अपने पैसों का तोहफा – रश्मि प्रकाश

‘‘क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया? अरे बेटा जी जिन्दगी में हर चीज हाथ में मिल जाए तो मेहनत के फल का मोल कैसे जानोगे।’’ बड़े प्यार से नेहा  को उसके पापा समझा रहे थे जो अपने पति से नाराज़ हो कर कुछ देर पहले मायके आ गई थी

बात बहुत खास नहीं थी पर हँसी हँसी में कही गई बात नेहा  को यूं चुभ जाएगी वो तो उसके पति शनिश ने भी नहीं सोचा था, जिसकी वजह से वो शनिश से नाराज़ हो कर मायके आ गई थी।अपने आत्मसम्मान पर चोट होता देख नेहा  को आज एहसास हो रहा था अब उसे अपने पैरों पर खड़ा हो कर शनिश को दिखाना है

नेहा  अपने पापा की बात सुन कर हाँ में सिर हिला दीं।पापा के समझा कर जाने के बाद नेहा  सोचने लगी कितने प्यार से शनिश को बोली थी,‘‘इस बार हम घर में कुछ पुरानी चीजों को हटाकर नया लें आते हैं साथ ही कुछ कपड़े भी खरीदेंगे।’’

उस वक्त तो शनिश ने हाँ हाँ कह दिया और छुट्टी वाले दिन मॉल में जाकर नेहा  ने जी भर खूब खरीदारी कर ली। लाख रूपए देखते देखते खर्च हो गए।कुछ नए डिजाइन के फर्नीचर तो कपड़े और भी ना जाने क्या क्या….

घर आकर शनिश ने कहा,‘‘ आज तो मोहतरमा खुश बहुत होंगी….अपनी पसंद का सामान जो खरीद कर लाई है…पर देखो मेरे लिए तुम कुछ भी नहीं लेकर आई हो।’’

‘‘ अरे लेकर आई तो हूँ…. ये दो शर्ट आपकी पसंद का!!’’ नेहा  ने शर्ट के बॉक्स निकाल कर शनिश को देते हुए कहा

‘‘ ये तो मेरे ही पैसों से आए है ना कभी अपने पैसों से कुछ लाकर दो तो बात हो..!’’ शनिश ने ये बातें हँसते हुए कही पर नेहा  के दिल को लग गई

‘‘ आप कहना क्या चाहते हैं? खुल कर बोलिए… जब हमारी शादी हुई थी तो मैं नौकरी करना चाहती थी पर आपने और सासू माँ ने कहा अभी घर गृहस्थी संभालो बाद में करना नौकरी.. फिर मैंने भी आप सबकी बात मान ली.. उसी वक्त मुझे नौकरी कर लेनी चाहिए थी बेकार आप सब की बातों में आ गई।’’गुस्से में पैर पटकती नेहा  कमरे से निकल गई


शनिश नेहा  को बहुत मनाने की कोशिश करता रहा पर नेहा  कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी।

चुपचाप वो कमरे में गई और दो चार कपड़े पैक की“अब तो मैं कुछ कमाने लगूंगी ना तभी आऊंगी तुम्हारे पास”और ये बोलकर निकल गई

उसका मायका शनिश जहां नौकरी करता था उससे डेढ़ घंटे के रास्ते पर ही था तो फिर क्या था कैब की और मायके पहुंच गई।

मम्मी पापा और छोटे भाई ने नेहा  को यूं अचानक अकेले आए देखकर घबरा गए।

नेहा  ने कहा,‘‘ मुझे अब कुछ करना है तभी उस घर जाऊंगी….इसलिए मैं अपने सर्टिफिकेट ये सब लेने आई हूं।’’

‘‘ पर बेटा ऐसी क्या बात हो गई जो इतने गुस्से में हो.. !’’ उसकी मम्मी ने पूछा

नेहा  ने आज वाली बात बता दी।

सब उसकी बात सुन हँसने लगे क्योंकि शनिश ने पहले ही फोन कर के सबको बात बता दी थी कि मजाक में कही बात पर नेहा  गुस्से में निकल गई है।

सबको हँसते देख नेहा  को और गुस्सा आ गया। उसकी मम्मी ने कहा,‘‘ इतनी सी बात पर ऐसा नहीं करते बेटा.. तुम नौकरी करना चाहती हो कर लो पर इस तरह घर से गुस्से में आना सही नहीं है।’’

‘‘ हाँ आप तो जमाई की ही तरफदारी करो… मैं ही गलत नजर आ रही हूं ना।’’नेहा  आवेश में मम्मी से बोली

‘‘ इसको तो कुछ कहना ही बेकार है मेरी कभी सुनी है जो आज सुनेगी.. समझाओ अपनी बेटी को हमेशा नाक पर गुस्सा लिए चलती है.. वो तो जमाई अच्छा है जिसने इसके घर से निकलने की खबर कर दी.. यहां नहीं आती तो वो भी परेशान और हम भी परेशान ही रहते…।’’ नेहा  के पापा को सुनाती हुई उसकी मम्मी वहां से चली गई

‘‘ पापा मुझे कुछ जॉब करनी है अब गृहस्थी से पहले नौकरी करना मुझको, सच में आज एहसास हुआ कि मैं अपनी इच्छाओं के लिए हमेशा शनिश पर निर्भर क्यों रहूं? अपने आत्मसम्मान के लिए पैरों पर खड़ा होना बहुत ज़रूरी है ताकि कोई भी गाहे-बगाहे कुछ सुना कर मज़ाक़ कह कर बात पलट ना दे…..पर मैं क्या करूंगी??’’नेहा  उदास होकर बोली


‘‘ क्यों कुछ नहीं कर सकती … क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया कि मेरी बेटी अपने पर सवाल उठाए क्या करूंगी? ’’पापा ने उसे बहुत अच्छी तरह समझा दिया था

‘‘बेटा ये ले तेरे सर्टिफिकेट्स.. और किसी स्कूल में जॉब कर लें.. तुम्हें तो शुरू से टीचर ही बनना था फिर बी.एड . की डिग्री का क्या होगा.. गुस्से में सब भूल रही..। ’’ कमरे में पापा की आवाज सुनकर नेहा  यथार्थ में लौट आई

नेहा  ने शनिश के घर के पास एक नामी स्कूल ज्वाइन कर लिया। एक महीने बाद शनिश नेहा  को मिलने आया अब तक नेहा  का गुस्सा शांत हो गया था और उसके पापा ने ही शनिश को आने के लिए कहा।

‘‘ अब तो घर चलो नेहा … मुझे पता ही नही था मेरी बीबी को इतना गुस्सा आ जाएगा और वो घर से निकल जाएगी… वो तो पापा ने समझा दिया कि नेहा  के दिल में जो बात चुभ जाए फिर वो किसी की भी जल्दी नहीं सुनती इसलिए मैं तो बस पापा से तुम्हारा हाल सुन रहा था.. अब तो बोलो यार नाराज नहीं हो…’’ शनिश नेहा  को मनाते हुए बोला

नेहा  चुपचाप उठकर अपनी अलमारी से एक पैकेट लेकर आई और बोली,‘‘ शनिश थैंक्यू!! उस दिन मुझे एहसास करवाने के लिए कि इतना पढ़ कर मैं बस गृहस्थी संभालने के लिए नहीं बनी थी.. अब तो मैं भी कमाती हूं और ये पहली तनख्वाह का पहला तोहफा उस इंसान के लिए जिसने अंजाने में ही सही मुझे खुद से मिलवा दिया।’’नेहा  बहुत प्यार से ये बात शनिश को बोली

शनिश कभी नेहा  को देखता कभी तोहफ़े को.. तुम ये क्या बोल रही हो.. मतलब नाराज़ हो और खुश हो….समझ नहीं आ रहा.. वो आश्चर्य से पूछा

‘‘ अरे मेरे बुद्धु.. मैं अब सच में खुश हूं.. मैं शुरू से नौकरी कर के अपने पैसे कमाना चाहती थी पर तुम लोगों की बात मान कर नहीं कर पाई …..अब जब तुमने उस दिन मजाक में ही कहा पर बात मेरे दिल को लग गई तो अब परिणाम तुम्हारे सामने है….अच्छा अब तो मैं भी नौकरी करने लगी हूं तो गृहस्थी संभालने में मदद करोगे ना?’’ नेहा  शनिश की आँखो में झांकते हुए सवाल की

‘‘ पहले घर तो चलो .. तुम्हारे बिना इतने दिन कैसे गुजारा है उसका हिसाब पहले पूरा करूंगा!’’शरारत से शनिश ने कहा

जब दोनों जाने लगे तो नेहा  की माँ ने प्यार से कहा,‘‘ अब ऐसे गुस्सा होकर नहीं आना.. जब भी आना जमाई जी के साथ समझी ना.. !’’

‘‘ हाँ माँ.. अब मैं तुम्हारे जमाई के साथ ही आऊंगी पहले जाने तो दो।’’ कहकर नेहा  और शनिश प्यार भरी दुनिया में चल दिए।

आपको मेरी रचना पंसद आये तो कृपया उसे लाइक करे कमेंट्स करें।

#आत्मसम्मान

धन्यवाद

रश्मि प्रकाश

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!