सबसे बड़ी भूल – माता प्रसाद दुबे  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: रात के बारह बज रहे थे,जीवन के पैंसठ बसंत देख चुकी रमादेवी की आंखों से नींद गायब थी,वह अतीत के पन्नों में खोई हुई पुराने दिनो को याद कर रही थी,तीस वर्ष की अल्पायु में जब पति का साथ छूट गया था,छोटे-छोटे तीन बच्चों को पालने पोसने उन्हे शिक्षित करके समाज में उचित स्थान दिलाने की सारी जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई थी,पति रामनिवास सरकारी कर्मचारी थे,उनकी जगह पर तीस साल नौकरी करने के बाद पांच वर्ष पहले ही वह सेवानिवृत्त हुई थी।

जब रमादेवी के पति रामनिवास का देहांत हुआ था,उस समय उनका बड़ा बेटा प्रभात आठ वर्ष,छोटा बेटा आकाश छह वर्ष, और सबसे छोटी बेटी अंशिका मात्र तीन वर्ष की थी,रिश्तेदारों ने साथ छोड़ दिया था, बल्कि वे रामनिवास की बीस एकड़ जमीन हथियाने के फिराक में लगे हुए थे,

कस्बे की मेन सड़क के पास उनके परिवार का पुश्तैनी मन्दिर व उसकी सम्पत्ति सबकी देखभाल रमादेवी ने अकेले अपनी सूझबूझ व कस्बे के पंडित दीनानाथ जो कि उन्हें अपनी बहन मानते थे,उनकी मदद से रमादेवी ने सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए तीस साल तक सरकारी नौकरी करते हुए अपने पति की सम्पत्ति और बच्चों की देखभाल में अपना पूरा जीवन समर्पण कर दिया था।

आठ वर्ष पहले प्रभात और आकाश के कहने पर ही रमादेवी ने ना चाहते हुए अनमने मन से बच्चों की खुशी के लिए कस्बे की बीस एकड़ जमीन जिसकी कीमत करोड़ों रुपए थी उसे बेचकर दोनों भाइयों और बहुओ में बांट दिया था, जिससे दोनों भाईयों ने शहर में आलीशान मकान खरीद लिया था, और कस्बे वाला मकान खाली रहता था,जिसकी देखभाल पंडित दीनानाथ और उनका बेटा करता था।

रमादेवी ने सेवानिवृत्त होने के बाद लाखों रूपया अपने दोनों बेटों और बेटी अंशिका जिसकी शादी हो चुकी थी,सभी में बांट दिए थे,वह सिर्फ अपने बच्चों को खुश देखना चाहती थी, उसे जितनी पेंशन मिलती थी,वह ही उसके खर्चों के लिए पर्याप्त थी, उसके जीवन में धन दौलत का कोई मूल्य नहीं था।

रमादेवी का बड़ा बेटा प्रभात सरकारी सेवा में अधिकारी था, छोटे बेटे आकाश का लाखों का व्यापार था, प्रभात की पत्नी उर्वशी पहले रमादेवी के आस पास रहकर उसकी सुध लिया करती थी,मगर रिटायरमेंट के बाद उसके पास भी रमादेवी के पास बिताने के लिए समय नहीं था,छोटी बहू पूजा बेहद मार्डन स्वाभाव और हाव भाव में डूबी रहती थी, बुजुर्गो के प्रति उसका नजरिया बिल्कुल नकरात्मक था, रमादेवी अपने बहू बेटों के जीवन में किसी भी प्रकार की रोक-टोक नहीं करती थी,वह जानती थी कि आज का समय बदल चुका है।

रमादेवी के स्वर्गीय पति रामनिवास जी की पुण्य तिथि का दिन नजदीक आने वाला था, रमादेवी हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि के दिन कस्बे में अपने पुश्तैनी मन्दिर में भंडारे का आयोजन करवाती थी, जिसे पंडित दीनानाथ जी वर्षों से सम्पन्न कराते आ रहें थे,जिसमे रमादेवी के संग उनके सभी बच्चे बेटी दामाद सभी लोग शामिल होते थे,

शहर में रहने के बाद से ही प्रभात आकाश और उनकी पत्नियों का कस्बे के मन्दिर में अपने पिता की पुण्य तिथि के कार्यक्रम में भी शामिल होने में आनाकानी करने लगे थे,कभी प्रभात,कभी आकाश,कभी इनकी पत्नियां कुछ वर्षों से परिवार के सभी लोग उक्त भंडारे और पूजा में नही शामिल हों रहे थे,किसी न किसी बहाने से कोई रूक जाता था, रमादेवी को यह बात बहुत नागवार गुजरती थी,मगर वह इसे जाहिर नहीं करती थी।

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सबसे बड़ी भूल भाग 2

सबसे बड़ी भूल (भाग – 2) – माता प्रसाद दुबे  : Moral stories in hindi

 

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