भाई साहब बिंदी भी क्या चीज है । नारी के माथे पर लगे तो नारी का श्रृंगार पुरूष के माथे पर लगे तो तिलक । बिंदी को नारी के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सच कहू तो ब्रम्हांड का आकार भी तो बिंदी के समान है । जीवन के आरंभ में भी बिंदी और अंत में फिर बिंदी के आकार का ।
क्या कहू इस बिंदी की महिमा को हिंदी के शब्दों में भी बिंदी का बड़ा महत्व है । हिंदी में बिंदी का उपयोग अक्षरों में लगाने के लिए किया जाता है ।इसका इतना महत्व है कि इसके बिना हिंदी अधूरी है । अलग-अलग स्थानों में इसका अलग-अलग अर्थ है ।
कही आरंभ में आधा म है तो कही अंत में आधा न है , कही चुंबक है तो कही चिंतन हैं । कभी अक्षर के उपर लग जाता है तो कभी नीचे कभी दायें में तो कभी बाये में कही हिंदी में बिंदी अनुस्वार है तो कही चंद्र बिन्दी कही आगत स्वर , द्वित्व ( उत्क्षिप्त) ध्वनि दो बिंदी से विसर्ग है ।
अतः में विसर्ग का उदाहरण हैं । ह: ह: ह: में अलग ही अर्थ है । भाई साहब मुझे तो आज तक ये समझ नही आया कि है और हैं मे और में क्या अंतर है । ड़ और ढ़ का अंतर तो और भी कठिन है । ड. इसकी बात तो तुम पूछो ही मत । फ़ारसी भाषा में तो बिंदी का बड़ा महत्व है ।
ज और ज़ में फ और फ़ में बड़ा अंतर है । फ़ारसी में बिंदी को नुक्ता कहते हैं । खुदा और जुदा में सिर्फ बिंदी का अंतर है, उर्दू के शब्द में लिखे खुदा में उपर बिंदी लगा होता है तो जुदा में नीचे , नुक्ता के हेर फेर से खुदा जुदा हुए ।
गणित में तो बिंदी की बात ही क्या कहनी है , अंको के बीच में लगे तो दशमलव और एक छोटी रेखा के उपर नीचे लगे तो भाग का चिन्ह , और हिंदी भाषा के बारे में कहा गया है हिंदी है माथे की बिंदी । कवियो और गीतकारो ने तो बिंदी को नहीं छोड़ा
चांद जैसे मुखड़े पे बिंदिया सितारा नहीं भुलेगा मेरी जान हो —— तो कही बिंदिया चमकेगी चुड़ी खनकेगी ———–
भाई साहब बिंदी की महिमा हैं अपरम् पार और अपने घर की बिंदिया को देखते हुए गुनगुनाईये चांद जैसे मुखड़े पे बिंदिया सितारा , और किसी दूसरे की बिंदिया को देखिये भी मत नही तो बिंदी की गोला बरस पड़ा तो अनर्थ हो जायेगा । अब अंत में इतना ही अपनी पत्नि की बिंदी को देखकर खुश रहिए ।
21 जनवरी 2025
प्रवीण सिन्हा
रामकुंड रायपुर