सपने में भी नहीं सोचा था – लतिका श्रीवास्तव

सुबह सुबह मोबाइल बज उठा मिताली जी ने जल्दी से चश्मा ढूंढ कर आंखों में लगाया हड़बड़ी में ठीक से लग ही नहीं पा रहा था फिर मोबाइल ऑन किया तो उनके पोते तुषार का फोन था…..” हेलो हां बेटा ….सब ठीक तों है ना!…..क्या कह रहे हो  ये तो मैने सपने में भी नहीं सोचा था …नही मुझे तो नही पता अभी देखती हूं.”..उन्होंने कहा…..

“….अरे दादी बधाई हो आप तो लेखिका बन गई हैं लाखो पाठको की पसंद बन गई हैं…..तुषार इतना उत्साहित हो कर बता रहा था मैं कल आपका सम्मान पत्र लेकर आ रहा हूं वो तो आप डाउनलोड कर नहीं पाएंगी…”…वो बोलता जा रहा और मिताली जी की दिल की रिक्त जगह  अनिवर्चनीय प्रसन्नता से भरती जा रही थी…….

करीब साल भर से जिंदगी में एक रिक्तता सी महसूस होने लगी थी उन्हें….सब कुछ था उनके पास ….ख्याल रखने वाले पति अविनाश…..बड़ा सा सर्व सुविधा युक्त मकान ….बेटा बहु भी साथ में रहते हैं।कोई किच किच नही है बहु भी जॉब करती है उनका ख्याल भी रखती है…..सभी तो उनके आस पास हैं,फिर भी वो अपने आप से ही दूर हो गई हैं……

जबसे उनके पोता पोती बाहर पढ़ाई करने चले गए जैसे मन का सारा उत्साह चला गया….ये दूरी और भी बढ़ गई।

सब कुछ है पर किसी के पास समय नहीं है उनसे बात करने का अविनाश की तो रिटायर्ड मित्र मंडली है वो उनके साथ व्यस्त और मस्त रहते हैं,बेटा बहु जॉब में हैं संडे को उनकी छुट्टी रहती तो है पर वो लोग आउटिंग पर निकल जाते हैं।उनसे कोई क्या बात करे!!!

अब तो उनके हाथों का खाना या नाश्ता भी  पिज्जा बर्गर के सामने किसी को भी पसंद नहीं आता है ……उम्र का ये दौर,खाली समय,खाली दिमाग कितना टी वी देखे कितना आराम करे!!!! कितनी पूजा पाठ करे!!!

अविनाश कहते हैं तुम्हारा कोई शौक भी तो नही है …..तुम भी लेडीज क्लब ज्वाइन कर लो। बेटा  बहु भी कहते हैं कोई शौक पालिए अब ….. “किटी ज्वाइन कर लीजिए मम्मी बुजुर्ग महिलाओं की अपनी अलग किटी है वो सब एक दूसरे के घर कभी पार्टी कभी पिकनिक का मजा लेते रहते है….

कभी भजन कीर्तन का आयोजन करते रहते हैं…”…..पर इन सब में उनका मन ही नही लगता है एक दूसरे के घरों की बातें, बहुओं की बुराई, टी वी सीरियल की चर्चा यही इनके मनोरंजन और टाइम पास के आधार है वो अच्छे से जानती थी….जिसमे उनका दम घुटता है।



तुम्हारा कोई शौक नहीं है!!अविनाश का वाक्य हथौड़े की तरह कई दिनों से उनके दिल को चोट पहुंचा रहा था…..मुझे   संगीत का शौक है क्या अविनाश भूल गए??मुझे लेखन का शौक है क्या अविनाश भूल गए ???शादी के पहले मेरे गीत और पत्रिकाओं में छपने वाले साप्ताहिक लेखों के तो वो दीवाने थे!!!

फिर धीरे धीरे घर गृहस्थी बच्चों की परवरिश रिश्तों की साझेदारी, निभाने की जिम्मेदारी में उनके सारे शौक तिरोहित होते चले गए….कई लेख कविताएं कहानियां उन्होंने लिखी थीं पर अविनाश के हतोत्साहित रवैए से कि…”अरे अब क्या करोगी ये सब लिख कर इनसे क्या फायदा अब रहने दो “…..उनकी लेखनी की धारा अप्रवाहित हो रुक गई।

कितनी तारीफ होती थी उनके लेखन की,कई पुरस्कार भी जीते थे उन्होंने जो अब भी बंद अलमारी से झांकते उनको मुंह चिढ़ाते हैं और उन्हें खुद से दूर करते जाते हैं……अब तो ये खालीपन और खुद से ही दूर हो जाने का एहसास उनमें कुंठा पैदा कर अवसाद की ओर ले जा रहा है हाई ब्लड प्रेशर रहने लगा है…नाश्ते के समान दवाइयां खानी पड़ती है….!

एक दिन  फिर से वो चुपचाप अपनी वर्षो पुरानी सहेज कर रखी रचनाओं को निकाल कर पढ़ रही थीं पढ़ क्या रही थी अपने होने का एहसास कर रही थीं खुद से खुद को मिलवा रही थीं…तभी तुषार आ गया था ….”ये क्या पिटारा खुला है आज दादी मां”…. और उनके रोकते रोकते भी उनसे छीनकर उसने सब पढ़ लिया ..”अरे वाह इतना बढ़िया आप लिखती है दादी “….

उसको बहुत आश्चर्य हुआ …”हां लिखती थी बेटा कभी “…उन्होंने दुखी मुस्कान से कहा ।आप लिखिए अभी भी दादी  “…..अब नहीं बेटा अब क्या फायदा लिखने से और अगर लिख भी लूं तो कौन पढ़ेगा ?!मैं तो कहीं आती जाती भी नहीं!!किसको पसंद आएगी ये सब???तभी तुषार ने ऑनलाइन ग्रुप से मुझको जोड़ते हुए कैसे कहानी लिखना है कैसे पोस्ट करना है सब बताया था …..

एक दिन डरते डरते उन्होंने अपनी एक कहानी पोस्ट भी कर दी थी ….अभी तक कोई जानकारी ना मिलने पर अपनी लेखन प्रतिभा की अक्षमता और ऑन लाइन ग्रुप की विश्वसनीयता पर शंकाओं का ताना बाना मन को बींध रहा था….. कि तुषार के फोन ने अचानक उत्साह और खुशी की लहर पैदा कर दी

तुरंत उन्होंने मोबाइल में ग्रुप की गतिविधि चेक की तो दिल की धड़कने तेज हो गई ….. लाखों पाठकों की पसंद बन चुकी उनकी रचना के सम्मान में उन्हें भी उस ईमानदार निष्पक्ष मंच द्वारा सम्मान पत्र प्रदान किया जा रहा था…

…..”.क्या बात है श्रीमती जी बहुत खुश नजर आ रही हैं आज सुबह से !कोई किटी ज्वाइन कर लिया है क्या आपने जिसका  इनाम आपके नाम निकला है ??”अविनाश ने मॉर्निंग वॉक से लौट कर कमरे में आते हुए पूछा।

जवाब में मिताली जी बस मुस्कुरा कर रह गईं बोलना तो चाह रही थी कि ….कुछ ऐसा हुआ है जो मैने सपने में भी नहीं सोचा था  परंतु बस इतना ही बोल पाई कि……कुछ नहीं तुषार आने वाला है इसलिए ……

तुषार उनके लिए सम्मान पत्र ही नही लाया था बल्कि उनके खालीपन को भरने का ,कुंठा से मुक्ति दिलाने का मंत्र ले के आया था वो अविनाश को कैसे बताती कि ऐसी किटी उन्होंने अब ज्वाइन की है जहां वो घर बैठे ही एक सुरक्षित माहौल में लाखों पाठकों के साथ साथ खुद अपने आप से भी मिल सकती हैं …अपने आपको सम्मानित कर सकती हैं…..।ऐसे सार्थक मंच के प्रति वो श्रद्धा से अवनत हो गई।

लेखिका : लतिका श्रीवास्तव

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