वो बुला रही है मुझे” – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : माधव की उम्र तब मात्र 4 वर्ष का थी, जब एक दिन वह पिताजी की उंगली पकड़कर घर से थोड़ी दूर स्थित छोटी पहाड़ी पर उछलते-कूदते जा रहा था, तभी उसने देखा कि आम के एक पौधे को बकरी खा रही है.. पिताजी ने उस बकरी को भगाकर, उस पौधे के चारों तऱफ कटीली झाड़ियों से घेरा बनाकर उस पौधे को संरक्षित करते हुये कहा..

“बेटा इस पौधे को समय-समय पर खाद और पानी दोगे तो यह पौधा तुम्हारा आजीवन साथी बनेगा”

इस बात पर माधव ने मासूमियत से पूछा “पर पिताजी मेरे तो वैसे भी बहुत साथी है, दोस्त हैं, भाई है, आप और माँ भी है, तो फ़िर मुझे भला इस छोटे से पौधें को अपना साथी बनाने की क्या जरूरत है?

पिताजी ने कहा बेटा “इंसानी रिश्ते वक्त के साथ बदल जाते हैं” कल यह पौधा ही बड़ा होकर तुम्हारा सच्चा साथी बनेगा। पिताजी के यह “ब्रह्मवाक्य” माधव ने मन मे गांठ बांध कर रख लिये..

माधव और वह आम का पौधा दोनों ही वक्त के साथ धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे, माधव एक दिनचर्या की तरह हर दिन, छोटी पहाड़ी पर जाकर उस पौधे को उसकी जरूरत के हिसाब से खाद, पानी देता और पशुओं से उस पौधे की रक्षा करता.. अगले बारह तेरह साल बाद तो उस पौधे को खाद पानी की जरूरत ही नहीं पड़ी.. बल्कि वह पौधा तो एक आम का युवा वृक्ष बन चुका था, उससे फ़ल आना भी शुरू हो गए थे..

माधव भी क़रीब 17 वर्ष का हो चुका था, हलांकि उस आम के वृक्ष को अब माधव के देखभाल की जरूरत नहीं थी, पर पता नहीं क्यों माधव के कदम रोज़ ख़ुद-ब-ख़ुद उस पहाड़ी की तरफ़ चल देते.. उसे उस वृक्ष को देख कर जो संतुष्टि मिलती थी वह शायद उसे कहीं और नहीं मिलती थी, जिस दिन किसी वज़ह से माधव उस पहाड़ी तक नहीं जा पाता, उसे पूरे दिन कुछ अधूरा सा प्रतीत होता था..

उसने पहाड़ी के छोटे बड़े पत्थरों के जोड़ कर उस आम के वृक्ष के चारों और एक चबूतरा बना लिया था.. अब जब भी क़भी माधव को फुर्सत मिलती थी, वह अपना खाली वक़्त उसी आम के नीचे अपने ही बनाये चबूतरे पर बैठकर बिताया करता था।

★★

बसंत के बाद जब आम के पेड़ में छोटी छोटी कैरीयां लगती थी, तो माधव घर से नमक और मिर्च लाकर कच्ची कैरी को तोड़कर, नमक मिर्च लगाकर चटकारे लेकर खाया करता था।

एक दिन दोपहर को माधव उसी आम के नीचे सुस्ता रहा था, तभी पीछे से एक युवती की खनकती आवाज़ ने उसे चौका दिया…

ए “बाबू” ज़रा इस पेड़ से कुछ आम तोड़ दो मेरे लिये, माँ ने अचार के लिए मंगाए हैं.. उस युवती ने कहा..

माधव ने उसे झिड़कते हुये कहा, इस पहाड़ी पर दूसरे भी तो आम के पेड़ हैं, तुम उनसे क्यों नहीं तोड़ लेती हो?

वह युवती इठलाते हुए बोली.. नहीं इस आम की बात कुछ और है, इसलिए मुझे तो बस यही आमियां चाहिए, जल्दी तोड़ के दो, वह युवती इतने अधिकार से माधव को बोली कि माधव उसे मना नहीं कर सका, वह उस पेड़ पर चढ़कर क़रीब आधा बोरी आमियां तोड़ लाया, और उस लड़की को देकर बोला, चलो आज पहली बार आई हो इसलिए दे देता हूँ, मग़र अब रोज-रोज न चले आना यहाँ आम माँगने को…

वह युवती मुस्कुराते हुये माधव को धन्यवाद करते हुऐ मेरा नाम ‘माला” है, मै त्रिपाठी जी की बेटी हूँ।

★★★

माधव को याद आया कि उसके पिताजी और त्रिपाठी जी की बड़ी अच्छी दोस्ती थी, पूजापाठ में भी वह दोनों कई जगह पर साथ साथ जाकर पुरोहिती किया करते थे, माला को भी माधव ने बचपन में ही देखा था, पर वह कब इतनी बड़ी हो गई माधव को पता ही न चला..

माला बहुत सुंदर और सुशील लड़की थी, सारे गाँव के युवक उसे बहुत पसन्द करते थे, उसके लिए दूर दूर से बड़े अमीर परिवारों से रिश्ते भी आ रहे थे, पर माला उन सबको कुछ न कुछ बहाना बनाकर मना कर देती थी। वह त्रिपाठी जी की इकलौती बेटी थी, इसलिए वह भी माला की इच्छा का सम्मान करते थे..

दूसरे दिन दोपहर को जब माधव उसी आम के नीचे बैठा था, माला फ़िर आई और बोली बाबू थोड़े आम दे दो न आज चटनी बनानी है..

माधव ने चिढ़ कर कहा, अब तुझे रोज़ रोज़ आम देने का मैंने कोई ठेका नही ले रखा, आज मैं कोई आम नहीं दूंगा..

उसकी बात से दुःखी होकर जब माला जाने लगी, उसका दुखी चेहरा देखकर माधव को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा.. जैसे ही माला पहाड़ी से के थोड़ा नीचे उतरी, पीछे-पीछे माधव कुछ आमियां लेकर उसके पीछे भागा भागा आ गया और पूछा इतने आम से चटनी तो बन जायेगी न?

माला ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुये आम ले लिये और माधव से इतराकर कहा…”हुँह “..

अग़र वहीं पर ये आमियां मुझे दे देते तो तुम्हें इतनी दूर भागकर मेरे पीछे पीछे नहीं आना पड़ता न ?

माधव ने भी चिढ़कर माला से कहा, देख माला आज तो ये आमियां दे रहा हूं, पर कल मत चली आना वहाँ फ़िर से आम लेने को..

★★★★

क्या होगा अगले भाग में? माला और माधव का प्रेम परवान चढ़ेगा अथवा माला के पिता उसके लिए कोई उपयुक्त वर देखकर माला का विवाह अन्यंत्र कर देंगे… जानने के लिये प्रतीक्षा कीजिये… कल तक..

मित्रों हमारे बुजुर्गों की कही हुई छोटी-छोटी बातें बहुत बार हमारे जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डाल सकती है, यह दर्शाती हुई एक कहानी लिखी है, थोड़ी बड़ी कहानी है, इसलिए 3 भागों में लिखी है, यह अगले दो दिन में पूर्ण पोस्ट हो जाएगी.. आशा है आपको यह कहानी भी पसंद आये..

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अविनाश स आठल्ये,

वो बुला रही है मुझे” भाग 2

वो बुला रही है मुझे” (भाग – 2 ) – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

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