संस्कार हमारी थाती – कुमुद चतुर्वेदी

कुहू और पिहू दोनों बहनें रोज स्कूल से शाम चार बजे तक लौटती थीं।फिर एक घंटे में नाश्ता,दूध,फल खाकर पाँच बजे तक ट्यूशन पढ़ने चली जातीं।वहाँ से छैः बजे वापिस आकर थोड़ा टी.वी.या बीतचीत में समय निकल जाता और रात को खाना खाकर पढ़तीं थीं।दस बजे सोने का समय था।सुबह फिर पाँच बजे उठना और आठ बजे तक स्कूल।

   दोनों राज की लाड़ली बेटियाँ थीं जो बारहवीं कक्षा में थीं।कुहू बड़ी थी और पिहू उससे एक साल छोटी थी,पर देखने में दोनों जुड़वाँ लगती थीं।राज बैंक में क्लर्क था और उसकी सैलरी में ठीक ठाक गुजर बसर चल रही थी।पत्नि सीमा के हाथ में वह अपनी सैलरी सौंप निश्चिंत हो जाता था।सीमा भी सुव्यवस्थित ढ़ंग से सब  कुछ सँभाल रही थी,थोड़े में ही सही सब संतुष्ट थे।

     एक दिन दोनों बहनें ट्यूशन से लौट रही थीं कि उनके सामने एक लम्बा,चौड़ा लड़का रास्ता रोक खड़ा हो गया और कुहू का हाथ पकड़ बोला..”मुझसे शादी कर लो वरना मैं मर जाउँगा”।यह सुन कुहू तो कुछ न बोल सकी डरकर पर पीहू ने लड़के की पीठ पर लात मारकर कहा”ओ  मजनूँ सपने देखना बंदकर,चल भाग यहाँ से”।वह लड़का कुहू का हाथ छोड़ पीहू से बोला”तुझे ही पहले देखूँगा”।तभी कुछ लोग आते दिखे तो वह भाग गया।पीहू ने कुहू का हाथ पकड़ा और घर चल दी।घर पर उन दोनों ने मम्मी,पापा को इस बारे में नहीं बताया कि वे परेशान हो जायेंगे।कुहू बहुत डर गई थी पर पीहू उसे समझाती और अब वे अपने साथ मिर्च का स्प्रे ले कर जाने लगीं।




     कुछ दिनों तक वह लड़का नहीं दिखा पर एक दिन अचानक फिर सामने आ गया और हाथ में पकड़ी बोतल को  दिखाते बोला”यह एसिड है,अब बोल  कितनी बहादुर है तू?कुहू तो काँपने लगी पर पीहू पीछे हटती तभी लड़के ने बोतल खोलकर पीहू पर फैंकी और भाग गया।पीहू ने हाथ चेहरे पर रख लिये थे सो उसके दोनों हाथ जल गये और चेहरे पर कुछ छींटे पड़ने से चेहरा भी झुलस गया।अब तक भीड़ लग गई थी पर सब लोग  तमाशा ही देख रहे थे।तभी वहाँ राज के पड़ोसी रोहन पहुँच गये और उन दोनों को  हॉस्पिटल ले जाकर राज को भी  सूचित कर दिया।कुहू ने जैसे तैसे सारी बात बताई और पुलिस में रिपोर्ट भी कराई पर कुछ न होना था सो नहीं हुआ,मुजरिम पकड़ा नहीं जा सका।

       पाँच साल बाद कुहू की शादी हो गई और माँ भी बन गई एक प्यारी सी बेटी की,पर पीहू ने शादी नहीं की।उसके चेहरे पर जलने से निशान पड़ गये थे और दोनों हाथों में भी जलने से हाथों की खाल  सिकुड़कर भद्दी हो गई थी सो उसने शादी न करने का फैसला कर लिया था।पीहू बैंक में जॉब करने लगी थी और अपने माँ बाप का सहारा बन गई थी।

   एक दिन पीहू बैंक जा रही थी तो रास्ते में भीड़ देख वहाँ पहुँची।ज्ञात हुआ किसी बाइक सवार का एक्सीडेंट करके कोई ट्रकवाला भाग चुका है।बाइक सवार औंधे मुँह रोड पर पड़ा था, सिर से खून बह रहा था पर सब तमाशा देख चले जा रहे थे।पहले तो पीहू भी वापिस मुड़ी,पर कुछ सोच बाइक सवार को सीधा किया तभी चौंकी..अरे यह तो वही गुंडा है, जिसने उसके ऊपर एसिड फैंका था।वह उठकर जाने लगी थी कि फिर कुछ सोचकर रुकी और टैक्सी रोक ड्राइवर की सहायता से घायल को टैक्सी में लिटा हॉस्पिटल ले गई।वहाँ उसने घायल को  एडमिट कराया और वापिस जा ही रही थी कि डॉक्टर ने उसे बुलाकर कहा…. “पेशेंट को ब्लड की जरूरत है और उसके ग्रुप का ब्लड हमारे पास इस समय नहीं है आप कहीं से ले आयें तो पेशेंट की जान  बच सकती है।”यह सुन पीहू ने पहले तो सोचा मरने दो मुझे क्या?इतना ही क्या कम है जो मैंने यहाँ लाकर एडमिट करवा  दिया।पर फिर उसे पापा की बात याद आ गई जो कहते हैं ..नेकी कर कुँए में डाल।




यह सोच डॉक्टर से कहा “मेरा ब्लड टैस्ट  कर लो यदि मेल कर जाये”।जब ब्लड का टैस्ट किया तो पोजीटिव आया और पीहू ने अपना ब्लड पेशेंट को दे दिया।कुछ देर बाद पेशेंट को होश आ गया और उसने अपने माँ,बाप को फोन कर बुलबा लिया।इतनी देर में पीहू को भी छुट्टी मिल गई थी तभी नर्स ने आकर उससे कहा.”.पेशेंट आपसे मिलना चाहते हैं”।पीहू वार्ड में गई वहाँ डॉक्टर ने जब पेशेंट को पूरी बात बताई तो वह रोने लगा और हाथ जोड़ पीहू से माफी माँगने लगा।बोला..मैंने तुम्हारे साथ इतना बुरा किया पर तुमने मुझे जीवन दान दिया,मैं  तो तुम्हारा आजीवन आभारी रहूँगा।कैसे मैं तुमको शुक्रिया कहूँ,मैं बहुत शर्मिंदा हूँ।”यह सुन पीहू ने पीठ फेरकर कहा..”तुम जीवन भर इसी सोच में दुखी रहोगे कि मैंने तुमको बचाया पर तुमने जो मेरे साथ किया वह तुम्हारे संस्कार थे और जो मैंने आज किया वे मेरे परिवार की थाती हैं जो मुझे मेरे माँ,पापा ने दिये हैं।बस आज के बाद कभी मेरे सामने मत पड़ना।”इतना कहकर पीहू वार्ड से बाहर चली गई।

                       ……….कुमुद चतुर्वेदी.

 

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