मैं क्या टीवी सीरियल की सास हूँ ? –  संगीता अग्रवाल 

” ये क्या बहू तुमने बस चावल बनाए हैं तुम्हें पता है रोहित को सिर्फ दाल चावल नही पसंद साथ में रोटी सब्जी भी चाहिए… फिर भी !” शारदा जी अपनी बहू मीनाक्षी को अपने बेटे रोहित का टिफिन लगाते देख बोली।

” मम्मी जी मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है जल्दबाजी मे जो बन गया ठीक है ना । ये कुक को भी अभी गांव जाना था अब नई कुक जाने कब मिलेगी !” मीनाक्षी जल्दी जल्दी सब करते हुए बोली।

” क्या यहां तुमने कुक लगा रखी है मतलब खाना तुम खुद नहीं बनाती हो ?” शारदा जी आश्चर्य से बोलीं।

” मम्मी जी मुझे रोहित से पहले ऑफिस के लिए निकलना होता है क्योंकि मेरा ऑफिस दूर है सुबह की चाय , नहाना धोना पूजा पाठ उसके बाद अपना और उसका लंच पैक करना इतना ही काम हो पाता है बस अब खाना बनाने लगी तो हो गई बस नौकरी इसलिए हमने कुक रखी हुई है!” मीनाक्षी ये बोल रोहित का टिफिन रख अपना ले निकल गई।

मीनाक्षी और रोहित दोनों पति पत्नी जिनकी शादी को दो साल हुए हैं। मीनाक्षी जहां नॉएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर है वहीं रोहित नेहरू प्लेस की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर। दोनों की शादी परिवार ने करवाई है। दोनों के परिवार वाले मेरठ रहते हैं। शादी से पहले मीनाक्षी दिल्ली मे जॉब करती थी बाद में उसे नॉएडा में अच्छा पैकेज मिला तो उसने नौकरी बदल ली थी। दोनों पति पत्नी वर्किंग हैं इसलिए घर में सफाई बर्तन को मेड और खाना बनाने को कुक रख रखी थी।

दो दिन पहले रोहित की माताजी शारदा जी कुछ दिन को बेटे बहू के यहां आई थीं । मीनाक्षी उनके आने से खुश थी बहुत और अपने ऑफिस में छुट्टी की एप्लीकेशन भी लगा रखी थी। आज उसे अपना अधूरा काम पूरा करने जाना था फिर पंद्रह दिन वो घर पर ही रहने वाली थी।



” अरे मम्मी जी खाना आपने क्यों बनाया ?” शाम को मीनाक्षी घर आई तो सास को रसोई में देख बोली।

” हां तो अपने बेटे को यूं अपने सामने रूखा सूखा खाते देखती रहूं और ना ही मैं ऐसा खाना खा सकती हूँ !” शारदा जी तुनक कर बोली उनकी बोली में तलकाहट मीनाक्षी ने साफ महसूस की पर हंस कर टाल गई।

” मम्मी जी आपकी बेटी जैसी बहु भी तो वही रूखा सूखा खाती है !” मीनाक्षी हंस कर बोली।

” हां तो तुझे किसने मना किया बना और खुद भी खा मेरे बेटे को भी खिला!” शारदा जी बोली।

” मम्मी जी चाहती तो मैं भी हूं पर नौकरी से बंधी हूं अपनी !” मीनाक्षी मायूसी से बोली।

अगले दिन चूंकि मीनाक्षी ने छुट्टी ले रखी थी तो उसने सुबह उठकर सब्जी – रोटी,  दाल – चावल सब बनाए!

” चलो छुट्टी के बहाने ही सही मेरे बेटे को ढंग का खाना तो मिलेगा नाश्ते में उसकी पसंद के आलू के पराठे बना दो अब जब घर पर हो ही तो !” मीनाक्षी को रोहित का टिफिन पैक करते देख शारदा जी ने कटाक्ष किया मीनाक्षी को बुरा तो लगा।

” जी मम्मीजी !” इससे ज्यादा कुछ बोलना मीनाक्षी ने उचित नही समझा।

” अरे मीनू ये क्या बनाया है नाश्ते में . तुम्हे तो पता है मैं पराठें नहीं खाता मुझे मेरे ओट्स ही दो !” नाश्ते की मेज पर रोहित पराठे देख बोला।

” अरे अब बहू घर में है तो अपनी पसंद का नाश्ता कर ना क्या वो बीमारों वाला खाना खाता है रोज देख कितना कमजोर हो गया दो साल में ही। बहू को तो बस नौकरी प्यारी तेरा तो कुछ ख्याल ही नही!” मीनाक्षी के कुछ बोलने से पहले ही शारदा जी बोल पड़ी।

” मां मीनाक्षी को सबका ख्याल है पर नौकरी में बंधी है वो …दो दिन से देख रहा हूं आप उसे बात बात पर एहसास दिला रहे हो कि जैसे वो अच्छी पत्नी नहीं है! रही ओट्स की बात वो मैं अपनी मर्जी से खाता हूं ।” रोहित बोला।

” मजबूरी को मर्जी का नाम मत दे मैं खूब जानती हूं कुक का खाना पसंद नहीं आता होगा इसलिए इन सबकी आदत डाल ली तूने !” शारदा जी हाथ नचा कर बोली।

” माँ कुक बहुत अच्छा खाना बनाती है और ऐसा नहीं की मीनाक्षी कुछ बनाती ही नहीं छुट्टी वाले दिन वो मेरी पसंद की चिजे भी बनाती है पर क्योकि ऑफिस मे सारा दिन बैठने का काम है इसलिए मैं सुबह पराठें ना खाकर ओट्स खाता हूँ जिससे मेरा पेट ना निकले आप क्या चाहती हो मैं मोटा लाला बन जाऊं !” रोहित मोहोल को हलका बनाने के लिए बोला।



” अरे पराठे खा कौन मोटा होता है ये सब भी बहु ने भरा होगा तेरे दिमाग़ मे जिससे इसे काम से छुट्टी मिले !” शारदा जी तूनक कर बोली।

” मां मेरी प्यारी मां ऐसा नही है और आप क्या ये सीरियल की सास जैसे अपनी बहू को ताने दे रहे हो…आपकी बहु मुझसे ज्यादा कमाती है फिर भी जितना बन पड़ता घर संभालती है। मां ये सास बहू वाले तमाशे न टीवी पर ही अच्छे लगते है हकीकत में नही। आप एक बार मीनाक्षी को तनुजा ( रोहित की बहन) समझ कर देखो अगर तनूजा जॉब करती होती तो क्या उसे परेशानी ना होती क्या आप तब भी तनूजा को ऐसे ही ताने देती !” रोहित मां के गले में बांह डालते हुए बोला।

” मैं क्या तुझे टीवी सीरियल की सास नजर आ रही हूं जो तमाशे करती हैं !” शारदा जी रोहित को आंखें दिखाती हुई बोलीं।

” और नहीं तो क्या वरना मेरी मां तो प्यारी सी स्वीट सी हैं ! अब आप ऐसे ही कटी कटी रहोगी मीनाक्षी से तो मैं बोल दूंगा उसे कल ही नौकरी छोड़ देगी वो फिर चाहे किस्त ना चुकाने की दशा मे घर और गाड़ी चली जाये चाहे हमें किराये के घर मे रहना पड़े और मुझे ऑफिस बस मे धक्के खाते हुए जाना पड़े । ” रोहित उदास होने का नाटक करते हुए बोला।

” चल चल बहुत हुआ ये तमाशा ये सिर्फ टीवी पर अच्छा लगता है हकीकत में नहीं। अभी नाश्ता खत्म कर और आज ये पराठा ही खा ले बहू ने मेरे कहे से बनाया है कल से वही खाइयों अपने ओट्स !” शारदा जी रोहित के गाल पर चपत लगाते हुए बोली। और तीनों हंस दिए।

अब क्योंकि शारदा जी सास हैं तो आप उनसे इतनी जल्दी सुधरने की या मीनाक्षी से माफी मांगने की उम्मीद तो ना ही करो पर हां इतनी उम्मीद तो कर सकते है कि अब मीनाक्षी को कम ताने सुनने को मिलेंगे क्योकि शायद वो समझ गई हैं बहू भी कमाती है इसलिए बेटा भी खुश रहता है पर प्रत्यक्ष में मानने को जो तैयार हो जाए तो वो सास ही क्या।

कैसी लगी आपको ये प्यारी सी कहानी बताइएगा जरूर

आपकी दोस्त

संगीता

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