बस अब और नहीं! – प्रियंका सक्सेना

“सीमा,ये क्या! तुम फिर किताब लेकर बैठ गई। आज तो तुम्हें ब्यूटी पार्लर जाना है। जाओ तैयार हो जाओ, भाभी के साथ चले‌ जाना।” माॅ॑ ने हाथ से किताब लेने का उपक्रम किया

सीमा बोली,”माॅ॑,परसों मेरा बहुत जरुरी व्याख्यान है। तैयारी नहीं करूंगी तो कांफ्रेंस में हड़बड़ा जाऊंगी।”

“हर समय काॅलेज दिमाग में चढ़ा रहता है,पता नहीं इस लड़की को कब समझ में आएगा कि पढ़ाई लिखाई सब कुछ नहीं होती है,शक्ल-सूरत सुधार लेगी तो शायद इस बार बात बन जाए। चार जगह से तो इसके स्याही जैसे रंग की वजह से मना हो चुकी है। ऐसा करना आज फेशियल करवा लेना और कल ब्यूटी पार्लर से ही तैयार होना। शायद लड़के वाले पसंद कर लें।”माॅ॑ गुस्से में बड़बड़ाने लगी

“माॅ॑,मैं कोई मेकअप नहीं करवाऊंगी।”सीमा ने साफ इंकार कर दिया 

“तब तो हो ली ननद रानी तुम्हारी शादी!”गोरी चिट्टी भाभी ने मौका मिलते ही ताना मारा

माॅ॑ ने भी हां में हां मिलाते हुए सीमा पर दबाव डालने की कोशिश की।

सीमा को चार बार लड़केवाले मना कर चुके थे। सीमा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अर्थशास्त्र की प्रवक्ता है,स्वभाव की भली है। बस रंग गहरा स्याह है और इसी वजह से माॅ॑ ने हर बार चेहरे को भाभी से मेकअप की परतें लगाकर लड़केवालों के  सामने दिखाया पर सफल न हो सकी। कहीं गले की काली लकीरें बोल पड़ी तो कभी कोहनी दिख गई। कभी तो पैरों की एड़ियों ने कालेपन का राज खोल दिया। 

फिर क्या, नतीजा वही ढाक के तीन पात! बारम्बार ठुकरा दिया गया सीमा को और अब अपमानित होते-होते सीमा आज़िज आ चुकी है। 

अपमान सहने की भी कोई सीमा होती है। आज उसके सब्र का बांध टूट गया।

वह बोली,”माॅ॑, बस अब और नहीं! मैं जैसी हूॅ॑,वैसी ही सामने जाऊंगी।

भाभी,आप भी कुछ नहीं कहेंगी। वाह्य छद्म रूप-रंग का आवरण दो दिन में उतर जाएगा। यदि मेरा काला स्याह रंग नहीं पसंद तो यही सही! विवाह ही एकमात्र विकल्प नहीं है…और हां माॅ॑!पसंद या नापसंद मैं भी लड़के को करूंगी।यदि मुझे पसंद नहीं आया तो मैं मना कर दूंगी।”

“कैसी उल्टी गंगा बहा रही है,सीमा!”माॅ॑ और भाभी के मुंह से एकसाथ निकला

पापा जो चुपचाप सब सुन‌ रहे थे,बोल ही पड़े,” आज तक सबकी मनमानी देख ली,सीमा सही कह रही है। मेरी बेटी है,सामान नहीं कि कोई पसंद या नापसंद करें। सीमा ऐसे ही लड़केवालों से मिलेगी।मेरी बेटी भी ठोक बजाकर लड़के को परखेगी। यदि उसे ठीक लगा तभी बात आगे बढ़ाई जाएगी।”

सीमा पापा के गले लग गई।

 

दोस्तों, बहुत मन से लिखा है यदि संदेश आपके हृदय के तारों को झंकृत कर गया है तो कृपया लाइक कमेंट और शेयर कीजिएगा। अपनी अमूल्य राय साझा अवश्य कीजियेगा।

 

 

कुछ दिल के करीब कहानियां पढ़िएगा

पहली रसोई!

https://betiyan.in/pehli-rasoi/

भाई के होने से ही मायका होता है?

https://betiyan.in/bahike-honesehi-maykahota-hai/

 

इंसानियत जिंदा है अभी!

https://betiyan.in/insaniyat-zinda-hai-abhi/

सूनी गोद

https://betiyan.in/suni-goad/

आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।ऐसी ही खूबसूरत रचनाओं के लिए आप मुझे फॉलो कर सकते हैं।

https://betiyan.in/category/kahani/samajik-kahaniya/priyanka-saxena/

 

#अपमान

धन्यवाद।

-प्रियंका सक्सेना

(मौलिक व स्वरचित)

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!