मुसीबत- मनीषा श्रीवास्तव: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आज नीना को सब कुछ याद आ रहा था ।नीना समझ नहीं पा रही थी कि अपनी यादों में उठते इस बवंडर को समझना कहां से शुरू करें नीना ने फिर से अपने अतीत के गलियारे में झांक कर अपने ही पुराने दर्द को पुराने जख्मों को कुरेदना शुरू किया यह जानते हुए भी कि इससे उसको शायद फिर से उतना ही दर्द हो लेकिन आज उन यादों पर उसका बस भी तो नहीं था।

  नीना की पूरी जिंदगी उसकी जिंदगी में आई हुई मुसीबत के ऊपर ही तो टिकी हुई थी बचपन से ही नीना ने सिर्फ मुसीबतें और मुसीबतें ही देखी थी। बचपन में ही नीना के माता-पिता का देहांत हो गया था और अपने चार भाई बहनों में सबसे बड़ी नीना को ही घर की सारी जिम्मेदारी बहुत छोटी सी उम्र से ही उठानी पड़ी थी। मेहनत मजदूरी करके नीना अपने भाई बहनों का भरण पोषण करने लगी। समय का पहिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा था और नीना अपनी जिम्मेदारियां के साथ अकेले ही आगे जा रही थी।नीना ने अपने भाई बहनों को पढ़ाने लिखाने के लिए दिन रात मेहनत की और सभी को बड़ा अधिकारी बनाया ।खुद नीना मात्र ग्रेजुएशन करके रह गई। दौलत और शोहरत आने के बाद नीना के भाई बहनों का व्यवहार ही बदल गया।

    “दीदी अब हम आपके साथ इस किराए के घर में नहीं रह सकते।हमारी इज्जत है समाज में दीदी ।हम तीनों ने ही एक ही अपार्टमेंट में अपने अपने फ्लैट खरीद लिए हैं। आप चाहे तो हम लोगो के साथ बारी बारी रह सकती हैं।”

अपने ही भाई के मुंह से ये बात सुन कर नीना को बहुत दुख हुआ और उसने किसी के भी साथ न जाकर अकेले ही रहने का फैसला किया। अब उसके अपने खून के रिश्तों ने भी उसका साथ छोड़ दिया और नीना फिर अकेली ही रह गई। ग्रेजुएशन करने के बाद नीना को एक स्कूल में अध्यापक की नौकरी मिल गई थी और नीना किराए की एक मकान में रहती थी। धीरे-धीरे नीना  का जीवन अकेलेपन बेबसी और मुसीबतों के साथ व्यतीत हो रहा था।

      अब नीना के जीवन का एक और अध्याय शुरू होने जा रहा था। नीना के स्कूल के ही एक अध्यापक  नील को नीना पसंद आने लगी थी।

एक दिन छुट्टी के बाद घर लौटते हुए नील ने नीना से कहा ” नीना मैं कुछ दिनों से आपसे कुछ कहना चाहता हूं लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था ,देखिए आप मेरी बातों को अन्यथा न लीजिएगा और मेरी बात ध्यान से सुनिएगा। मैं आपसे जबसे मिला हूं आपसे प्रेम कर बैठा हूं क्या आप जीवन भर के लिए मेरे जीवन में आएंगी”।

नीना अपनी तरफ बढ़ते इस प्यार के पग को रोक नहीं पाई हालांकि उसे अपनी तकदीर पर जरा भी भरोसा नहीं था लेकिन फिर भी नील के प्रेम निमंत्रण को नीना ठुकरा नहीं पाई और नीना ने नील से विवाह कर लिया। नीना के जीवन में भी खुशियों का आगमन हुआ ,नील के प्रेम ने नीना के सारे दुख दर्द पर जैसे मरहम लगा दिया और नीना को भी यह महसूस होने लगा कि अब शायद दुख और मुसीबतों ने उसका पीछा छोड़ दिया है ।नीना अपने पति के साथ खुशी-खुशी रहने लगी समय बीतता गया। दो साल के बाद नीना के आंगन में भी एक फूल मुस्कुराया । नीना एक बेटे की मां बन चुकी थी।

नीना अपने पति और बेटे के साथ खुश थी और उसे लगने लगा था कि थोड़ी खुशियां शायद भगवान ने उसके हिस्से में भी लिखी है लेकिन नीना की नियति में सुख के पल बहुत ही कम लिखे थे और मुसीबत का अंबार लगा हुआ था। नीना की हसती खेलती जिंदगी को बस कुछ वर्ष ही बीते थे कि उसके पति नील को जानलेवा बीमारी कैंसर ने जकड़ लिया ।नीना  को फिर अपनी किस्मत पर रोना आया लेकिन फिर भी नीना ने हार नहीं मानी और अपने पति का इलाज करवाने की और उनको बचाने की हर संभव कोशिश की   लेकिन किस्मत के आगे किसका जोर है। नीना भी अपनी किस्मत से हार गई और उसके पति का स्वर्गवास हो गया। नीना पर  तो मानो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा ।

एक बार फिर नीना जिन्दगी के अंधियारे सफर में अकेली रह गई ।इस बार उसको अपना दुख फिर छुपाकर अपने बच्चे के लिए खुश होना पड़ा और हिम्मत करके एक बार फिर नीना ने अपने बेटे के साथ जीवन की शुरुआत की।

  यही नियति है तो यही सही जीवन का संघर्ष तो अनवरत चलता ही रहता है तो मैं भी इसी अनवरत बहती जीवन नदी के साथ बहती ही जा रही हूं ।

तभी माँ की आवाज सुनाई दी।

नीना ने चौंक कर दरवाजे की तरफ देखा  जैसे किसी नींद से जागी हो ।बेटा स्कूल से वापस आ गया था और नीना को आवाज लगा रहा था । नीना ने मुस्कुराकर अपने बेटे को गले लगाया और आंचल के कोर से अपने आंसू पोंछे।  अब यही मेरा जीवन है मेरे हर दुख का मरहम है और हर बेचैनी का यही सुकून है। नीना की आंखों में एक सुकून और तसल्ली भरी मुस्कुराहट तैर गई जैसे उसने अपनी मुसीबतों को ठेंगा दिखाया हो कर लो जितना परेशान करना है मैं फिर भी खुश हूं।

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मनीषा श्रीवास्तव

बाराबंकी उत्तर प्रदेश

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