संस्कार शून्य  ! –  रमेश चंद्र शर्मा 

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माता-पिता की तमाम चेतावनी और विरोध के बाद भी निधि अपने प्रेमी निमिष से शादी की जिद पर अड़ी रही । खुले माहौल और कॉन्वेंट शिक्षा में  पली-बढ़ी निधि आधुनिक विचारों और रहन-सहन को अपनाने लगी। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद भी निधि के पिता सुरेश उसकी हर इच्छा की पूर्ति करते। निधि के बेहतर जीवन के लिए वे हर संभव समझौता करने को तत्पर रहते। निधि अपने प्रेमी के साथ क्लबों में जाने लगी। पिता की आपत्ति नजरअंदाज करती रही ।

निधि (पिता सुरेश से) ” पापा आपको मालूम नहीं है ।निमिष अपने बाप की इकलौती संतान है। उसके पास अकूत दौलत है।”

सुरेश (निधि से) ” बेटी तुम अभी बच्ची हो। हम सामान्य परिवार के लोग हैं।  दौलतमंद लोगों से रिश्तो का निर्वाह नहीं कर सकते।”

निधि “निमिष नेक लड़का है। उसके आसपास लड़कियों की लाइन लगी रहती है,फिर भी वह मुझसे शादी करना चाहता है।”




सुरेश “अब तुम वयस्क हो ।अपना भला बुरा समझती हो ।निमिष तुम्हारे योग्य नहीं है ।उसका पिता शहर का नामी भू माफिया है।”

निधि “मां-पापा, आप दोनों ग्रामीण परिवेश से आते हैं। इसीलिए आपकी सोच नकारात्मक है। अपनी इसी नेगेटिविटी के कारण आप जीवन में प्रोग्रेस नहीं कर पाए।”

उमा ( निधि की मां) ” लगता है तुम पर ग्लैमर हावी हो गया है ।हमारी छूट का तुमने दुरुपयोग किया है। हम दोनों ने अपना पेट काटकर सारे सपने ताक में रखकर उच्च शिक्षा दिलवाई है।”

निधि “आप दोनों को उपदेश देने के अलावा आता ही क्या है ? मैं अब दूध पीती बच्ची नहीं रही। हर पेरेंट्स अपनी औलाद को पालते-पोसते, पढ़ाते-लिखाते हैं।”

                               निधि ने माता-पिता की हिदायतों को नजरअंदाज कर निमिष से लव मैरिज कर ली। कुछ दिन ठीक-ठाक चलता रहा। निधि ने माता-पिता से संपर्क बंदकर रिश्ता तोड़ दिया। पब और नाइट क्लब के  आदि निमिष के साथ निधि भी नाइट क्लब जाने लगी। नशे में धुत निमिष क्लब में ही निधि से मारपीट करने लगा। 

 जल्द ही निधि  की सारी अय्याशियां निधि के सामने आ गई। रोज झगड़े होते। कुछ दिनों बाद अधिक नशा और ड्रग लेने के कारण निधि वहीं नाइट क्लब में दम तोड़ बैठी। सुबह-सबह सारे चैनल निधि और निमिष के मसालेदार रहस्य उजागर करने लगे।

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# रमेश चंद्र शर्मा 

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