बेरंग से रिश्तों में रंग भरने का समय आ गया है – पूजा शर्मा : Moral stories in hindi

होली का त्यौहार आने में अभी एक हफ्ता बचा था और विकास के दोनों बच्चों ने अभी से अपने अपने रंग गुब्बारे गुलाल सब इकट्ठे करने शुरू कर दिए थे।

 बच्चे होली की तैयारी में पूरी तरह मस्त थे। सच में सारे त्योहारों का मजा तो बचपन में ही लिया जाता है बड़े होने के बाद यह दिन बहुत याद आते हैं। उन्हें देखकर विकास को भी अपना बचपन याद आ गया था कैसे हम तीनों भाई बहन मिलकर गुब्बारे में कितने दिन पहले पानी भर भर कर रखना शुरू कर देते थे। 

 और छत पर खड़े होकर कभी-कभी तो आने जाने वालों को भी गुब्बारे फेक कर मारा करते थे। और जब वह शिकायत करने हमारे घर आते थे तो कितने डांट पड़ती थी पापा से हमें। जाने कहां चले गए वो दिन। लड़ते थे और फिर थोड़ी देर बाद ही एक हो जाते थे लेकिन आज हम तीनों भाई बहनों को आपस में मिले हुए 5 साल हो चुके थे।

मां क्या मरी हमारे आपस के संबंध भी ना के बराबर हो गए कभी-कभी मैसेज पर या फोन पर दोनों से बात हो जाती है। बड़े भैया मुंबई में नौकरी करते हैं और छोटी बहन राखी बेंगलुरु में है और विकास हैदराबाद में अपने बच्चों के साथ रहता है। हमारे बच्चे तो कभी जान ही नहीं पाएंगे कि उनका भी परिवार है।

तभी अचानक विकास के फोन पर भाई साहब का फोन आ जाता है। आज उन्हें भी अपना बचपन बहुत याद आ रहा था उन दोनों ने कॉन्फ्रेंस कॉल में अपनी बहन को भी शामिल कर दिया था। तीनों भाई बहन कितनी देर तक अपने बचपन की बातें करते रहे। ऐसा लग रहा था जैसे सब कुछ आंखों के सामने फिर से जीवित हो गया हो।

तब बड़े भाई साहब ने अपने दोनों भाई बहनों से कहा कि इस बार होली का त्योहार तुम हमारे साथ मनाना प्लीज मना मत करना तुम सब लोग मुंबई आ जाओ। बच्चे भी एक दूसरे को जान जाएंगे उन्हें भी पता होना चाहिए कि उनका भी कोई परिवार है। हम लोग खुद में इतने व्यस्त हो गए कि सगे भाई बहन भी इतनी दूर हो गए हैं।

विकास की पत्नी ने कहा हम अपना घर छोड़कर दूसरों के यहां होली कैसे मनाएंगे हमारा घर क्या त्यौहार पर खाली रहेगा यही बात रखी के पति ने भी कही थी लेकिन जिद करके उन्होंने अपने परिवार को मना लिया और एक हफ्ते की छुट्टी लेकर बड़े भाई साहब के घर मुंबई भी पहुंच गए। घर में जैसे रोनक आ गई।

थी उनके दोनों बच्चे बड़े हो चुके थे और वह कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे वे अपने चाचा और बुआ को देखकर बहुत खुश हुए और उनसे गले लिपट गए। क्योंकि वह उनके साथ रह चुके थे तब अक्सर उनका मिलना होता रहता था लेकिन राखी और विकास के बच्चे उनसे ज्यादा परिचित नहीं थे इसलिए वह पहले तो थोड़े झिझके लेकिन फिर अपने भाई बहनों में खूब घुल मिल गए।

सबने एक साथ बैठकर होली का पूजन किया और अगले दिन के लिए गुंजियां मठरी और खाने का तरह-तरह का सामान भी सब ने मिलकर बनाया। इस बार होली फिर से उसी तरह खेली गई। जैसा बचपन में हम खेलते थे बच्चे भी कितनी देर तक डीजे बजा कर नाचते रहे और एक दूसरे पर रंग लगाते रहे सच में आज त्यौहार का दुगना मजा हो गया था

सारा परिवार एक साथ इकट्ठा था। तीनों नंद भाभियों की अलग जोड़ी बनी हुई थी और राखी का पति और दोनों भाईयों की अलग महफिल जमी हुई थी। रसोई का काम भी तीनों मिलकर कर लेती थी और फिर सारा समय घूमने फिरने में जाता था बच्चे तो बहुत खुश थे। बच्चे भी रात भर जाग जाग कर कितनी बातें करते थे।

लग ही नहीं रहा था जैसे उनका आपस में कोई परिचय नहीं है। अपने बच्चों को अपने बचपन की बातें बताते बताते हैं ऐसा लग रहा था जैसे किफिरसे बचपन में आ गए हो एक हफ्ता कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। इस बार तीनों भाई बहनों ने आपस में यही तय किया कि हर साल हम त्यौहार इसी तरह मनाया करेंगे अगले साल होली विकास के घर और फिर राखी के घर इस तरह त्योहार पर सबका मिलना हो जाएगा और हमारा परिवार आपस में जुड़ा भी रहेगा।

अपने बेरंग से रिश्तों में फिर से रंग भरने का समय आ गया है। अब हम अपने रिश्तों में प्यार का रंग कभी फीका नहीं पढ़ने देंगे। और समय-समय पर एक दूसरे के लिए फुर्सत जरूर निकाला करेंगे। अगली पीढ़ी भी आपस में जुड़ी रहे यही प्रयास करेंगे। सा रा परिवार इस नई पहल पर बहुत खुश था। इस होली पर सबको पता चल गया था कि अपनों के बना हर त्यौहार फीका है। आज बेजान से बड़े रिश्तो में फिर से जान आ गई थी। 

 बिल्कुल सही बात है इंसान सुख या दुख दोनों में अपनों के साथ के बिना अधूरा है। हमारे बड़ों ने कहा भी है इंसान अकेला ना रोता हुआ और ना हंसता हुआ ही अच्छा लगता है। अगर परिवार का साथ हो तो खुशी दुगनी हो जाती है और गम आधा हो जाता है।

 पूजा शर्मा

 स्वरचित।

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