बुढ़ापा – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

मेडिका हॉस्पिटल के प्राईवेट केबिन में पड़ी मैं सत्तर साल की जानकी भगवान से प्रार्थना कर रही हूं मुझे अपने पास बुला ले… आंखों से आंसुओं की बरसात हो रही है… आज हीं डॉक्टर डिस्चार्ज करने के लिए बोला था पर बड़े बेटे राहुल के पास समय नहीं था और बहु अटेंडेंट के लिए जिन एजेंसियों में संपर्क की थी उन्होंने कल भेजने को बोला है…

                 ये तो भगवान की कृपा है मेरे पति ने स्वास्थ्य बीमा मेरे नाम का करवा दिया था जो अब काम आ रहा है… बैंक में कुछ रकम मेरे नाम से फिक्स कर दिए थे.. एक घर भी मेरे नाम से है..और मेरा पेंशन कुल मिला कर मैं किसी पर निर्भर नही हूं पर ये #बुढ़ापा #जाने कैसा दिन दिखा रहा है… सात महीने पहले सीढ़ियों से गिर गई थी… छोटे बेटे के पास जाने के उत्साह में खरीदारी करने गई थी.. मॉल का एक लिफ्ट खराब था दूसरी लिफ्ट में बहुत लोग लाइन में थे इसलिए सीढ़ियों से आ रही थी…

कमर की हड्डी और हाथ की हड्डी टूट गई… हॉस्पिटल में एडमिट रही पच्चीस दिन… सोचा छोटा बेटा रोहन और बेटी रोमा सुनते हीं दौड़े चले आयेंगे… पर…. बेटा के ऑफिस में विदेश से डेलीगेट्स आ रहे थे और बेटी बोली मां मैं तो बेचैन हूं आने के लिए पर आशु के मंथली टेस्ट हैं मार्क्स फाइनल में जुड़ते हैं… वैसे भी मां बाप की सेवा बेटे बहु को करने का फर्ज है… ओह यही आशु होने वाला था तो मैं पूरे डेढ़ साल रोमा के साथ रही… बेड से उठने नही दिया…

क्या कुछ नही किया… आराम करने का वक्त भी नही मिल पाता था.. अड़ोस पड़ोस वाले कहते मां ऐसी होती है… बहुत भाग्यशाली हो रोमा.. तीज त्यौहार जन्मदिन सालगिरह पर तीनों बच्चों के लिए उपहार खरीदना नही भूलती .. राहुल के बच्चे हुए तो बहु मान्या को बिछावन पर से उतरने नही देती..

बच्चे की मालिश नहाना सबकुछ अपने हाथों से करती.. मां आप सास नही मां हैं मेरी.., और मैं निहाल हो उठी..रोहन आया छठिहार में तो सबके सामने मेरे गले में हाथ डालते प्यार से बोला मां अनु भी मां बनने वाली है.. उसे भी तुम्हारी जरूरत है. तुम सास नही मां हो…. और मै खुशी खुशी उसे आश्वस्त किया बेटा मैं आ जाऊंगी… पति के मरने के बाद मैं बच्चों में व्यस्त रहती… मेरे समय भी कट जाता और खुशी भी होती.. थक जाती पर उत्साह बना रहता मैं अपने बच्चों के लिए कुछ कर रही हूं..

         पच्चीस दिन बाद जब डिस्चार्ज होकर घर आई तो मन बहुत दुखी था … बेटा बेटी मिलने नही आए सोचा था सुनते दौड़ते चले आयेंगे… बहु एक दिन भी हॉस्पिटल नही आई..

नर्स के सहारे छोड़ दिया था… बेटा कभी कभी ऑफिस से लौटते वक्त थोड़ी देर के लिए आ जाता. एक दिन बेटा मुझसे पावर ऑफ एटरनी मांगने लगा… उसे दे दूं.. मैने इंकार कर दिया तो भड़क गया.. रोहन और रोमा तो पूछ भी नही रहे हैं.. और उस दिन से राहुल भी हॉस्पिटल आना बंद कर दिया… दरवाजे पर से नजर नहीं हटती विजिटिंग आवर में… कोई तो आयेगा मिलने…. घर आने पर माहौल बदला हुआ था.. मेरे रूम से बेदखल कर कोने वाला छोटा रूम में शिफ्ट कर दिया गया..एसी तो दूर कूलर भी नही था..

बहुत कहने पर स्टैंड फैन लगा… बहु अटेंडेंट के हाथ से खाना भिजवा देती… फिजियोथेरेपी के लिए एक लड़की आती थी उसने मुझे बहुत हिम्मत दी… पर मेरा आगे क्या होगा ये सोचते सोचते बेहोश हो गई.. होश आने पर हॉस्पिटल में पाया खुद को… नर्स ने बताया बीपी हाई हो गया था शुक्र था गॉड का की आपके नाक से ब्लीडिंग हो गई वरना कुछ भी हो सकता था… अंडर ऑब्जरबेशन मुझे एक सप्ताह के लिए रोक लिया गया..

फिजियोथेरेपी करने वाली लड़की नेहा मुझे समझाती आप हिम्मत करो और अपने बच्चों को सबक सिखाओ.. मैने कहा #बुढ़ापे #अब मैं क्या सबक सिखाऊंगी मैं खुद सबक सीख रही हूं.. अपने हीं बच्चों से.. मैं नेहा की मदद से धीरे धीरे चलने लगी थी.. नेहा ने बताया शहर में एक वृद्धाश्रम है जहां बहुत अच्छी तरह से देखभाल की जाती है.. मैं वहां जाती हूं फिजियोथेरेपी करने… आप के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, पेंशन है और बैंक में भी पैसे हैं.. आप वहां जाइए आपको अच्छा लगेगा.. जिनके बच्चे विदेश में हैं ज्यादातर वही बुजुर्ग वहां हैं..

      मैं धीरे धीरे खुद को तैयार करने लगी…

      दुबारा  डिस्चार्ज हो कर घर आ गई… बेटा दुबई के ट्रिप पर जा रहा है बहु और बच्चों को भी जाना है… पर मैं एक बोझ की तरह ओह…

        बहु तेज आवाज में फोन पर कांफ्रेंस में रोहन और रोमा से बात कर रही है… बहुत हो गया अब तुम लोग ले जाओ.. हमारी जिंदगी नरक हो गई है… तीनों को पैदा की है तो जिम्मेदारी भी तीनो की है… बहुत बोझ उठा लिया अकेले अब नही…. रोहन और रोमा मुझे ले जाने या आने में असमर्थता जता रहे हैं.. बहु चिल्ला रही है… हमलोग कल चले जायेंगे.. फिर मत कहना बताया नही.. अब ये बूढ़ी मरे या जिए… कानों में जैसे किसी ने पिघला हुआ गर्म सीसा उड़ेल दिया हो..

         राहुल अपने परिवार के साथ चला गया… जाते समय मिलने भी नही आया.. नेहा मेरी सूजी आंखें देख पूछ बैठी क्या हुआ.. और मैं फफक पड़ी… और फिर मैने फैसला कर लिया मुझे वृद्धाश्रम में जाना है… अगले दिन नेहा कैब बुलवा लिया और मुझे वहां ले गई.. जाते वक्त बहुत रोई.. पर मन को समझाया तीन बच्चों को जनम देने के बाद भी मैं बांझ हूं….

            यहां आकर मुझे अच्छा लग रहा है… सब बहुत केयर करते हैं.. अपने हमउम्र बुजुर्गों के साथ अच्छा लग रहा है.. नेहा रोज आती है.. यहां आकर लगा #बुढ़ापा #और अपने संतान के मारे बहुत लोग हैं दुनिया में.. मैं अकेली नहीं..# बुढ़ापा #आजतक किसी को नहीं छोड़ा है ये जवान लोग क्यों नही समझ पाते हैं…

                        पूरे दस दिन हो गए मुझे यहां आए… स्टाफ आया है मुझे बुलाने आपके बेटा बहु आए हैं, आपने कहा था मेरा कोई नही है.. मैं जाती हूं आवेश में राहुल के बोलने के पहले हीं मैं बोल उठती हूं मै निःसंतन हूं. इसे नही पहचानती.. मेरा अंतिम संस्कार आश्रम के लोग हीं करेगे.. और मेरा जो है सब मेरे बाद आश्रम का होगा.. इसे मैं नही पहचानती. ये पैसे के लिए मेरे पास आया है .. राहुल बहु वापस थके कदमों से जा रहे हैं और मैं अपनी दुनिया में जहां मेरे जैसे बहुत लोग हैं…

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

 

Veena singh

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