पवित्र रिश्ता – मंगला श्रीवास्तव : Short Stories in Hindi

Short Stories in Hindi : सुनन्दा और अमित दोनो हमउम्र थे,और एक ही मौहल्ले में रहते थे।  उनकी पढ़ाई भी एक ही स्कूल कॉलेज में हुई थी। सुनन्दा अपने माता पिता की इकलौती संतान थी।इस कारण जब भी कोई बड़ा व कठिन काम होता था वह हर काम के लिए अमित से ही मदद लेती थी.

कॉलेज में भी अमित ही उसका बहुत ध्यान रखता था। परंतु उसको नही मालूम था कि लोगों की सोच व विचारधारा उनके इस रिश्ते को गलत निगाह से देखेगी ,व एक रिश्ता जो कि बचपन से पवित्र था उसको बदनाम कर देगी । धीरे धीरे उनका यह रिश्ता लोगों की निगाह में आने लगा था। मौहल्ले भर में उनके बारे में अफवाह का बाजार गर्म  होने लगा था ।पर वह दोनों इस बात से अनभिज्ञ थे,क्योंकि  उन दोनों के मन में कभी ऐसी कोई बात आई ही नही थी।

पर लोगों के नजरिये को बदलना किसी के लिए सम्भव नही होता।

जब अफवाहें ज्यादा फैलने लगी तो

सुनन्दा के माता पिता जो कि एक साधारण मध्यम वर्गीय थे ,उन सब उड़ती खबरों से आहत हो ,उसके और अमित के मिलने पर पाबंदी लगा दी।

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सुनन्दा बोलती रही आपको सब की बातों पर भरोसा है पर अपनी बेटी जिसको बाइस साल पाला है उस पर जरा भी विश्वास नही। परन्तु उन्होंने कठोर शब्दों में कहा कि हमको यही इसी समाज मे जीना है । इस कारण उसकी आगे पढ़ने की इच्छा को भी उन्होंने बलि चढ़ाकर पढ़ाई पूरी होते ही उसके माता पिता ने जल्दी ही एक अच्छे परिवार को देखकर उसका रिश्ता तय कर दिया और जल्दी ही शादी भी कर दी। किस्मत से उसे उच्चवर्गीय परिवार भी मिल गया।

अमित ने  भी अपने पड़ोसी धर्म निभाया व एक बेटे की तरह बहुत शादी में बहुत दौड़भाग व काम किया ,विदा होते वक्त जब वह कार में बैठने ही वाली थी ,कि तभी अमित उसके पास आया और बोला सुनन्दा जीवन मे जब भी तुमको मेरी जरूरत हो मुझकों याद भर कर लेना मैं आ जाऊँगा मदद के लिए एक दोस्त व भाई की तरह।


वह रो पड़ी थी उसने कहा अमित  बस मेरे माता पिता का ध्यान रखना।

अमित पढ़ने में बहुत अच्छा था इस कारण उसका की जॉब भारतीय पुलिस विभाग में उच्चपद पर हो

गई ।

वक्त गुजरता गया सुनन्दा के पति राजीव ने भी उड़ती खबरों को सच माना और वक्त बेवक्त सुनन्दा को अमित के नाम से बेइज्जत किया। धनवान होने का गरूर तो था ही वह पार्टीयों का भी शौकीन था,इस कारण क्लब बार जाने लगा था।कहते वक्त किसी का साथ नही देता राजीव जुए व बार गर्ल की चुंगल में फंस कर सब कुछ लुटा बैठा।

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माता पिता दोनो के गुजर जाने के बाद तो वह और भी बिन लगाम घोड़े की तरह हो गया था। सुनन्दा उसको बहुत समझाती व अपने बच्चों का वास्ता भी देती पर वह उसको मारता पीटता व धमकी देता था।

 आखिर बुराई भला किसको छोड़ती जो राजीव उससे बचता एक दिन वह जुएं में सबकुछ हार गया ।क्लब वाले राजीव को धमकाने लगे थे। उन्होंने उसके बहुत सारे अश्लील वीडियो बना रखे थे वह उसको धमकी देते थे कि वह उसको सभी दूर वाइरल कर देंगे ।

अब राजीव जो नाक पर मक्खी तक नही बैठने देता था वह बदलते हालात को संभाल नही पाया। क्योंकि वह बिलकुल कंगाली के हालत पर खड़ा था, क्लब वालो ने रुपये वसूलने के लिए उंसके दोनो बच्चों को उठावा लिया।

अब राजीव व सुनन्दा परेशान हो,सुनन्दा का रो रो कर बुरा हाल हो गया था। ऐसे वक्त में जो लोग परिचित रिश्तेदार  कभी मक्खी की तरह उनके घरों पर डोलते रहते थे ,राजीव के सारे दोस्त जो कि राजीव के रुपयों पर अय्यासी करते थे उसकी मदद करना तो दूर उससे बात करना भी बंद कर चुके थे।

आखिर में सुनन्दा उसको लेकर थाने पर पहुँची व रिपोर्ट लिखवाने लगे थे वह कि, पुलिसकर्मि एकदम सचेत हो गए और थाने के इंचार्ज ने उन दोनों को कहा कि अभी एक तरफ बैठ जाओ रिपोर्ट बाद में लिखेंगे कमिशनर साहब आ रहे है। वह दोनो एक तरफ खड़े हो गए।तभी सुनन्दा ने देखा कि कमिशनर कोई और नही उंसके बचपन का साथी अमित ही था।

सुनन्दा जल्दी से अमित के पास पहुँची और रोते हुए बोली अमित मेरे बच्चों को बचा लो।

अमित ने जैसे ही उसको देखा वह एकदम बोला सुनन्दा तुम

क्या हुआ बच्चों को ?


सुनन्दा ने जल्दी से उसे पूरी बात बताई और रोने लगी, अमित ने राजीव को भी पास बुलाया , उनको लेकर अंदर गया और थाने के इंचार्ज को बुलाया व अपने सामने ही पूरी रिपोर्ट लिखवाई व उसी वक्त आदेश दिया कि जाओ जैसे भी हो क्लब के मालिक को इसी वक्त हाजिर करो।

करीब एक घण्टे के अंदर ही

क्लब के मालिक को लेकर पुलिस थाने में आ गई।

अमित ने सबसे पहले तो क्लब के ऊपर छापा मारने का आदेश दिया। व क्लब के मालिक को बोला तुम्हारे जैसे लोग ही अच्छे भले घर के लड़कों को बुरी लत लगा देते हो ,उनको ब्लैकमेल करते हो या रुपये ना मिलने पर बच्चों को किडनैप करना करवाना जैसे काम करते हो।

तुमने आज जिन बच्चों को पकड़ा है  वह मेरी बहन के बच्चें है। और उनको कुछ नुकसान भी पहुँचा तो मुझसे बुरा कोई नही होगा।

अमित के मुहँ से यह सुनकर राजीव का मुहँ छोटा सा हो गया। वह अपनी छोटी सोच पर शर्मिंदा हो रहा था ।वही सुनन्दा रोकर अमित से बोली अमित काश उस वक्त मैंने तुमको राखी बांध दी होती तो अपना यह पवित्र रिश्ता लोगों की निगाह में मम्मी पापा की निगाह में कलंकित नही होता। मुझकों नही मालूम था कि लोगो की निगाह में हमारा रिश्ता बस एक कच्चेधागे का मोहताज था।

अमित बोला सुनन्दा मैने तो सोचा भी था एक दिन अपने रिश्ते को तुमसें राखी बंधवा कर एक नया नाम दूंगा पर उस वक्त हालातों ने ऐसा नही होने दिया।

 आज तुम मुझकों राखी बांध कर इस रिश्ते को मजबूत बना लो जिससे किसी की नजर ना लगे।

सुनन्दा ने जल्दी से अपनी चुन्नी से एक चीर निकाल कर अमित के हाथों में बांध दी।

राजीव की आँखों मे आंसू भर आये थे जो शायद शर्मिंदगी के थे। उसने सुनन्दा से अपने गलत व्यवहार के लिए माफी मांगी और अमित से भी  माफी मांग कर बोला , लोगों की बातों में आकर मैंने तुमको बहुत गलत समझा अमित जी और सुनन्दा को भी तुम भी मुझको माफ कर दो कहकर वह अमित के पैरों में झुक गया ।

अमित ने उसको उठाकर गले लगा लिया । तभी थानेदार उनके दोनों बच्चों को लेकर अंदर आये जो कि क्लब में छापा मारने के कारण एक कमरे में बंद मिले थे।दोनो बच्चें दौड़कर सुनन्दा से लिपट गये थे।

समाप्त

मंगला श्रीवास्तव इंदौर

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