पापा आप लोगों को बस पैसा दिखताअपने बच्चों की खुशी नही- संगीता अग्रवाल

राहुल  के पापा विनोद जी ने अपने बेटे राहुल से कहा बेटा राहुल आज 1 सप्ताह हो गया तुम ऑफिस नहीं जा रहे हो क्या बात है कोई तकलीफ है तो हमें बताओ पहले तो तुमने कहा कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए ऑफिस नहीं जा रहे हो अब तो बिल्कुल ठीक हो फिर क्यों ऑफिस नहीं जा रहे हो तुम्हें तो पता ही है कोरोना के बाद नौकरी मिलना कितना मुश्किल हो गया है।  इसी साल तुम्हारी बहन की भी शादी करनी है और एक अकेला तुम ही हो जो इस घर में कमाने वाले हो अगर तुम भी नौकरी छोड़ दोगे तो घर का खर्चा कैसे चलेगा बेटा।  

राहुल  ने पलट कर जवाब दिया ”  पापा सच बताऊँ तो मैने नौकरी छोड़ दी !”  

” क्या ….फिर से ? पिछले तीन सालों में तुम तीसरी बार नौकरी छोड़ कर आए हो ये क्या तरीका है दो महीने नौकरी करना और छह महीने खाली रहना इससे तो तुम्हारी रेपुटेशन खराब होती रहेगी और अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी !” विनोद जी  गुस्से में बोले ।

” पापा मुझे नौकरी करनी ही नहीं है क्योंकि मैं नौकरी के लिए नही बना मुझे खुद का बिजनेस करना है अब !” राहुल  बोला।

” देखो राहुल  तुम्हे इंजीनियरिंग करवाने में ही हमारी सारी जमा पूंजी लग गई अब बिसनेस के लिए पैसे नहीं हैं हमारे पास !” विनोद जी  ने समझाया ।

पर पापा की बात सुनकर राहुल  उखड़ गया….” पापा  आप लोगों को बस पैसा दिखता अपने बच्चों की खुशी नही आपसे अच्छे तो मेरे दोस्त राजन के मम्मी पापा हैं तुरंत पैसा दे दिया उन्होंने बिजनेस को आपने   कभी मेरे लिए कुछ नही किया !” राहुल  गुस्से में बोला।


” राहुल  राजन के पापा खुद बिजनेस करते हैं उनके पास बेहिसाब पैसा है हमने मामूली सी तनख्वाह में इंजीनियरिंग ही कैसे करवाई वो हम ही जानते हैं और आज तुम बोल रहे हमने किया क्या है !” विनोद जी राहुल  से बोले । पर राहुल  उसकी बात सुनने को वहां रुका ही कहा गुस्से में पैर पटकता चला गया ।

ये आज की बात नही है राहुल  का रोज का काम है। कभी किसी चीज के लिए कभी किसी चीज के लिए ज़िद करता और ना पूरी होने पर कई कई दिन उखड़ा रहता। अपने पिता विनोद जी  से तो राहुल  बात तक करना छोड़ दिया था क्योंकि जबसे राजन से उसकी दोस्ती हुई है और राजन को बाप के पैसों पर ऐश करते देखता तबसे उसका यही कहना था उसके पिता ने कभी हमारी खुशी के लिए कुछ नहीं किया। दोनों बाप बेटे के बीच की दूरी बढ़ती जा रही थी और अब तो राहुल अपनी माँ पर भी बात बात पर चिल्लाने लगा था। ऊपर से अब नौकरी छोड़ कर बैठ गया।  विनोद जी सोचते अब राहुल  को जिम्मेदारी का एहसास करवाना ही होगा ।

1 दिन राहुल के पापा विनोद जी ने अपनी पत्नी सावित्री जी से कहा, ” सुनो राहुल  को बिजनेस के लिए पैसे चाहिए …ऐसा करते है हम ये घर बेच कर उसे पैसे दे देते हैं और हम दोनों अपने गांव चलते हैं  वैसे भी राहुल  को आपसे और मुझसे कोई लगाव नहीं हमने उसकी खुशी के लिए क्या कुछ  नहीं किया !”     

” विनोद जी  आप समझ नहीं रहे आपने राहुल  की पढ़ाई के लिए अपने पीएफ से पहले ही पैसा निकाल रखा है अब रिटायरमेंट बाद कुछ मिलेगा तो है नही हमे फिर गुजारा कैसे करेंगे वैसे भी राहुल  को आज बिजनेस करना कल उसे ये भी नही करना होगा फिर क्या होगा मेरे सारे गहने उसे बाइक दिलवाने में पहले ही बिक गए अब बचा क्या हमारे पास!” सावित्री बोली।

राहुल  ओट में खड़ा दोनो की बातें सुन रहा था उसे याद आया मम्मी हमेशा फंक्शन में आर्टिफिशियल गहने पहनती है ये बोल कर की सोना चोरी होने का डर है पर उन्होंने गहने तो मुझ पर खर्च कर दिए।

” हां सावित्री माना हमारे पास कुछ नहीं पर मेरे बाजुओं में अभी दम है मैं  कुछ काम करूंगा कल से तुम मेरी रोटी पर घी मत लगाना और दूध भी मत देना मैं अपने बच्चे की खुशी के लिए सब करूंगा !” विनोद जी  बोला।

” पर विनोद जी  डॉक्टर ने पहले ही बताया है कि तुम्हारे शरीर में कमजोरी है फल तुम पहले ही ये बोल कर नही खाते कि राहुल  को इनकी ज्यादा जरूरत। उस पर ओवरटाइम और ताकत की चीजें नहीं खाने से शरीर कब तक चलेगा इससे अच्छा मैं कहीं काम पकड़ लेती हूं माना ज्यादा पढ़ी नहीं हूं पर घरों में काम तो कर सकती ना !” सावित्री बोली।


अब राहुल  पूरी तरह शर्मिंदा हो चुका था उसके मां बाप ने उसके लिए कितने त्याग किए हैं और अभी भी करने को तैयार हैं और एक वो है कि …. घिन होने लगी उसे खुद से।

” मम्मी आपको कोई जरूरत नहीं है घरों में काम करने की और पापा आपको भी ओवरटाइम की या मेरे लिए दूध घी छोड़ने की जरूरत नहीं है … मैं हूं ना मैं नौकरी करूंगा और अब अपने मां बाप को हर खुशी दूंगा …माना नालायक बेटा हूं आपका पर अब लायक बनना चाहता हूं मुझे माफ कर दो मैं भटक गया था ।” ये बोल बेटा पिता के गले लग फूट फूट कर रो दिया। पिता हैरान थे क्योंकि जो बेटा पिता के पास दो घड़ी नही बेटा सालों से वो आज उसके गले लगा आंसू बहा रहा है उनकी आंखों से भी नीर बहने लगा ये पता लगाना मुश्किल था ये नीर बेटे को रोता देख दुख में बह रहा है या सालों बाद बेटे को अपने दिल के इतने करीब देख खुशी में बह रहा है जो भी हो पिता ने बेटे को कस कर सीने में भींच लिया मानो ये सपना है और सपना टूटने से पहले एक पिता अपने हृदय को ठंडक पहुंचाना चाहता है इतने सालों बाद जो बेटा मिला है।

सावित्री दोनों के पास आ नम आंखों से बेटे की पीठ सहलाने लगी तो राहुल  ने उसे भी गले लगा लिया। आज सही मायने में एक बेटा बड़ा हुआ था अपनी जिम्मेदारी को जो समझ गया था वो , मां बाप के त्याग को जो समझ गया था वो। अब भले बेटा कम कमाएगा पर अपने मां बाप को पूरा मान सम्मान देगा जो एक माता पिता के लिए सबसे बड़ी पूंजी है। आज एक बेटा सही मायने में लायक बना था।

कहानी पर आपके विचार का इंतजार रहेगा ।

आपकी दोस्त

संगीता। 

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