल बड़ी दुविधा में था सोच सोच के उसका सर फटा जा रहा था आखिर एक तरफ चाय की दुकान है ,,एक तरफ बच्चे की साइकिल
केसरी लाल वही चौक पर बैठकर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा हे प्रभु तुम ही कुछ मदद करो
तभी उसके पास एक 6 बर्ष का नन्हा सा बालक आया और आकर केसरी लाल के पास बैठ गया केसरी लाल ने उस नन्हें बच्चे से उसका नाम पूछा,, तो वह कुछ ना बोला,,,,
उसकी जेब में हाथ डालकर टटोला ,,,पर कुछ नहीं मिला शायद उस बच्चे के घर का पता मिल जाता ,,
केसरी लाल ने उस बच्चें को अपनी गोद में उठाया और अपने मित्र संजय के पास चल दिया तेज तेज कदमों से केसरी लाल चलने लगा
उसे डर था कहीं उसका मित्र ड्यूटी के लिए घर से निकल ना जाए
एक बड़े से मकान के सामने केसरी लाल रुक गया ।
संजय अपनी बाइक स्टार्ट कर ही रहा था केसरी लाल को आता देख
बाइक स्टार्ट करनी बंद कर दी और केसरी लाल का हाल-चाल पूछने लगा। और केसरी लाल कैसे हो सब ठीक-ठाक तो है ना,,
केसरी लाल ने ,,,, बीती रात की सारी कहानी बता दी
तब संजय ने कहा मैं तुम्हारी भावनाओं की कदर करता हूं
पांच हजार रुपए तो मैं तुम्हें दे दूंगा तुम मोहन के लिए नई साइकिल भी खरीद लोगे तुम्हारा बच्चा साइकिल से स्कूल भी जाएगा
लेकिन तुम तो जानते ही हो शहर के अंदर एक छोटी सी नौकरी भी बड़ी कठिनाई से मिलती है मेरी बात मानो चाय का खोखा मत बेंचो
घर में तुम ही एक कमाने वाले हो तुम ही बेरोजगार हो जाओगे तो
घर में बच्चे और भाभी खाना कहां से खाएंगे
केसरी लाल कहने लगा ,,,शहर में बहुत से मजदूरी वाले काम है उनमें से कोई एक कर लूंगा
संजय ने बाइक स्टार्ट की और कहा अभी तो मैं ड्यूटी जा रहा हूं
मैं अपनी पत्नी से मोबाइल पर कह देता हूं वह तुम्हें रुपया दे देगी
संजय के जाते ही केसरी लाल बच्चे की उंगली थामें सड़क पर गुमसुम खड़ा था
संजय की पत्नी पांच हजार रुपए लेकर कमरे से बाहर आई
रुपए देते हुए बोली भाई साहब चाय पानी तो पीते जाइए
मगर केसरी लाल जल्दी में था वह रुपया लेकर तुरंत चल पड़ा
पुलिस स्टेशन 3 किलोमीटर की दूरी पर था केसरी लाल मन ही मन सोचने लगा पहले इस नन्हे से बच्चे को पुलिस स्टेशन में जमा करवा देता हूं बाकी काम फिर करूंगा
चलते चलते अभी आधा किलोमीटर ही केसरी लाल चला होगा
रास्ते में उसे एक दुकान दिखाई दी बहुत सारी छोटी-छोटी बच्चों की साइकिले दिखाई देने पर केसरी लाल वही साइकिल की दुकान पर खड़ा होकर मोहन के लिए और गुड़िया के लिए अच्छी सी साइकिल देखने लगा
तभी दुकान का मालिक ऊपर वाले कमरे से उतरकर नीचे आया,,कहो भाई साहब कौन सी साइकिल दिखाऊं
केसरी लाल की गोद में 6 साल के बच्चे को देखकर एकदम चौक गया
उसने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और फोन में बताने लगा
सलमा बहन तुम्हारा बेटा अल्फाज मिल गया यहां एक व्यक्ति उसे लेकर आया है
दुकानदार ने तुरंत केसरी लाल को कमरे के भीतर ले जाकर सोफे पर बिठाया कहने लगा यह मेरी बहन सलमा का बेटा है और मैं इस बच्चें का मामा हूं
सुबह मेरी बहन सलमा वॉक करने के लिए पार्क में जाती है तो यह अल्फाज भी जिद्द करके साथ में चल पड़ा और उधर से न जाने खेलते खेलते कहां ओझल हो गया
सुबह से सब इसे ढूंढने में लगे हुए हैं थाने के कई चक्कर लगा दिए
दुकान पर नौकर को बिठाकर बस में भी निकल ही रहा था अपनी बहन सलमा के घर
दुकानदार ने कहा तुम कोई नेक इंसान दिखाई देते हो अगर यह अल्फाज ना मिलता तो मेरी सलमा बहन का तो रो रो के बुरा हाल था
मैं तुमसे बहुत खुश हूं तुम यहां साइकिल देख रहे थे खरीदने के इरादे से आए थे
तुम्हें साइकिल चाहिए,, इस दुकान में जो भी साइकिल तुम्हें पसंद हो तुम ले लो
केसारी लाल ने कहा,, मेरे पास सिर्फ पांच हजार रुपए है तो तुम कोई ऐसी साइकिल दिखा दो जिसकी कीमत पांच हजार रुपए हो
दुकानदार केसरी लाल को देखने लगा और बोला
इस अल्फाज का मैं मामा हूं इसके लिए तो पूरी दुकान लुटा सकता हूं
जान हाजिर है इसके लिए तो ,,,
मैं तुमसे रुपए मांगूंगा यह तुमने सोच भी कैसे लिया,,,
तुम्हारे घर में जितने बच्चे हैं उतनी साइकिलें तुम ले जा सकते हो
शाम हो चुकी थी,,
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मोहन बार-बार घड़ी की तरफ देख रहा था मां से कहने लगा
शाम होने को है पापा अभी तक नहीं आए पड़ोस वाले अंकल बता रहे थे आज तुम्हारे पापा ने चाय का ठिया नहीं लगाया,,
मोहन की मां ने खाना तो बना लिया था मगर घर में कोई खाना नहीं खा रहा था तभी मोहन रोने लगा ,,,मां मुझे नहीं चाहिए साइकिल ,,,
मुझे मेरे पापा चाहिए ,, न जाने कहां चले गए,,
तब गुड़िया बोली तूने ही तो जिद की थी पापा से साइकिल खरीदने के लिए बेचारे पापा न जाने कहां भटक रहे होंगे ,,
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई खटखट खटखट
मोहन ने तुरंत दरवाजा खोला देखा तो सामने पापा खड़े हैं और उनके पीछे रिक्शा खड़ा हुआ है उसमें दो नई साइकिले रखी हुई है
पापा ने कहा एक साइकिल गुड़िया की,,,
और एक साइकिल मोहन की,,,
अब तुम्हें सप्ताह में 3 दिन साइकिल से नहीं
सप्ताह में पूरे 6 दिन साइकिल से स्कूल जाना पड़ेगा
केसरी लाल ने वह पांच हजार रुपए घर आते समय संजय की पत्नी को वापस लौटा दिए थे
केसरी लाल अगली सुबह फिर अपने उसी पुराने ठिकाने पर चाय बेचने के लिए चल पड़ा रोज की तरह ।।
मोहल्ले के लोग अक्सर उनकी तरफ देखकर कहते
,,,,ऐसा भी हो सकता है,,,
नेकराम सिक्योरिटी गार्ड दिल्ली से स्वरचित रचना

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