मेरे लिए आपका आशीर्वाद ही काफी है – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  आकाश और पूनम दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे | दोनों ने एक ही साथ एक ही कालेज से मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी और संयोग से दोनों को नौकरी भी एक ही कंपनी में मिल गया | कालेज के समय से शुरू हुई दोस्ती प्यार में बदल गया था और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था|  दोनों अपने माता- पिता की सहमति चाहते थे, पर अभी तक उन्होंने उन्हें बताया नहीं था | वे चाहते थे, पहले नौकरी लग जाये और करियर व्यवस्थित हो जाये, फिर उन्हें बतायेंगे और शादी करेंगे | अब नौकरी लग गई थी और करियर व्यवस्थित हो गया तो वे अपने माता- पिता से बात करना चाह रहे थे | दोनों ने आपस में परामर्श कर छुट्टी ली और अपने -अपने घर चले गये | 

          पूनम के पिता बैंक मैनेजर थे और माँ प्रोफेसर थी |उसका एक छोटा भाई था, जो इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था | उसने जब अपने घर में आकाश के बारे में बताया तो किसी ने आपत्ति नहीं की और अपनी सहमति जताई | साथ ही आकाश को उनलोगों से मिलवाने को कहा | पूनम बहुत खुश हुई और उसने फोन से आकाश को सारी बातें बताई और अपने यहाँ आने को कहा | आकाश ने कहा कि वह अपने माँ- पिताजी से सहमति लेकर उनके साथ आ जायेगा |

       आकाश के पापा शहर के नामी बिजनेसमैन थे और आकाश उनकी इकलौती संतान था | वह उसे बहुत प्यार करते थे और उसकी सारी बातें मानते थे | आकाश को पूरा विश्वास था कि उसके मम्मी- पापा उसकी बात जरूर मानेंगे |उसने अपने मम्मी- पापा को पूनम के बारे में बताया |मम्मी कुछ कहती उसके पहले पापा ने उसकी बात काट दी और बताया कि वे उसकी शादी अपने दोस्त जो एक बिजनेसमैन है, की बेटी से करना चाहते हैं || इस विषय में उसने अपने दोस्त से बात कर ली है, हांलाकि उनकी बेटी का मन पढाई में नहीं लगता है और उसने सिर्फ ग्रेजुएशन किया है,पर उसे कौन सी नौकरी की जरूरत है | अतः आकाश को उसी से शादी करनी होगी |

आकाश की मम्मी ने भी उन्हें समझाना चाहा, पर वे अपनी बात पर अडे रहे |आकाश अपनी जिद पर था और वे अपनी जिद पर | दो दिन यूँ ही बीत गये | आकाश को लौटना भी था |                                तीसरे दिन आकाश ने जब फिर वही बात शुरू की तो पापा ने समझाया-” देखो आकाश, मैंने तुम्हारी हर जिद मानी है |तुम्हारे लिए सारे सुख सुविधा जुटाए है, तो तुम्हें भी मेरी बात माननी चाहिए |मैंने तुम्हें  नौकरी करने दिया , ताकि एक दो साल नौकरी कर और मैनेजमेंट की पढ़ाई द्वारा तुम बिजनेस की बारिकियां सीख सको और कुछ अनुभव प्राप्त कर सको , पर तुम्हें संभालना तो अपना ही बिजनेस है |कौन सा तुम्हें जीवन भर नौकरी करना है? तुम अभी ही नौकरी छोड़ कर आ जाओ और मेरे दोस्त की बेटी से शादी करो |यह संबंध हमारे लिए सामाजिक, आर्थिक और हर दृष्टिकोण से फायदेमंद है | मैं यही चाहता हूँ |”

       “पर पापा मैं पूनम से प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ |” आकाश बोला |

         “यह प्यार -व्यार के चक्कर को छोडो़ |नौकरी और उसे दोनों को छोड़ कर यहाँ आ जाओ |” पापा ने कहा |

       ” यह मुझसे नहीं होगा |” आकाश बोल पडा |

       “तो फिर जाओ, करो उससे शादी और रहो वहीं, पर फिर मै तुम्हें अपने पैसे और संपत्ति में से कुछ नहीं दूंगा |” पापा गुस्से से बोले |

        ” ना मुझे आपके पैसे चाहिए, ना आपकी संपत्ति | दे सकते हैं तो अपना आशीर्वाद दे ंं| मैं जा रहा हूँ और आपलोगो का इंतजार करूँगा |  मैं आप दोनों से बहुत प्यार करता हूँ और आपलोग अपना आशीर्वाद देगें तो हमें अच्छा लगेगा |” कहते हुए आकाश ने अपना बैग उठाया , उनके पैर छुए और चला गया | माँ रोकती रह गई पर आकाश न रूका |

           दो माह बाद आकाश और पूनम की शादी  बहुत धूमधाम से हुई | आकाश के पिता ने अपने दोस्त से माफी मांग ली और उसकी माँ की यह जिद भी मान ली कि आकाश को भले ही उनके पैसे और संपत्ति नहीं चाहिए पर उन्हें तो अपना बेटा – बहू, पोता- पोती से भरा घर चाहिए ही चाहिए | आकाश और पूनम नौकरी छोड़कर अपने घर के बिजनेस से जुड गये और माता- पिता की बेटा-बहू, पोता-पोती से भरा घर देखने की इच्छा भी जल्द ही पूरी हो गई |

सुभद्रा प्रसाद

# ना मुझे आपके पैसे चाहिए, ना आपकी संपत्ति

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