उपहार –  दीप्ति सिंह

रमेश के पास विवाहिता छोटी बेटी प्रभा की पी. एच. डी. पूरी होने का फोन आया ।आशीर्वादों से नहला कर पत्नी रेवती को फोन दे दिया। माँ बेटी बतला रही थी।

 उधर रमेश जैसे स्वयं से बाते कर रहे थे।

   रेवती, तीन भाइयों की इकलौती सबसे छोटी व लाडली बहन थी । गाँव अत्यंत पिछड़ा होने के कारण शिक्षा की कोई व्यवस्था न थी अतः रेवती अनपढ़ थी।  दो भाइयों के पास तो संतान थीं लेकिन तीसरे भाई मंगल निसंतान थे।तीनों भाइयों का सिद्धांत था ‘चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाये।’ कभी रेवती मायके जाती तो उसके बच्चों के हाथ पर इकन्नी रखने में भी उनकी जान निकलती।

 प्रभा के जन्म की खबर मायके पहुँची। मंगल के मन में एक विचार आया ।उसी विचार को मन में ले कर  रेवती के ससुराल आये।

 नाश्ता पानी करने के बाद वह अपने विचार से रेवती को अवगत कराने लगे।



” लल्ली! तुम्हारे दो बेटियां और एक बेटा पहले से है; अब तीसरी हो गयी …कैसे करोगी तीन तीन लड़कियों का ब्याह ? मर जाओगी दहेज जुटाते जुटाते …ऐसा करो तीसरी वाली हमें दे दो, हमारे तो वैसे भी कोई औलाद न है।दोनो भईया तो हमें अपनी औलाद दे नही रहे “

 रेवती तो थी ही अनपढ़  …उसे भाई की बात एकदम सही लगी।

“ठीक कह रहे हो भईया! हम इनसे और पूछ लें हमें पता है ये तुम्हारा दर्द पहचानेगें।”

  रात को जब रेवती ने रमेश से बात की तो रमेश बिफर गये।

 ” रेवती !मैं तेरे भाई का दर्द समझता हूँ लेकिन बेटी नही दूँगा ।”

“ए जी ! ऐसा क्यों कह रहे हो ? भईया सही तो कह रहे है … कहाँ से लायेंगे हम इतना दहेज?” 

 ” चुप रह ..तेरे मायके में पढ़ाई का कोई मोल नही है तभी तो तेरे दोनों भाइयों की बेटियां अनपढ़ है मैं भी अपनी बेटी दे दूं तो मेरी बेटी भी अनपढ़ रह जायेगी। हम तो शहर में रहते है मैं तो अपने चारों बच्चों को खूब पढ़ाऊंगा…साफ मना कर दे अपने भाई से।”

 रेवती ने भारी मन से पति के विचारों से भाई को अवगत करा दिया।

मंगल भी उदास लौट गए।

” लो अपना फोन ..” रेवती के कहते ही रमेश वर्तमान में आ गये।

 ” देख लिया… तू तो प्रभा को अपने भाई को देने जा रही थी; जो मैंने कहा वो पूरा भी किया ।बड़ी शोभा टीचर ,आभा नर्स और ये देख प्रभा तो अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा बैठी और बेटा भी इंजीनियर बन गया।”

 “सही कह रहे हो ?”

  ” खाली हाथ तो कोई माँ- बाप अपनी बेटी को विदा नही करता… लेकिन बेटी के दहेज से ज्यादा उसकी पढ़ाई के बारे में सोचना चाहिए ।वही उसके लिए सबसे बड़ा उपहार होता है।”

 दीप्ति सिंह (स्वरचित एवं मौलिक)

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!