अनोखा रिश्ता – अनिता वर्मा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : ऐ औरत कौन है ? दादू इनसे क्या रिश्ता है आपका, आखिर लगती कौन है “ऐ” आपकी।

मै एक सप्ताह के लिए इंडिया जा रहा हूं डैड ब्रेक फास्ट करते हुए शाश्वत ने बताया, अरे यूं अचानक तुम्हें वहां जाने की क्या पड़ गई? पिता जी टिशू से हाथ पोछते हुए सवाल किए कुछ ख़ास काम नहीं है कुछ दोस्त जा रहे हैं तो …. तो क्या…. मुंह से बेटे के शब्द छीनते हुए पिताजी गुर्राए तुम्हे पता है ना अभी अपना नया प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है , और तुम्हारी शादी भी तो है अगले महीने……ओह! डैड मै कौन सा इंडिया जाकर बसने वाला हूं, बस कुछ ही दिनों की तो बात है…… ओके.ओके जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, 

शाश्वत बैग में  कपड़ों के साथ ,बचपन की कुछ धुंधली यादें लिए निकल पड़ता है । एयरपोर्ट से बाहर आते ही पिता की पुरानी पॉकेट डायरी से एड्रेस निकाल कर टैक्सी से अपने गंतव्य की ओर चल पड़ता है।

 बाहर का दृश्य देख बार बार चेहरे का भाव बदलते रहता है , उफ्फ कितनी भीड़ है यहां, कैसे जाहिल लोग है, …..डैड बिल्कुल सही कहते है, इंडिया में देखने या रहने जैसा कुछ है ही नहीं …… बाबूजी आ गए …ड्राईवर ने मानो उनकी एकग्रता भंग की.. टैक्सी पर बैठे बैठे ही हवेली नुमा तीन मंजिली इमारत पर नज़र मारी , कितनी जर्जर हो गई है, जैसे बूढ़ी हो गई हो जगह जगह से दीवार में बड़ी बड़ी दरारें नज़र आ रही थी।

डोर बेल बजाने पर एक महिला दरवाज़ा खोलती हैं उम्र यही कोई साठ के आस पास कद काठी सामान्य, रंग गेहुंआ साड़ी का पल्लू कमर में खोंस रखी थी जैसे आम तौर पर घरेलू काम में व्यस्त महिलाएं बांधी रहती हैं ।

 दरवाजा खोलते ही  पूरे अधिकार से सवाल दागती है कौन हो तुम? किससे मिलना है ?आज से पहले कभी नहीं देखा तुम्हें! 

मै शाश्वत हूं द्वारिकाप्रसाद जी से मिलना है , वो मेरे दादा जी हैं। संदेह भरी नज़रों से देखते हुए अन्दर आने का इशारा करती है।

कमरे में व्हील चेयर पर बैठे सख़्श बहुत बूढ़ा और निशक्त दिखाई दे रहा था , प्रणाम दादू उनके चरण स्पर्श करते हुए शाश्वत ने पूछा कैसे हैं आप, मै तो ठीक हूं पर तुम कौन हो ? बुढ़ापे पर विस्मृत पड़ी धूल को झाड़ने का निर्थक प्रयास करते हुए पूछता है। मै आपके निशांत का बेटा शाश्वत ।

क्या तुम निशांत के बेटे हो ….

सुना तुमने आशा ऐ निशांत का बेटा है …

 आशा को ध्यान आया कि  कुसुम ताई अक्सर अपने विदेश जा बसे बेटे का ज़िक्र करती थी। 

दूसरे दिन झगड़ने की बहुत तेज़आवाज़ से शाश्वत की नीद टूटी । बुज़ुर्ग चीख चीख कर बोल रहे थे, मुझे जहर दे के मार क्यूं नहीं देती रोज रोज के तेरे अत्याचार से मुझे भी मुक्ति मिल जाएगी सौ बार कह चुका हूं ,छोड़ कर चली क्यूं नहीं जाती मुझे मेरे हाल पर …..हां चली ही जाऊंगी मुझे भी तुम्हारे ऐ  जली कटी सुनकर कोई बहुत आंनद नहीं आता, अगर ताई को जुबान नही दी होती तो कब की चली गई होती कहते हुए रो पड़ी…… बुजुर्गों के पैर पर लगी चोट पर मरहम कर रही थी… I

         आशा के जाते ही शाश्वत कमरे में आता है कितनी बुरी तरह आप ने डांटा दादा जी, जब से आया हूं देख रहा हूं कितनी सेवा कर रही है आपकी बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह, आपके इतनी दुत्कारने के बावजूद भी कितना ख्याल रखती है आपका आखिर है कौन है क्या लगती हैं आपकी क्या रिश्ता है आपका इनसे.??

सबकुछ है ऐ मेरी “सबकुछ” माँ, बहन, बेटी, (दैहिक संबंधो को ना जोड़ा जाए तो) पत्नी है, प्रेमिका है, मेरे लिए जमाने के सारे रिश्ते इनमे समाहित है, उन्नीस साल से ऐसे ही निष्काम भाव से मेरी सेवा कर रही है, एवज में दो वक्त का खाना और साल भर में दो जोड़ी कपड़े लेती है।

एक मंदिर में झाड़ू पोछा का काम करती थी, सड़क दुर्घटना में पति मारे जाने से बेघर हो गई थी, तेरी दादी अपने साथ ले आई, तब से हमारे साथ है तेरी दादी को वचन दिया था आखरी सांस तक इस घर की सेवा करुंगी, उन्ही वचनों से बंधी हुई है अब तक, शाश्वत हैरानी से देखता रहा  दादा जी की ओर, कोई एक वचन के खातिर अपना पूरा जीवन कैसे सामर्पित कर सकती है।

उसी शाम शाश्वत के पिता जी का फ़ोन आता है कब आ रहे हो?

नही आ रहा हू डैड!

क्या…… तुम्हें पता है यहाँ तुम्हारी कितनी जरूरत है?

हां पता है लेकिन वहाँ से जादा किसी को मेरी यहां जरूरत है।

ऐसा क्या मिल गया तुम्हें इंडिया में?

मुझे वो मिल गया है डैड जो आपने बरसों पहले खो दिया था

मुझे इंडिया में “भारत” मिल गया है डैड, पूरी दुनियाँ में अगर कोई रहने लायक जगह है तो यहीं है.…भारत, “मेरा भारत, महान भारत”

 अगर अपको सही मे मेरी जरूरत है तो आप भी आ जाइए डैड,

  बेटे की बात सुनकर इतने भावुक हो गए कि गला रूँध गया आँखो के कोर गीले हो गए, हाथो से फ़ोन की पकड़ ढीली हो गई, पास खड़ी पत्नी की सिसकी निकल पड़ी फिर भी मुस्कुराते हुए पति के आँखो में देखकर कहती हैं तो सामान बाँध लूँ चले अपने घर पति स्वीकृति में सर हिला देता है…….

स्वरचित

 अनिता वर्मा

भिलाई छत्तीसगढ़

1 thought on “अनोखा रिश्ता – अनिता वर्मा : Moral stories in hindi”

  1. ये और ऐ का अंतर समझिये। हर ये के लिये ऐ प्रयोग नहीं किया जाता।

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