दास्तान इश्क़ की (भाग -31)- अनु माथुर : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा…..

आदित्य सबको राधिका पर हुए हमले की बात बताता है और  कुछ क़रीबी रिश्तेदारों के साथ राघव और कावेरी की शादी हो जाती है

अब आगे……

राघव और कावेरी की शादी होने के बाद बाक़ी की रस्में करके  अगले दो दिनों में सब रिश्तेदार चले गए….

शीतल भी  रुपाली से जाने की बात करती है…… लेकिन वो उन्हें एक दिन और रुकने के लिए बोलती है और शीतल को बताती है कि कुलदेवी के मन्दिर जा कर सब लोग दर्शन कर लें फिर आप चले जाना…. शीतल देवेंद्र जी और आदित्य से बात करके रुकने के लिए मान जाती है….

अगले दिन सब रेडी हो कर मन्दिर जाने के लिए तैयार थे…….दो घंटे का रास्ता था मन्दिर का……..जाने की और वहाँ रुकने की सारी व्यवस्था वीर प्रताप ने कर दी थी…. लोग ज़्यादा तो गाडियाँ भी दो जा रहीं थी गाड़ी में एक – एक गार्ड था और बाक़ी गार्ड्स गाड़ियों के आगे पीछे … सब एक साथ निकले…सब बड़े एक गाड़ी में थे और बाक़ी सबको एक में….

सब अपने – अपने पाटनर के साथ बैठे थे ….भुवन आदित्य वाली गाड़ी चला रहा था और दूसरी वाली गाड़ी से आगे था….दूसरी गाड़ी किशन चला रहा था …

क़रीब एक घंटा हो गया था उनको निकले हुए….सब बातें करते हुए चले जा रहे थे….. अचानक भुवन कि आगे वाली गाड़ी की रफ़्तार कम हो गयी…. भुवन ने अपने फोन से आगे वाली गाड़ी चला रहे गार्ड से पूछा क्या हुआ?? गाड़ी की स्पीड कम क्यों कर दी???

आगे वाली गाड़ी चला रहे गार्ड ने कहा – “” सर कोई एक्सीडेंट हुआ है और पूरी सड़क पर लोग खड़े हैं”

एक्सीडेंट…. ??

एक्सीडेंट का नाम सुनकर सब एक दूसरे को देखने लगे… भुवन ने किशन को फोन करके बताया और किशन को बोला कि बाक़ी आने वाली गाड़ियों में जो गार्ड्स है उन्हें भी बता दो…

सबने अपनी गाड़ी की स्पीड कम की और एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर गाडियाँ खड़ी हो गयीं….

भुवन ने किशन को कहा – “बोलो किसी को देखने को कि क्या हुआ है ? “

किशन ने एक गार्ड को बाहर देखने के लिए बोला….. वो गार्ड देखने गया तो बोला एक्सीडेंट हुआ है…. उनको मदद चाहिए

किशन ने फोन करके भुवन को बताया…

आदित्य ने सारी बात सुन कर कहा – “बोलो गार्ड्स को मदद करने के लिए.”

आगे वाली गाड़ी के गार्ड्स निकले और जैसे ही वोजाने लगे उनकी गाड़ी के नीचे से धुआँ निकलने लगा  उनमें से एक गार्ड गाड़ी के नीचे देखने के लिए झुका और वहीं नीचे गिर गया ….. अब तक वो धुआँ गाड़ी के चारों तरफ फैल गया …. एक – एक करके सारे गार्ड्स आगे वाली गाड़ी के नीचे गिर गए…

भुवन  ने और बाक़ी सबने ये देखा तो समझ गए ये एक्सीडेंट नहीं हुआ हमला हुआ है….. भुवन ने किशन को पीछे वाली गाड़ी में बैठे हुए गार्ड्स को बाहर ना निकालने के लिए बोला…. लेकिन उस से पहले ही बाक़ी गार्ड्स मदद करने के लिए बाहर निकाल चुके थे….. उनका भी वही हाल हुआ जो आगे वाली गाड़ी के गार्ड्स का हुआ

किशन की गाड़ी में बैठे हुए गार्ड ने उसे  बताया की सारे गार्ड्स नीचे गिरे हुए है…..भुवन को सारी बात किशन ने बतायी…

धुआँ थोड़ा कम हुआ तो सबने देखा

20 -30 लोग हाथों में डंडे और हथियार लिया उनकी तरफ बढ़ रहे हैं…. किशन की गाड़ी में उसके अलावा का गार्ड वीर प्रताप जी, देवेंद्र जी, रुपाली और शीतल थे…. आदित्य ने अपनी गाड़ी में बैठे हुए गार्ड को उनकी सुरक्षा करने के लिए बोला…

राधिका ने आदित्य से कह – ” कुँवर यहाँ गाड़ी में बैठे रहने से कुछ नहीं होगा हमें लड़ना पड़ेगा… “

“लेकिन राधिका इन लोगो के पास हथियार हैं और हमारे पास कुछ नहीं ऊपर से काका, काकी, माँ और ताऊजी हैं ” आदित्य ने कहा

“इसीलिए तो और ज़रूरी है लड़ना कुँवर… वो एक गार्ड इन सबका सामना नहीं कर पायेगा.”

“मुझे लगता है भाभी ठीक कह रहीं हैं हमें लड़ना पड़ेगा” – राघव ने कहा

ठीक है …. आदित्य ने कहा

“अभी ये लोग कुछ दूर है उतरो वरना पास आ गए तो क्या पता गाड़ी के शीशे तोड़ दें ”  इस बार कावेरी बोली

तभी देवेंद्र जी का राधिका के फोन पर आया राधिका ने फोन उठाया

उधर से देवेंद्र जी ने कहा -” लाडो कौन हैं ये सब और गार्ड्स को क्या हुआ? “

“पता नहीं ताऊजी कौन हैं? हम लोग गाड़ी से उतर कर देखते हैं… फिर आपको बतायेंगे आप लोग कोई गाड़ी से मत उतरियेगा… “

ठीक है…लेकिन संभल कर – देवेंद्र जी ने कहा और फोन कट कर दिया

सब लोग गाड़ी के बाहर आ गए तब तक वो लोग भी उनके पास आ गए ….आदित्य और बाक़ी सबने देखा किसी के हाथ में डंडा, किसी के पास लोहे की रॉड, किसी के हाथ में लौहे की चेन थी |

भुवन ने पूछा – कौन हो तुम लोग….और क्या चाहिए….इस तरह रास्ता रोकने का और ये सब करने का क्या मतलब है???

उनमें से एक ने कहा –  हम किसी को कुछ भी नहीं करेंगे …. हमें बस ठाकुराइन को दे दो हम चले जायेंगे..

उनकी बात सुनकर कावेरी ने राधिका की तरफ देखा और धीरे  से कहा -” कह तो ऐसे रहे जैसे राधिका कोई मन्दिर का प्रसाद है कि दे दो और हम चले जायेंगे… “

उसके बात पर लाजो मूँह दबा कर हँसने लगी…

राघव ने कहा – और ना दें तो??

उनमें से जिसके हाथ में लोहे की रॉड थी वो उसे ज़मीन पर पटकते हुए बोला – ” फिर हम तुम सबको ऊपर पहुँचा देंगे… “

आदित्य ने कहा- भेजा किसने तुम्हें?

“उस से तुम्हें क्या मतलब”?? उसी आदमी ने कहा

“और किसने विक्रम ने “- राघव ने हँसते हुए कहा

भुवन ने कहा -” देखो अगर जीना चाहते हो तो चुपचाप चले जाओ वरना सब

मरोगे “….

“चुप हमें तुमसें बहस करने नहीं आए…हमें जो चाहिए वो लेने आए हैं ” कहते हुए जिस आदमी के पास लोहे का डंडा था वो उसे घसीटता हुआ आगे बढ़ा उसके साथ बाक़ी लोग भी आगे बढ़े….

भुवन, आदित्य और राघव ने एक दूसरे की  तरफ देखा …… राधिका, कावेरी और लाजो भी एक दूसरे की तरफ देखने लगे…

राधिका ने कावेरी को इशारा किया कावेरी ने उसका इशारा समझ कर उसे आँखों ही आँखों में जवाब दिया फिर उसने लाजो कि तरफ देखा लाजो ने भी उसके इशारे का समझ कर आँखों से ही इशारा किया

वो लोग एक साथ बढ़े चले आ रहे थे….जैसे ही उस आदमी ने रॉड से  आदित्य पर वार किया आदित्य ने उसकी रॉड को पकड़ा और न लात उसे पेट पर मारे….. भुवन ने झुक कर दूसरे आदमी के पैर पर मारा वो भुवन के इस वार के लिए वो तैयार नहीं था वो लडखडा कर गिर पड़ा.. और उसके पीछे जो आदमी था वो भी गिर पड़ा राघव ने जल्दी से उस पीछे वाले आदमी के हाथ से लोहे का डंडा लिया और उसे पीटने लगा

भुवन ने आगे बढ़कर उसके हाथ से डंडा छीना और उसके सिर पर ज़ोर से दे कर मारा वो आदमी वहीं बेहोश हो गया….

अब तीनों के हाथ में हथियार था…. आदित्य ने  सामने जो आया बस वो उसे पीट रहा था….

एक आदमी ने उन सबको अपने आदमी को पीटते हुए देखा तो उसने औरों का इशारा करके राधिका की तरफ जाने को बोला….

राधिका , कावेरी और लाजो तो पहले से ही तैयार थी….. जैसे ही वो आदमी राधिका के क़रीब आया राधिका झुकी उसने उसके पैर पर मारा वो गिरा तो दूसरे तो कावेरी ने पेट पर लात मारी

लाजो ने उसके मूँह पर पास में पड़ा हुआ पत्थर उठा कर मारा वो दर्द से चिल्लाया…. राधिका ने दूसरे आदमी को डंडे से मारा , कावेरी और लाजो ने भी डंडे से सबको मारना शुरू किया….

हर कोई लड़ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे कोई जंग का मैदान है….

इसी बीच एक आदमी ने पीछे से राधिका को धक्का दिया राधिका जमीन पर गिर गयी कावेरी ने देखा तो ज़ोर से चिल्लायी राधिका…..

सब एकदम से रुक गए…. उस आदमी ने राधिका के हाथ को पकड़ा और उसे खड़ा किया…..सबने  देखा राधिका के चेहरे पर चोट के निशान आ गए हैं उस आदमी ने राधिका के हाथ को पीछे की तरफ किया और ज़ोर से बोला -”  बस.. रूक जाओ सब वरना ये हाथ तोड़ दूँगा मैं सब रुक गए

राधिका की सांसे बहुत तेज चल रही थी उसके माथे से खून आने लगा था…आदित्य उसकी तरफ बढा तो उस आदमी ने कहा – ” ठाकुर साहब ये  गलती मत करना वरना अभी इनको जान से मार दूँगा मैं… वैसे भी हमें इनको मारने के लिए ही बोला है…. आदित्य वहीं रुक गया

“हाँ तो चलो अब सब एक लाइन में खड़े हो जाओ बहुत लड़ लिए..”… उस आदमी ने कहा

आदित्य, राघव, भुवन, कावेरी और लाजो सब एक तरफ आ गए…..

उस आदमी ने बोला और कोई है तो आ जाओ…..

किशन  गाड़ी में से सब देख रहा था Stat वीर प्रताप जी को पुलिस को फोन करने के लिए बोला….. दोनो गार्ड्स को वहीं छोड़ कर वो धीरे से गाड़ी से उतरा और छुपते हुए आदित्य की गाड़ी कि तरफ आया…… भुवन की नज़र उस पर गयी वो मन ही मन मुस्कुराया….

किशन ने चारों तरफ देखा….. तो उसे एक बड़ा सा पत्थर दिखायी दिखायी दिया और एक लोहे का डंडा…… उसने देखा जहाँ राधिका है उसके पीछे बस वो आदमी खड़ा है… और बाक़ी सब थोड़ा आगे खड़े है….

किशन बिना कोई आवाज़ किये गाड़ी के पीछे आया जहाँ से वो आदमी साफ दिख रहा था …. उसनें अपने हाथ में पकड़े हुए  पत्थर को निशाना लगा कर उस आदमी को मारा……

वो आदमी इस वार के लिए तैयार नहीं था वो जब तक कुछ समझता किशन ने फुर्ती से बाहर निकल कर उसके डंडे से मारा…

उस आदमी ने राधिका का हाथ छोड़ा…. इतना समय काफी था आदित्य और बाक़ी सबके लिया…..उन्होंने वापस से सबको मारना शुरू किया….

राधिका उस आदमी से छूट कर जमीन पर गिर गयी.. …

राघव ने आदित्य से कहा – आदि तुम भाभी  देखो…

आदित्य राधिका की तरफ गया और उसका सिर अपनी गोदी में रख लिया….

उसने राधिका से पूछा आप ठीक है??

राधिका ने हाँ में गर्दन हिलायी

कई लोग जमीन पर गिर चुके थे आदित्य ने देखा जिसने राधिका को मारा था वो किशन से लड़ रहा था….आदित्य ने लाजो को बुलाया और राधिका को देखने के लिए बोला…

आदित्य उस आदमी की तरफ  गया और उसकाे ज़ोर से धक्का दिया वो आदमी जमीन पर गिर गया….. आदित्य ने पास में पड़ी हुयी लोहे के चेन को अपने हाथ में लपेटा और उसे मारना शुरू किया…..

आदित्य ने कहा -” तेरी हिम्मत कैसे हुयी राधिका को हाथ लगाने की …. मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा ” कहते हुए वो उसे मारे जा रहा था

तभी जीप की आवाज़ आयी… पुलिस वहाँ आ गयी थी…

राघव ने देखा आदित्य उस आदमी को बुरी तरह मार रहा है वो उसके पास गया और बोला ‘ आदि छोड़ उसे मर जायेगा वो “

लेकिन आदित्य उसे मारे जा रहा था…. तभी फायरिंग की आवाज़ हुयी पुलिस ने सभी लोगो को पकड़ लिया….

राघव और भुवन ने आदित्य को पकड़ कर

उस आदमी से दूर किया आदित्य बोला ‘छोड़ो मुझे मैं इसे मार डालूँगा “

“आदि पुलिस आ गयी है…. वो देख लेगी तुम चलो और भाभी को देखो… “

राघव ने जब राधिका का नाम लिया तो आदित्य रुक गया उसने अपने हाथ की चेन उतार कर फेकी और राधिका के पास गया….

तब तक एम्बुलेंस भी आ गयी  थी राधिका को नर्स ने वार्डबॉय कि मदद से राधिका को एम्बुलेंस में लिटाया..

वीर प्रताप जी के साथ बाक़ी सब भी गाड़ी से उतर कर आ गए थे ….. देवेंद्र जी ने राधिका को देखा तो उनकी आँखों में नमी उतर आयी …

बाक़ी सबको भी चोट आयी थी….. वीर प्रताप जी ने कहा – ” अभी सब हॉस्पिटल चलो बाक़ी बात बाद में करेंगे…

सब हॉस्पिटल पहुँचे सबको कहीं ना कहीं चोट लगी थी डॉक्टर ने सबको चेक किया राधिका को उन्होंने एडमिट किया और बाक़ी सबकी चोट पर नर्स को बैनडेज करने के लिए बोला…..!!!

कहानी का ये भाग आशा करती हूँ पसंद आया होगा… जल्दी ही नये भाग के साथ मिलूँगी…..

धन्यवाद

स्वरचित

कल्पनिक कहानी

अनु माथुर 

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