तू इस तरह मेरी जिन्दगी में शामिल है (भाग -9)- दिव्या शर्मा : Moral stories in hindi

बारिश में भीगता शेखर रिक्की के चेहरे पर खुशी देखकर खुश हो जाता है।वह रिक्की के साथ डाँस करने लगता है।शेखर भूल जाता है कि तृप्ति उसका इंतजार कर रही है और आज उनकी मैरिज एनिवर्सिरी है।

दोनों के भीगे जिस्म एक दूसरे को छूने लगे।और एक बार फिर एक दूसरे में डूब गए।रात के बारह बज चुके थे।शेखर अपने फोन को उठा कर देखता है तो तृप्ति की दस मिसकॉल थी।वह घबरा कर रिक्की की ओर देखता है।वह बेफिक्र सो रही थी।शेखर जल्दी से अपने कपड़े पहनता है जो अब तक सूख चुके थे।

वह चुपचाप कमरे से निकलना चाहता है लेकिन रिक्की जाग जाती है और कहती है,

“थोड़ी देर रुक जाओ न शेखर।अभी तो रात बाकी है।”

“नहीं रिक्की।यह भी हो रहा है गलत है और मुझे लगता है कि हमें दोबारा कभी नहीं मिलना चाहिए।मैं तृप्ति को धोखा नहीं दे सकता।” शेखर ने कहा।

“धोखा! यदि किसी को खुशी देना धोखा है तो तुम धोखा दे चुके हो।यदि उसे कोई बताएगा नहीं तो उसे कैसे पता चलेगा कि हमारे बीच क्या हुआ है?” रिक्की ने शेखर का हाथ पकड़ते हुए कहा।

“मुझे तो पता है न कि मैं क्या कर रहा हूँ!प्लीज भूल जाओ सब।” इतना कहकर शेखर उसके कमरे से बाहर चला गया।

रिक्की बिस्तर पर लेट गई और बुदबुदाई,

“तुम्हें भूलने के लिए याद नहीं किया था जानेमन।अब तो बस तुम मुझे याद रखोगे।”

रिक्की की आँखों में चमक आ गई।बेड के ठीक सामने लगी पेंटिंग को वह घूरने लगी।

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शेखर ने झिझकते हुए बेल बजाई।आत्मग्लानि से शेखर की गर्दन झुकी हुई थी।आखिर उसकी गलती माफी लायक भी नहीं।

तृप्ति ने दरवाजा खोला और शेखर को देखते ही पीठ फेर ली।घड़ी में रात के एक बज रहे थे।शेखर ने ध्यान से देखा।टेबल पर फूल और कैंडल्स सजी थी।खाना वैसे ही लगा हुआ था और क्राकरी भी उलटी रखी थी।

“तुमने… खाना नहीं खाया तृप्ति?” शेखर ने धीरे से पूछा।

“भूख मर गई थी।” इतना कहकर वह अपने बेडरूम में जाकर दरवाजा बंद कर लेती है।शेखर बंद दरवाजे के बाहर खड़ा लगभग रोने को था।

“मेरी बात तो सुन लो तृप्ति।बस एक बार।” वह रिक्वेस्ट करता हुआ बोला।लेकिन तृप्ति की ओर से कोई जवाब नहीं आया।शेखर का मन अनजानी आशंका से घबरा गया।वह दरवाजा खटखटाते हुए बोला,

“प्लीज तृप्ति, दरवाजा खोलो मैं मर जाऊंगा यार…प्लीज तृप्ति प्लीज।”

तृप्ति दरवाजा खोल देती है और चुपचाप एक ओर खड़ी हो जाती है।

“मुझे माफ कर दो तृप्ति, जरूरी काम से रूकना पड़ गया… प्लीज यार।” शेखर लड़खड़ाती जुबान से बोला।वह जानता था कि वह तृप्ति के विश्वास को तोड़ चुका है लेकिन उसे सच बता कर खोना नहीं चाहता था।मन ही मन खुद को कोसता शेखर तृप्ति के पैरों में बैठ गया।

तृप्ति छिटक कर दूर खड़ी हो जाती है और गुस्से से कहती है,

“काम जरूरी था मानती हूँ लेकिन मेरा फोन भी तुमने नहीं उठाया।मैं कितना डर गई थी।तुम्हें कुछ हो तो नहीं गया यह सोच सोचकर मर रही थी मैं!”

“माफ कर दो।दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी।”

शेखर तृप्ति को गले लगाते हुए बोला।

“ठीक है इस बार माफ करती हूं लेकिन याद रखना यह आखिरी गलती हो।वरना मुझसे बुरा कोई नहीं।” तृप्ति अपनी आँखों से शेखर को घूरते हुए बोली।

“कभी नहीं होगा।” शेखर उसके माथे को चूम लेता है।

अगली सुबह शेखर कुछ जल्दी उठ गया।तृप्ति अभी भी सो रही थी।शेखर का सिर दर्द हो रहा था वह किचन में जाकर चाय बनाने लगता है कि तभी उसका मोबाइल बजने लगता है।रिक्की का नंबर देख शेखर तनाव में आ जाता है।

फोन उठाकर वह फुसफुसाया,

“इतनी सुबह फोन की वजह!”

कहाँ हो जानेमन।शरीर टूट रहा है चले आओ एक बार प्लीज।”

रिक्की की आवाज़ सुन शेखर सकते में आ जाता है।उसकी आवाज़ बदली हुई थी और आवाज़ में शामिल कुटिलता साफ सुनाई दे रही थी।

“मतलब क्या है तुम्हारा?” शेखर हैरानी से बोला।

“मतलब साफ है यार…तुम्हारी आदत हो गई है मुझे।और वैसे भी उस लो स्टैंडर्ड तृप्ति तुम्हें क्या दे सकती है।मेरे पास चले आओ वह सब दूंगी जो तुम डिजर्व करते हो जानेमन।” तृप्ति बेशर्मी से बोली।

“देखो रिक्की, जो तुम सोच रही हो वैसा कभी नहीं होगा और न ही मैं होने दूंगा।” दाँतों को चबाकर शेखर ने जवाब दिया।

उसके जवाब पर रिक्की की तेज हँसी शेखर के दिल को जला गई।

“अपना व्हाट्सएप चेक करो और फिर मुझे फोन कर लेना।” रिक्की की हँसी शेखर के दिमाग को हथौड़ा मार गई।

व्हाट्सएप पर गुजरी रात का एक एक चित्र नजर आ रहा था जिसे देख शेखर की नसों में खून जम गया।बाथरूम से लेकर बिस्तर तक की हर एक तस्वीर जिसमें शेखर रिक्की से लिपटा नजर आ रहा था।

“बिच..मुझे मालूम था यह औरत घटिया है लेकिन तृप्ति!…हे भगवान कैसे फेस करूंगा तृप्ति को अब।” खुद से बुदबुदाता शेखर पसीने से भीग गया।

” बिच,तुम्हें छोडूंगा नहीं…बास्टर्ड।”

“तो कौन कह रहा है कि छोड़ दो!और सुनो ज्यादा स्मार्ट बनकर तृप्ति को यह वीडियो दिखाने की गलती न करना क्योंकि आज भी कानून औरतों के साथ है और वैसे भी तुम्हारा इंकार सुनते ही यह वीडियो ब्रेकिंग न्यूज़ के साथ सोशल मीडिया पर अपलोड तो कर ही दूंगी।” रिक्की बेशर्मी से बोली।

“तुम चाहती क्या हो मुझसे? क्यों पीछे पड़ी हो मेरे!” शेखर दाँत पीसकर बोला।

“क्या चाहतीं हूँ वह भी पता चल जायेगा।फिलहाल एक ऐड्रेस भेज रही हूं यहाँ पर चुपचाप जाकर वही करना जो मेरे साथ रात को किया।”

“मतलब!!” शेखर की समझ में कुछ नहीं आ रहा था।

“मतलब क्लीयर है।तुम्हें खुद को खर्च करना होगा मेरी क्लाइंट को खुश करने के लिए।सिम्पल सा काम है।मैं तुम्हे इसके दाम भी दूंगी।पूरे पचास हजार।” रिक्की की आवाज़ गर्म शीशा बन शेखर के कान में उतर गई।

(क्या शेखर रिक्की की बात मान लेगा या फिर तृप्ति को सब कुछ बता कर मुश्किल से निकलने की राह ढूंढेगा।क्या तृप्ति शेखर की बात पर यकीन करेगी।यह पढेंगे हम अगले भाग में।)

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