दर्द रिश्तो का – मुकेश पटेल 

रामनाथ जी दिल्ली के एक सरकारी बैंक में मैनेजर थे  उनकी शादी के 20 साल गुजर चुके थे  लेकिन अभी तक उन्होंने संतान सुख की प्राप्ति नहीं की थी  उनकी पत्नी सुनंदा इस बात को लेकर हमेशा चिंतित रहती थी कि भगवान उनकी कोख में भी एक बेटा या बेटी दे दे इसके लिए सुनंदा ने  हर उपाय करके देख लिया था । मंदिर, मस्जिद और  गुरुद्वारे सब जगह सुनंदा  ने माथा टेका कैसे  भी उसका गोद भर जाए।  उनके किसी दोस्त ने आईवीएफ के लिए भी सलाह दिया तो सुनंदा और रामनाथ जी ने दो बार वह भी करा कर देख लिए लेकिन वह सक्सेस नहीं हुआ।

दोस्तो सब कुछ इंसान के हाथों में नहीं होता है किस्मत भी एक चीज होती है अगर सब कुछ इंसान के चाहने से हो जाए तो फिर लोग भगवान पर भरोसा नहीं करेंगे उन्हें लगेगा कि इंसान जो चाहे वह कर सकता है।



आखिर में फैसला यह लिया गया कि राम नाथ जी का भाई श्याम नाथ जो कि गांव में ही खेती किसानी करते थे उनके चार बेटे थे उनकी आमदनी इतनी नहीं थी कि वह चारों बेटे को अच्छी तरह से पालन पोषण कर सकें।

श्याम नाथ जी का छोटा बेटा जो अभी मात्र 5 साल का था उन्होंने अपने बड़े भाई रामनाथ जी को दे दिया।  लेकिन शर्त यह रखी कि आपको मेरे बेटे को कानूनी रूप से अपना बेटा मानना होगा।  रामनाथ जी इस बात के लिए तैयार हो गए और वह कोर्ट में जाकर अपने छोटे भाई के  सबसे छोटे बेटे विनीत को कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया।  अब वह उन लोगों के साथ दिल्ली आ गया। रामनाथ जी ने विनीत  एडमिशन दिल्ली के एक बड़े स्कूल में करा दिया ताकि उसकी पढ़ाई सही तरीके से हो सके।

धीरे-धीरे समय बिता और अब  विनीत 15 साल का हो चुका था और इधर रामनाथ जी भी रिटायर होने वाले थे। रामनाथ जी और सुनंदा विनीत से इतना प्यार करते थे  की उसकी किसी भी गलती पर उसे कभी नहीं  रोकते टोकते थे इसका नतीजा यह हो गया कि विनीत जिद्दी हो गया था उसे जो चीज चाहिए था जिद करके अपने माता-पिता से पूरा करा ही लेता था।  रामनाथ जी कई बार अपनी पत्नी से कहते थे कि सुनंदा इसकी इच्छाओं पर रोक लगाओ।  इसके लिए सही नहीं है लेकिन सुनंदा जी अपने पति को यह कहकर चुप करा देती थी कि कितनी मुश्किल से तो हमें एक बेटे की प्राप्ति हुई है सब इसी का तो है मरेंगे तो  तो क्या हम अपने साथ ले जाएंगे।

अब  विनीत कॉलेज में पहुंच गया था।  लेकिन कॉलेज में उसकी गिनती अच्छे विद्यार्थी के रूप में नहीं बल्कि उस कॉलेज के सबसे नालायक लड़के में गिनती होती थी।  माता पिता के लाड़ प्यार  ने उसे इतना बिगाड़ दिया था कि उसकी कोई भी कमी उन्हें नजर ही नहीं आती थी।  वह अब शराब भी पीने लगा था सिगरेट गुटखा खाना तो आम बात हो गई थी।



विनीत अब कई दिनों तक रात को घर भी नहीं आता था जब मां पिताजी उससे पूछते तो बोल देता था कि दोस्त के यहां पढ़ाई करने गया है क्योंकि एग्जाम सर पर है और हम लोग मिलकर तैयारी करते हैं।

1 दिन राम नाथ जी की तबीयत अचानक से रात में बिगड़ गई और उन्हें तत्काल हॉस्पिटल ले जाया गया सुनंदा जी ने जब अपने बेटे विनीत के पास फोन लगाया तो उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था उन्होंने उसके दोस्त अमित के पास फोन लगाया, “बेटा विनीत को फोन देना उसकी पापा की तबीयत बहुत खराब हो गई है उसे बोलो जल्दी से वह हॉस्पिटल पहुंचे।”  अमित ने फोन पर जवाब दिया “आंटी जी विनीत  इतनी रात में मेरे यहां कहां से होगा।”  सुनंदा का माथा ठनका “क्या बात कर रहे हो बेटा वह तो रोज घर से यही कह कर जाता है कि तुम्हारे यहां पढ़ाई करने जा रहा है।”

अमित ने बताया कि आंटी जी वह आज तक कभी भी हमारे घर नहीं आया है बल्कि वह तो कई महीनों से कॉलेज भी नहीं आ रहा है हमें ऐसा पता चला है कि वह रोजाना रात में बीयर बार में जाता है लेकिन आंटी जी यह बात विनीत से मत बताइएगा कि मैंने आपको ऐसा बताया है।

एक तरफ तो सुनंदा जी अपने पति की तबीयत से टेंशन में थी और यहां बेटे की बातें सुनकर और भी टेंशन में हो गई।

रामनाथ जी को मामूली सा हार्ट अटैक आया था सुबह ही उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया वह घर आ चुके थे लेकिन उस दिन विनीत शाम को घर आया। विनीत जैसे ही घर के अंदर कदम रखा सुनंदा जी ने कहा, “विनीत वहीं रुक जाओ आज के बाद तुम्हारे  लिए इस घर में कहीं जगह नहीं है।  तुम हमें इतने दिनों से बेवकूफ बनाते रहे कि तुम दोस्त कि साथ  पढ़ाई करने जाते हो लेकिन तुम तो वहां 1 दिन भी गए ही नहीं हमें पता चल गया है कि तुम रोजाना रात में कहां जाते हो।

  हमने सोचा था कोई बात नहीं एक ही बेटा है जितना तुमने पैसा मांगा हमने तुम्हें दिया हमने कभी भी नहीं पूछा कि इस पैसे का क्या करते हो लेकिन तुमने हमारे पैसे और विश्वास का नाजायज फायदा उठाया।  कल तुम्हारे  पापा को हार्ट अटैक आया था तुम्हें तो इस बात का पता भी नहीं होगा।  तुम अभी  इस घर से निकल जाओ मैं नहीं चाहती हूं कि तुम्हारी इस करतूत के बारे में तुम्हारे पापा को पता चले मैं तुम्हारे पापा से कह दूंगी कि तुम अपने मम्मी पापा के पास वापस लौट गए।  हमें नहीं चाहिए ऐसा बेटा।  इससे तो अच्छा है कि हम बिना बेटा के रहे तुम्हारे जैसा नालायक बेटा भगवान किसी को ना दे कितने विश्वास से हमने तुम्हें पाला था।



विनीत समझ गया था कि अब  समझदारी इसी में है कि सुनंदा जी और रामनाथ जी से माफी मांग ले नहीं तो वह कहां जाएगा और फिर इतनी ऐशों आराम की जिंदगी उसे कहां मिलने वाली है उसका बाप तो वैसे ही गरीब है उसके तीनों बड़े भाई गांव में ही खेती किसानी करते हैं उसे भी जाकर खेती-किसानी करना पड़ेगा इससे अच्छा है कि माफी मांग कर बात को यहीं  खत्म कर लो।

वह सुनंदा जी के पैरों में जाकर गिर पड़ा माफी मांगने लगा मां सिर्फ एक बार मुझे माफ कर दो एक बार तो कोई मां अपने बच्चे की गलती को माफ कर ही सकती है मुझे नहीं पता था कि ऐसा हो जाएगा मेरे कदम बहक  गए थे आज के बाद मैं आपकी और पापा की कसम खाता हूं कि मैं कभी भी शराब को हाथ भी नहीं लगाऊंगा और रोज रात में ही घर पर रहूंगा प्लीज मम्मी पापा को यह सब कभी मत बताइएगा।

मां का दिल तो बहुत कोमल होता है ऊपर से जितनी कड़क होती है उतनी ही अंदर से नरम आखिर विनीत को उन्होंने अपने बेटे की तरह पाला था विनीत की बातों से  सुनंदा जी पिघल गई और विनीत को माफ कर दिया।

विनीत अब घुल मिलकर सुनंदा जी और रामनाथ जी के साथ रहने लगा वह अपने पापा रामनाथ जी का खूब सेवा करता रात में सुनंदा जी और रामनाथ जी को दूध देने के बहाने उनके दूध में नींद की गोली डाल देता और रात में घर से बाहर चला जाता अब रोजाना का उसने यह नियम बना लिया था रात में ही वह घर भी वापस आ जाता था सुनंदा जी और रामनाथ जी को कुछ भी पता नहीं चलता था विनीत रात में क्या करता है।

सुनंदा जी और रामनाथ जी सुबह अक्सर यह चर्चा करते थे कि कई दिनों से ना जाने क्यों अब सो कर उठने पर सिर भारी भारी सा लगता है।  उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा उनकी दूध में नींद की गोली मिला देता है।

1 दिन विनीत जब अपनी मां को दूध देकर अपने कमरे में चला गया  सुनंदा जी  जैसे ही दूध पीने के लिए उठी हाथ से दूध गिर गया।  उन्होंने सोचा अब कौन दोबारा दूध लेने जाएगा कोई बात नहीं एक दिन दूध नहीं पियूंगी तो क्या हो जाएगा।

रात के 2:00 बज रहे थे दरवाजे पर खटाक  की आवाज आई  सुनंदा जी को यह एहसास हो गया कि कोई दरवाजा खोल रहा है उनको लगा कि कहीं घर में चोर तो नहीं घुस रहे हैं।  वह जैसे ही अपने रूम से बाहर निकली उन्होंने देखा

विनीत  बाहर से अंदर आ रहा है।  उन्होंने विनीत को देखकर विनीत से पूछा विनीत तुम इतनी रात में कहां से आ रहे हो।  क्योंकि विनीत बहुत नशे में था उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था सामने कौन खड़ा है और किस से क्या बात करनी है।  वह पूरी तरह से नशे में ट्यून था।  सुनंदा जी ने दोबारा से पूछा विनीत तुम बता क्यों नहीं रहे हो कहां से आ रहे हो।



विनीत ने अभद्र तरीके से सुनंदा जी को  जवाब दिया बुढ़िया चुपचाप जाकर अपने कमरे में सो जा ज्यादा जांच पड़ताल करने की जरूरत नहीं है नहीं तो यही गला दबा दूंगा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी रोज तो तुम्हारे दूध में नींद की गोली मिला देता हूं आज गोली कैसे नहीं असर किया।

सुनंदा जी को अब माजरा पता चल गया कि  उन दोनों का सुबह-सुबह सिर क्यों भारी रहता है इसका मतलब रोजाना रात में विनीत हम लोगों को दूध में नींद की गोली मिला देता है।

सुनंदा जी अब गुस्से में हो गई थी वहीं पर एक डंडा पड़ा  हुआ था और उन्होंने उठाया विनीत को मारने के लिए लेकिन विनीत नशे में था उसने अपनी मां से डंडा छीन लिया।  और उस डंडे से  गुस्से में अपनी मां के सर पर मार दिया चोट इतना गहरा था सुनंदा जी के प्राण पखेरू वही उड़ गए।  विनीत को जब पता चला कि अब सुनंदाजी नहीं रही उसके होश ठिकाने आ गए 1 मिनट में उसका नशा फट गया।  वह डर गया था उसे लगा पिताजी को पता चलेगा तो उसे जेल की हवा खानी होगी उसने अपने बचने के लिए अपने पिताजी को तकिए से दबाकर उनका भी काम तमाम कर दिया।

घर में जितने भी पैसे और सोने चांदी के जेवर थे उसे लेकर उसी समय वहां से भाग गया।

विनीत एक लड़की से प्यार करता था उसके भाई का ट्रैवल का बिजनेस था उनको सब कुछ बता दिया और अपनी प्रेमिका को लेकर दुबई भागने की तैयारी करने लगा।

इधर दो-तीन दिन हो गए घर में कोई चहल-पहल ना देखकर पड़ोसियों ने पुलिस को फोन कर दिया।  जब पुलिस आई तो देखी अंदर से सड़ी हुई लाश की दुर्गंध आ रही है।

पुलिस जब अंदर गई  तो देखा कि सीढ़ियों पर सुनंदा जी की सड़ी हुई लाश पड़ी है और अंदर कमरे में रामनाथ जी की।

पड़ोसियों ने बताया कि उनके घर में इनका एक गोद लिया हुआ बेटा भी रहता था जो दो-तीन दिनों से वह भी दिखाई नहीं दिया।

पुलिस का शक सीधा विनीत पर हुआ उन्होंने उसका फोन ट्रैक किया और पता चला कि वह दिल्ली एयरपोर्ट पर है पुलिस की टीम जल्दी से पहुंचकर विनीत को पकड़ लिया और उसी समय हवालात में भर्ती कर दिया।

दोस्तो यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है और  और इस कहानी से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि अगर हमारे पास कोई संतान नहीं है और हम कोई संतान गोद लेते हैं  तो उसके प्यार में इतना भी अंधा मत हो जाइए उसकी गलती को भी आप नजरअंदाज करते जाएं क्योंकि वह आपके लिए शुरू में तो छोटी गलती लगेगी लेकिन बाद में इतनी बड़ी गलती हो जाएगी जिसको आप चाह कर भी सुधार नहीं कर सकते इसीलिए दोस्तों चाहे आपका गोद लिया हुआ बेटा हो या आपका खुद का जन्मा हुआ बेटा शुरू से ही उन पर नियंत्रण रखें यह पता करें कि वह कहां जाता है क्या करता है।

दोस्तों उम्मीद है आपको यह प्रेरक सामाजिक कहानी जरूर पसंद आई होगी तो फिर मिलते हैं एक और नई कहानी के साथ तब तक अपने दोस्त को दीजिए धन्यवाद।

स्वरचित

मुकेश पटेल (संस्थापक,बेटियाँ डॉट इन)

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