भगवान सब देख रहा है – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

सुधा आज सुबह से ही बहुत खुश थी उसके बेटा बहू अरुण और हेमलता उसे चार धाम की यात्रा कराने के लिए अपने साथ ले जा रहे थे उसकी वर्षों से तमन्ना थी चार धाम की यात्रा अपने पति के साथ करने की परंतु, घर की जिम्मेदारियां के कारण वह चार धाम की यात्रा न कर सकी थी और जब वह घर की जिम्मेदारी  से मुक्त हुई तो एक दिन उसके पति दिल का दौरा पढ़ने से भगवान को प्यारे हो गए थे पति के जाने के बाद उसने अपनी सारी इच्छाओं पर विराम लगाकर खुद को भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया था सुबह-सुबह जल्दी से उठकर वह इस डर के कारण की कहीं खाली बैठने के कारण उसकी बहू उसे रोटी ना दें पहले बहू के साथ घर के कामों में हाथ बटाती फिर पूजा पाठ करती थी और घर में जो भी रुखा सुखा खाने को मिलता चुपचाप खाकर अपना समय व्यतीत करती थी।

      पति के जाने के बाद उसका अच्छे वस्त्र पहनने से भी मोह भंग हो गया था अपने पुराने वस्त्र पहनकर ही वह संतुष्टि से जी रही थी उसके बेटा बहु उसके खाने पीने और पुराने वस्त्रों पर कभी ध्यान नहीं देते थे बस खुद के अच्छा खाने पीने और अच्छे वस्त्र पहनने पर ही ध्यान देते थे वे दोनों कभी उससे उसके मनपसंद खाना और कपड़ों के बारे में भी नहीं पूछते थे। एक दिन जब वह खाना खाकर अपने कमरे में आराम कर रही थी तो अरुण और हेमलता उसके पास आकर बैठ गए बेटे बहु को अपने पास बैठे देखकर सुधा के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा था क्योंकि पति के जाने के बाद दोनों को उसके पास बैठने का वक्त ही नहीं मिलता था अपनी मम्मी को अपनी तरफ आश्चर्य से देखने पर अरुण मुस्कुराते हुए उनसे बोला “मम्मी जी आप हमारी तरफ ऐसे आश्चर्य से क्यों देख रही हो?

   “वह बेटा इसलिए कि तुम कभी मेरे पास बैठते नहीं हो ना आज तुम्हारे पास मेरे पास बैठने के लिए वक्त कैसे निकल गया? मैं इसलिए तुम दोनों को आश्चर्य से देख रही थी” सुधा बोली तो अरुण मुस्कुराते हुए बोला”मम्मी जी आपकी इच्छा थी ना चार धाम की यात्रा करने की मुझे कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी मिली है इसलिए मैंने सोचा है कि इस बार कहीं जाने की बजाय मैं आपको चार धाम की यात्रा करा दूं मैं आपके लिए कुछ कपड़े लेकर आया हूं आप जल्दी से इन्हें पहन कर तैयार हो जाओ।”

   अरुण की बात सुनकर सुधा की आंखें सजल हो गई थी क्योंकि बेटा उसका वर्षो पुराना सपना जो पूरा कर रहा था बेटे की बात सुनकर उसने खुशी से उसके साथ चलने की तैयारी कर दी बेटे के द्वारा लाये वस्त्र पहन कर वह खुशी-खुशी बेटे बहू के साथ गाड़ी में बैठकर चार धाम की यात्रा पर चल दी थी।

    काफी दूर जाने पर अरुण ने गाड़ी रोक दी और सामने से आती हुई एक बस का इंतजार करने लगा सुधा की समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी गाड़ी होते हुए अरुण बस का इंतजार क्यों कर रहा था?

  कुछ देर बाद जब बस गाड़ी के निकट आई तो अरुण और हेमलता ने उन्हें बस में बिठा दिया खुद पानी लेने के बहाने दोनों नीचे उतर गए तभी सुधा को अचानक कुछ याद आया और वह बस से नीचे उतरी तो उसने देखा उसकी बहु बेटे से कह रही थी “बस में काफी लोगों ने हमें मम्मी को बिठाते हुए देख लिया है कहीं ऐसा ना हो ये लोग मम्मी को दोबारा हमारे पास छोड़ जाए ऐसा करते हैं मम्मी को किसी ऐसी बस में बिठा दे जिसमें कोई सवारी ना हो फिर हमें इनके घर वापस आने का कोई डर भी नहीं रहेगा।”बहू की बात सुनकर बेटा मुस्कुराते हुए बोला” यह तुमने बहुत अच्छी बात कही चलो जल्दी से मम्मी को दूसरी बस में बिठाते हैं।”

   ।बेटा बहू की बात सुनकर सुधा सन्न रह गई थी वो चुपचाप कुछ लिए बगैर वापस आकर बस में बैठ गई थी ताकि बहु बहु को पता ना चले की उसने इन दोनों की बात सुन ली है कुछ देर बाद जब दूसरी बस आई तो वह बिल्कुल खाली थी इससे पहले की उसमें दूसरी सवारियां बैठती अरुण और हेमलता ने जल्दी से सुधा को बस में बिठाकर जब उनके लिए कुछ खाने का सामान लाने का बहाना बनाकर चलने लगे तो सुधा दुखी स्वर में बोली”बेटा तुम्हारी इस हरकत को कोई देखे ना देखें लेकिन भगवान सब देख रहा है एक दिन बुढ़ापा सबको आना है

आज जैसा तुम मेरे साथ कर रहे हो कल को जब तुम्हारे बच्चे तुम्हारे साथ ऐसा करेंगे तब तुम्हें पता चलेगा कितना दुख होता है भगवान के दरबार में देर है लेकिन अंधेर नहीं”अपनी मम्मी की बात सुनकर अरुण और हेमलता दोनों शर्मिंदा हो गए थे उन्होंने तो सोचा भी ना था कि इंसान के अलावा उन्हें कोई और भी देख सकता है दोनों ने अपनी मम्मी के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोले”मम्मी जी हमें माफ कर दो हम आज के बाद ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे मैं इसके बहकावे में आ गया था आप तो इतनी अच्छी हैं फिर भी आप इसको बोझ लगने लगी थी

इसलिए आपसे छुटकारा पाने के लिए कि हम आपको बस में बिठाकर वापस घर जाने वाले थे लेकिन अब मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगा बस एक बार हम दोनों को माफ कर दो”औलाद कितनी भी बुरी हो परंतु , मां तो मां होती है बेटे बहु के माफी मांगने पर उसने दोनों को माफ करके गले से लगा लिया था।

#बुढ़ापा 

बीना शर्मा

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!